ब्रेकिंग न्यूज़ 

बातों के जादूगर मोदी

बातों के जादूगर मोदी

ब्रांड मोदी का तिलिस्म में लोकसभा चुनाव 2014 से लेकर दिल्ली और बिहार के विधानसभा चुनावों में हुए बदलाव क की व्याख्या करती है तथा यह भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक संघ प्रचारक से गुजरात का मुख्यमंत्री और अन्तत: देश का प्रधानमंत्री तक का सफ र तय करने तथा इस रास्ते को तय करने में उनके द्वारा अपनाये गये पथ का वर्णन करती हैं।

इस पुस्तक के माध्यम से लेखक ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 2014 में मिले जनादेश में विभिन्न पहलुओं को कारण बताया है, जिसमें गुजरात दंगो के बाद नरेन्द्र मोदी की कट्टर हिन्दुत्व की छवि का बनना, उनकी पिछड़ी जाति का होना, 2011 में अन्ना हजारे द्वारा भ्रष्टाचार के विरूद्ध किया गया आन्दोलन तथा कांग्रेस नित यूपीए पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का मुख्य योगदान था।

Layout 11994 के बाद 2014  में पहली बार कोई राजनैतिक दल 272 सीटों के साथ पूण बहुमत से सरकार बनाने में सफल रहा  और लेखक ने इसका पूरा श्रेय नरेन्द्र मोदी को दिया है। लेखक का मानना हैं कि नरेन्द्र मोदी द्वारा गुजरात को एक माडल के रूप में ब्रांड बनाकर लोगो के सामने रखना तथा पूरे देश मे घुम-घुम कर गुजरात में मुख्यमंत्री के रूप में अपने द्वारा किये गये कामों को  भुनाना उनकी जित में अहम था। इसमे गुजरात के बड़े-बड़े व्यवसायिक घराने जिनके साथ नरेन्द्र मोदी के अच्छे संबन्ध थे उन लोगो ने इनके महंगे चुनाव प्रचार कराने में भरपूर सहयोग किया। इससे  नरेन्द्र मोदी लोगों के समक्ष एक ब्रंड के रूप में उञ्जारे और युवाओं में अपना स्थान बनाने में सफल रहे। 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी ने वर्षो पहले सोनिया गांधी द्वारा दिये गये ‘मौत का सौदागर’ तथा मणीशंकर अय्यर द्वारा उनको ‘एक चाय बेचने वाला’ कहने जैसे बयानों को खूब भुनाया और यह कारगर भी साबित हुई।


एक गाय की आत्मकथा

लेखक  : गिरीश पंकज

प्रकाशक : बाबा हिरदास पुस्तक सेवा समिति

मूल्य   : २०० रु.

पृष्ठ    : २३४


लेखक ने अपने पुस्तक में यह निर्दीष्ट किया हैं कि भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के पश्चात केवल कांग्रेस शासित राज्यो में ही अपनी सरकार बना पायी है। जहां-जहां क्षेत्रिय दल है, वहां भाजपा कमजोर हुई है और बिहार तथा दिल्ली में नितीश कुमार और अरविन्द केजरीवाल को मिली जीत भाजपा तथा नरेन्द्र मोदी के प्रभाव पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करती है और यह प्रदशिर्त करती हैं कि आने वाले गत वर्षों में नितीश कुमार और अरविन्द केजरीवाल एक ताकत के रूप में उभरेंगे क्योंकि इन दोनो नेताओं ने नरेन्द्र मोदी की तरह लोगों को आकॢषत करने का गुर सीख लिया है ।

लेखक ने अपने इस लेखन में स्पष्ट किया हैं कि लोकस तथा बिहार चुनाव दोनो में ही दलितों, पिछड़ो और आदिवासियों ने सबसे ज्यादा भाजपा के पक्ष में वोट किया था क्योंकि अभी लोगों के बीच नरेन्द्र मोदी एक करिश्माई चेहरे के रूप मे थे। लेकिन फिर भी भाजपा की बिहार में हार नितीश कुमार के सुशासन और लालू लादव के समाजिक न्याय के समीकरण के कारण हुई।

धर्मेन्द्र कुमार सिंह की लिखी गई यह पुस्तक पाठकों का ध्यान आकॢषत करेगी, क्योंकि यह पुस्तक नरेन्द्र मोदी के राजनैतिक जीवन के आरम्भ और अन्त की पृष्टभूमी तथा उनकी राजनीति करने की शैली को विस्तृत ढंग से दर्शाती है।

रवि मिश्रा

палатка купитилюбительский теннис

Leave a Reply

Your email address will not be published.