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सर्जिकल स्ट्राइक

सर्जिकल स्ट्राइक

पीएम मोदी जी की सर्जिकल स्ट्राइक ने राजनीतिक दलों को हैरान कर रखा है। पहले पीएम ने सेना से सीमा पर सर्जिकल स्ट्राइक कराई और अब रिजर्व बैंक से। इसको लेकर सबसे बड़ी परेशानी यूपी और पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर खड़ी हो गई है। यह किसी से छिपा नहीं है कि चुनाव में काले धन का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। एक पार्टी की नेता पर नेताओं से टिकट के बदले पैसे लेने के आरोप लगते रहे हैं। वहीं सत्ताधारी दल के कुछ नेताओं को लेकर भी लोग फब्तियां कस रहे हैं। वहीं, योग गुरू बाबा रामदेव बल्लियों उछल रहे हैं।



बुआ जी परेशान


mayawati copy

यूपी के सी एम अखिलेश की बुआजी कुछ ज्यादा ही परेशान हैं। पहले बुआ जी यादवों के घर के झगड़े से खुश थी। अब उन्हें लग रहा है की कहीं उप्र की राजनीतिक लड़ाई भाजपा बनाम जनता दल परिवार में न बदल जाए। यदि ऐसा हुआ तो सारा समीकरण ही बदल जाएगा।  लिहाजा  बुआ जी आपरेशन डैमेज कंट्रोल को लेकर सक्रिय हो गयी हैं और अल्पसंख्यक मतों को खींचने के लिए पूरा जोर लगा दिया है।



राहुल बाबा को बचाओ


Rahul Gandhi at Parliament

उप्र में बदलते राजनीतिक घटनाक्रम ने कांग्रेसी रणनीतिकारों को डिफेंसिव मोड में ला दिया है। उन्हें भी लगने लगा है की खाट लूटने के हाई वोल्टेज एपिसोड के बाद भी खास जमीनी बदलाव नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में पार्टी रणनीतिकार खराब चुनावी नतीजों की आशंका के कारण कोई रिस्क नहीं मोल लेना चाहते। बताते हैं कि इसी के चलते राहुल बाबा की कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर ताजपोशी को टाल दिया गया है। ताकि चुनाव नतीजों का ठीकरा राहुल बाबा के सर पर फूटने से बचाया जा सके।



खुश हैं अमर सिंह


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मेरा घर भले न चमके, पर पड़ोसी के घर में भी सफेदी न लगने पाए। इसी तर्ज पर समाजवादी पार्टी के महासचिव अमर सिंह काफी खुश है। नवरंग हाऊस के 13वें फ्लोर पर अपने कार्यालय में अमर सिंह केवल राजनीतिक गुफ्तगू कर रहे हैं। राजनीति से जुड़ी हर चर्चा में वह यह बताना नहीं भूलते कैसे उन्होंने रामगोपाल को धूल चटाई। कभी रामगोपाल ने भी यही किया था। यह बात अलग है कि भले ही पार्टी से निकाले जाने के बाद भी अदृश्य हुए रामगोपाल की अकडऩ कम नहीं हुई हो, लेकिन अमर सिंह की प्रसन्नता का कोई ठिकाना नहीं है। आगे क्या होगा….बस देखते रहिए।



शरद जी की कसरत


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शरद यादव ने फिर जोर अजमाइश तेज कर दी है। शरद जी चाहते हैं कि किसी भी कीमत पर उ.प्र. में महागंठबंधन बन जाए। इसके लिए वह लगातार मुलायम सिंह यादव से चर्चा कर रहे हैं। 9 नवंबर को भी उन्होंने मुलायम के आवास पर उनसे करीब एक घंटे तक बात की। शरद जी चाहते हैं कि जनता दली परिवार एक जुट हो जाए। बिहार चुनाव से पहले भी उन्होंने ही कोशिश की थी। जबकि मुलायम है अभी समाजवादी पार्टी की लहलहाती फसल की तरफ देख रहे हैं। वहीं भाई लोग शरद की कोशिश को उनके भविष्य से जोड़कर देख रहे हैं। बताते हैं शरद जो को भी जार्ज फर्नांडीस जैसे भविष्य का डर सताने लगा है। इसलिए उन्होंने कसरत तेज कर दी है।



अखिलेश है नंबर 1


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सपा में मचे घमासान का पटाक्षेप अखिलेश को हीरो बना गया।  खबर है की चाचा शिवपाल अब इसको हजम नहीं कर पा  रहे हैं। लेकिन करें भी तो क्या, चिडिय़ा पूरा खेत चुग गयी है।  मुलायम ताल ठोंक कर भाई शिवपाल के साथ खड़े रहे और बेटा हीरो बन गया। शिवपाल अब करें भी तो क्या? वहीं राजनीति के जानकारों का मानना है की हवा का रुख भांप कर राजनीतिक दांव चलाने  में माहिर मुलायम के धोबियापाट को शिवपाल समेत आधी सपा समझ ही नहीं पायी।  किसी को भनक तक नहीं लगी और मुलायम ने अपने बाद उत्तराधिकारी के तौर पर बेटे को स्थापित कर दिया।



ये जो पी. के. है


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ये जो पी.के. हैं न बड़ा बकवासिया आदमी है।  यह हम नहीं कांग्रेसी नेता कह रहे हैं। खबर है की पी.के. पर हमला तेज हो गया है। कांग्रेसी नेताओं के अनुसार पी.के. से कोई जी.के. (जनरल नॉलेज) हल नहीं होगा। उनकी शिकायत है की टीम पी.के. एक के बाद एक प्लानिंग का दबाव बना रही हैं। खुद कांग्रेस हाईकमान से प्रचार का दाम वसूली है और खर्चे के एक हिस्से की जिम्मेद्दारी स्थानीय नेताओं पर डाल दे रही है। इतना ही नहीं कांग्रेस की कौन कहे घूम-फिरकर खुद की ही मार्केटिंग में लगी है। अब देखिये यह घमासान क्या रंग लाता है।


никасефимова ольга владимировна

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