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काले धन पर मोदी मार

काले धन पर मोदी मार

प्रधानमंत्री मोदी ने काले धन के कारोबारियों को गहरा झटका देकर अपना कद कुछ  और ऊंचा कर लिया है। यह बेहिचक स्वागतयोग्य कदम है। 500 रु. और 1,000 रु. के नोट वापस लेना बेहद साहसिक कदम है। अपनी गैर-कानूनी दौलत को रातोरात बेमानी होते देख काला धन रखने वालों की नींद गायब हो गई होगी। उनके पास बड़े नोटों के भारी-भरकम बंडल अब रद्दी के टोकरों में बदल गए। यह कहने की दरकार नहीं कि स्वैच्छिक घोषणा योजना का जिन लोगों ने लाभ उठाया, अब वे अपने को भाग्यशाली मान रहे होंगे क्योंकि उनकी अघोषित आय 30 प्रतिशत कर अदा करके बच गई। हालांकि नोटों को बदलने की प्रक्रिया में आम लोगों को भी शुरुआत में कुछ दिक्कतें आएंगी लेकिन थोड़े समय बाद वे दूर हो जाएंगी। इतने बड़े पैमाने पर काले धन के अभिशाप को खत्म करने के लिए ऐसे ही साहसिक कदम की दरकार थी, जिससे आम लोगों को भी थोड़ी दिक्कत पेश आ सकती है। इससे राजनैतिक दलों के चुनाव प्रचार पर असर पड़ सकता है। लेकिन उम्मीदवार कम खर्च करेंगे तो समाज का हित ही होगा। इसका लंबी अवधि में लाभ मिलेगा। चुनाव में धनबल और बाहुबल की भूमिका खत्म हो जाएगी। चुनाव कानून के मुताबिक और पारदर्शी हो जाएंगे। अच्छे उम्मीदवारों को चुनाव लडऩे का प्रोत्साहन मिलेगा। यह कहने की दरकार नहीं कि इससे हर कोई पुराने नोट को बदलने के लिए बैंकिंग व्यवस्था की ओर जाने को मजबूर होगा। इसमे दो राय नहीं कि शुरुआती दिक्कतें आएंगी लेकिन यह भविष्य में हर किसी के भले के लिए है। भारी सुरक्षा उपायों वाले नए नोटों के जारी होने से देश में मौद्रिक व्यवस्था में निश्चित ही स्थिरता आएगी। केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक का अगला कदम सभी कारोबारियों और कॉरपोरेट घरानों को हर तरह का लेनदेन पीओएस, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और ई-वैलेट के जरिए करने पर जोर देने का होना चाहिए, ताकि आखिरकार सभी कुछ बैंकिंग व्यवस्था के जरिए हो। हालांकि सेकुलर ब्रिगेड के कुछ विश्लेषक इस फैसले का विरोध कर रहे हैं लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि अगर व्यवस्था में भारी बदलाव लाना है तो आपको कुछ ऐसे कठोर कदम उठाने ही होंगे। यह कोई नहीं, मोदी भी नहीं कहते कि इससे काले धन की समस्या दूर हो जाएगी। यह भी जाहिर है कि सौ साल की समस्या को हम एक झटके में खत्म नहीं कर सकते। लेकिन इस फैसले से निश्चित तौर पर मामला सुधरेगा और काले धन को कानूनी रास्ते से चलना होगा। आगे चलकर हमें काले धन के पैदा होने की स्थितियों को पहचानना होगा और उस पर यथासंभव रोक लगानी होगी।



महाबली राष्ट्रपति


Donald Trump

दुनिया का सबसे ताकतवर आदमी अब पत्ते फेंटने के लिए बदस्तूर आ धमका है। डोनाल्ड ट्रंप अब अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति हैं। उनके लाए बदलावों के बारे में सबकी अपनी-अपनी राय होगी और यह भी देखना होगा कि वे विविधता भरी दुनिया को कैसे अलग-अलग नजरिए से देखते हैं। कुछ चुनावी रैलियों में उनके बोले शब्द कुछ गलत हो सकते हैं लेकिन वे उन्हीं मुद्दों को उठा रहे थे, जो अमेरिका के सभी लोग सुनना चाह रहे थे। उन्होंने आतंकवाद से लडऩे के पाकिस्तान के फरेब पर भी दो-टूक राय जाहिर की। वे राजनीति और विदेश नीति में गेम चेंजर की भूमिका निभा सकते हैं। भारत को कुछ नौकरियों और आउटसोर्सिंग उद्योग के अलावा मोटे तौर पर लाभ होगा। बतौर राष्ट्रपति वे एशिया में सत्ता समीकरणों को भारत की ओर झुका सकते हैं, जो चीन के लिए भारी झटका साबित होगा। यह गौर किया जा सकता है कि चीन और पाकिस्तान दोनों दशकों से अमेरिका का दोहन कर रहे हैं। चीन भारी कारोबारी कर्ज (2015 में 366 अरब डॉलर) के जरिए तो पाकिस्तान अपने दोहरे खेल से अमेरिका को चूना लगा रहा है। पाकिस्तान कट्टरतावादी इस्लाम से लडऩे के नाम पर अमेरिका से आर्थिक मदद (2002 से 30 अरब डॉलर से अधिक) हासिल कर चुका है। लेकिन ट्रंप इन दोनों देशों की ओर अमेरिकी पैसे के प्रवाह को रोक सकते हैं। हालांकि मैं यहां यह भी कहना चाहूंगा कि अमेरिका और उसके बाहर मीडिया का एक वर्ग हिलेरी के पक्ष में पूर्वाग्रह से ग्रस्त रहा है। उसने छोटे आकार के नमूनों के आधार पर सर्वेक्षण करके लोगों की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की लेकिन अंतत: उसकी कलई भी उतर गई। याद रखिए कि बहुसख्ंयक लोग मौन भले रहें, वे सब कुछ देखते-समझते रहते हैं और जब वे फैसला सुनाते हैं तो सब दांतों तले उंगली दबा लेते हैं।

दीपक कुमार रथ

दीपक कुमार रथ

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