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पश्चिमोत्तनासन से रहें चुस्त-दुरूस्त

पश्चिमोत्तनासन से रहें चुस्त-दुरूस्त

पश्चिम अर्थात पीछे का भाग यानि पीठ। इस क्रिया से पीठ में खिंचाव उत्पन्न होता है, इसलिए इसे पश्चिमोत्तनासन कहते हैं। इस आसन से शरीर की सभी मांसपेशियों में खिचाव पड़ता है। पश्चिमोत्तनासन को आवश्यक आसनों में से एक माना गया है। शीर्षासन के बाद इसी आसन का महत्वपूर्ण स्थान है। इस आसन में मेरूदंड लचीला बनता है, जिससे कुंडलिनी जागरण में लाभ होता है। यह आसन आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

कहा जाता है कि अगर पेट ठीक हो तो इंसान को कोई बीमारी छू नहीं सकती, लेकिन पाचनतंत्र में गड़बड़ी होते ही पूरा शारीरिक तंत्र अस्त-व्यस्त हो जाता है और शरीर को अनेक बीमारियां आकर घेर लेती हैं। पाचन क्रिया ठीक बनी रहे इसके लिए चिकित्सा की सभी पद्धतियों में सही आहार-विहार लेनी की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही पाचनतंत्र को मजबूत बनाने में कई योगासनों लाभदायक हैं। इनमें से ही एक है, पश्चिमोत्तनासन। यह आसन न केवल पेट-पीठ की नसों और हड्डियों पर अच्छा प्रभाव डालता है, बल्कि पाचन तंत्र को दुरुस्त रखकर हमें अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करता है।

पश्चिमोत्तनासन की विधि
जमीन पर चटाई या दरी बिछाकर इस आसन का अभ्यास करें। चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं और अपने दोनों पैरों को सामने  की ओर फैला कर, आपस में परस्पर मिलाकर रखें तथा अपने पूरे शरीर को बिल्कुल सीधा तान कर रखें।

दोनों हाथों को सिर की ओर ऊपर जमीन पर टिकाएं। अपने दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाते हुए एक झटके के साथ कमर से ऊपर के भाग को उठा लें। इसके बाद धीरे-धीरे अपने दोनों हाथों से पैरों के अंगूठों को पकड़े और अपनी नाक को घुटने से लगाने की कोशिश करेंं। ऐसा करते समय हाथों और पैरों को बिल्कुल सीधा रखें।

अगर आपको लेटकर ये आसन करने में परेशानी हो तो, इस आसन को बैठे-बैठे भी किया जा सकता है। इस प्रकार एक बार ये क्रिया पूरी होने के बाद 10 सैकेंड तक आराम करें और पुन: इस क्रिया को दोहराएं। ये आसन शुरू में 2-3 बार दोहराएं। इस आसन को करते समय सांस सामान्य रूप से लें और छोड़ें।

पश्चिमोत्तनासन के लाभ

  • इस आसन से शरीर की वायु ठीक से कार्य करती है।
  • शरीर में खून का प्रवाह सुचारू रूप से होता है, जिससे शरीर की कमजोरी दूर होकर शरीर सुदृढ़ और स्फूर्ति दायक बनता है।
  • इस आसन से बौनापन दूर होता है।
  • यह पेट की चर्बी को कम कर शरीर को सुडौल बनाता है।
  • सफेद बालों को कम कर उन्हें काला व घना बनाता है।
  • गुर्दे की पथरी, बहुमूत्र, बवासीर जैसे रोगों में भी लाभकारी है।
  • वीर्य दोष, मधुमेह, कब्ज की समस्या से भी निजात दिलाता है।
  • इस योगासन से स्त्रियों में योनिदोष, मासिक धर्म संबंधी विकार तथा प्रदर आदि रोग दूर होते हैं।
  • गर्भाशय से सम्बंधी शरीर के स्नायुजाल को ठीक करता है।

पश्चिमोत्तनासन करते समय बरते सावधानियां

  • इस आसन में न तो झटके से कमर को झुकाएं और न उठाएं।
  • ललाट को जबरदस्ती घुटने से टिकाने की कोशिश न करें।
  • प्रारम्भ में ये आसन आधा से एक मिनट ही करें। अभ्यास होने पर 15 मिनट तक बढ़ा सकते हैं।
  • कमर या रीढ़ में गंभीर समस्या होने पर योग शिक्षक की सलाह पर ही यह आसन करें।

 

प्रीति ठाकुर

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