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शांत स्वभाव शक्ति संरक्षण का माध्यम

शांत स्वभाव शक्ति संरक्षण का माध्यम

हिन्दू धर्म में हर पूजा का अलग अलग महत्व होता है। हर पूजा में भिन्न-भिन्न देवी-देवताओ की उपासना की जाती है। इन सभी चीजो से हम अच्छे से अवगत होते हैं। जिन देवी-देवताओ की हम उपासना करते हैं, हमारे मन में न केवल उनके प्रति भक्ति-भाव जागृत होता है बल्कि हमारे अंदर रहने वाले दैवीय स्वभाव भी जागृत हो जाता है। हम मनुष्यो के अंदर ही हर देव का वास होता है हमारी साधना और आराधना के माध्यम से वो विकसित होते है।

देवी पक्ष की बात करें तो हम मां दुर्गा अथवा मां भगवती की आराधना करते हैं। हमें यह ज्ञात है की दुर्गा अपनी शक्ति के द्वारा राक्षस प्रवृति के लोगो का विनाश करती है। देवी की आराधना के माध्यम से सारी दुनिया स्त्री शक्ति का एहसास कर सकती है। हिन्दू धर्म में यह माना जाता है की स्त्री स्वयं ही शक्ति की रूप होती है। स्त्री के बिना यह सृष्टि असंभव है। हम हर साल इन दिनों देवी मां की पूजा करके यह दर्शाते है की भले ही नारी शारीरिक बल से पुरुष से कमजोर हो लेकिन उसका मनोबल पुरुष से कहीं अधिक होता है। हर नारी को अपने अंदर की शक्ति को जागृत करना चाहिए।

साधारणत: शक्ति की बात आने पर हम  दुसरो के ऊपर अपना हावी होने को ही शक्ति समझ बैठते हैं। ऐसा माना जाता है की शक्ति का केवल बाहरी  प्रदर्शन ही सब कुछ होता है। आजकल महिला सशक्तिकरण की बात चहुंओर होती है, और ऐसे में कुछ महिलाएं खुद की शक्ति को आजमाने का प्रयास करने लगती है। स्वयं को शक्ति रूपेण दुर्गा मान बैठती हैं। समाज और संस्कार का उल्लंघन करना, अपनी मर्जी से पूरी दुनिया को चलाने का प्रयास करना, इन सभी तरीको से अपनी शक्ति को नापने में लग जाती हैं। असलियत में उन्हें यह पता नहीं होता की इन हरकतों से उनकी शक्ति का क्षरण होता है।

शक्ति का सृजन हमारे अंदर ही होता है और उस शक्ति को अधिक क्रियाशील करना हमारे अपने ऊपर है। हमारी कुछ आदतें हमें अधिक शक्तिशाली बना सकती हैं। शक्तिको जागृत करने के लिए सर्वप्रथम जिस चीज की आवश्यकता है वो है हमारा अपना धैर्य। हम अधिकतर अपना धैर्य खो बैठते हैं और हालात के विपरीत कार्य कर बैठते हैं। हमारे कठोर शब्द और हमारे दुष्कार्य के माध्यम से हमारी शक्ति का उपचय होता है। दूसरी चीज जिससे हम अपनी शक्ति जागृत कर सकते है, वो है शांत स्वभाव। अपने शांत स्वभाव से हम दुसरो के मन पर अपना प्रभाव छोड़ सकते हैं।

शक्ति का संरक्षण भी जरुरी है। शक्ति बिजली जैसी है। जैसे बिजली के संरक्षण की आवश्यकता होती है वैसे ही अपने अंदर की शक्ति के संरक्षण की आवश्यकता होती है।  केवल जरुरत पडऩे पर ही शक्ति का प्रयोग करना चाहिए। एक नारी अपनी शक्ति का संरक्षण करके जरूरत पडऩे पर दुर्गा जैसी प्रचंड शक्ति की अधिकारी हो सकती है। आजकल समाज में बढ़ते व्यभिचार की घटनाओ से यह समझा  जा सकता है की एक नारी के लिए शक्ति कितनी आवश्यक है। अगर एक नारी सही दिशा पकड़ कर अपनी शक्ति का संरक्षण करती है तो जरुरत पडऩे पर वह दुर्गा का रूप धारण कर दुष्टों का विनाश कर सकती है।

उपाली अपराजिता रथ

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