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अमर की खामोशी

अमर की खामोशी

समाजवादी पार्टी के नये महासचिव अमर सिंह की खामोशी चर्चा में है। वह भी तब जब पार्टी जमीन से जहान तक पारिवारिक उथल-पुथल से गुजर रही है। अमर सिंह के बारे में आम है कि जब हवन चल रहा होता है तो उसकी आंच में हाथ नहीं जलाते। दूर बैठकर साधना करते हैं। उनके इस चिंतन को बड़ी रणनीतिक तैयारी से जोड़ा जाता है। वैसे भी पार्टी एक तरफ जहां चुनाव में जाने और अगले नेतृत्व की जोर अजमाइश में मसगूल हैं, वहीं संसद का शीतकालीन सत्र आने वाला है। माना जा रहा है कि संसद के शीतकालीन सत्र शुरु होने तक सपा के राष्ट्रीय महासचिव खामोश रहेंगे। फिर बोलेंगे, तो खूब बोलेंगे। तब तक लखनऊ की गोमती में बहुत पानी बह जाएगा।



सिद्धू पाजी


06-11-2016

पजांब की राजनीति में नई ‘कॉमेडी’ बन गए हैं। पहले लोग सिद्धू (नवजोत) के टोंट, बोल, मुहावरों पर ठहाके लगाते थे, अब नवजोत पर चल रहे तंज उन्हें हंसा रहे है। हंसे भी क्यों न। पहले नवजोत पाजी ने नाराजगी दिखाई, फिर भाजपा छोड़ी। ‘आप’ से पींग बढ़ाई, केजरी से मिल आए। फिर नया मोर्चा बनाया। कांगे्रस की घंटी बजाई और अब फिर ठंडे पड़ गए हैं। उन्हें समझ में नही आ रहा है कि जाने कब कौआ बाज को पंजे में दबोचकर उड़ जाएगा। खैर, अभी सिद्धू पाजी की कोशिश चालू है।



पास हो जाओ बाबा


06-11-2016

कांग्रेस के नेताओं में फिर खलबली है। यह खलबली राहुल बाबा के ताजा बयान से हैं। पार्टी का उ.प्र. में जोरदार प्रचार अभियान चल रहा था। या तो खाट लुट रही थी, या चर्चा में थी। सपा, भाजपा भी इससे हैरान थी कि अचानक राहुल बाबा ने मुंह खोल दिया। सारे किया-धरा इधर-उधर बह गया। बचे तो केवल राहुल बाबा और कांगे्रस की फजीहत। अब नेताओं की चिंता यह है कि बाबा एक ही कक्षा में अटके हैं। न आगे बढ़ रहे हैं और न पीछे लौट रहे हैं। हाल ही में पार्टी ने उ.प्र. के पिछड़े दलित नेताओ को बुलाकर जमीनी हकीकत जाननी चाही तो उन्होंने भी राहुल बाबा पर सवाल उठा दिया। वरिष्ठ कांगे्रसियों का एक कुनबा पहले से ही चिढ़ा है। वहीं राहुल बाबा हैं कि अपनी धुन में मस्त हैं।


काटजू जी को क्या हो गया?


06-11-2016

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू फिर चर्चा में हैं। तमाम अजीबो-गरीब और दिमाग का दही बनाने वाले बयान के महारथी काटजू इस बार फेसबुक पर अपनी पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। चर्चित सौम्या रेप केस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही पूर्व जज को पेश होने का आदेश देकर दलील पेश करने को कहा है। जस्टिस काटजू ने अपने फेसबुक पोस्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले में गंभीर खामियां बताई हैं। लिहाजा अदालत अपने पूर्व काबिल जज से अब खामियों को जानना और समझना चाहती है। शायद यह पहली बार हो रहा है, जब शीर्ष अदालत ने ऐसा कदम उठाया है। वाह काटजू जी वाह।


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