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महासमर की शुरूआत

महासमर की शुरूआत

उत्तर प्रदेश का राजनीतिक माहौल विधान सभा चुनाव 2017 को देखते हुए काफी गर्म हो चुका है। एक तरफ  सत्ताधारी समाजवादी पार्टी तमाम विसंगतियों के बावजूद दोबारा सत्ता में आने का दावा कर रही हैं तो दूसरी ओर केन्द्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी बिहार की गलतियों से सबक लेकर यू.पी. में कमल खिलाने को बेताब है। वहीं बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो का दावा है कि सपा का खेल खत्म, भाजपा के झूठ का पर्दाफाश हो चुका है। जनता ने तय कर लिया है-हाथी ही विकल्प है। उधर देश की सबसे पुरानी पार्टी कंाग्रेस भी अपनी दुविधाओं से उबरने के लिए हाथ-पांव मार रही है तो किसान नेता चौधरी चरण सिंह के वारिस चौधरी अजित सिंह भी अपने लिए राजनीतिक ठौर की तलाश में हैं। मेहमान कलाकार के तौर पर जनता दल यू. और जनता दल (एस) की एंट्री कम महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि ‘इससे जनता परिवार’ की एकता का माहौल खड़ा करने में सहूलियत हो रही है। कुल मिलाकर युद्ध का औपचारिक शंखनाद भले न हुआ हो, रथ दौडऩे लगे हैं, साइकिलें हवा में फर्राटे भरने लगी हैं। हाथी की चिग्घाड़ से लोग-बाग सहमने लगे हैं। गुलाब खोंसकर चलने वाले भी कमलहस्त दिख रहे हैं। गरज कि मेरठ से मिर्जापुर-सोनभद्र और रूहेलखंड से बुंदेलखंड तक सियासी तापमान काफी बढ़ गया है। फिलहान सियासी तापमान बढ़ाने और हवा का रूख अपने पक्ष में करने में कौन-कौन लोग कैसी करवटें ले रहे है, आइये इसका जायजा लें।

सपा की सिल्वर जुबली व रथयात्रा

सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी की चुनावी तैयारी सबसे पहले शुरू हुई और उम्मीदवारों की दो सूचियां भी अक्टूबर से पहले ही जारी कर दी गयीं। लेकिन इसके बावजूद पार्टी के भीतर आंतरिक कलह ने सपा की तैयारियों पर ‘ब्रेक’ लगा दिया। पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के समाजवादी कुनबे की आंतरिक कलह चुनाव से पहले ही सतह पर आ जाने से उसके महारथी विरोधियों से मुकाबले की जगह आपस में ही गुत्थमगुत्था होने लगे। इसमें स्वयं मुलायम सिंह को एक पक्ष में खड़ा होना पड़ा। हालांकि यह लड़ाई उनके पुत्र और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बनाम भाई शिवपाल कें बीच अहं का टकराव है। लेकिन इसमें पूरी पार्टी दो हिस्सों में बंटी नजर आयी। लिहाजा बीच-बचाव और समझौते के लिए समूचे समाजवादी कुनबे को सामने आना पड़ा। पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा, जनता दल (यू.) के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव, राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह, राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव और इनेलो (हरियाणा) नेता अजय चौटाला समाजवादी पार्टी के रजत जंयती समारोह के बहाने लखनऊ आये और सपा सुप्रीमो को फिलहाल समाजवादी घराने का शीर्ष नेता बताते हुए भावी गठबंधन की जिम्मेदारी उन्हे सौंपी।

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मजेदार तथ्य यह कि 5 नवम्बर (सपा का स्थापना दिवस) को जिस दिन समाजवादी घराना अपने बिखरे कुनबे को एकजुट करने के लिए लखनऊ में इकठ्ठा था, इनके टारगेट पर रही भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश (सहारनपुर) में अपनी बहुप्रतीक्षित ‘परिवर्तन यात्रा’ की शुरूआत कर रही थी। यानि उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने की चाहत वाले दोनों धुर विरोधी एक साथ अपने मकसद को पूरा करने का आगाज कर रहे थे। इस मौके पर पूर्व प्रधानमंत्री और जद (सेक्यूलर) के अध्यक्ष देवेगौड़ा ने समाजवादियों की एकजुटता को जरूरी बताते हुए स्पष्ट किया कि ‘यू.पी. में ही नहीं देश में इकठ्ठा होकर मुलायम सिंह के नेतृत्व में साम्प्रदायिक शक्तियों से लड़ाई लडऩी है। धर्म निरपेक्ष ताकतें इकठ्ठा होकर साम्प्रदायिक ताकतों से लडेगी।’ देवेगौड़ा ने भाजपा के खतरे की ओर भी इशांरा किया। बोले- साम्प्रदायिंक शक्तिया देश को बांटना चाहती हैं। वे एक देश, एक कानून, समान नागरिक संहिता की बात कर रही हैं। क्या यह सम्भव है। इतना ही नहीं उन्होने लोगों को आगाह किया- 2017 का यू.पी. का चुनाव देश की राजनीति की दिशा तय करेगा।

भाजपा पर अटैक करते हुए जद (यू) के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव ने भी समाजवादियों की एकजुटता को वक्त की जरूरत बताया। बोले- ‘मतभेद भुलायें, दिल बड़ा करें और एक मंच पर आयें। तभी यू.पी. के साथ पूरे देश में समाजवादी सरकारें बनेंगी। यू.पी. के चुनाव से ही दिल्ली की सत्ता की चाभी मिलेगी।’ समाजवादियों के संघर्षों की ओर लोगों का ध्यान दिलाते हुए शरद यादव ने कहा- जे.पी. मधुलिमयें, लोहिया और मुलायम सिंह ने बहुत लाठियां खायी हैं। भाजपा को अलगाववादी बताते हुए उन्होने कहा-लव जेहाद, तीन तलाक, गोमांस जैसा भाजपा का हर मुद्दा बंटवारे का है। याद रखना, एक रहने से देश मजबूत होता है बंटने से पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे हालात हो जायेंगे। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को समझाने से वे भी बाज नहीं आये। बोले-मुलायम सिंह में काबिलियत है। वे देश के समाजावादी विचारधारा के सभी लोगों को एकजुट करेंगे। आप पर इतिहास ने एक जिम्मेदारी डाली है, उसे समझिये।’

लालू प्रसाद यादव ने भी अखिलेश को एकजुटता के बारे में समझाया। भाजपा पर अपने ही अंदाज कटाक्ष करते हुये कहा- चुनाव होने वाले हैं, इसलिए इन्हें फिर राम जी याद आ रहे है। इसी राम जी के रथ को मैने रोका था। अब इसे रोकने की जिम्मेदारी आप और मुलायम सिंह पर है।’ भाजपा को रंगुआ सियार बताते हुए लालू बोले- ‘यह सियार बहुत खतरनाक है, बहुत काटेगा। इसे यू.पी. से भगाना पड़ेगा।’

सपा के स्थापना दिवस, समारोह की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह भी रही कि रालोद नेता चौधरी अजित सिंह ने भी मुलायम सिंह को अपना नेता बताया। उन्होने अखिलेश से कहा -‘आप प्रदेश संभालें और मुलायम सिंह देश।’

फिलहाल सपा के स्थापना दिवस समारोह (रजत जयंती) में समाजवादी कुनबे की एकता की इच्छा शाक्ति तो दिखी लेकिन महागठबंधन की किसी रूपरेखा का ‘ब्लू प्रिंट दूर-दूर तक नहीं दिखा। दूसरी ओर कुनबे के सम्भावित स्तम्भ बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार छठ पर्व का हवाला देकर लखनऊ आये ही नहीं। उन्होंने बातचीत में यहां तक कह दिया कि ‘मायावती के बिना यू.पी. में मुलायम सिंह के महागठबंधन का प्रयास कितना मायने रखेगा, पता नहीं।’ मुलायम सिंह के अपने परिवार में दो ध्रुवों पर खड़े शिवपाल सिंह और अखिलेश यादव के बीच तनातनी को भी समाजवादी कुनबा कम न करा सका तो राष्ट्रीय स्तर पर एकता कायम करने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। पूर्वांचल विश्वविद्यालय में राजनीतिशास्त्र के प्रो. एम.पी. सिंह कहते है- ‘सैद्धांतिक स्तर पर बात भले चल रही हो, व्यावहारिक स्तर पर सीटों का बटंवारा जिस तरह कांग्रेस (सौ से सवा सौ सीटें) चाहती है, रालोद भी कुछ वैसी ही हिस्सेदारी चाहेगा। क्या सपा को यह मान्य होगा? ‘

निश्चिन्त दिखती भाजपा

आपसी तलवारबाजी में उलझी प्रदेश की सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी और महागठबंधन की आस लगाये पुराने जनता दली लोगों की फंतासी के बीच यूं तो भारतीय जनता पार्टी निश्चिन्त दिख रही है, लेकिन वह अपना हर कदम फूंक-फूंक कर उठा रही है। कम से कम उसकी परिवर्तन यात्रा को देखकर तो ऐसा ही लग रहा है ‘लक्ष्य-2017 मिशन 265 प्लसÓ को पूरा करने के उद्देश्य से पार्टी ने 5 नवम्बर को सहारनपुर से जो परिवर्तन यात्रा शुरू की है, उसमें यू.पी. की कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार को टारगेट बनाया गया है। सपा सरकार के ‘गुंडाराज’ और ‘बसपा सरकार के भ्रष्टचार’ पर अटैक करते हुए भाजपा शासित प्रदेशों के विकास पर जनता का ध्यान खींचने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश सरकारों के विकास कार्यों की फेहरिस्त के अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा ढ़ाई वर्षो में शुरू की गयी विभिन्न योजनाओं, उनके सुपरिणामों, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी देश की साख, पड़ोसी देश को दिये जा रहे ‘जैसे को तैसा जवाब’ और आतंकवाद की रीढ़ पर किये जा रहे प्रहारों की विस्तृत जानकारी भी दे रहे हैं।

परिवर्तन यात्रा के चौथे चरण में पूर्वांचल के सोनभ्रद में रैली को सम्बोधित करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा- उत्तर प्रदेश में जमीनी परिवर्तन की जरूरत है। सिर्फ  चेहरा बदलने से काम नहीं चलेगा। प्रदेश की जनता के रहन-सहन में बदलाव नजर आना चाहिए। विकास दिखाई पडऩा चाहिए। सपा सरकार पर तंज कसते हुए शाह ने कहा-चाचा भतीज आपस में गाली-गलौज कर रहे हैं जबकि बुआ दोनों को गाली दे रही हैं।

रैली को सम्बोधित करते हुए रेल राज्यमंत्री मनेाज सिन्हा ने कहा कि ‘सपा सरकार सिर्फ इटावा, मैनपुरी और कन्नौज के विकास के लिकाम कर रही है। शेष प्रदेश की इस सरकार के लिए कोई अहमियत नहीं है। श्री सिन्हा ने कहा – पुलिस की भर्ती में 83 प्रतिशत लोग सिर्फ इन्हीं जिलों से लिये गये है। पूछो भाई, राज्य के अन्य जिलों के नौजवान क्या इस लायक नहीं है।’

फिलहान परिवर्तन रैली में जनता की भीड़ तो उमड़ रही है लेकिन एक सवाल उसकी ओर से भी उछाला जा रहा है – आखिर भाजपा का मुख्यमंत्री कौन होगा? ओबरा के राम निहाल सिंह कहते हैं – जब सपा अखिलेश यादव, बसपा मायावती को और कांग्रेस शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट कर चुकी है। तो भाजपा क्यों इस सवाल को टाले हुए है?

खैर, जो भी हो रैलियों और यात्राओं ने प्रदेश की फिजां बदल दी है। चुनावी माहौल तो बन ही गया है। कौन इस फिजां को अपने पक्ष में मोडऩे में सफल होता है, इसके लिए इन्तजार करना होगा।

लखनऊ से सियाराम यादव

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