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”नोटबंदी: देश को सही दिशा में ले जाने के लिये बिल्कुल उचित व साहसिक प्रयास’’

”नोटबंदी: देश को सही दिशा में ले जाने के लिये बिल्कुल उचित व साहसिक प्रयास’’

काले धन के खिलाफ काफी सोचे-समझे महाभियान के पहले चरण नोटबंदी से होने वाली तकलीफें जल्द दूर हो जाएंगी और साफ हो जाएगा कि कौन काली कमाई के हक में है, कौन नहीं। यह कहना है केंद्रीय वित्तराज्य मंत्री संतोष गंगवार का। मंत्री जी ने इस योजना पर विस्तार से उदय इंडिया के संपादक दीपक कुमार रथ से बातचीत की। मुक्चय अंश:

क्या केंद्र सरकार का नोटबंदी का फैसला पूर्वनियोजित था?

आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के समय अपनी बातें देश की जनता के सामने रखते हुए काले धन की चर्चा की थी। यह सत्ता परिवर्तन केवल कुर्सी के लिए नहीं है। कुछ काम करने  के लिए है, जो सबको दिखाई दे रहा है। आपको ध्यान होगा की जब स्वैच्छिक आय घोषणा योजना आई, तब भी प्रधानमंत्री ने काला धन रखने वालों को अपने छुपाए धन को उजागर करने का अंतिम मौका दिया। उसके पश्चात उन्होंने कहा कि इस स्कीम को न मानाने वालों के विरुद्ध वे कड़ा कदम उठाएंगे। यह उसी कड़ी में उठाया गया कदम है। वास्तविकता यह है कि आदरणीय प्रधानमंत्री के ध्यान में आम आदमी का हित है और नोटबंदी इस संबंध में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे कुछ लोगों को असुविधा होना स्वाभाविक है लेकिन देश की बहुसंख्यक जनता इससे प्रसन्न है। देश के सवा सौ करोड़ लोगों में एक सौ दस-पंद्रह करोड़ लोगों को कोई समस्या नहीं है। केवल थोड़ी-सी कठिनाई अभी प्रयाप्त मात्रा में नोट नहीं मिलने से हो रही है। लेकिन शीघ्र ही नए नोट मिलने शुरू हो जायेंगे।  देश को सही दिशा में ले जाने के लिये यह बिल्कुल उचित व साहसिक प्रयास है।

सभी का मानना है कि सरकार का यह कदम सही है, लेकिन कुछ लोगों की शिकायतें है कि सरकार ने नोटबंदी की उचित तैयारी नहीं की।

यदि कोई यह कहे कि सरकार को कदम उठाने से पहले लोगों को संज्ञान में लेना चाहिए था, तो मेरा स्पष्ट मानना है की यह बताने वाला मामला नहीं है। एक नोट छपने में कम से कम चौबीस दिन का समय लगता है। 500 रु. और 1000 रु. के नोटों की करेंसी 86 प्रतिशत है। अत: समस्या होना स्वभाविक है। लेकिन धीरे-धीरे यह समस्या कम होती जा रही है। बैंकों में कतारों की संख्या में भी कमी आ रही है।

ओडि़शा सहित अन्य जगहों से दो हजार के नकली नोटों के पकड़े जाने की शिकायतें आ रही है।

यह जांच का विषय है।

सरकार ने कुछ मामलों में राहत दे रखी है। सरकार द्वारा किसानों, छोटे व्यापारियों और छोटे उद्योगों सहित अन्य वर्गों को छूट देने के संबंध में कुछ बताना चाहेंगे?

आम आदमी के लिए कोई संकट नहीं है। हां, लोगों को कतार में खड़ा होना पड़ रहा है लेकिन धीरे-धीरे बैंकों में पैसा आने से यह समस्या लगभग एक सप्ताह में दूर हो जाएगी। सरकार ने चौबीस तारीख तक कुछ खास जगहों पर पुराने नोट बदलने की छूट दे रखी थी। वो उन स्थानों पर जमा भी हुआ। अभी तक जो खबर है उसके अनुसार देश के विभिन्न बैंकों में कुल चौदह लाख करोड़ की धनराशि में से छह लाख करोड़ की धनराशि जमा हुई है।

अभी भी देश में बहुत ऐसे लोग है जिनका कोई बैंक अकाउंट नहीं है, वो इतनी जल्दी बैंक अकाउंट खोलकर कैसे चला सकते हैं?

 जन-धन के माध्यम से देश के पच्चीस करोड़ लोगों ने अपना बैंक अकाउंट खोला है। जैसा कि प्रधानमंत्री जी ने जीरो बैलेंस पर खाते खोलने को कहा था, उसके अनुसार इसमें से एक चौथाई खाते जीरो बैलेंस पर ही खुले हैं। ये खबर अवश्य आ रही है कि काला धन रखने वाले लोग इन खातों में अपने पैसे डलवा रहे हैं। इस पर हम नजर बनाए हुए हैं।

आप टेक्सटाइल मंत्री रहे हैं और जैसा कि टेक्सटाइल मिल में काम करने वाले मजदूरों या चाय बागान में काम करने वाले मजदूरों के पास बैंक खाते कम होते हैं। तो इन असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों  के वेतन का भुगतान कैसे होगा?

यह अच्छा प्रयास है। सबके खाते खुल जायेंगे। सबके खाते में ही उनका वेतन जाए। अब कम वेतन मिलने की शिकायतें न्यूनतम हो जाएंगी और सबको उचित और सही पैसा ही मिलेगा।

जैसा आपने कहा कि जनधन खाते में पैसा जमा होने की खबर आ रही है। कल शाम की खबर है कि पश्चिम बंगाल में खुले जनधन खातों में सबसे ज्यादा पैसे जमा हो रहा है।

इस पर अभी पूरी रिपोर्ट नहीं आई है। जहां तक जन-धन खातों में पैसा जमा होने की बात है तो जो लोग जन-धन के खातों में पैसा जमा कर रहे हैं, उनकी नीयत साफ समझ में आ रही है। मैं इस पर अभी कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा। परन्तु इतना अवश्य कहना चाहूंगा कि किसी के खाते का जो भी दुरुपयोग करेगा वह अपराध माना जायेगा और उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जायेगी।

सरकार ने नोटबंदी का फैसला आतंकवाद, कालेधन रखने वालो के विरुद्ध लिया था। लेकिन इसका  विरोध तो विपक्षी दल कर रहे हैं।

हमने विपक्ष से नोटबंदी पर लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विस्तृत चर्चा करने के लिए कहा है। लेकिन विपक्ष चर्चा करने से बच रहा है क्योंकि उसके पास इस विषय के विरुद्ध में बोलने के लिए कुछ नहीं है। जिनके संबंध काले धन वालों से है उन्हें इस बात से काफी परेशानी हो रही है। हम सभी चाहते हंै कि काले धन पर रोक लगे और हर पार्टी यह कहती है। थोड़ी-बहुत असुविधा है और प्रधानमंत्री जी भी इसे मानते हैं। इसलिए उन्होंने कहा है कि पचास दिन का उन्हें समय दें। धीरे-धीरे समस्या का समाधान आपको नजर आयेगा।

विपक्ष नोटबंदी पर संयुक्त संसदीय जांच समिति बैठाने की मांग कर रहा है।

पहले विपक्ष चर्चा तो करे, उसके बाद जरूरत पड़ी तो ज्वाइंट कमेटी का गठन होगा। संसद का सत्र आरंभ हुए एक सप्ताह से अधिक हो चुका है और यह कितने दुख की बात है कि अभी तक संसद का सत्र ठीक से नहीं चला।

देश के अंदर के काले धन को खत्म करने के लिए तो यह कदम समझ में आ रहा है। लेकिन देश के बाहर  के काले धन पर आपकी क्या राय  है?

चुनाव प्रचार  तथा और कई माध्यम से मोदी जी ने काले धन वालों को कला धन उजागर करने की बात कही है। लेकिन काला धन छुपाकर जो लोग देश के लिए समस्या उत्पन्न कर रहे हैं, उनके लिए सरकार समस्या बन जाएगी।

क्या सरकार नोटबंदी के फैसले को वापस लेगी?

यह संभव नहीं है।

александр лобановский детиvsemsmart.ru

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