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विचारधारा के नाम पर आतंक

विचारधारा के नाम पर आतंक

 ‘ISIS का आतंक’ नामक पुस्तक सीरिया और इराक में इस्लाम के नाम पर आतंक  फैलाने वाले आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) के  विषय की व्याख्या करती है। यह पुस्तक मध्य एशिया में अबु बकर-अल-बगदादी के नेतृत्व वाले आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट द्वारा सीरिया और इराक के लोगों पर किये जाने वाले उत्पीडऩ तथा इस उत्पीडऩ के खात्मे के लिए पश्चिमी देशों जैसे अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन का एक होकर इस्लामिक स्टेट के आतंकियों के खात्मे के लिए सैन्य कार्रवाई जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का वर्णन करती है।

Layout 1लेखक ने अपनी पुस्तक में व्याख्या की है कि सीरिया और इराक संभवत: टूटने के कगार पर पहुंच चुके थे। वहां के भिन्न-भिन्न वर्ग जैसे शिया, सुन्नी, ईसाई, कुर्द और अलवाईट को लगने लगा था कि वे यह युद्ध अपने अस्तित्व को बचाने के लिए लड़ रहे थे। इसी कारण इस्लाम के नाम पर अपने कट्टरपंथी विचार के लिए जाने जानेवाले आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया ने उन सभी को निशाना बनाया जिसमे इस्लामिक स्टेट की संप्रभुता को न मानने वाले निर्दोष लोग मार दिये गये या फिर भाग जाने के लिये विवश कर दिये गये।

ISIS का आतंक

लेखक                   : पैट्रिक कॉकबर्न

प्रकाशक : प्रभात प्रकाशन

मूल्य                   : 250 रु.

पृष्ठ                    : 160

लेखक ने बताया है कि  10 जून, 2014 इतिहास का एक काला दिन था, क्योंकि इसी दिन इस्लामिक स्टेट ने इराक के शहर  मोसुल पर अपना कब्जा जमा कर वहां की सारी पुरानी विरासतों को विध्वंस कर दिया था।

इस पुस्तक के लेखक, जिन्होंने अपने प्राण संकट में डालकर इस युद्ध क्षेत्र के विषय में जानने का प्रयास किया,  लिखते हैं कि इराक एक शिया बहुल देश है। इराक में साठ फीसदी आबादी शिया समुदाय की है, फिर भी सुन्नी समुदाय से आने वाले सद्दाम हुसैन ने इस देश पर शासन किया और जब से सद्दाम हुसैन को फांसी दे दी गई यहां की राजनीति में सुन्नी समुदाय ज्यादा उग्र विचार वाला हो गया। उन्होंने आगे लिखा है कि आतंकी संगठन  इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया  अपने विरोधी शिया लड़ाको को भयभीत करने के लिये प्राय: कत्ल करने जैसे भयावह वीडियो बनाता था। उनका प्राय: यही उद्देश्य होता था कि उनके द्वारा बनाये गये वीडियो को देखने के पश्चात इराकी सैनिक उनसे युद्ध करने में भयभीत हो जायेंगे। लेखक ने आगे लिखा है कि अमेरिका और रूस जैसी ताकतों का कुछ मतभेद के साथ इस आतंकी संगठन के विरूद्ध एक साथ आना, इस्लामिक स्टेट के लिये अत्यधिक भारी पड़ा। यही कारण है कि आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट की कमर टूट गयी और अब तो ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इस्लामिक स्टेट नामक विचारधारा पूरी तरह से खत्म होने के कगार पर है।

पैट्रिक कॅाकर्बन द्वारा लिखी गई यह पुस्तक पाठकों का ध्यान आकर्षित करेगी, क्योंकि यह पुस्तक मध्य एशिया में शिया और सुन्नी समुदाय के बीच के वर्षों पुराने मतभेद तथा इस मतभेद का युद्ध के रूप में परिवॢतत होना और इसके खात्मे के लिये पश्चिमी देशों का साथ आना आदि महत्वपूर्ण बिन्दुओ को इंगित करती है।

रवि मिश्रा

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