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आदिवासियों की कीमत पर विकास स्वीकार नहीं—नरेन्द्र मोदी

आदिवासियों की कीमत पर विकास स्वीकार नहीं—नरेन्द्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अक्टूबर 2016 को राजधानी दिल्ली में प्रथम आदिवासी कार्निवाल का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसा पहली बार है कि दीपावली जैसे उत्सव के अवसर पर देश भर से जनजातीय समूह के लोग दिल्ली में हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि जनजातीय लोगों का जीवन संघर्ष से भरा पड़ा है लेकिन इसके बाद भी जनजातीय लोगों ने सामुदायिक जीवन को आत्मसात किया है और समस्याओं के बावजूद भी प्रसन्नचित रहते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि आदिवासियों को उनका जमीन का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ये सुनिश्चित करेगी कि आदिवासियों से जमीन का अधिकार कोई न छीन सके। उन्होंने आगे कहा कि जो भी आदिवासियों के अधिकार छीनने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना था कि अधिकतर प्राकृतिक संसाधन वन क्षेत्रों में मिलते हैं, जहां पर आदिवासी रहते हैं। ऐसे में देश को विकास की ओर अग्रसर करने के लिए खनिज संसाधनों का दोहन इस तरह से करना चाहिए कि आदिवासियों के हित प्रभावित न हों। उन्होंने कहा कि लौह अयस्क और कोयला निकालने की जरूरत तो है, लेकिन यह आदिवासी लोगों की कीमत पर नहीं होना चाहिए। इस कार्निवल में पीएम मोदी ने आदिवासियों का पारंपरिक हथियार तीर-धनुष चलाया और ड्रम भी बजाया। पीएम ने कहा कि, अभावों और काफी परेशानियों के बावजूद आदिवासी लोगों ने जीवन जीने का बेहतर तरीका अपनाया है। हर पल खुशियों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना, संकटों में जीना, शिकायत ना करना और समूह में रहना आदिवासी समुदाय से सीखना चाहिए। ए.सी. कमरों में बैठकर आदिवासियों का कल्याण संभव नहीं है।

कार्यक्रम में केन्द्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि उनका मंत्रालय देश में जनजातीय लोगों के संपूर्ण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय एकलव्य विद्यालयों और जनजातीय युवाओं के लिए छात्रवृत्ति द्वारा उनकी शिक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। ओराम ने कहा कि वन बंधु कल्याण योजना मंत्रालय की एक ओर महत्वपूर्ण योजना है जो जनजातियों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है। उन्होंने आगे कहा कि मंत्रालय जनजातीय द्वारा उत्पादित वन उत्पादों के लिए उचित बाजार प्रदान के लिए भी समान रूप से कार्यरत है।

उद्घाटन समारोह में देश भर के विभिन्न राज्यों और संघ शासित प्रदेशों से आए लगभग 1200 जनजातीय कलाकारों ने परंपरागत वेशभूषा में महोत्सव परेड में भाग लिया। इस कार्निवाल का मुख्य उद्देश्य आदिवासियों के बीच समावेशी भावना को बढ़ावा देना है, ‘इसका अंतरनिहित विचार आदिवासी जनजीवन की संस्कृति, परंपरा, रीति-रिवाज और उनके कौशल से संबंधित विभिन्न पहलुओं को बढ़ावा देना है। इसे आम लोगों के बीच ले जाना है ताकि अनुसूचित जनजाति का संपूर्ण और समग्र विकास हो सके।

इस चार दिनों के कार्यक्रम में आदिवासियों के सामाजिक- सांस्कृतिक दस्तावेजों, कला/शिल्प कृति, सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा खेल पेंटिंग और पारंपरिक चिकित्सा कार्यों से संबंधित कौशल आदि का प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्र तक विस्तार) अधिनियम,1996 (पीईएसए), इसका क्रियान्वयन अनुसूचित जन जाति समुदाय का इसका लाभ एवं कमियों, वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) 2006 और इसके निहितार्थ और राजनीति में आरक्षण और आवश्यकता जैसे मुद्दों पर कार्यशाला भी इस चार दिवसीय कार्निवाल का हिस्सा रही।

इस अवसर पर देश के कोने-कोने से आये हुए कलाकारों ने संगीत एवं नृत्य, प्रदर्शनी, शिल्प का प्रदर्शन, फैशन शो, पैनल डिस्कशन और पुस्तक मेले के माध्यम से अपनी कला का प्रर्दशन किया। इसके साथ ही इस कार्निवाल के दौरान भारतीय आदिवासी जनजीवन एवं संस्कृति, संगीत, पारम्परिक व्यंजन से संबंधित ज्ञान तथा अनुभव से भरपूर संगीत और नृत्य के कार्य प्रस्तुत किए गए।

चार दिवसीय राष्ट्रीय जनजातीय महोत्सव का आयोजन केन्द्रीय जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा जनजातीय लोगों के बीच एकीकरण करने के भाव को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से किया गया है। महोत्सव का उद्देश्य जनजातीय संस्कृति, परंपरा और कौशल को संरक्षण और प्रोत्साहन प्रदान करना और इसे लोगों के सामने प्रस्तुत कर जनजातीय समुदाय के लोगों के समेकित विकास की संभावनाओं का प्रयोग करना है। चार दिवसीय महोत्सव के दौरान परंपरागत सामाजिक-आर्थिक पहलूओं पर दस्तावेजों का प्रदर्शन, कला और शिल्पकृति पर प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेल, चित्रकला, परंपरागत चिकित्सा आदि गतिविधियों का आयोजन हुआ।

उदय इंडिया ब्यूरो

 

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