ब्रेकिंग न्यूज़ 

यौगिक जीवन शैली अपनायें मोटापा-फोबिया से बचें

यौगिक जीवन शैली अपनायें  मोटापा-फोबिया से बचें

समुचित आहार हमारे स्वास्थ्य का आधार है, अन्नम वै प्राण: अर्थात अन्न में प्राण का निवास माना गया है। इसलिए अन्न हमारे स्वास्थ्य एवं पोषण के लिए आवश्यक है। जिसका मेटाबोल्जिम सिस्टम दुरूस्त है इसके लिए समुचित खानपान मोटापे का कारण बन ही नहीं सकता। पर जिसका यह सिस्टम कमजोर है अर्थात् पचाना भी उसके लिए कठिन होगा।

विश्लेषकों के अनुसार बड़ी संख्या में लड़के-लड़कियां मोटापा फोबिया के शिकार होकर खाने-पीने से ही परहेज करते देखे जाते है, जो गलत है। ऐसा नहीं है कि उन्हें भूख नहीं लगती। उन्हे भूख तो लगती है, पर इस डर से कि खाना खाने से मोटे हो जायेंगे, इसलिए वे खाना नहीं खाते।

लड़कियों पर इसका सीधा प्रभाव चेहरे की बनावट तक पर पड़ता है। इसी तरह की मानसिकता जानकर ही आज अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियां संबंधित उत्पादों के द्वारा मनमाफिक ऐसे खाद्य पदार्थ बाजार में उतार रहे हैं जिसका न कोई पोषकीय मानक है, न स्वास्थ्य परक गारंटी है। यह सही है कि वजन की अधिकता अनेक बीमारियों का न्यौता दे डालती है, पर किसी योगाचार्य डॉक्टर व वैद्य की सलाह के बिना दुबले-पतले होने की चाहत मन में पाल लेने से रोगी बनने में जरा सी भी देर नहीं लगती।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते है कि ऐसा करना बहुत ही गलत है, क्योंकि ऐसा करने से लाभ की जगह हानि ही होती है। वस्तुत: पतले-दुबले होने के लिए संतुलित व पोषणीय आहार एवं यौगिक जीवन शैली अपनानी पड़ती है। पतंजलि योगपीठ में पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी के मार्गदर्शन में विगत दिनों संपन्न मोटापा निवारण शिविर में आहार के साथ योगादि पर विशेष ध्यान दिया गया था और उसके सकारात्मक परिणाम भी आये। श्रद्वेय आचार्य बालकृष्ण महाराज स्वयं बताते हैं कि शरीर, मन एवं भावनाओं का स्वस्थ समुच्चय ही ऋषि प्रणीत स्वास्थ्य की परिभाषा है। जो लोग सोलह साल की आयु तक फॉस्ट फूड खा-खाकर अपने वजन में मनचाही बढ़ोतरी कर चुके होते है, वे ही इस अवस्था में छुटकारा पाने के बारे में सोचत हैं। इस उम्र तक आते-आते फिल्मों और टेलीविजन एवं विदेशी साहित्य के द्वारा वे इस बात को जान चुके होते हैं कि स्लिम रहना अच्छे स्वास्थ्य और सफलता की निशानी है।

06-11-2016

जबकि विदेशी आबोहवा, जीवन शैली पर सौन्दर्य की किताबों में लिखे टिप्स पर आंख मूंद कर अमल करना ठीक नहीं है, साथ ही डायटिंग के द्वारा पतले होना, इसके लिए प्लास्टिक सर्जरी का रास्ता अपनाना, बॉटोक्स की शरण में जान कहां की नीति है। इस फोबिया से ग्रसित व्यक्ति कभी-कभी अति कठिन आदतों से ग्रस्त हो जाते है, विशेषकर लड़कियां। पर यौगिक जीवन शैली में जीते हुए किसी विशेषज्ञ योगाचार्य की सलाह से यदि कोई आहार को न्यूनतम पर ले जाता है तो उस पर कोई नकारात्मक असर नहीं होता। वे चिड़चिड़ी सी हो जाया करती हैं, और हर वक्त बस यही सोचती रहती हैं कि कहीं उनके भार में वृद्धि न हो जाये।

चिकित्सकीय मत

वजन कम करने की चाह में अनुचित तरीके से वजन कम करने की कोशिश कतई न करें। क्योंकि ऐसा करने से भी इन सबका उनके भावी स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में यदि किसी को वजन कम करना है तो वह योग चिकित्सक के मार्गदर्शन में लौकी, एलोवेरा, आंवला आदि के जूस, फ्रूट जूस, पतंजलि आयुर्वेद के ऐसे ही अनेक उत्पादों का सहारा लेकर प्रयास करना चाहिए। पतंजलि दलिया व नमकीन दलिया का संतुलित प्रयोग भी सकारात्मक परिणाम लाने में कारगर हुआ है।

06-11-2016

अच्छी तरह जान लेना चाहिए कि उचित भोजन करने से ही सही प्रकार के काम कर सकते है। हमें खाने से ही प्रोटीन, विटामिन, खनिज, कैलोरी, कैल्शियम की प्राप्ति होती है।

इसी क्रम में योग-व्यायाम व कुछ प्राणायाम भी है जो समुचित पोषणीय क्षमता बनाये रखने में मदद करते हैं। पतंजलि योगपीठ का ‘भारत मोटापा मुक्त’ अभियान इस दिशा में कुछ विशेष प्रयोग करने जा रहा है, इसका लाभ ले सकते हैं। सबसे पहले अपनी मन:स्थिति को सामान्य करें और मोटापा की चिंता छोड़कर नित्य सामान्य तौर पर सूक्ष्म व्यायाम व कपालभाति, अनुलोम-विलोम, प्राणायाम औसत स्तर पर करें। भरपूर आहार लें, इससे मन में प्रसन्नता पैदा होगी। इसके अतिरिक्त निम्नलिखित तरह से भी अपना वजन कम कर सकते हैं।

  • वजन कम करने के लिए उचित मात्रा में जूस और पानी पीना चाहिए। आलस्य का परित्याग करके, प्रकृति के ज्यादा नजदीक रहे, नैसर्गिक फूड लेकर भी अपने वजन में कमी ला सकते हैं। ताजी हवा व संतुलित आहार का सेवन अवश्य करना चाहिए। फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे- चावल, चपाती, परांठे, आलू, मीठा, तले-भूने खाद्य पदार्थों व फास्ट फूड का परित्याग करें। डॉक्टर की सलाह के बिना कभी भी वजन कम करने की औषधि का सेवन न करें।

अंतत: मनोवैज्ञानिक तरीकों से काम लेते हुए, बच्चों को उसका मनपसंद खाना खाने के लिए प्रेरित करें। जब वह परिजनों की सलाह मानकर खाना खाने लगे तो धीरे-धीरे उसके खाने में वृद्धि करते चले। दिमाग में यह बात बिठानी चाहिए कि सुंदर दिखने की चाह योगाभ्यास व आयुर्वेद सम्मत आहार द्वारा भी किया जा सकता है। इस प्रकार भरपूर आहार के सेवन से चेहरे की चमक में तो वृद्धि होगी ही, साथ योगाभ्यास अपनाने से स्वस्थ, सुंदर, प्रसन्नता से भरी छरहरी काया भी बनी रह सकती है और हम मोटापा फोबिया से भी निजात पायेंगे।06-11-2016

मोटपा हेतु प्रमुख आसन

संपूर्ण भारत को मोटापा मुक्त करने हेतु विगत दिनों पतंजलि योगपीठ मोटापा मुक्ति पर चले अनुसंधानात्मक शिविर में निम्नलिखित आसनों द्वारा विशिष्ट उपलब्धियां प्राप्त हुईं जो निम्नलिखित हैं-

  • खड़े होकर करने वाले आसानों में द्रोणासन, कोणासन, त्रिकोणासन, चलित पादहस्तासन तथा पी. टी. शामिल हैं।
  • बैठकर करने वाले आसनों में चक्की चलाना तथा कोणासन प्रमुख हैं।
  • लेटकर करने वाले आसनों में:-एक-पाद उत्तानासन, अर्धहलासन, पादवृत्तासन, द्विचक्रिकासन, शलभासन, मर्कटासन तथा भुजंगासन आदि शामिल हैं।

                साभार: योग संदेश

डॉ. अरुण कुमार पाण्डेय, चिकित्सक अधीक्षक, पतंजलि योगपीठ चिकित्सालय

велосипед украина ценадетектор лжи по другому

Leave a Reply

Your email address will not be published.