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सारनाथ में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सक्वमेलन बुद्ध के उपदेशों में शांति की तलाश

सारनाथ में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सक्वमेलन बुद्ध के उपदेशों में शांति की तलाश

हिंसा, आतंक और दमघोंटू  माहौल के जिस मुहाने पर आज दुनिया खड़ी है, उससे उबरने का रास्ता आज भी भगवान बुद्ध ही सुझा सकते हैं। शांति, सद्भाव और मानवीय प्रेम का उनका संदेश ही इस धरती को सर्वाधिक सुंदर और मनोरम बनाने में सहायक हो सकता है। यह निष्कर्ष निकाला दुनिया के 39 देशों से बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ पहुंचे 270 प्रतिनिधियों सहित हजारों शांति समर्थकों ने जो विश्व में फैली हिंसा, आतंक के माहौल और बिगड़े पर्यावरण से व्यथित हैं। अवसर था आध्यात्मिक और सांस्कृतिक नगरी वाराणसी में बुद्ध भूमि सारनाथ में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन का जहां विश्व के कोने-कोने से शांति और सद्भाव के दूत बनकर आये लोगों ने एक स्वर से यह स्वीकार किया कि आज भी भारत ही दुनिया को शांति का संदेश दे सकता है। वही फिर एक बार इस धरती को करूणा,  दया और ममता का केन्द्र और आदमी को सर्वाधिक स्तुत्य प्राणी के रूप में प्रतिष्ठापित करने का विकल्प बना सकता है।

अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन का तीन दिवसीय आयोजन सारनाथ में केन्द्रीय एवं उत्तर प्रदेश राज्य के पर्यटन मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से किया गया। यूं तो इस तरह का आयोजन यहां पहली बार नहीं हुआ लेकिन हां, इस बार का आयोजन कई कारणों से ‘खास’ बन गया। एक तो यह कि इस बार के सम्मेलन का मौका ऐसा रहा जब पूरी दुनिया दूषित पर्यावरण की भयावहता से ऊब चुकी है। विश्व दमघोंटू वातावरण से उबरने का रास्ता खोज रहा है। यही नहीं आतंकवाद की भयावहता, गोली-बारूद की धमक से मानवता दहल गयी है। मानवीय सद्भाव और भाईचारा विलुप्त होता जा रहा है। शांति का नामोनिशान जैसे मिटता जा रहा है। लोग इस सबसे उबरने का रास्ता खोज रहे हैं। इसीलिए जब बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ में मूलगंध कुटी परिसर के बुद्ध मंदिर में सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यावरण मंत्री महेश शर्मा ने ‘शांति दूतों’  का आह्वान किया कि ‘आज दुनिया भय और आतंक के जिस मुहाने पर खड़ी है, बुद्ध ही वहां से उबरने का हमें रास्ता दिखा सकते हैं’ तब पूरा पंडाल तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा। इतना ही नहीं थाईलैंड की पर्यटन मंत्री प्रो. चावनी टोंगरोच ने हाथ उठाकर ‘हर हर महादेव’ का उद्घोष किया और दर्जन भर अन्य लोगों ने उद्घोष को दोहराया।


काशी को खास तवज्जो-नवनीत सहगल


aaअंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन वैसे तो पहले भी होते रहे हैं लेकिन 3 से 5 अक्टूबर तक चला ‘बुद्धा कानक्लेव’ कई मायनों में खास साबित हुआ। इस सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खास निर्देश पर क्रमश: केन्द्रीय पर्यटन (राज्य) मंत्री महेश शर्मा और पर्यटन मंत्री (यूपी) ओम प्रकाश सिंह तीन दिनों तक वाराणसी में जमे रहे। यही नहीं बुद्ध सर्किट से जुड़े स्थलों के विकास के लिए दोनों सरकारों ने दिल खोलकर बजट का इंतजाम किया। बुद्ध से जुड़े स्थलों के विकास के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को खास निर्देश तो दिये ही, पर्यटन मंत्री ओम प्रकाश सिंह और पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत सहगल को खास दायित्व सौप दिया कि इस मामले में कोई कमी न रह जाय। इस मुदे् पर नवनीत सहगल से हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

सहगल जी, पर्यटन के मामले में उत्तर प्रदेश राजस्थान, गुजरात या अन्य प्रदेशों के मुकाबले पिछड़ जाता है। इसका बड़ा कारण पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाओं में से एक और बेहद जरूरी सड़कें स्तरीय होटलों, ट्रांसपोर्ट आदि की कमी है। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार क्या कर रही है?

देखिये बुद्धिस्ट सर्किट में आवागमन को आसान बनाने के लिए आगरा-लखनऊ,एक्सप्रेस-वे जल्द चालू होगा। आगरा -लखनऊ-गोरखपुर, आगरा-लखनऊ-इलाहाबाद और  आगरा – लखनऊ- वाराणसी के बीच पर्यटकों के लिए हवाई सेवा की शुरूआत बहुत जल्द हो जायेगी। होटल इंडस्ट्री को भी हम उत्साहित कर रहे हैं। बुद्धा सर्किट में कुछ नये और बेहतरीन होटल जल्द ही बनेंगे। बुद्धा सर्किट में आने वाले पर्यटक सुविधाओं के मामले में संतुष्ट होकर लौटें यह हमारा प्रयास होगा।

इसके अलावा पर्यटकों के लिए आप और क्या सुविधाएं दे रहे हैं?

पर्यटकों को अधिकतम सुविधाएं, जैसे-मोबाइल ऐप तैयार कर रहे हैं। इस ऐप में गाइड, टैक्सी, होटल की उपलब्धता के अलावा सभी आवश्यक जानकारियां होंगी।

वाराणसी सांस्कृतिक नगरी है, क्या इसे खास तवज्जो नहीं मिलनी चाहिए?

काशी को हम खास तवज्जो दे रहे हैं। गंगा के समानांतर वरूणा को तवज्जो दिया गया है। वरूणा कारीडोर का जो भी काम बाकी है वह दोबारा शुरू हो गया है। जल्दी ही वरूणा और उसके घाट ऐतिहासिक स्वरूप  में लोगों को आकर्षित करेंगे।


कानक्लेव की राय में आतंकवाद एक वैश्विक समस्या के रूप में सामने आ रहा  है। इससे न केवल दक्षिण पश्चिम एशिया प्रभावित है बल्कि यूरोप के तमाम देशों में भी आतंकी घटनाएं बढ़ी हैं। इस समस्या का समाधान बुद्ध के विचारों में ही खोजा जा सकता है। उनके उपदेशों में ही दुनिया के लिए नयी राह मिल सकती है।


बौद्ध सर्किट के विकास के लिए प्रधानमंत्री का है खास निर्देश -महेश शर्मा


23-10-2016तीन दिवसीय बुद्धा कान्क्लेव के सफल आयोजन से केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन (राज्य) मंत्री महेश शर्मा काफी संतुष्ट नजर आये। एक तो इतनी अधिक संख्या में (270) पहली बार आये विदेशी पर्यटक प्रसन्नचित्त यहां से वापस गये और दूसरे ‘फिर आयेंगे’ का भाव दर्शाते हुए आतिथ्य सत्कार से संतुष्टि दिखायी। प्रस्तुत है महेश शर्मा से बातचीत के अंश

कान्क्लेव तो काफी सफल रहा, बधाई।

दरअसल प्रधानमंत्री जी की इच्छा थी कि बुद्धा कान्क्लेव बेहतर हो। इससे एक अच्छा संदेश जाना चाहिए।

आपको लगता है कि यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई संदेश छोड़ेगा जिससे भारत को लाभ मिलेगा?

एक अच्छा और गंभीर प्रयास हमने किया। और जो भी हो, पर्यटन के लिहाज से तो पहली बार इतने पर्यटक (विदेशी) यहां आये। वे संतुष्ट होकर वापस गये।

विदेशी पर्यटकों के लिए जो सुविधाएं देने की बात आप लोग कर रहे हैं, कब तक हो जायेंगी।?

हम उन परियोजनाओं पर काम शुरू कर चुके हैं। प्रधानमंत्री का खास निर्देश है कि बुद्धा सर्किट से जुड़ी तमाम योजनाओं के कार्यान्वयन में विलम्ब नहीं होना चाहिए।

आपका विभाग इनमें से किस योजना को हाथ में लिए है?

पर्यटन मंत्रालय को स्वदेश दर्शन योजना के अन्तर्गत बौद्ध सर्किट विकसित करने के लिए अभी तक 132.17 करोड़ रूपए मंजूर हो गये हैं। यूपी का पर्यटन विभाग श्रावस्ती, कपिलवस्तु और कुशीनगर को कवर करने वाले बौद्ध सर्किट के लिए 99.97 करोड़ रूपये खर्च कर रहा है।


उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री ओम प्रकाश सिंह ने इस अंतरराष्ट्रीय कानक्लेव में आये विश्व के चुनिन्दा प्रतिनिधियों से वैचारिक आदान-प्रदान करते हुए कहा,”वाराणसी और खासकर सारनाथ के ऐतिहासिक महत्व को आप बखूबी समझते हैं। भगवान बुद्ध ने दुनिया के 45 देशों में जाकर लोगों को मानवता का संदेश दिया था। बावजूद इसके उन्होंने सारनाथ को खास महत्व दिया और अपने पांच प्रमुख शिष्यों को ‘ज्ञान’ देने के लिए इसी भूमि को चुना। इसीलिए सारनाथ ‘ज्ञानभूमि’ के रूप् में जाना जाता है। भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली में हम चाहेंगे कि आप बार-बार पधारें।’’

23-10-2016

कानक्लेव में हिस्सेदारी कर रहे दुनिया के 39 देशों के 270 प्रतिनिधि सारनाथ (वाराणसी ) पहुंचकर अभिभूत दिखे। उन्होंने काशी में गंगा दर्शन और गंगा आरती में भी खासी रूचि दिखायी। उत्तर प्रदेश के पर्यटन विभाग और केन्द्र के पर्यटन विभाग के अधिकारियों की खासी रूचि के कारण इन पर्यटकों की यात्रा अविस्मरणीय बन गयी। नार्वे से आयी हेडी सत्यबाग का कहना था-”इस कानक्लेव से भगवान बुद्ध के बारे में जानने की जिज्ञासा और बढ़ गयी है।’’ इसी तरह रूस से आये रूस्लान वोच का कहना था कि सारनाथ पहली बार आया हंू। एक अलग तरह की अनुभूति महसूस कर रहा हूं। कानक्लेव में आकर बुद्ध के बारे में एक अलग तरह की धारणा बनी है। इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि आज दुनिया जहां खड़ी है वहां से निकलने में बुद्ध का मंत्र ही सहायक हो सकता है। थाइलैण्ड की पर्यटन उप मंत्री चावानी तोंग्रोच तो जैसे कानक्लेव में आकर अभिभूत थीं। उन्होंने कहा- यहां आकर भगवान बुद्ध को एक और एंगिल से जानने का अवसर मिला है। गरज यह कि कानक्लेव में आये लोगों की धारणा और सोच में बदलाव महसूस किया गया। कई प्रतिनिधियों ने तो सारनाथ और काशी की यात्रा को ‘अद्भुत’ और ‘अविस्मरणीय’ बताया और कहा कि हम यहां बार-बार आना चाहेंगे।

वाराणसी से सियाराम यादव

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