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राजस्थान: कांग्रेसजनों की कोहनी में सत्ता का गुड़

राजस्थान: कांग्रेसजनों की कोहनी में सत्ता का गुड़

एक मर्तबा राजनीति से सन्यास लेने पर आमादा कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं राजस्थान के प्रभारी गुरूदास कामत पुन: फार्म में आ गये है। उन्होंने 2018 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव में पुन: सत्ता में लौटने का सब्जबाग दिखाते हुये जयपुर में टिकट बांटने का फतवा देकर कांग्रेसजनों की कोहनी में गुड़ लगाने की कवायद की है। लेकिन गुटबाजी के चक्रव्यूह में फंसी प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को डिनर डिप्लोमेसी के बहाने एक जाजम पर बिठाकर एकजुटता का संदेश देने की मंशा पहले ही चरण में पटरी से उतरती दिखाई देने लगी है। उधर प्रदेश की फिजा बदलने के सरकारी दावों के बीच बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार प्रदेश भाजपा कार्यसमिति के गठन तथा राजनीतिक नियुक्तियों की राह ताकते सत्तारूढ दल के कार्यकर्ताओं के सब्र का बांध रिसने लगा है तो सरकार के खिलाफ मुद्दों की फेहरिस्त में आईपीएल के कर्ता धर्ता रहे ललित मोदी से जुड़ा विवाद फिर गरमाने लगा है। इस बीच प्रशासन तंत्र को गतिशील बनाने के उपक्रम और कानून व्यवस्था को लेकर उठते सवाल आम जनता के दिलो दिमाग को झकझोरे हुए है।

सत्तारूढ भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की उदयपुर तथा प्रमुख विपक्ष कांग्रेस की बीकानेर में सम्पन्न प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक में फोकस आगामी विधानसभा चुनाव पर केन्द्रित रहा। प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महासचिव गुरूदास कामत और प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने कांग्रेसजनों को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिये आव्हान किया है। कामत ने साफ किया कि टिकट वितरण के दौरान वे जयपुर में रहेंगे और लोगो से मिलकर टिकट बाटेंगे। यदि कोई दिल्ली गया तो उसका टिकट कटेगा। टिकट के इच्छुक उम्मीदवारों को पन्द्रह सक्रिय कार्यकर्ताओं की बूथवार कमेटिया बनाकर अक्टूबर माह के अंत तक प्रदेश कार्यालय में जमा करानी होगी। भाजपा ‘वन बूथ टेन यूथ’ का नुस्खा आजमा चुकी है।

मीडिया से बातचीत में कामत ने तो यहां तक आशंका जता दी कि सीमा नियंत्रण रेखा पार किए गए सर्जिकल स्ट्राइक को भुनाने के लिये गुजरात और राजस्थान में निर्धारित समय से पहले चुनाव कराये जा सकते है। दोनो राज्यों में अपनी जमीन खिसकने से भाजपा भयभीत है। सचिन पायलट का कहना था कि भाजपा कार्यकर्ताओं की नेता नहीं सुनते। नेताओं की मंत्री, मंत्री की मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री की प्रधानमंत्री नहीं सुनते। सरकार महल के मुद्दे सुलझाने में लगी हुई है उसे किसानो और गरीबो की सुनवाई के लिए फुर्सत नहीं है। उत्साह से भरे पायलट ने दावा किया कि कांग्रेस में गुटबाजी नहीं है। नेता चयन का मुद्दा केन्द्र का हैं। ये मीडिया की उपज है। हमारे तो खाने पर भी खबरे बनती है। डिनर डिप्लोमोनी नहीं है वो अनौपचारिक मिलन है।

करीब तीन घंटे चली इस बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सी.पी. जोशी पूर्व केन्द्रीय मंत्री भंवर जितेन्द्र सिंह, डॉ. गिरिजा व्यास नहीं आये जबकि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पारिवारिक मित्र के यहां शादी में जाने के कारण बैठक में शामिल नहीं होने की जानकारी टिवटर पर दी। बैठक में पारित प्रस्तावों में बिजली की दरें बढ़ाने, पाठ्यक्रम के राजनीतिकरण, वर्षा में खराब फसलों का मुआवजा नहीं देने आदि मुद्दों पर सरकार की निंदा की गई।

06-11-2016

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार टिकट के लिये बूथवार सक्रिय कार्यकर्ताओं की सूची मंगवाई गई है। इन सूचियों की पुष्टि के साथ टिकट वितरण के समय इन पर विचार किया जाएगा। वितरण प्रणाली से तो कांग्रेस संगठन के पास लाखों का डाटा बेस एकत्रित हो जाएगा। प्रदेश के 200 विधानसभा क्षेत्रों में अभी 45 हजार से अधिक मतदान बूथ है प्रत्येक दावेदार को प्रति बूथ पन्द्रह सक्रिय कार्यकर्ताओं के नाम, पते एवं मोबाईल नम्बर देने होंगे। यदि एक सीट से औसतन पाच उम्मीदवार भी दावेदारी जताये तो यह संख्या तैतीस लाख पार कर जाएगी। क्या ऐसा संभव हो पाएगा फिर ऐन वक्त पर अन्य दलों से मोह भंग नेताओं को पार्टी टिकट देने की राजनीतिक मजबूरी का क्या हश्र होगा। बहरहाल कांग्रेस नेतृत्व यह हवा बनाने में जुटी है कि उसके पास दावेदारी पेश करने वालों का इजाफा हो रहा है।

प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी बैठक से दस दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर मे अपने निवास पर दावत दी। गहलोत अपनी बेहतरीन मेजबानी के लिए जाने जाते है। वह वरिष्ठ नेता पूर्व राज्यपाल और मुख्यमंत्री रहे जगन्नाथ पहाडिय़ा तथा गुजरात की पूर्व राज्यपाल डॉ. कमला को व्यक्तिगत न्यौता देने उनके घर गये। इस भोज में प्रदेश कांग्रेस के वर्तमान एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदेश से जुड़े ए.आई.सी.सी. के पदाधिकारी, केन्द्र में मंत्री रहे नेताओं के साथ प्रदेश प्रभारी सह-प्रभारी आमंत्रित थे। भोज से कुछ दिन पहले उन्होने मीडिया के समक्ष स्वीकार किया कि थोड़े बहुत मतभेद तो हर पार्टी में होते है। मतभेद दूर करने को पॉवर डिनर के सवाल पर गहलोत का कहना था कि कामत ने गुजरात में ऐसा किया और राजस्थान में उन्होने इसकी शुरूआत की है। दो राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सी.पी.जोशी, मोहन प्रकाश, पूर्व मंत्री चन्द्रेश कुमारी तथा पूर्व प्रतिपक्ष नेता हेमाराम चौधरी इस भोज में शामिल नहीं हुए। अलबता जोशी ने टिवट्र के जरिये दावत में शामिल नही होने की जानकारी दी। पहली दावत में नेताओं की आपसी खटास बरकरार देखी जा सकती है। देखना होगा कि प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट के यहां अगली दावत का क्या नजारा रहता है और यह सिलसिला चुनाव तक कायम रहा पाता है।

प्रदेश कांग्रेस में फिलहाल पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट, नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी और राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सी.पी. जोशी शक्ति केन्द्र के रूप में जाने जाते है। लेकिन मोटे तौर पर कांग्रेसजन गहलोत या सचिन पायलट के गुट पर चर्चा में सिमट जाते है। बीकानेर की बैठक में कामत ने पायलट एवं डूडी के कामों की तारीफ करते हुए चुनाव की तैयारियों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। युवाओं को आगे बढ़ाने की नसीहत देते हुए मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने पिछले दिनों बांसवाड़ा में गहलोत को प्रदेश में युवाओं को मौका देने तथा राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय होने की नसीहत दी थी। पलटवार में गहलोत ने ईट का जवाब पत्थर के रूप में देते हुए तंज कसा कि यदि दिग्विजय सिंह अपने प्रांत मध्यप्रदेश में सक्रियता दिखाते तो पार्टी वहां रसातल में नहीं जाती। मैं राजस्थान में सक्रिय हूं तो यहां कांग्रेस भी मजबूत है। राजस्थान में जिस प्रकार का माहौल बना है उससे आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनना तय है। अगला मुख्यमंत्री बनने की बात पर गहलोत ने फिर दोहराया कि इसका निर्णय पार्टी हाईकमान करता है। पहले दो बार पार्टी ने मुझे जिम्मेदारी दी तो मैंने उसे निभाया। अब हाईकमान जिसे भी जिम्मेदारी देगा वह उसे संभालेगा। वैसे चुनाव मिलकर लड़े जायेंगे। गहलोत का कहना था कि मैं राष्ट्रीय राजनीति में भी सक्रिय रहा हूं। अब पार्टी ने यहां काम करने की जिम्मेदारी दी है तो मैं उसे निभा रहा हूं। यह साफ नहीं है कि वह जिम्मेदारी क्या है?

राजनीतिक प्रेक्षक भी मानते है कि गहलोत प्रदेश में कांग्रेस की पहचान के रूप में जाने जाते है। दिल्ली में पार्टी हाईकमान में दस जनपथ तक उनकी सीधी पहुंच है। लेकिन पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी की किसान यात्रा के समापन पर दिल्ली में राजघाट पर प्रदेश कांग्रेस की ओर से आयोजित स्वागत समारोह में गहलोत की गैर मौजूदगी कांग्रेस के राजनीतिक हलको में चर्चा का विषय बनी रही। तब गहलोत दो दिन से दिल्ली में थे, वह राजस्थान से आये नेताओं व कार्यकर्ताओ से भी मिले। अलबता गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत राजघाट पर आयोजित समारोह में मौजूद थे। प्रदेश कांग्रेस के महासचिव वैभव गहलोत पिछले दिनों सवाई माधोपुर में बकरीद पर ईदगाह पहुंचे। ईद की नमाज समाप्त होने पर माइक थामे बशीर अंसारी ने जब यह कहा कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री नमोनारायण मीणा तथा वैभव गहलोत भी आये हुए है तथा नमाजी उनसे मिलकर जाये तो वहां बवाल मच गया। तभी पॉपुलर फ्रंट के असलम ने माइक अपने हाथ में लेकर दोनों नेताओं की मौजूदगी पर रोष जताया। असलम का आरोप था कि मीणा ने वन मंत्री रहते हुए तथा वैभव के पिता गहलोत के मुख्यमंत्री काल में समाज की भावना और समाज के लोगो की उपेक्षा की गई थी। ऐसे लोगों से मिलने की घोषणा जन भावना के खिलाफ है। नमो नारायण मीणा ने मामले की नाजुकता को देख कहा कि यह झगड़े एंव सियासत का समय नहीं है। तब जाकर मामला शांत हुआ। मीणा टोंक-सवाईमाधोपुर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके है। पिछले चुनाव मे वैभव गहलोत का नाम बतौर कांग्रेस प्रत्याशी के चर्चा में रहा था।

एक तरफ गहलोत ने कामत की सलाह पर डिनर डिप्लोमेसी के लिए पहल की। वहीं दोनो नेताओं में सर्जिकल स्ट्राइक के मुद्दे पर विरोधाभास सामने आया। गहलोत ने लगातार दस ट्विट जारी कर यह जताया कि यदि सुरक्षा कारणों से सरकार सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो सार्वजनिक नहीं कर सकती तो कम से कम विपक्षी दलों को इसे दिखाना चाहिये जिससे प्रामाणिकता को लेकर उठने वाली अटकलों पर विराम लग सके। उन्होंने यह भी माना कि इन अटकलों को राष्ट्रीय एवं अन्र्तराष्ट्रीय मीडिया का एक वर्ग हवा दे रहा है। तब गहलोत इस विवाद में क्यों पड़े यह समझ से परे है।

जयपुर से गुलाब बत्रा

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