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समृद्धि के लिए एक दीया

समृद्धि के लिए एक दीया

भारत के सबसे महत्त्वपूर्ण त्योहारों में से एक ‘दीपावली’ प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। विश्व के अलग-अलग देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीय भी इस पर्व को प्रकाश पर्व के रूप में धूमधाम से मनाते हैं। ईश्वर की कृपा से आप सबके लिए दीपावली तथा भाई-दूज का पर्व मंगलमय हो! दीपावली मनाते समय हमारा हृदय निर्मल, मन प्रसन्न, चित्त शांत, शरीर स्वस्थ एवं अहंकार ‘शून्य’ हो, ऐसी ही अनुनय विनय है। भाई-बहिन के पवित्र प्रेम तथा आत्मीयता में वृद्धि हो। त्रेता युग में अयोध्या के राजा दशरथ के ज्येष्ठ पुत्र ‘मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम’ जब पिता की वचन-पूर्ति के लिए चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके तथा अहंकारी रावण का वध करके अपनी पत्नी सीता जी एवं अनुज लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे तो नगरवासियों ने उनके स्वागत के लिए, अपनी खुशी प्रदर्शित करने के लिए तथा अमावस्या की रात्रि को भी उजाले से भरने के लिए दीपक जलाये थे। दीपावली को आलोक पर्व के रूप में मनाया जाता है। यह प्रकाश पर्व मर्यादापुरूषोत्तम श्रीराम की शिक्षाओं को जानने तथा उन शिक्षाओं पर चलकर आत्मा का जीवन जीने की प्रेरणा देता है। दीपावली मात्र एक पर्व अथवा त्योहार नहीं है, अपितु यह हमें अपने अंदर आत्मा का प्रकाश धारण करने की प्रेरणा देता है। जैन धर्म के अनुयायिओं का मत है कि दीपावली के ही दिन महावीर स्वामी जी को निर्वाण मिला था। सिक्ख धर्म को मनाने वाले कहते हैं कि इसी दिन उनके छठे गुरू श्री हर गोविन्द सिंह जी को जेल से रिहा किया गया था।

वनवास के मध्य ही लंका का राजा रावण श्री राम की पत्नी सीता जी का हरण करके उन्हें लंका ले गया था और तब हनुमान, अंगद, सुग्रीव, जामवंत एवं विशाल वानर सेना के सहयोग से समुद्र पर सेतु-निर्माण कर तथा सोने की लंका पर आक्रमण करके उन्होंने रावण जैसे आततायी का वध कर धर्म तथा मर्यादित समाज की स्थापना धरती पर की थी। इसके अलावा सम्पूर्ण मानव जाति को यह संदेश दिया कि ‘आतंक चाहे कितना भी सिर उठाने की कोशिश करे तो भी उसका अंत निश्चित है’ और ‘बुराई पर अच्छाई सदा भारी हुआ करती है।’ इस स्मृति में हर वर्ष दशहरा मनाया जाता है जो ‘विजय दशमी’ के नाम से भी विख्यात है और दशहरे के लगभग बीस दिन बाद ही दीपावली आती है। श्रीराम ने राम राज्य की स्थापना जादू की छड़ी घुमाकर नहीं कर दी। राम ने अपने पूरे जीवन भर अनेक कष्ट उठाकर मर्यादाओं का पालन करते हुए राम राज्य की स्थापना की। राम राज्य के मायने अयोध्या के राजा राम का राज्य नहीं वरन् सारे संसार में आध्यात्मिक साम्राज्य स्थापित करना है। ऐसे राज्य में नगर, घर, खेत, खलियान गांव, बाग, नदी, गुफा, घाटी, गली सभी जगहें ईश्वरीय आलोक से भर जाते हैं। एक ऐसा राम राज्य जहां किसी को भी शारीरिक, दैविक तथा भौतिक किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं होगा। हमारा मानना है कि परिवार की एकता समाज की आधारशिला है। अत: हमें भी श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने परिवार के सदस्यों के बीच एकता स्थापित करने का हर कीमत पर प्रयत्न करना चाहिए।

यह त्योहार सारे भारत में अत्यंत हर्षोल्लास के साथ कार्तिक मास की अमावस्या पर तीन दिनों तक मनाया जाता है। अमावस्या से दो दिन पहले का दिन ‘धनतेरस’ के रूप में मनाया जाता है। जिसका सन्देश है आरोग्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। दरअसल, इस दिन भगवान् धन्वन्तरी जी का प्रागट्य हुआ था जो सबको आरोग्य देते हैं लेकिन कालांतर में यह दिन कोई न कोई नया बर्तन, सोना ,चांदी आदि खरीदने के रूप में विख्यात हो गया। इस दिन तुलसी के पेड़ के पास या घर के द्वार पर दीपक जलाया जाता है। तत्पश्चात् अगला दिन चतुर्दशी- ‘नरक-चतुर्दशी’ या छोटी दीपावली के नाम से प्रसिद्ध है। कहते है कि इस दिन भगवान् श्रीकृष्ण ने महाआतंकी नरकासुर नाम के दैत्य का वध किया था। दीपावली के लगभग एक माह पूर्व से घरों में स्वच्छता, पुताई, रंग-रोगन एवं साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

दीपावली का पर्व सुख-समृद्धि, सुयश-सफलता, उन्नति, अंतस् की शुद्धता, पवित्रता और घर-आंगन की स्वच्छता की प्रेरणाओं से ओतप्रेात पर्व है ताकि अज्ञानता के अन्धकार की सारी बेडिय़ां कट जाएं और संसार का प्रत्येक व्यक्ति ईश्वरीय प्रकाश से प्रकाशित हृदय धारण करके विश्व में सामाजिक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम बने। जीवन के परम लक्ष्य ईश्वर की नजदीकी को प्राप्त करें। परमात्मा हमें कार्य-व्यवसाय में सदैव उन्नति-प्रगति की ओर अग्रसर रहने की प्रेरणा दें। बुराइयों को त्यागकर अच्छाइयों को ग्रहण करके आत्मा का जीवन जीने की शक्ति दें। ज्योति पर्व दीपावली हम सबके लिए शुभ रहे, मंगलकारी रहे और कल्याणकारी रहे। परमात्मा का स्नेह-आशीष सदैव हम सबके साथ रहे। प्रकाश पर्व दीपावली तथा भाई दूज की हार्दिक शुभकामनाओं सहित!

 जगदीश गांधी

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