ब्रेकिंग न्यूज़ 

संस्कारी पर्रीकर

संस्कारी पर्रीकर

लोग कहते हैं कि मनोहर पर्रीकर जमीन से जुड़े हुए नेता है और इस बार पर्रीकर जी ने इस बात को सच में प्रमाणित भी किया। पार्लियामेंट स्थित बालयोगी ऑडिटोरियम में स्वयं प्रधानमंत्री, केदारनाथ साहनी पर एक किताब का विमोचन कर रहे थे। जब तक रक्षा मंत्री पर्रीकर जी पहुंचे तब तक प्रधानमंत्री स्टेज पर पहुंच चुके थे और हॉल भी पूरी तरह भर गया था। तब पर्रीकर जी संस्कारों का परिचय देते हुए जमीन पर बिछे कालीन पर ही बैठ गए और कहने लगे मैं रोज शाखा जाता हूं और वहां ऐसे ही बैठता हूं, इसमें मुझे कोई शर्म नहीं। पर्रीकर जी को देख वित्त राज्यमंत्री अर्जुन मेघवाल भी उनके साथ बैठ गए। यह संस्कार पर्रीकर जी को संघ से ही मिले हैं कि जरूरत पडऩे पर कभी रक्षा मंत्री की कुर्सी पर तो कभी आदर्श स्वयंसेवक की तरह जमीन पर बैठने में संकोच नहीं करना चाहिए।



प्रियंका का ही सहारा


priyanka copy

कांगे्रस के पास घूम फिरकर प्रियंका का ही सहारा है। अब कांगे्रसी यहां तक कहने लगे हैं कि प्रियंका के पैरों में राजयोग है। जिधर जाएंगी, सत्ता की बहार लाएंगी। अभी हाल में राहुल गांधी के आवास पर नेताओं से अपनी तारीफ सुनकर खुद प्रियंका भी झेंपने लगीं थी। फिलहाल ख़बर है कि अब प्रियंका ने भी हामी भर दी है। वे जनसभा, रोड-शो, पदयात्रा सब करेंगी। अब आगे कांगे्रस की कुंडली जाने। क्या पता राहु-केतु का कुछ असर कम हो और यूपी में थोड़ा कमाल हो जाए।



पिटवाई भद्द


pk

कांगे्रस चुनाव प्रचार के प्रमुख रणनीतिकार पीके ने पूरी भद्द पिटवा ली है। जब से पीके महागठबंधन की योजना से यू.पी. में फेल हुए हैं, कांगे्रस अध्यक्ष सोनिया गांधी की भौंहें तन गई हैं। अहमद पटेल पहले ही खिलाफ थे। अब उ.प्र. प्रचार अभियान से जुड़े लगभग सभी कांगे्रस नेता पीके को लेकर असहज महसूस कर रहे हैं। वहीं पीके ने यूपी से ध्यान हटाकर पंजाब में केन्द्रित करना शुरू कर दिया है। वहीं सूत्र बताते हैं कि जल्द ही बड़ा धमाका होने वाला है।



गडकरी जी खुश


Nitin_Gadkari_1 copy

काम-काज में उस्ताद, नतीजे देने में माहिर और कामवीर- गडकरी जी खुश हैं। कोई कहे चाहे जो लेकिन ढाई साल में उनके विभाग ने कामकाज के जोरदार नतीजे दिए हैं। नाम के अनुरूप गडकरी ने न केवल अपने अधिकारियों का भरोसा जीता बल्कि गाहे-बगाहे पीएम भी उनकी तारीफ करने लगे हैं। वहीं गडकरी जी ने भी एक सीख ले ली है। वे तीन और तेरह में रहने की बजाय केवल अपने कामकाज पर ध्यान दे रहे हैं। भला सुकून किसे अच्छा नहीं लगता।



कमाल के जावड़ेकर


HRD_MIN_PJ copy

जावड़ेकर जी कमाल के हैं। विजिटर कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी उनकी तारीफ करने से खुद को नहीं रोक पाए। कुलपतियों से कामकाज की तारीफ सुनकर भी जावड़ेकर जी गदगद हैं। सुना है, इनमें से जो भी मिला किसी ने भी उनकी पूर्ववर्ती स्मृति ईरानी की तारीफ  नहीं की। वहीं टीम जावड़ेकर की बाछें खिल गई हैं। जावड़ेकर जी अभी कुछ नया करने की बजाय केवल विवादित मुद्दे किनारे रख सबकी सुन रहे हैं। बीच का रास्ता निकाल रहे हैं। जब कुछ करेंगे तब सोचिए क्या होगा।



मुलायम की गुगली


Samajwadi Party chief Mulayam Singh Yadav entering the parliament before presentation of the Rail Budget 2013-14. (Photo: IANS)

शिवपाल के साथ खड़े होकर मुलायम ने अखिलेश को अपना स्थापित उत्तराधिकारी बना दिया। मुलायम की इस गुगली से जहां शिवपाल और अमर सिंह की हेकड़ी ढ़ीली हो गई, वहीं महागठबंधन की आस लगाए नेता भी ठगे से रह गए हैं। जद(यू), रालोद, कांगे्रस समेत कई पार्टियों के नेताओं को न ही कुछ कहते बन रहा है और न ही कुछ सुनते। यहां तक कि शरद यादव, के सी त्यागी, चौधरी अजित की भी हवा गुम है। वहीं मुलायम ने लखनऊ में सबको मंच पर उतार कर अपनी पूरी गोट साध ली।



अवसर की तलाश


rahul

राहुल बाबा लोकसभा में अपना जौहर दिखाना चाहते हैं। शीतकालीन सत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर नया जुमला चिपकाने की तैयारी में हैं। वे चाहते हैं कि संसद के दोनो सदनों में न केवल चर्चा और सामान्य कामकाज हो, बल्कि कांगे्रस, सरकार पर जोरदार हमला बोले। पीएम पर चाल-चरित्र- चेहरा का तंज भी कसा जाए, लेकिन सत्तापक्ष गुलाम नबी आजाद से माफी की मांग को लेकर अड़ गया है। भाजपा की यह रणनीति देखकर कांगे्रस हैरान है। अब देखिए राहुल बाबा को आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर सेना की सर्जिकल स्ट्राइक पर बोलने का अवसर मिल पाता है या नहीं।


установка паркета ценаparket-ukladka.com

Leave a Reply

Your email address will not be published.