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काले धन के दैत्य का दमन

काले धन के दैत्य का दमन

मोदी, मोदी, मोदी! लौह-पुरुष मोदी। हे भगवान! हर किसी को यह क्या हो गया है? गरीब, किसान, व्यापारी, आतंकवादी, राजनैतिक नेता, अफसर, देश के दुश्मन, सभी मोदी से चौकन्ना हैं। आम आदमी अब थोड़ी राहत महसूस कर रहा है और थोड़ी-बहुत दिक्कतों के बावजूद गरीब तथा पिछड़े लोग मोदी के समर्थन में जुट आए हैं। हमारी सीमाएं अब कुछ ज्यादा सुरक्षित हैं। हमारे सैनिक अपने प्रधानमंत्री पर गर्व महसूस करने लगे हैं। न कहीं उपद्रव या दंगे हैं, न भ्रष्टाचार, लोग निडर होकर जीवन बसर कर रहे हैं। दरअसल समूचे देश को पक्का यकीन हो गया है कि जिसके कंधों पर उन्होंने सहज, संतुलित सरकार चलाने का जिम्मा सौंपा है, वह देश को सही दिशा में ले जा रहा है। मध्य प्रदेश, असम, अरुणाचल प्रदेश में उपचुनाव के भाजपा के पक्ष में नतीजों से भी साबित होता है कि आम आदमी नोटबंदी के फैसले का समर्थन कर रहा है।

बेशक, ’56 इंच सीना’ वाले लौह पुरुष मोदी का शुक्रिया, जिनके कंधों पर अब देश भरोसा करता है। मोदी जब दुनिया भर के दौरे कर रहे थे तो उनके राजनैतिक विरोधी उनकी आलोचना कर रहे थे लेकिन मोदी का कद तो विश्व नेता का हो गया। जब मोदी ने काले धन के खिलाफ मुहिम शुरू की तो काले धन के खिलाफ कोई कदम न उठाने के लिए हल्ला मचाने वाले ही आलोचना करने लगे। इससे कोई हैरान हो सकता है कि वे चाहते क्या हैं? क्या मोदी को देशहित में अपनी सरकार चलानी चाहिए या डॉ. मनमोहन सिंह की तरह रिमोट से निर्देश हासिल करने चाहिए?

इसमें दो राय नहीं कि नोटबंदी के फैसले से देश में काले धन की समांतर अर्थव्यवस्था पर भारी चोट पड़ेगी। काले धन का दैत्य जब हमारे पूरे अर्थिक ढांचे को तबाह करने की हालत में पहुंच गया है तो उसे खत्म करने के लिए युद्ध जरूरी हो गया है। बेशक, इससे कुछ तकलीफें होंगी, कुछ नुकसान होगा, लेकिन हमें उसके लिए तैयार रहना चाहिए। आखिर बिना कष्ट उठाए कुछ भी हासिल नहीं होता। हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कदम की सराहना करनी चाहिए कि उन्होंने उन राजनैतिक नेताओं को कठघरे में खड़ा कर दिया है, जो काले धन के संरक्षक हैं और जनता की तकलीफों के नाम पर संसद में घडिय़ाली आंसू बहा रहे हैं। कहने की जरूरत नहीं कि इस देश में पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और काला धन पैदा करने के तरीकों को बंद करने की बुनियादी जरूरत है। मोदी सरकार ने सत्ता में आने के साथ ही इस मोर्चे पर लगातार कई कदम उठाए हैं, जिनसे उसकी इस मामले में गंभीरता का अंदाजा लगता है।

कालेधन से जूझने के लिए नए-नए बेहतर उपाय तो स्वागतयोग्य हैं, लेकिन  नोटबंदी पर यह कहना कि इससे कुछ सुधरेगा नहीं, एक तरह का नकारवाद है, जैसा कि कुछ तथाकथित अर्थशास्त्री और अपने को विशेषज्ञ बताने वाले पत्रकार भविष्यवाणी कर रहे हैं। यह कहना लाजिमी है कि ये लोग आतंकी गतिविधियों में लगने वाले नकली नोटों पर या हिसाब-किताब पर लोगों के रवैए, भ्रष्टाचार और लेनदेन के तरीकों (नकदी से बिना नकदी के लेनदेन) पर शायद ही कुछ कहते-सुनते देखे जाते हैं। नकदीरहित लेनदेन वाकई हमारी अर्थव्यवस्था के लिए दीर्घकाल में बेहतर है। वे इस पर भी टिप्पणी नहीं करते कि मोदी सरकार ने बैंकिंग व्यवस्था की अकुशलता को सामने लाया है और बैंकों को सुधार करने पर मजबूर किया है। मोदी ने एक मायने में बर्र के छत्ते को छेड़ दिया है। वाकई उस व्यवस्था के खिलाफ खड़े होने के लिए साहस की दरकार है जिसके आप हिस्सा हैं। महज इसलिए यथास्थिति बनाए रखी जाए कि फिलहाल इससे अफरा-तफरी मच जाएगी और कुछ समय तक दिक्कतें रहेंगी, कोई समझदारी नहीं है। लोग जानते हैं कि काला धन उनके रोजमर्रा के जीवन को कैसे चौपट कर रहा है इसलिए उन्होंने तकलीफों के बावजूद इस कदम का स्वागत किया है। इसलिए नकारवादियों को अपना फैसला सुनाने के लिए कुछ महीनों का इंतजार करना चाहिए।

इसके अलावा, नोटबंदी का विरोध करने वाले लगातार यह दलील दे रहे हैं कि इससे काले धन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह दलील इसी तरह है जैसे कहा जाए कि बहते नल के नीचे फर्श को कितनी बार साफ कर लो, वह वैसा ही बना रहता है। जब सरकार ने इस साल जून से सितंबर तक स्वैच्छिक आय घोषणा योजना के तहत मौका मुहैया कराया तो कुछ ने ही इसका लाभ लिया। काले धन के जमाखोर चुप्पी लगाए रहे। इसलिए सरकार को नोटबंदी का कड़ा कदम उठाना पड़ा। अगर नोटबंदी नहीं होती तो बेहिसाब संपत्ति वाले, भ्रष्टाचारी और आतंकवादी आम आदमी को परेशान करने के लिए मजे से घूमते रहते। इसलिए यह सवाल तो काल्पनिक है कि नोटबंदी से क्या पूरा काला धन बाहर आ जाएगा। गौरतलब है कि नोटबंदी का तरीका सही है लेकिन कुछ दिक्कतें भी साथ जुड़ी हुई हैं। इनमें कुछ संयोग से हैं तो कुछ सोची-समझी योजना के तहत। यह कोई नहीं कहता कि अब सब कुछ साफ-सुथरा हो जाएगा लेकिन मौजूदा दिक्कतें पिछले 65 साल के संघर्षों और अपमान के मुकाबले कुछ भी नहीं हैं। अंत में, यह सही है कि युद्ध छिड़ गया है और काले धन के दैत्य के दमन के लिए हम सभी एकजुट हो जाएं।

दीपक कुमार रथ

दीपक कुमार रथ

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