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कुछ लोगों को मोदी से इतनी नफरत क्यों है?

कुछ लोगों को मोदी से इतनी नफरत क्यों है?

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, तथाकथित हनीमून पीरियड के बाद भी, भारत के साथ-साथ दुनिया में लोकप्रिय बने हुए हैं। इस साल सितंबर में फोब्र्स की ओर से प्रकाशित प्यू रिसर्च सेंटर के एक हालिया सर्वे के अनुसार, 2014 में जबरदस्त बहुमत से सत्ता में आने के दो साल बाद भी मोदी की लोकप्रियता अब भी 81 प्रतिशत के साथ बुलंदियों को छू रही है। जनता के बीच लगातार समर्थन हासिल करने के साथ ही, उन्होंने कुछ बेहद शक्तिशाली और काफी मुखर दुश्मन भी बना लिए हैं।

हवाला के संचालन की दुर्दशा यहां हम उन तर्कसंगत राजनीतिक दलों का जिक्र नहीं कर रहे हैं जो सोचते हैं कि मोदी और उनकी सरकार चाहे कुछ भी करे उसे गाली देना उनका धर्म है। प्रधानमंत्री ने कुछ खास तबकों जैसे कर चोरी करने वालों, रीयल एस्टेट माफिया, भारत और विदेश में आतंकी गतिविधियों के लिए पैसा मुहैया कराने वालों के साथ ही उन लोगों को अपना दुश्मन बना लिया है, जिन्होंने बेहिसाब धन (जिसे भारत में काला धन कहते हैं) की भारी रकम छिपा रखी है, जिनमें हवाला कारोबारी भी शामिल हैं।

हवाला, जिसे हुंडी के नाम से भी जाना जाता है, विभिन्न देशों में लोगों के एक नेटवर्क द्वारा अनाधिकारिक माध्यमों से पैसे भेजने की एक पुरानी लेकिन अवैध प्रणाली है। एक एजेंट स्रोत देश में पैसा भेजने वाले से पैसा लेता है और दूसरे देश में अपने संपर्क सूत्रों के माध्यम से अंतिम प्राप्तकर्ता तक वहां की स्थानीय करेंसी में उसका भुगतान कर देता है। भारत और दक्षिण एशिया के अलावा, यह प्रणाली पश्चिमी एशिया, उत्तरी अमेरिका और कुछ अफ्रीकी देशों में प्रचलित है।

पीएम ने कैसे काला धन जमा करने वालों के खिलाफ कदम को समय से पहले घोषित किया

इस वर्ष 8 नवंबर को नमो सरकार की ओर से रुपए 500 और रुपए 1000 के उच्च मूल्य वाले बैंक नोटों का विमुद्रीकरण एक चौंकाने वाले फैसले से किया गया तो असमाजिक तत्वों को गहरा सदमा लगा। भले ही यह एक अचानक हुए सर्जिकल स्ट्राइक की तरह दिख रहा था, लेकिन पीछे मुड़कर देखें तो हमें पता चलता है कि केंद्र सरकार पिछले कई महीनों से बुनियादी तैयारी कर रही थी। अगर आपको याद हो, तो एनडीए सरकार ने हर किसी से कहा था कि वे बिना चूके आधार कार्ड बनवा लें। इसलिए हर किसी के लिए नामांकन की प्रक्रिया को काफ ी सरल और झंझटों से मुक्त बनाया था। फिर, इसने सारे बैंकों को निर्देश दिया था कि वे सभी को शून्य-बैलेंस वाले खाते खोलने में सहायता करें। सरकार ने कर चोरी करने वालों को भी अपनी सारी बेहिसाब संपत्ति घोषित करने और किसी भी प्रकार का जुर्माना चुकाए बिना सही अनुपात में टैक्स भरने का मौका दिया था। हालांकि, हमेशा की ही तरह, लोगों के कुछ वर्गों ने ऐसे सारे सुझावों और एनडीए सरकार की ओर से जारी निर्देशों को अनदेखा किया क्योंकि उन्हें हर समस्या से गुपचुप तरीकों का इस्तेमाल कर निकल जाने की आदत पड़ गई थी। उन्हें लगा कि वे व्यवस्था की आंखों में धूल झोंक देंगे और पहले की ही तरह किसी भी संकट से बाहर निकल जाएंगे। लेकिन इस बार, वे इस बात को भूल गए कि नरेंद्र मोदी, जो सर्वेसर्वा हैं, उन्हें किसी भी प्रकार से भ्रष्ट नहीं बनाया जा सकता और वे जो कहते हैं उसे कर दिखाते हैं।

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भ्रम में भ्रष्टाचारी, इसे रखें या जलाएं

चूंकि गोरखधंधा करने वाले ऐसे तत्वों को अब समझ आ गया है कि वे अपने फायदे के लिए व्यवस्था में हेरफेर नहीं कर सकते हैं, इसलिए वे मोदी से भयंकर नफरत करते हैं। मिसाल के तौर पर, रीयल एस्टेट माफियाओं का एक बड़ा वर्ग, जो पहले किसी सरकारी रसीद को दिए बिना ही न जाने कितने पैसे वसूल लिया करता था उसे अब लग रहा है कि उनके पास बोरियों में भरे उच्च-मूल्य वाले करेंसी नोट रातों-रात रद्दी हो गए हैं। उनकी कीमत उस कागज जितनी भी नहीं जिन पर उन्हें छापा जाता है।

यही नहीं, उन्हें डर है कि अगर वे आधिकारिक तौर पर विमुद्रीकरण वाली करेंसी को बैंकों या अन्य अधिकृत केंद्रों में बदलने का प्रयास करते हैं, तो वे सरकार की निगरानी में आ जाएंगे और इनकम टैक्स विभाग उनके खिलाफ बीते वर्षों के दौरान कर चोरी के मामले में दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है। रीयल एस्टेट डेवलपर भी समझ गए हैं कि वे भविष्य में अपने किसी भी ग्राहक से काला या बिना हिसाब-किताब का धन नहीं वसूल सकते हैं।

हवाला कारोबार पर भी अब तक की सबसे बुरी मार पड़ी है, और करेंसी की किल्लत के चलते इसका चक्का जाम हो गया है। हवाला कारोबारियों के पास पड़ा रहने वाले उच्च-मूल्य के करेंसी नोटों का अंबार अचानक कूड़े का ढेर बन गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ हवाला कारोबारियों ने घबराहट में आकर 500 करोड़ रुपए से अधिक की करेंसी को नष्ट कर दिया। किसी भी सूरत में, ऐसा माना जा रहा है कि 2,000 से 3,000 करोड़ भारतीय रुपए विदेश में पैसा भेजने वालों से इकट्ठा किए गए थे और वे सौंपे जाने वाले हैं। चूंकि यह पूरा सिस्टम भरोसे पर चलता है, इस कारण हवाला कारोबारी भुगतान नहीं करेंगे, तो पूरा सिस्टम हमेशा के लिए धराशायी हो जाएगा।

पाक के आतंकी फंडिंग पर एक और सर्जिकल स्ट्राइक

इसी प्रकार, विदेश में बैठे राष्ट्रविरोधी तत्व तथा संगठन जैसे पाकिस्तान की प्रमुख खुफि या एजेंसी, इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई), आतंकी हमले करवाने के मकसद से भारत में आतंकी संगठनों और फियायीन बम धमाके करने वालों को धन मुहैया कराते रहे हैं। आतंक की ऐसी फंडिंग पर लगाम लगाना मुश्किल होता है। सरहद के उस पार के ऐसे संगठन भी भारी मात्रा में फर्जी नोट का इस्तेमाल करते हैं, जो प्रमुख रूप से पाकिस्तान के सरकारी प्रेस में छपते हैं। वे वैसे ही कागज और स्याही का इस्तेमाल करते हैं जिसका इस्तेमाल भारत अपनी करेंसी को छापने के लिए करता है। कुछ आकलनों के अनुसार, आईएसआई स्थानीय कट्टरपंथियों और भारत विरोधी हमलों के लिए आतंकियों को धन मुहैया कराने के मकसद से भारतीय अर्थव्यवस्था में कम से कम 70 करोड़ रुपए के भर्ती भारतीय करेंसी नोट (एफआईसीएन) डालता है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था पर करारी चोट करता है और इसे पकडऩा भी काफी मुश्किल होता है। काले धन पर मोदी की सर्जिकल स्ट्राइक ने ऐसे जाली नोटों और पाकिस्तान के नापाक इरादों पर पानी फेर दिया है। इस घटना के कारण, मोदी के लिए उनकी जबरदस्त नफरत का ठिकाना नहीं है।

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क्यों विपक्ष नोटबंदी से कभी फायदा नहीं उठा सकेगा

प्रधानमंत्री के साहसिक फैसले ने मनी लाउंडरिंग करने वालों की एक भारी तादाद को कम से कम इस समय तो बेरोजगार कर ही दिया है। ये सारे तत्व हेट-मोदी खेमे में शामिल हो गए हैं, जिसमें अब तक राजनीतिक मौकापरस्त भरे थे जिन्होंने अब अपनी आवाज काफी बुलंद कर ली है। अरविंद केजरीवाल, मायावती, राहुल गांधी, मुलायम सिंह और असदुद्दीन जैसे देश के नेता जानते हैं कि प्रधानमंत्री की ओर से विकास की दिशा में उठाए गए सारे कदमों का फायदा अगर देशवासियों तक पहुंच गया तो उनका राजनीतिक भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। हालांकि, उन्हें यह एहसास नहीं होता कि देशवासी अब होशियार हो गए हैं और उनकी चाल को समझ सकते हैं।

इसी प्रकार,जिन अनैतिक राजनेताओं, भ्रष्ट अधिकारियों, और दागी कारोबारियों ने गलत धंधे से काला धन इकट्ठा कर लिया है, वे भी इसी उलझन में फंसे हैं। इस प्रकार, बरसों से काला धन इकट्ठा करने वाले और 500 तथा 1000 रुपए के नोट में उनका जखीरा रखने वाले सारे ही असामाजिक तत्वों ने नरेंद्र मोदी से नफरत करना शुरु कर दिया है और वे उन्हें बदनाम करने की मुहिम चला रहे हैं।

 सुनील गुप्ता

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