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‘एकला चलो रे’ की राह पर एकल अभियान

‘एकला चलो रे’ की राह पर एकल अभियान

धनबाद में एकल विद्यालय के तीन दिवसीय बैठक का आयोजन किया गया, जिसमेंं सरसंघचालक मोहन भागवत, विश्व हिंदु परिषद के अंतर्राष्ट्रीय संस्थापक अशोक सिंघल, साध्वी ऋतंभरा, चंपत राय, एकल अभियान धनबाद चैप्टर के महेंद्र अग्रवाल और आयोजन समिति के अध्यक्ष के. एन. मित्तल की उपस्थिति खास थी। इस बैठक में छह देशों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। अमेरिका से आए 40 से अधिक प्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। एकल विद्यालय ने 25 साल पहले धनबाद से अपनी मुहिम की शुरूआत की थी। पिछड़े इलाकों के लोगों के उत्थान के उद्देश्य से इसकी शुरूआत हुई, जिसने इतने सालों में कई सफल पड़ाव पार किए और लोगों को शिक्षित कर उन्हें जिंदगी की सही राह दिखाई। आज न जाने कितने ही गांव और परिवार एकल की वजह से जिंदगी जीने की कला सीखकर अपने और अपने परिवार का भरण-भोषण तो कर ही रहे है, साथ ही देश के विकास में भी अपना योगदान दे रहे हैं। एकल विद्यालय एक ही शिक्षक व शिक्षिका से चलाये जाते हैं। एक स्कूल की एक शिक्षिका से बात हुई तो उन्होंने जानकारी दी किएकल विद्यालय में सरकारी विद्यालय से भिन्न शिक्षा दी जाती है। सरकारी स्कूलों में संस्कार शिक्षा नहीं दी जाती, जबकि एकल विद्यालयों में संस्कार शिक्षा का अहम स्थान है। एक गुणवान नागरिक होने के लिए अन्य विषयों का ज्ञान होने के साथ ही उत्तम संस्कार भी होना चाहिए। एकल विद्यालयों में इसका खास ख्याल रखा जाता है। बचपन से ही बच्चों को संस्कार की शिक्षा दी जाती है, ताकि आगे चलकर वह देश के जिम्मेवार  नागरिक बन सके।

धनबाद में एकल विद्यालय के तीन दिवसीय अभियान का आयोजन किया गया, जिसमें सरसंघचालक मोहन राव भागवत, विश्व हिंदु परिषद के अंतर्राष्ट्रीय संस्थापक अशोक सिंघल, दीदी मां साध्वी ऋतंभरा, चंपत राय, एकल अभियान धनबाद चैप्टर के महेंद्र अग्रवाल और आयोजन समिति के अध्यक्ष के. एन. मित्तल की उपस्थिति खास थी। इस बैठक में छह देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अमेरिका से आए 40 से अधिक प्रतिनिधियों ने इस इस कार्यक्रम में भाग लिया। इसके अलावा कनाडा, जर्मनी, आस्ट्रेलिया आदि देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। एकल संगम के पहले दिन एक मार्च को झारखंड के गांवों में एकल अभियान से जुड़े 40 हजार ग्रामीणों की शहर के अलग-अलग तीन मार्गों से शोभायात्रा निकली। शोभायात्रा में शामिल ग्रामीणों का व्यवहार अनुकरणीय था। वे जय श्री राम का उद्घोष करते हुए दिखाई दिए। नगर के गणमान्य लोगों ने सात स्थानों पर इनका स्वागत किया। शोभा यात्राएं बीसीसीएल, नेहरू कॉपलेक्स और रेलवे स्टेडियम से निकलीं। इनमें झारखंड के गिरिडीह, देवघर, पाकुड़, बोकारो, रांची और धनबाद के ग्रामीण शामिल थे। शोभा यात्राएं चलते हुए गोल्फ  मैदान में पहुंच कर समाप्त हुई।

आगे बढऩे वालों की होती है निंदा

04-04-2015

साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि जो बांटा जाता है, वही संस्कार है। जो बटोरा जाए वह विसाद है। एकल के कार्यकर्ता यहां बांटने आए हैं, बटोरने नहीं। व्यक्तिगत हित से ऊपर उठकर और समाज के लिए जीने में ही सार्थकता है। कार्यकर्ता पूरी तत्परता से अपने कार्य में लगे रहें। आने वाले समय में और बेहतर परिणाम आएंगे। एकल अभियान से भारत में स्वर्ग उतार देने की योजना है। कार्यकर्ता आपसी प्रतिस्पर्धा से बचें। अपने बड़प्पन का बखान भी नहीं करें, क्योंकि इससे काम प्रभावित होता है। हमेशा यही सोचें कि वे इस विशाल संगठन के एक यंत्र मात्र हैं। निंदा से घबराए नहीं, कार्य करने वालों की ही निंदा होती है।

एकल भारत के चरित्र निर्माण के लिए ब्रह्मास्त्र

04-04-2015

अशोक सिंघल (विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक) ने कहा कि एकल अभियान भारत के चरित्र निर्माण के लिए ब्रह्मास्त्र है। इस अभियान से भारत फिर से विश्व गुरु बनेगा, इस देश का सम्मान लौटेगा। उन्होंने कहा कि भारत में नि:शुल्क शिक्षा, नि:शुल्क आरोग्य की व्यवस्था थी, लेकिन विदेशी हमलावरों ने हमारी शक्ति छिन्न-भिन्न कर दी। देश में कोई झूठ नहीं बोलता था, चोरी नहीं होती थी, यहां लोग सन्यास लेते थे। विदेशियों ने यहां की शिक्षा व्यवस्था को छिन्न-भिन्न कर दिया। इससे लोगों का चरित्र खराब हो गया। दृष्टि बदलने की हमारी ताकत है। एकल अभियान, ये कोई मामूली अभियान नहीं है। इस अभियान से जागृति आई है, नहीं तो हम सोच ही नहीं सकते थे कि भारत में एक स्वाभिमानी सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि एकल अभियान से समाज में वैदिक सनातन व्यवस्था आएगी। वैदिक संस्कृति सनातन धर्म के आधार पर यह देश फिर से खड़ा होगा।

उन्होंने कहा की बलपूर्वक या प्रलोभन देकर धर्मांतरित किए गए हिन्दुओं की घर वापसी गलत नहीं है। ईसाई मिशनरी प्रलोभन देकर और उल्टा-सीधा पढ़ाकर धर्मांतरण करा रहे हैं। यह हर हाल में रुकना चाहिए। धर्मांतरण से बड़ा अपराध कुछ नहीं है। धर्मांतरण करा कर लोगों की हजार साल की संस्कृति खत्म कर दी जाती है। इस्लामी शासन काल में भय दिखाकर धर्म परिवर्तन कराए गए। अंग्रेजों के शासन काल में भारत को सांस्कृतिक रूप से खत्म करने के लिए ईसाई मिशनरियों को धर्म परिवर्तन के लिए लगाया गया। ब्रिटिश काल में शुरु धर्मांतरण अब तक सुनियोजित तरीके से चलाए जा रहे हैं। ईसाई मिशनरियों का लक्ष्य सेवा की आड़ में धर्मांतरण है। कपटता से धर्मांतरण कराने का सिलसिला रोका जाना चाहिए। हिन्दू स्वभाव से ही सहनशील और सर्व धर्म समभाव की भावना रखते हैं। इसका जीता-जागता प्रमाण यही है कि इस्लाम और ईसाईयों ने धर्मांतरण तो कराए, लेकिन हिन्दू किसी का धर्म नहीं बदलवाते।

एकल ने ऐसे बदला भारत
एकल अभियान की बदौलत भारत बदलता नजर आ रहा है। एकल ने पोषण वाटिका बना कर गांव के लोगों को बच्चों की शिक्षा के साथ ही हर बात के लिए जागृत किया है। उन्हें जैविक खाद बनाकर उसकी बदौलत खेती कर वनवासी लोगों को आत्मनिर्भर होने के गुर सिखाए। उन्हें पेड़-पौधों के औषधीय गुण बता कर स्वस्थ्य के प्रति जागृत किया। एकल की पंचमुखी शिक्षा सुदूर गांवों में जागृति का संवाहक बन गई है। एकल अभियान के पांच उद्देश्यों में प्राथमिक शिक्षा, बुनियादी स्वास्थ्य और देखभाल, रोजगार उन्मुखी शिक्षा, सामाजिक स्वावलंबन की शिक्षा और जागरण शिक्षा शामिल है। आश्चर्यजनक रूप से एकल अभियान से वनवासियों की जीवन पद्धति में बदलाव आया है। वे अपने अधिकार की लड़ाई खुद लड़ रहे हैं। इनके उदय से भारत की संभावनाएं ज्यादा मुखर हो रहीं हैं। एकल अभियान ने वनवासी क्षेत्र में कई विलक्षण प्रतिभा को उभारने में मदद की है। सोचकर अजीब लगेगा कि उन इलाकों में जहां लोगों में बातचीत करने की समझ नहीं थी, वहां लोगों ने बड़े-छोटों का आदर और प्रणाम-नमस्कार करना सीखा लिया। थोड़ी सी शिक्षा-दिक्षा से लोग उन इलाकों में शिक्षा का अलख जगा रहे है, जहां विकास की रोशनी का एक कतरा आज तक नहीं पहुंचा है। देश के 54,000 गांवों में एकल के प्रयास से स्वास्थ्य जागरूकता क्रांति आई, वहां के लोगों ने एनेमिया जैसी बीमारियों से निपटना सीख लिया। नशे में डूबे रहने वाले अब भगवत भजन में लीन हो गए। इन सब परिणाम और प्रसंगों का विवरण पिछड़े गांवों से आए वनवासी और बुद्धिजनों से मिलती है। इन लोगों के लिए विपरीत हालातों से उबरना काफी मुश्किल था, लेकिन एकल के सहयोग से वनवासियों की उपलब्धियां देश के दूसरे राज्यों से जोड़ी गईं और कृषि क्रांति की संवाहक बनी।

एकल के प्रयास से भारत बनेगा विश्व गुरू

श्यामजी गुप्ता (अभियान के संगठन मंत्री) ने कहा कि हम लोग ऐसे आदमी गढऩे में जुटे हैं, जो धरती से सोना उगाएंगे। इस अभियान से जुड़े बालकों ने अपने गांव के साथ ही देश की तकदीर बदली है। अगले 25 साल में एकल अभियान के बदौलत भारत को विश्व गुरू बनाएंगे। एकल अभियान के कई प्रकल्प भारतीय गांवों में चल रहे हैं। इसी प्रकल्प का एक भाग पंचमुखी शिक्षा है। इस शिक्षा की बदौलत भारत के गांवों की तस्वीर बदल कर रख देंगे। एकल विद्यालय से पढ़कर निकले बच्चे नौकरी नहीं करेंगे, उत्पादन करेंगे। इस तरह के प्रयोग भारत के 21 राज्यों में चल रहे हैं। पड़ोसी देश नेपाल में भी एकल अभियान वहां के कई जिलों में चल रहे हैं। धरती, गाय और गंगा की बदौलत हमारे किसान महीने में अच्छी आमदनी करने में सक्षम होंगे। एकल अभियान की बदौलत गांव को आर्थिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य व रोजगार के ख्याल से समर्थ बना दिया जाएगा। आर्थिक रूप से गांव समर्थ होने पर लोग रोजी-रोटी की तलाश में शहर की ओर पलायन नहीं करेंगे। गांवों में जिस तरह दारू-शराब पीने का प्रचलन बढ़ा है, यह चिंता की बात है। इस बुराई को हरि कथा व सत्संग के माध्यम से दूर किया जा रहा है।

04-04-2015

 पत्थर पर लहलहाती फसल

मिट्टी में तो फसल की पैदावार होती है, लेकिन पत्थर पर फसल उगाने की कोई बात करे तो अचरज ही होगा। एकल अभियान के सहयोग से गिरिडीह जिले के परमाडीह गांव के लोगों ने अपने अथक परिश्रम से यह कर दिखाया। पथरीली भूमि को उपजाउ भूमि में बदल दिया। यह गांव चट्टानों पर बसा है। खेत के नीचे पत्थर हैं और ऊपर मिट्टी। एकल अभियान से जुड़कर इस गांव के किसान कृषि का प्रशिक्षण लेकर खेती करने में जुट गए और अब यहां के किसान सब्जी की खेती कर भरपूर उत्पादन करते हैं। किसानों की आय का जरिया सब्जी उत्पादन है। वे लोग सब्जी उगाकर गिरिडीह और आसपास के बाजारों में बेचतेे हैं। गांव के किसान ननू प्रसाद, नरेश प्रसाद वर्मा और दिलीप सिंह ने बताया कि एकल अभियान से हम लोगों को काफी लाभ पहुंच रहा है। खेत में लहलहाती फसलों को देखकर उन्हें खुशी होती है। एकल अभियान के कारण उनके गांवों में कृषि सहित अन्य क्षेत्रों में भी काफी क्रांति आयी है। यहां के किसान बताते हैं कि इस गांव के किसान पूरी तरह जैविक खाद का प्रयोग करते हैं। जैविक खाद बनाने का प्रशिक्षण उन्हें एकल अभियान में दिया गया। जैविक खाद रासायनिक खाद से बेहतर है। इसके प्रयोग से पैदावार अधिक होती है और जमीन को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। कम लागत से घर में ही मात्र 48 दिनों में ये खाद तैयार हो जाती है। एक मच्छरदानीनुमा नेट में गोबर और केंचुएं से इसे तैयार किया जाता है। एकल अभियान के सदस्य ये सारा सामान उन्हें उपलब्ध करवाते हैं। अच्छी पैदावार देखकर किसानों ने गेहूं, धान, दलहन की खेती भी शुरू कर दी है।

04-04-2015

एकल के माध्यम से शिक्षा, रोजगार, सांस्कृतिक चेतना की क्रांति गांवों में आई है। इस अभियान के संचालन में यूएसए के एनआरआइ की बहुत बड़ी भूमिका है। अमेरिका के नब्बे प्रतिशत एनआरआइ को एकल विद्यालयों की गतिविधियां मालूम हैं। वे इसके कार्यक्रमों से वाकिफ  हैं और वे इसके लिए कोष भी देते हैं। एकल विद्यालय फाउंडेशन ऑफ  यूएसए के ग्लोबल को-ऑर्डिनेटर रमेश पी. शाह भारत के ग्रामीण और वनवासी क्षेत्र से अशिक्षा दूर करने के लिए 1,00,000 एकल विद्यालय की स्थापना करने की कोशिश कर रहे हैं। शाह एकल अभियान के लिए वर्ष के 6 महीने भारत में,  खासकर सुदूर क्षेत्रों में वनवासी भाइयों के बीच बीताते हैं। वे उनके सम्यक विकास की संभावना तलाशते हुए अभियान को इसके अंतिम लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए कृतसंकल्प हैं। पूरे अभियान में खर्च की पूरी पारदर्शिता है। एनआरआइ को यह संदेश दिया गया है कि वे भारत के विकास के लिए एक बार में एक गांव के विकास का संकल्प लें। उनके लिए नारा है – वन डॉलर, वन डे, वन स्कूल, वन विलेज।

विधि से नहीं चलने वाले होते हैं अराजक

04-04-2015

मोहन भागवत (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक) ने कहा कि जो विधिवत नहीं है, उसे समाज स्वीकार नहीं करता। जो विधि से नहीं चलते वह अराजक होते हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के विकास के लिए कार्य आगे कैसे बढ़े, इस पर विचार करेंगे। जिस दिशा में बढ़े थे, उसी दिशा में और आगे बढेंगे। रणनीति बदलनी पड़ सकती है, सिंहावलोकन कर देखेंगे। कैसी राह चलकर आए, कैसे रास्ते पर चलेंगे, आगे काम में अनुकूलता-प्रतिकूलता आएगी, राह कैसी थी इस पर नहीं सोचना, राह में जो अनुभव मिले इसे स्मरण रखना है। अपने अनुभव से क्या सीखा उससे सबक लेना है। कल्पना का जन्म मन में होता है। कल्पना को प्रत्यक्ष करने के लिए साहस चाहिए। पथ कांटों भरा हो, लेकिन चलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मंदिर, धर्मस्थल सभी को हमें ठीक करना है। जो काम आगे करना है उस पर विचार करना चाहिए। देश की संस्कृति रीति-नीति को मानना चाहिए। सब को स्वीकार करना हमारी नीति है। आगे काम करने के लिए हो सकता है कि हम लोगों को अपना स्वरूप बदल कर काम करना पड़े। अब तक के परिणाम अच्छे हैं, यह सोचकर काम नहीं चलेगा, हर्ष करो, गर्व न करो।

एकल की शुरूआत होने से धर्मांतरण का प्रभाव भी कम हुआ है। लोगों में सांस्कृतिक चेतना जगी है, जिससे धर्मांतरण सुदूर इलाकों के लोगों को समझा पाना आसान हुआ है। इसमें एकल विद्यालय का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। शिक्षिका चांदनी मुर्मू ने बताया कि ईसाई मिशनरियों ने इस गांव के लोगों का भी धर्मांतरण कराना चाहा, लेकिन लोगों की जागरूकता व निजी संस्कृति से प्रेम के कारण वह असफल होकर यहां से चले गए। एकल विद्यालय में बच्चों को मातृभाषा, निजी गांव, निजी संस्कृति, निजी मिट्टी व स्वदेश की शिक्षा दी जाती है। क्षेत्र में शिक्षा व संस्कृति के प्रति जागरूकता के कारण प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन यहां सफल नहीं हो पाया। यहां से निकलने वाले वनवासी बच्चे शत-प्रतिशत भारतीय बनकर निकलते हैं। वह दिन दूर नहीं जब एकल विद्यालय में पढ़े वनवासी बच्चे सरकारी व गैर-सरकारी सेवाओं में उच्च पद प्राप्त करेंगे।
इस कार्यक्रम की शुरूआत बहुत ही आधुनिक तरीके से हुई। कार्यक्रम की शुरूआत में एकल विद्यालय मीडिया ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन दिया। इसमें एकल के कार्यों और योजनाओं की झलक थी, जो काफी उत्साहवद्र्धक रहीं। इसके अलावा एकल अभियान के विभिन्न संभागों के प्रमुखों ने भी अपने काम और उसके नतीजे का ब्योरा दिया। यह भी बताया कि देश में आज डिजिटल इंडिया की बात होती है, जबकि एकल के सारे कार्यों का डिजिटलाइजेशन कई वर्षों पहले ही हो गया है। इस पूरे कार्यक्रम का समापन शांति मंत्र से हुआ।

प्रीति ठाकुर

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