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बसपा बेचैन है

बसपा बेचैन है

सपा में चैन नहीं है। बसपा बेचैन है। हो भी क्यों न। खबर है मायावती के घर के बाहर इस बार टिकटार्थियों की लाइन काफी छोटी हो गई है। इतना ही नहीं भाई लोग टिकट तो चाह रहे हैं, लेकिन दांव नहीं लगा रहे हैं। ऐसे में पार्टी को लग रहा है कि चुनाव अभियान चलाने में भी कुछ दिक्कत आएगी। वैसे भी हर महीने कोई न कोई बसपा का चेहरा पार्टी को छोड़कर जा रहा है। भाजपा स्वामी प्रसाद मौर्या को झटककर ले गई तो स्वामी अपने करीबियों को ले गए। हाल-फिलहाल में मायावती के वफादार माने जाने वाले डेढ़ दशक से साथ रहे पीएसओ पदम सिंह भी भाजपा में शामिल हो गए हैं। बताते हैं ऐसे अनिश्चितता के माहौल में बसपा सुप्रीमो मायावती न तो प्रत्याशियों को अंतिम रूप दे पा रही हैं और न ही चुनाव के बाबत अभियान को।



नीतिश की खिचड़ी


15-10-2016

खबर बिहार से है। सीएम नीतिश कुमार ने दिल्ली की तरफ देखना शुरू कर दिया है। खबर है कि इसके लिए वह उ.प्र. विधानसभा चुनाव में भी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ाने वाले हैं। सूत्र बताते हैं कि इस योजना को अंजाम देने के लिए नीतिश कुमार ने मंत्रणा भी तेज कर दी है। इसके लिए व्यस्त क्षणों में भी प्रशांत किशोर को पटना के लिए समय निकालना ही पड़ता है। वैसे भी बिहार की राजनीति में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद लगातार अपना दबदबा बढ़ाते जा रहे हैं। ऐसे में नीतिश 2019 में बिल्कुल चूकना नहीं चाहते। उन्हें पता है कि राजनीति एक दिनी क्रिकेट मैच की तरह है। आखिरी बाल पर छक्का लगते ही पासा पलट जाता है। इसलिए नीतिश ने अभी से 2019 की खिचड़ी पकाना शुरू कर दिया है।



सिप्पाल की चौपाल


15-10-2016

मुलायम के प्यारे लठैत भाई सिप्पाल (शिवपाल) की चौपाल लग गई है। खैर, शिवपाल तो पहले भी पार्टी में काफी दमदार थे, लेकिन इन दिनों उनकी हैसियत बन निकली है। जब से मुख्यमंत्री अखिलेश का मुलायम सिंह ने पर कतरा है, लगभग पुराने सपाइयों का शिवपाल की दर पर तांता लग गया है। एक कबीना मंत्री तो काफी खुश हैं। उनके छोटे भाई पुलिस सेवा में थे। कभी उन्होंने मुलायम सिंह के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी थी।  जब राजनीति में मुलायम का प्रभाव बढ़ा तो वह इसे याद करते हुए महोदय को राजनीति में ले ही नहीं आए बल्कि हर बार मंत्री भी बनाया। पहले ये मंत्री अखिलेश का दरबार लगाना नहीं भूलते थे और अब शिवपाल की दर पर जाना नहीं भूलते।



अखिलेश…..अखिलेश


15-10-2016

आजकल अपने उ.प्र. के मुख्यमंत्री बहुत उदास हैं। मुख्यमंत्री आवास के खबरची बताते हैं सीएम ने साफ निर्देश दे दिया है कि चाहे जो हो लेकिन पूरा विवरण लेने के बाद ही उन्हें फोनकॉल स्थानांतरित की जाए। कभी समय था कि संजय लाठर से लेकर तमाम चेलों का फोन आते ही कर्मचारी सीधे लाइन दे देते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। पहले कर्मचारी फोन करने वाले से बातचीत का विषय पूछ रहे हैं और तब बड़ी मुश्किल से बात हो पा रही है। बताते हैं जब से सीएम पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटे हैं तब से जरा कुछ ज्यादा ही सावधान रह रहे हैं। हों भी क्यों न। समाजवादी पार्टी का दूसरा धड़ा लगातार कैंची लेकर करीबियों के पर कतर रहा है। ऐसे में जिसे देखो  वही अखिलेश…..अखिलेश कर रहा है।



अमर भईया


15-10-2016

जब से समाजवादी पार्टी में लौटे हैं, कलह थम ही नहीं रही है।  बताते हैं यादवों के घर की आग अभी राख के नीचे सुलग रही है। पार्टी में इन दिनों करीब-करीब पैदल हो चुके मुलायम के चचेरे भाई राम गोपाल भी सुलग रहे हैं। पिछली बार जब समाजवादी पार्टी से अमर सिंह को जाना पड़ा था तो उसकी वजह भी राम गोपाल थे। राम गोपाल ने तब भी अखिलेश समेत कईयों को आगे करके मुलायम के कान भरे थे।  इस बार भी जब अखिलेश का धरातल दरकता देखा तो राम गोपाल ने हर चाल चली, लेकिन पहले से तैयार चक्रव्यूह को बेधने में सफल नहीं हो पाए। सुना है इस बार अमर भी कोई कसर नहीं छोडऩा चाहते। अमर के बारे में आम है कि वह धारदार से सफाई नहीं करते। बस चुपचाप कर ही देते हैं।  वहीं, इधर अमर का प्रताप भी बढ़ा है। अब तो घर के बाहर मिलने वालों की भीड़ भी लगने लगी है।



सिंहम्


15-10-2016

अपने केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन जयराम गड़करी की इन दिनों काफी पूछ बढ़ गई है। भाजपा के कार्यकर्ता से लेकर संघ और गैर भाजपाई दलों के लोगों में गड़करी नये अवतार में आए हैं। इसका कारण मोदी सरकार के दौरान लगातार उनका व्यवहार रहा है। गड़करी ने कभी प्रधानमंत्री के सामने हथियार नहीं डाले। एक कबीना मंत्री का भी कहना है कि गड़करी पूरे सिंहम के अवतार में हैं। हाल ही में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी दो टूक जवाब दे दिया। प्रधानमंत्री चाहते थे कि वह पंजाब का प्रभार संभालकर पार्टी को मजबूत बनाएं और गड़करी ने इसे एक कान से सुना व दूसरे से निकाल दिया। यही नहीं, बात जब गड़करी की आती है तो भाजपा अध्यक्ष भी कई बार सोचकर उनसे कुछ कह पाते हैं।



अजीत की पूछ कहां


15-10-2016

सभी दलों का दरवाजा खटखटाकर लौट चुके चौधरी अजीत सिंह ने नया पासा फेंका है। अब वह पिता चौधरी चरण सिंह और लोहिया, जेपी विचारधारा की एकाई पर जोर देने का शिगूफा छोड़े हैं। वाह चौधरी वाह…एक तो उनका अपना अलग लोकदली समाजवाद है। खुद ही पिता जी की विचारधारा से काफी दूर रहते हैं, लेकिन यह तो राजनीति है। राजनीति में ही सबकुछ जायज भी है। लिहाजा चौधरी का यह पासा एक बार फिर बिहार के सीएम नीतिश कुमार को मुफीद लगने लगा है। वहीं मुलायम परिवार के झगड़े में बुरी तरह घायल हैं। जदयू के नेता केसी त्यागी इसे नये अवसर की तरह देख रहे हैं।  वैसे भी त्यागी के पास न तो राज्यसभा है और न ही लोकसभा। अब ऐसे में अगर चौधरी के फिर से नाज-नखरे बढ़ जाएं तो क्या कहना।


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