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नोटबंदी के खिलाफ  ममता की मुहिम का राज क्या?

नोटबंदी के खिलाफ  ममता की मुहिम का राज क्या?

केंद्र सरकार द्वारा 500 एवं 1000 रुपए के नोट अचानक बंद किए जाने को लेकर देश भर में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं हो रही हैं। कहीं लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कदम को सही बता रहे हैं, तो कहीं केंद्रीय सरकार के खिलाफ बेशुमार नाराजगी भी है। हालांकि नोटबंदी के इतने दिन गुजर जाने के बाद भी आम लोगों की मुसीबतें कम नहीं हुई हैं। लोग परेशान हैं। बंगाल की स्थिति भी काफी खराब है। लोग नोट बदलने के लिए घंटों लाइनों में खड़े रहने को मजबूर हैं, लिहाजा आम लोग केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम से खासे नाराज भी हैं। उधर राज्य सरकार का गुस्सा भी प्रधानमंत्री द्वारा उठाए गए इस कदम से कुछ कम नहीं है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो नोटबंदी को लेकर एक मुहीम छेड़ दी है और विभिन्न राजनीतिक दलों से लगातार संपर्क कर अपनी मुहीम में साथ आने का अनुरोध कर रही हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है कि केंद्र सरकार ने बेहद जल्दबाजी में यह कदम उठाया है और प्रधानमंत्री के इस कदम से आम आदमी काफी परेशान है। बैंकों और एटीएम काउंटरों की लंबी कतारों में अमीर आदमी नहीं दिख रहा है, बल्कि आम आदमी खासा परेशान हो रहा है। उनकी परेशानी कम होने का नाम ही नहीं ले रही। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस फैसले को बदलने का अनुरोध कई बार किया। ट्विटर पर भी लगातार इस सन्दर्भ में ममता बनर्जी के सन्देश आते रहे, मगर प्रधानमंत्री तो वस्तुत: अपने धुन के पक्के हैं। उन्होंने इसकी जरा भी परवाह नहीं की। उन्होंने बस यही  कहा कि वे भारत को भ्रष्टाचार मुक्त करना चाहते  हैं। इसमें सभी उनका साथ दें। अगर सभी ने उनका साथ दिया तो भारत को पूर्ण रूप से वे भ्रष्टाचार मुक्त बना देंगे और सबको उनके सपनों का भारत भी देंगे, मगर ममता बनर्जी प्रधानमंत्री के इन बातों से बिफर उठती हैं और कहती हैं कि केंद्र सरकार के इस अप्रत्याशित कदम से पश्चिम बंगाल की आम जनता परेशान है और आम लोगों का दु:ख उनसे देखा नहीं जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि छोटे नोटों की कमी के कारण बहुत सारे लोगों को घंटों लाइनों में खड़े रहने के बाद भी वापस आना पड़ता है। रोज कमाने-खाने वाले गरीब लोग भी घंटों लाइनों में खड़े रहते हैं, जिससे वे काम नहीं कर पाते, लिहाजा रोटी के लाले पड़ जाते हैं। ममता बनर्जी ने इस मामले को लेकर देश के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भी मुलाकात की और सरकार के इस फैसले को बदलने की गुहार लगाई। उन्होंने केंद्र सरकार के इस कदम को वित्तीय आपदा कहते हुए इस पर रोक लगाने की बात कही। हालांकि कई राजनीतिक दलों के लोग उनके साथ हैं, मगर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने उल्टे टीएमसी पर कई संगीन आरोप मढ़  दिए। केंद्र सरकार पर हमला करने वाली ममता बनर्जी को माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य तथा राज्य सचिव सूर्यकान्त मिश्र ने निशाने पर लेते हुए कहा कि मुख्यमंत्री तथा उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को सारधा व नारदा घोटाले में 500 एवं  हजार के नोट ही मिले थे, यही वजह है कि ममता इन नोटों को प्रतिबंधित किए जाने का पुरजोर विरोध कर रहीं हैं। उन्होंने कहा कि-प्रदेश में सारधा को छोड़कर दर्जनों चिटफण्ड कंपनियां आईं और सभी ने 500 एवं 1000 के नोटों पर ही काम किया तथा टीएमसी को भी यही नोट दिए गए। जितने भी स्टिंग ऑपरेशन्स हुए सभी में टीएमसी नेताओं को 500 और 1000 के नोट लेते हुए साफ तौर पर देखा गया। यही कारण है कि ममता बनर्जी इस पर बेहद नाराज हैं। सूर्यकान्त मिश्र ने कहा कि केंद्र सरकार के इस फैसले से वह भी खासे नाराज हैं, लेकिन उनकी पार्टी टीएमसी का साथ नहीं देगी, बल्कि अपने स्तर से प्रधानमंत्री के इस फैसले पर अपना विरोध जताएगी। उनका कहना है कि -तृणमूल कांग्रेस तो खुद ही भ्रष्ट है. अगर टीएमसी को भ्रष्टाचार की गंगोत्री कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। सूर्यकान्त मिश्र ने प्रधानमंत्री पर भी निशाना साधा और कहा कि-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एलान किया था कि देश के हर नागरिक के खाते में 15 लाख रुपए जमा होंगे, लेकिन वे इसमें विफल रहे और न ही विदेश से काला धन ला पाए। रूपये तो दूर, बैंक खाते में एक पैसा तक नहीं आया। इन्हीं मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए प्रधानमंत्री तीन तलाक के मुद्दे को चर्चा में रखे हुए हैं। मोदी जी को जनता ने पहला तलाक दिल्ली विधानसभा चुनाव में दिया, दूसरा बिहार विधानसभा चुनाव में और अब तीसरा तलाक उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में दे देगी।

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नोटबंदी का मुद्दा इस बार यहां के उपचुनाव पर भी हावी रहा। कूचबिहार जिले के कूचबिहार संसदीय क्षेत्र और पूर्वी मेदिनीपुर के तमलुक संसदीय क्षेत्र के साथ ही मोंटेश्वर विधानसभा क्षेत्र के लिए चुनाव हुआ। तृणमूल कांग्रेस ने इस चुनाव में नोटबंदी के मुद्दे को जोर-शोर से उछाला। उधर नोटबंदी को लेकर भाकपा (माले) के प्रदेश सचिव पार्थ घोष ने कहा कि-केंद्र सरकार के इस कदम से आम जनता को काफी परेशानी हो रही है। भारत के बहुत सारे ऐसे पूंजीपति हैं जो यहां के बैंकों से करोड़ो रुपए कर्ज लेकर भारत से बाहर रह रहे हैं। ऐसे उद्योगपतियों के खिलाफ सरकार को सख्त कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के नोटबंदी को लेकर किसान और मजदूर वर्ग के लोग काफी परेशान हैं। केंद्र सरकार विदेश से कालाधन लाने में तो नाकाम रही और अब इस तरह के कदम उठाकर देश के लोगों को परेशान किया जा रहा है। इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल के श्रम व कानून मंत्री मलय घटक भी केंद्र के इस फैसले का विरोध करते हुए कहते हैं कि -विदेश से काला धन लाने में असफल होने के बाद प्रधानमंत्री ने जल्दबाजी में इस तरह का कदम उठाया जो आम जनता के खिलाफ है।

500 और 1000  के नोट बंद होने से यहां माइक्रो फाइनेंस संस्थानों की मुश्किलें भी बढ़ गईं हैं। माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं ने नोटबंदी के चलते ग्राहकों को अस्थाई तौर पर ऋण देना बंद कर दिया है तथा वापस किए जाने वाला ऋण भी बाधित हुआ है। दरअसल माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं का लेन-देन नगदी पर आधारित होता है, इसलिए 500 और 1000 के नोट बंद किए जाने से काफी दिक्कतें हो गईं हैं। विलेज फाइनेंस सर्विसेज के प्रबंध निदेशक कुलदीप माइती के मुताबिक ऋण वापसी के दर में काफी गिरावट आ गई है। इसलिए नए तौर पर ऋण दिया जाना भी फिलहाल बंद कर दिया गया है। उनका मानना है कि सरकार के इस फैसले से यह उद्योग काफी प्रभावित हुआ है। हालांकि इस सन्दर्भ में भारतीय रिजर्व बैंक एवं वित्त मंत्रालय से बातचीत की जा रही है।

दूसरी तरफ भाजपा नेत्री एवं राज्यसभा सांसद रूपा गांगुली केंद्र सरकार के इस कदम को साहसिक और सराहनीय बताती हैं। रूपा ने बताया कि प्रधानमंत्री ने जो भी कदम उठाया है, वह देश-हित में है। आम जनता को अभी थोड़ी परेशानी हो रही है मगर बाद में जरूर इसका सुखद परिणाम भी देखने को मिलेगा। इसके खिलाफ वही लोग आवाज उठा रहे हैं जो खुद भ्रष्ट हैं। कुल मिलाकर इस मुद्दे पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रहीं हैं।

कोलकाता से संजय सिन्हा

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