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प्राकृतिक-यौगिक विधि से दूर करें मोटापा

प्राकृतिक-यौगिक विधि से दूर करें मोटापा

मोटापा एक शब्द है, जिसको सुनकर प्रत्येक व्यक्ति आंकलन करने लगता है कि कहीं वह मोटा तो नहीं है, यद्यपि आज के परिवेश में रहन-सहन को, आहार-विहार को देखते हुए मोटापा जैसी बीमारी सामान्य सी बात हो गई है। लगभग 50 वर्ष पहले जहां 10 में से एक व्यक्ति मोटा हुआ करता था, वही आज 10 में से 4 मोटापे के शिकार हैं और यह प्रतिशत दिनों दिन बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मोटापा शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक ऊर्जा में असंतुलन का परिणाम है, मोटापे के कारण शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती हैं और भावनात्मक व मानसिक गतिविधियों में यह सुस्ती लाता है।  

कुछ बीमारियां जैसे पागलपन, मिर्गी, मधुमेह, व अन्य मानसिक बीमारिया में प्रयुक्त cortico steroids के  कारण भी मोटापा बढ़ता है। पतले-दुबले होने के लिए संतुलित व पोषणीय आहार एवं यौगिक जीवन शैली अपनानी पड़ती है। पतंजलि योगपीठ में पूज्य योग ऋषि स्वामी रामदेव जी के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुए मोटापा निवारण शिविर में आहार के साथ योगादि पर विशेष ध्यान दिया गया और उसके सकारात्मक परिणाम भी आये। श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण महाराज स्वयं बताते है कि ‘शरीर, मन एवं भावनाओं का स्वस्थ समुच्चय ही ऋ षि प्रणीत स्वास्थ्य की परिभाषा है।’ जो लोग सोलह साल की आयु तक फास्ट फूड खा-खाकर अपने वजन में मनचाही बढ़ोत्तरी कर चुके होते हैं, वे इस अवस्था में मोटापे का शिकार होते हंै और वे इससे छुटकारा पाने के बारे में सोचते हैं।

साथ ही स्लिम दिखने के लिए विदेशी आबोहवा, जीवन शैली पर सौन्दर्य की किताबों में लिखे टिप्स आंख मूंद कर अमल करना प्रारम्भ कर देते हैं, जो ठीक नहीं है। इस फोबिया से ग्रसित व्यक्ति कभी-कभी अति कठिन आदतों से ग्रसित हो जाते हैं, विशेषकर लड़कियां। पर यौगिक जीवनशैली जीते हुए किसी विशेषज्ञ योगाचार्य की सलाह से यदि कोई आहार को न्यूनतम कर लें, तो उस पर कोई नकारात्मक असर नहीं होता।

मोटापे के कारण होने वाली अन्य बीमारियां-

मोटापे से होने वाली बीमारियां जो व्यक्ति को सीधे प्रभावित करती हैं, इनमें हैं:-मधुमेह, उच्चरक्त चाप, उच्च कोलस्ट्राल, दिल की बीमारी, पित्ताशय की थैली का रोग, गठिया वात, अनिद्रा, श्वसन संबंधी बीमारी आदि।

कुछ घरेलू उपचार –

  • नींबू का रस एवं शहद को गुनगुने पानी में लेने से वजन कम होता है।
  • अश्वगंधा की 5-6 पत्तियों को सुबह सायं चबाने से वजन कम होता है।
  • गोभी भी मोटापे के लिए बहुत फायदेमंद है, इसमें tartaric acid पाया जाता है, जो वसा में चीना व कार्बोहाइटस के रूपांतरण को रोकता है, जिससे वजन नही बढ़ता।
  • बेर (बदर) के पत्ते भी वजन कम करने में महत्वपूर्ण हैं। इसकी पत्तियां रात में पानी में भिगो दें, सुबह खाली पेट सेवन करें।
  • ग्रीन टी भी वजन को नियंत्रित करने में सहायक है।
  • शहद व ताजी अदरक को एक साथ पीसकर लेने से वजन कम होता है।

 

आहार एवं दिनचर्या

  • सुबह जल्दी उठना।
  • सुबह उठकर गुनगुने जल में नींबू निचोड़कर पीना।
  • प्रतिदिन सुबह उठकर सैर करें।
  • नास्ते में मलाई निकाला हुआ दूध व गेहूं व चने का स्पाउटस लें।
  • संतरे व गाजर का रस भी ले सकते है।
  • दोपहर के भोजन में गार्डन सलाद, ककड़ी, गाजर, गोभी, चुकंदर, प्याज, टमाटर को स्टीम कर लें ।
  • शाम को सब्जियों का सूप लें ।
  • रात्रि में हल्का भोजन ग्रहण करें।
  • दोपहर के भोजन व रात्रि के खाने का समय निर्धारित करना चाहिए।

मोटापे का औषधीय उपचार

पतंजलि निर्मित औषधियां जो निम्नवत् है:- दिव्य मदोहर वटी, गोमूत्र अर्क, दिव्य पेय व दिव्य त्रिफ ला चूर्ण महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त:-

  • एक-एक पत्ता अश्वगंधा को हाथ से मसल कर गोली बनाकर सुबह, दोपहर एवं सायंकाल भोजन के एक घंटे बाद या खाली पेट जल से 15 दिन लें, फिर कुछ दिन छोड़ दें, पूज्य स्वामी जी का यह नुस्खा लाखों लोगों के मोटापे में कारगर साबित हुआ है।
  • 1 कप पानी लेकर उसमें ताजी तुलसी पत्र स्वरस व 1 चम्मच शहद मिलाकर पीने से मोटापे में अतिशय लाभ मिलता हैं।

RNS-YOGA-INDIAमोटापे में योग एवं प्राणायाम

  • ताड़ासन
  • त्रिकोणासन
  • कोणासन
  • पादहस्तासन
  • चक्की आसन
  • स्थिति कोणासन
  • पश्चिमोत्तासन
  • 16भुजंगासन
  • शलभासन
  • अर्धहलासन
  • पादवृतासन
  • द्विचक्रिकासन
  • मर्कटासन
  • शवासन
  • भस्त्रिका
  • कपालभाति
  • उज्जयी
  • अनुलोम-विलोम
  • भ्रामरी
  • उद्गीथ प्राणायाम।

अन्य सावधानी

अनुचित तरिके से वजन कम करने की कोशिश कतई ना करें। क्योंकि ऐसा करने से स्वास्थ पर बुरा असर पड़ सकता है। योग चिकित्सक के मार्गदर्शक में लौकी, एलोवेरा, आंवला, आदि के जूस, फू्रट जूस पतंजलि पुष्टाहार दलिया का संतुलित प्रयोग भी सकारात्मक परिणाम लाने में कारगर साबित हुआ है।

इसी क्रम में योग-व्यायम व कुछ प्राणायामभी हैं जो समुचित पोषणीय क्षमता बनाये रखने में मदद करते हैं। इसके लिए सबसे पहले अपने मन: स्थिति को समान्य करें और मोटापा की चिंता छोड़कर नित्य सामान्य तौर पर सूक्ष्म व्यायाम व कपालभाति, अनुलोम-विलोम प्राणायाम औसत स्तर पर करें। भरपूर आहार लें, इससे मन में प्रसन्नता पैदा होगी।

वजन कम करने के लिए आलस्य का परित्याग करके, प्रकृति के ज्यादा नजदीक रहें, नैसर्गिक फूड लेकर भी वजन में कमी ला सकते हैं। ताजी हवा व संतुलन आहार का सेवन अवश्य करें।

फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे- चावल, चपाती, परांठें, आलू, मीठा, तले-भूने खाद्य पदार्थ व फास्ट फूड का परित्याग करें। डॉक्टर की सलाह के बिना कभी भी वजन कम करने वाली औषधि का सेवन न करें।

इसी प्रकार जो बच्चे भोजन में अरूचि दिखाते हैं, ऐसे बच्चों को उनका मनपसंद खाना खाने के लिए प्रेरित करें। जब वह परिजनों की सलाह मानकर खाना खाने लगे, तो धीरे-धीरे उसके खाने में पोषक तत्वों की वृद्धि करने चलें। बच्चों के दिमाग में यह बात बिठानी चाहिए कि सुंदर दिखने की चाह योगाभ्यास व आयुर्वेद सम्मत आहार द्वारा भी किया जा सकता है। इस प्रकार भरपूर आहार के सेवन से चेहरे की चमक में तो वृद्धि होगी ही, साथ योगाभ्यास अपनाने से स्वस्थ, सुंदर, प्रसन्नता से भरी काया बनी रहेगी और हम मोटापा फोबिया से भी निजात पायेंगे।

(साभार: योग संदेश)

डॉ. शंभू, पतंजलि जड़ी-बूटी एवं अनुसंधान

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