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यूपी में हर घर अब मोदीमय हो गया है

यूपी में हर घर अब मोदीमय हो गया है

 

 

भाजपा के उड़ीसा प्रभारी अरूण सिंह ने होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव तथा उड़ीसा मे पंचायती चुनाव और वहां चल रही राजनीतिक उठा-पटक पर उदय इंडिया के वरिष्ठ संवाददाता नीलाभ कृष्ण से विस्तृत बात की। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:-

 

अभी हाल ही में उरी हमले के जवाब में भारत ने पीओके में सर्जीकल स्ट्राइक  किया, क्या इससे लोगों में पार्टी और प्रधानमंत्री की छवि बढ़ी और क्या इससे आने वाले राज्यों के चुनाव में पार्टी को फायदा होगा?

देखिये हम इसे चुनाव से जोड़कर नही देखते हैं और न ही राजनीति से जोड़कर देखते हैं, बल्कि  अगर आप पार्टी की छवि बढऩे, श्रेय लेने या मनोबल बढऩे की बात करंे तो इससे भारत के एक सौ पच्चीस करोड़ लोगों का मनोबल बढ़ा है, सेना के जवानों का मनोबल बढ़ा है और इसे हम राजनीति से जोड़कर नहीं देखते हैं।

अभी राहुल गांधी ने कहा है कि ढाई साल में पहली बार प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री की तरह एक्ट किया है। इस पर क्या कहेंगे ?

कम से कम ढाई साल में पहली बार राहुल जी ने तारीफ  तो की है, नहीं तो इससे पहले राहुल जी जो सकारात्मक चीजे होती थी उसकी भी तारीफ  नही करते थे। हर चीज में कहीं न कहीं कमी निकालते थे मतलब आरोप के लिए आरोप ढूढ़ते थे, तो मेरा यही कहना है कि राहुल जी ने ढाई साल मे पहली बार कम से कम प्रधानमंत्री जी की तारीफ  तो की।

आप यूपी से आते हैं तो वहां अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी किस प्रकार की रणनीति बना रही है ?

देखिये कुल मिला कर के चौदह साल से भारतीय जनता पार्टी वहा सरकार में नही हैं, बसपा और सपा का शासनकाल चलता रहा है और इन 14-15 सालों में हमारा उत्तर प्रदेश बहुत पीछे छूट गया है, सड़के वहा नहीं है,जो हैं उनकी हालत बहुत खराब है। बिजली की हालत ऐसी है जो कभी रात में आती है तो कभी दिन में आती है। वहा सिस्टम ऐसा बन गया है कि पन्द्रह दिन बिजली दिन मे आयेगी तो पन्द्रह दिन रात को आयेगी। अस्पतालों की हालत जर्जर है, पीने का पानी नहीं है और इन सब से ऊपर कानून व्यवस्था बहुत खराब है।

हत्या, डकैती, अपहरण अपने चरम सीमा पर है। लोग त्रस्त हैं। पिछले आठ-दस साल में अगर आप देखें तो एक भी उद्योग नहीं लगा है। बिजली के कारखानों के नाम पर जब बसपा कि सरकार थी तब बसपा ने इलाहाबाद में हजारो एकड़ जमीन लोगों और किसानों से अधिग्रहण किया और पैसा कमाया। कोई बिजली का प्लांट भी नहीं लगा, अगर उत्तर प्रदेश पीछे होता है तो पूरा देश पीछे होता है, उत्तर प्रदेश का अगर विकास नहीं होता है तो देश का विकास भी संभव नही हैं इसलिए उत्तर प्रदेश का विकास होना चाहिए। अगर देखें तो बसपा, सपा में मूल अन्तर यही है कि भ्रष्टाचार और जंगलराज दोनों के समय होता है, कानून व्यवस्था बसपा के समय भी खराब होती है और सपा के समय भी, बस अन्तर इतना होता है कि समाजवादी पार्टी की सरकार होती है तो  टाप रैंक पर ध्वस्त कानून व्यवस्था हो जाती है और दूसरे स्थान पर भ्रष्टाचार हो जाता है, और जब बसपा सरकार मे होती है तो भ्रष्टाचार टाप रैंक पर हो जाता है और दो पर कानून व्यवस्था हो जाती है ।

सपा और बसपा एक ही सिक्के के दो पहलु है जहा एक तरफ  लिखा है भ्रष्टाचार वहीं दूसरी तरफ ध्वस्त कानून व्यवस्था और जंगलराज है। भारतीय जनता पार्टी के सिक्के के दोनों तरफ  विकास लिखा है। जनता ने मन बना लिया है। जनता के पास पहले विकल्प नहीं होते थे इसलिए कभी भी इन सरकारों को लगातार नहीं चुना, कभी सपा तो कभी बसपा लेकिन इस बार भारतीय जनता पार्टी एक विकल्प के रूप मे वहां दिख रही है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार चल रही है जो प्रति-दिन विकास के नये आयामों को छू रही है और लोगों में हमारे प्रति अच्छा माहौल है और यह उत्साह इसलिए भी है कि लोकसभा में उत्तर प्रदेश के लोगों ने भारतीय जनता पार्टी को दो सहयोगी दल की सीटों के साथ 80 मे से 73 सीटें दी हैं।

विकास के नाम पर राजनीतिक पार्टियां चुनाव नहीं लड़ती हैं और जिस पर लड़ती हैं उसमें समाजवादी पार्टी आगे है, उदाहरण के तौर पर अटल जी के शासन काल को देखें तो विकास करने के पश्चात भी लोगों ने उन्हें दुसरा अवसर नहीं दिया। तो इससे निपटने के लिए भाजपा कि क्या रणनीति होगी?

मेरा इस मामले मे अलग मानना है, पिछले दस-पन्द्रह सालों से अब नई प्रकार की राजनीति देखने को मिली है जिसमें एक तो विकास के नाम पर सफलता मिली है और दुसरा एन्टी‐इंकम्बेन्सी के नाम पर। अब राजस्थान मे देखिये हमने विकास के एजेन्डे को जनता के सामने रखा और कांग्रेस की एन्टी‐इंकम्बेन्सी से वसुन्धरा जी को पच्चासी प्रतिशत सीटे प्राप्त हुई। शिवराज जी ने अच्छी सरकार चलाई और फिर शासन में आये, रमन सिंह जी अच्छा विकास काएजेन्डा लेकर चल रहे हैं और लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री हैं और असम में भी कांग्रेस के असञ्जय शासन की जगह लोगों ने हमारे विकास केएजेन्डे को चुना है। मतलब जो सरकारें अच्छी नहीं चल रही है उनकी एन्टी‐इंकम्बेन्सी और हम जो विकास का एजेन्डा जनता के सामने रखते है तो जनता हमारे विकास के एजेन्डे को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी के पक्ष मे आ जाती है, इसलिए हम उत्तर प्रदेश में चल रहे कुशासन को सुशासन का रूप देने के एजेन्डे को लेकर लोगों के बीच जायेंगे और हमने अन्य राज्यों मे यह कर के दिखाया भी है।

फिर उत्तर प्रदेश की जनता ने कल्याण सिंह को दूसरी बार क्यों नकार दिया?

आज भी लोग मानते है कि सबसे अच्छी कानून व्यवस्था कल्याण सिंह जी के कार्यकाल मे रही है। राजनाथ सिंह जी ने भी किसान पंचायत से लेकर कई योजनाएं चलाई और अच्छी कानून व्यवस्था रही। उनके कार्यकाल को भी लोग याद करते हैं, ये बात अलग है कि हमारी सरकार दुबारा सत्ता में नहीं आई, हां समय थोड़ा कम मिला, इतने बड़े प्रदेश में नीचे तक काम पहुंचाने के लिए थोड़े समय की आवश्यकता होती है।

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के पद के लिए उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण चेहरे के रूप में शीला दीक्षित को उतारा है तो इस स्थिती मे भाजपा कैसे मुकाबला कर पायेगा?

कांग्रेस का जनाधार उत्तर प्रदेश मे खत्म हो चुका है और शीला दीक्षित राजनीति से सन्यास ले चूकी थी, किंतु कांग्रेस के राहुल गांधी जानते है कि वे दस सीटें भी नहीं जीत सकते इसलिए वे हार का ठीकरा शीला दीक्षित को आगे कर उन पर फोडऩा चाहते है । मैं यहा कहना चाहुंगा कि भाजपा जाति के आधार पर राजनीति नही करती हैं।

जाति के आधार पर राजनीति, मंत्री बनाने से लेकर टिकट बांटने तक में राजनीति हर राजनैतिक पार्टीया करती है चाहे वो कांग्रेस हो या बसपा-सपा और भाजपा भी इससे अछूती नही है।

हम जाति के आधार पर राजनीति नहीं करते। रमन सिंह जी राजपूत समुदाय से आते हैं और छत्तीसगढ़ में राजपूत समुदाय एक प्रतिशत से भी कम हैं यदि ऐसा होता तो वो लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री नहीं होते। आज की जनता विकास के एजेन्डे को पसन्द करती हैं, काम करने वाले लोगों को पसन्द करती है। जाति के आधार पर तो लोग केवल तर्क देते हैं।

पिछले दो तीन सालों से राजनाथ सिंह से लेकर कलराज मिश्रा तक, उत्तर प्रदेश भाजपा के सभी वरिष्ठ नेता दिल्ली में हैं और अगले कुछ ही महीनों बाद यूपी में विधानसभा का चुनाव हैं।

अभी लखनऊ मे भारतीय जनता पार्टी के पचास बड़े नेता हैं, केशव मौर्या हमारे प्रदेश अध्यक्ष, शिव प्रताप साही, शिव प्रताप शुक्ला, रमापती राम त्रिपाठी, ओम प्रकाश जी और हमारे नेता विनय कटियार जी, ये सारे हमारे प्रदेश अध्यक्ष रह चुके है और सबसे बड़ी बात यह है कि हमारे 71 सांसद उत्तर प्रदेश से आते है।

कल्याण सिंह जो अब राजस्थान के गवर्नर है, उत्तर प्रदेश भाजपा के बड़े चेहरे के रूप मे थे । तो क्या आप कोई बड़ा चेहरा लखनऊ भेजेंगे?

भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कोई चेहरा प्रोजेक्ट करेगी या नहीं करेगी इसका निर्णय हमारी पार्टी के संसदीय बोर्ड को ही सही समय पर लेना है।

क्या इस बार उत्तर प्रदेश के चुनाव में राम मंदिर का मुद्दा भाजपा के एजेन्डे में रहेगा? 

राम मंदिर भारतीय जनता पार्टी के लिए कभी राजनीतिक मुद्दा नही रहा है। यह तो हमारे लिए आस्था का विषय है। देशवासी और करोड़ो हिन्दु चाहते हैं कि भव्य राम मंदिर का निर्माण हो। हम भी चाहते हैं कि भव्य राम मंदिर बने, मामला कोर्ट में है और माननीय कोर्ट के अन्तिम आदेश परही मंदिर का निर्माण हो सकता है, या फिर राम मंदिर का निर्माण हिन्दु-मुस्लिम भाईयों के आपसी समझौते के द्वारा भी कराया जा सकता है। लेकिन यह कभी भारतीय जनता पार्टी के लिए राजनीतिक मुद्दा नहीं रहा है। आस्था हमेशा राजनैतिक मुद्दों से उपर होती हैं।

क्या समाजवादी पार्टी मे चाचा-भतीजा के बीच हो रही लड़ाई से भारतीय जनता पार्टी को फायदा होगा?

चूंकि चुनाव नजदीक आ रहा है और यह धन के बंटवारे की लड़ाई है। किसके पास कितना पैसा जायेगा तो हिसाब-किताब की लड़ाई है। इसलिए तो खनन मंत्री प्रजापती को एक बार हटाते हैं फि र रख लेते हैं, देखिए यह शुद्ध रूप से धन की लड़ाई है।

लेकिन कहीं ना कहीं इससे भारतीय जनता पार्टी को फायदा तो हो रहा है।

जनता तो देख रही है कि ये आपस में धन के लिए लड़ रहे हैं। यदि दूसरी पार्टी आपस में धन के बंटवारे की लड़ाई लड़ेगी तो अवश्य ही भारतीय जनता पार्टी को फायदा मिलेगा

अभी जो स्थिति दिख रही है उसके अनुसार एक हंग ऐसेम्बली की स्थिति है। क्या ऐसे में  भाजपा, समाजवादी पार्टी के साथ जायेगी?

ये काल्पनिक प्रश्न है, भाजपा दो तिहाई बहुमत से उत्तर प्रदेश में सरकार बनायेगी।

क्या आप ऐसे पांच नेताओं के नाम बता सकते हैं जो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हो सकते है?

अब आप मुझे फंसा रहे है। मैं यहां पांच नेताओं के नाम बताऊ और वहा 25-30 नेता होंगे। यह तो भारतीय जनता पार्टी का संसदीय बोर्ड तय करेगा।

क्या आप केन्द्र से किसी को भेजने वाले हैं?   

यह हमारी पार्टी का संसदीय बोर्ड तय करेगा।

जैसा की आपने असम मे सोनवाल जी को चेहरा बनाया तो क्या आप उत्तर प्रदेश में भी ऐसा करने वाले हैं?

देखिये, हमने कई राज्यों मे बिना चेहरा सामने लाये ही सरकार बनाई। जैसे कि हम 2003 में बिना रमन सिंह जी को आगे किये ही छत्तीसगढ़ में सत्ता मे आये, वैसे ही हमने हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखण्ड में किया और सरकार बनाई। हमने मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान, सोनवाल जी को असम मे चेहरा बनाया और वहंा भी सरकार बनाई। हां हम बिहार चुनाव मे बिना मुख्यमंत्री का चेहरा सामने लाये ही जनता के पास गये लेकिन सफ लता नहीं मिली तो दोनों स्थिती में भारतीय जनता पार्टी को सफलता मिलती है इसीलिए इसका निर्णय संसदीय बोर्ड लेगा कि करना है या नहीं करना है यदि करना है तो किसको करना है और कब करना हैं।

आप पिछले तीन-चार सालों से उड़ीसा के प्रभारी हैं। आखिरकार पार्टी यहां उतनी प्रभावशाली क्यों नहीं हैं?

उड़ीसा में पहले भारतीय जनता पार्टी की स्थिति अत्यधिक कमजोर थी। 2009 के चुनाव में भाजपा के चार विधायक थे और सांसद कोई नहीं था, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में हमें दस सीटें प्राप्त हुई। पिछले लोकसभा चुनावो में एक सांसद भी बना और हम नौ सीटों पर दूसरे स्थान पर रहे, कुछ सीटें ऐसी रही जैसे बरगड़ मे हम ग्यारह हजार से हारे, कम वोटों से हारे। लोकसभा में हमें 35 प्रतिशत वोट मिले। अब उसके बाद हमने संगठन पर काम किया और पार्टी के साढ़े 32 लाख नये  सदस्य बनाये। उसके बाद हमने तीन टायर पर काम किया, पहला संगठन का विस्तार बूथ लेवल पर कैसे हो, संगठन को कैसे सशक्त बनाया जाए, बूथ में हमने मंडलो की संख्या बढ़ाई और उनका गठन किया और संगठन में विस्तार हुआ,।पहली बार साढ़े चार हजार लोगों को जिला अध्यक्ष बनाया गया, पहली बार जिला कमेटी का गठन हुआ जो पहले नहीं थी तो पहले तीन महीनों में हमने संगठन का विस्तार किया। अब दूसरे विषय पर आते हैं।

नवीन पटनायक से लोग त्रस्त हैं। नवीन पटनायक ने 16 साल में कुछ नही दिया, लोग भयंकर परेशान हैं। पहले सरकार का विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम केवल प्रदेश स्तर तक होता था, जिला स्तर पर नहीं होता था हमने यह तय किया कि जितने भी सरकार  विरोधी कार्यक्रम हैं। सड़क है, बिजली है, पानी है, अस्पताल, दवाई कि समस्या है, राशन कार्ड कि समस्या है, सब को लेकर हमने मंडल स्तर से हर महीने उड़ीसा की जनता के हित में प्रदर्शन कर रहे हैं और इससे भारतीय जनता पार्टी मजबूत हुई है। अभी हमारे 16 जिलों में प्रदर्शन हो चुका है और अब नवंबर अंत तक हम प्रदेश का सबसे बड़ा प्रदर्शन करेंगे और अब हम लोकल बॉडी के चुनाव की भी तैयारी करेंगे।

आप नवीन पटनायक को जन‐विरोधी कहते हैं लेकिन प्रधानमंत्री जी तीन बार और गृहमंत्री जी ने दो बार उड़ीसा मे बड़ी-बड़ी रैलियां कि लेकिन कभी नवीन पटनायक को निशाना नही बनाया।

एक प्रधानमंत्री की भी बोलने की सीमा होती है। उन्होंने नवीन पटनायक को जम के निशाना बनाया था और शायद आप भूल रहे हैं कि प्रधानमंत्री जी ने बालेश्वर की रैली मे इस सरकार को सोती हुई सरकार कहा था।

उड़ीसा में खनन के मामले में जो साहा कमिशन कि रिपोर्ट आई है उसके अनुसार आप यहा सीबीआई जांच क्यों नहीं करा रहे हैं?

सीबीआई अपना काम करेगी और आप देख ही रहे हैं कि अपराधियों पर कार्यवाही हो भी रही है। चिट फंड मामले में बीजू जनता दल के कई सांसद और विधायक जेल गये। लेकिन अब हमने अपना फोकस नवीन पटनायक जी के द्वारा सोलह साल में किये गये कार्या पर कर दिया है। लोगों के पास सड़क, बिजली और पानी कि परेशानी है। अस्पताल में दवाई कि समस्या है, पुलिया टूटी है और राशन कार्ड में भी घोटाले हैं और ये नवीन पटनायक की जिक्वमेदारी है और इससे वो भाग नही सकते हैं।

लेकिन जनता मे नवीन पटनायक की छवि साफ है और इसलिए जनता उनको बार-बार चुनती है। उनके दल का मानना है कि 2017 के पंचायत चुनाव मे भी यह बरकरार रहेगा।

यह भ्रम दिल्ली मे शीला दीक्षित को, बंगाल मे कक्वयुनिस्टों को और असम मे तरूण गगोई को था। और यदि नवीन पटनायक चुनाव जीतते भी हैं तो इसका कारण है कि उन्होंने एक ग्रुप बना रखा हैं और वे पैसे के बल पर चुनाव जीत सकते हैं। लेकिन उड़ीसा की जनता सब जानती है कि नवीन पटनायक ने कोई काम नहीं किया है और इनके राज मे  भयंकर भ्र्रष्टाचार हैं। इसका उदाहरण खनन घोटाले की वो सारी फाइलें हैं जिस पर नवीन पटनायक ने स्वयं हस्ताक्षर किये हैं। अगर आप देखें तो लोगों को संबलपुर और बालांगीर मे पीने का स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा है। लगभग 60 से 70 लोगों कि मृत्यु प्रदूषित पानी पीने के कारण हो जाती हैं, कटक के शिशु भवन मे 50-60 बच्चे मर जाते है और किसान आत्महत्या कर लेता है, निर्दोष आदिवासियों की हत्या हो जाती है, ढोंगी बाबा कितने लोगो कि जमीनों पर कब्जा कर लेता है और सरकार उसको बचा लेती है तथा अपनी नाकामी छुपाने और उड़ीसा में भाजपा कि लोकप्रियता प्रधानमंत्री जी कि रैली के पश्चात बढ़ते देख नवीन पटनायक के  लोग एक केन्द्रीय मंत्री के उपर जानलेवा हमला करते हैं।

अब भारतीय जनता पार्टी विकल्प के रूप में लोगों के बीच उभरी है और अब नवीन पटनायक को जाना ही है और भारतीय जनता पार्टी सरकार बनायेगी। जब हम हरियाणा मे 4 सीट से 48 और असम मे पांच से बारह गुना हो सकते हैं तो दस सीट से एक सौ बीस हम उड़ीसा मे क्यों नही हो सकते हैं, उसी पर भारतीय जनता पार्टी काम कर रही है।

आपकी राष्ट्रीय कार्यकारणी के सदस्य, विजय महापात्रा ने कहा है कि महानदी पर उड़ीसा का स्वार्थ ज्यादा आगे है और मैं भारतीय जनता पार्टी द्वारा लिए गये कदम के साथ नही हूं।

ये तो दोनों राज्यों कि सरकारों के बीच का मामला है। नवीन पटनायक को छत्तीसगढ़ सरकार से बात करनी चाहिये, हां भले यह बात अलग है कि छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है लेकिन हम तो पार्टी के सदस्य हैं। इस मामले में उड़ीसा सरकार को केन्द्र से बात करनी चाहिये लेकिन वो केन्द्र में तो अपना कोई प्रतिनिधि भेजते नहीं हैं। अभी गये हैं तो उनसे पूछना चाहिये कि इतने दिन से वे क्या कर रहे थे? नवीन पटनायक चारों तरफ से घिर गये हैं और ये इनका राजनीतिक शगुफा है। लेकिन यदि यह सरकार इस मामले में कोई कदम उठाती है तो उड़ीसा भाजपा इनके साथ है।

लेकिन उनका कहना हैं कि जल संसाधन तो केन्द्र सरकार के अन्दर आता है।

ये बीजू जनता दल वाले अपनी नाकामी छुपाने के लिए महानदी कोलावरम का मुद्दा जानबूझ कर लाते हैं। आपकी इतनी मजबूत सरकार है तो कोई कदम उठाते क्यों नहीं?

उड़ीसा में होने वाले 2017 पंचायत चुनाव में आपको क्या लगता है?

2017 पंचायत चुनाव में भारतीय जनता पार्टी अपनी ताकत बढ़ाएगी और आने वाली विधानसभा में अपनी सरकार बनायेगी।

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