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संतुलित आहार क्यों ?

संतुलित आहार क्यों ?

सही खुराक व खेलकूद बच्चों की ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी है। आजकल बच्चों को न तो संतुलित आहार मिल रहा है और न ही खेलने-कूदने का पर्याप्त समय ही, जिससे उनका शारीरिक व मानसिक विकास किसी न किसी रूप में अवश्य ही प्रभावित होता है।

भोजन की मात्रा कार्य के आधार पर होनी चाहिए। अगर थोड़ा काम करके पूरी खुराक या ज्यादा खुराक बच्चा लेगा तो वह मोटा हो जायेगा। वैज्ञानिकों का मत है कि अंदर जाने वाली कैलोरीज व कार्य के रूप में बाहर आने वाली कैलोरीज समान होनी चाहिए।

संतुलित भोजन में 50 प्रतिशत सलाद, सब्जियां व फल होने चाहिए। 25 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट जैसे रोटी, चावल, व 25 प्रतिशत प्रोटीन जैसे दाल, दूध, पनीर आदि होना चाहिए। भोजन में अधिक फाइबर होने चाहिए व सॉफ्ट ड्रिंक को भोजन में कोई जगह न दें।

पौष्टिक और संतुलित भोजन

कार्बोहाइड्रेट भोजन में सबसे अधिक होता है। ऊर्जा का सर्वाधिक स्त्रोत हैं फल, सब्जियां, मक्का, गेंहू, चावल। बच्चों के भोजन में इन खाद्य पदार्थों को शामिल करें।

वसा

वसा एसैंशियल फैटी एसिड का खजाना होती है। अनसैच्युरेटिड फैट बच्चों को दें जैसे सरसों का तेल, मूंगफली का तेल, सोयाबीन का तेल आदि। जबकि सैच्यूरेटिड फैट से कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है।

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प्रोटीन

बढ़ते बच्चों को प्रोटीन प्रतिदिन देना चाहिए, जैसे दालें, फलियां, सोयाबीन, पनीर, दूध, दही आदि डेयरी प्रोडक्ट्स इसके प्रमुख स्त्रोत हैं।

आयरन

आयरन की कमी बढ़ती उम्र में एनीमिया की वजह बन सकती है। आयरन हरी पत्ते वाली सब्जियों, अनाज, फलियों, ड्राई फ्रूटस से प्राप्त होता है। इनका सेवन बच्चों को पर्याप्त मात्रा में कराएं।

कैल्सियम

हड्डियों की ग्रोथ बढ़ती उम्र में होती है। इस समय में एक दिन में 1300 मिग्रा. कैल्सियम की आवश्यकता होती है, पर केवल भोजन में कैल्सियम की मात्रा इतनी नहीं होती तथा कोल्ड ड्रिंक्स तथा कॉफी ज्यादा पीने से कैल्सियम की और कमी हो जाती है। इसकी पूर्ति के दूध, पनीर, दही, केला व अन्य डेयरी उत्पाद ग्रहण करना जरूरी है।

जिंक

जिंक बढ़ते बच्चों की ग्रोथ के लिए बहुत आवश्यक है। दालें, पनीर, दूध आदि से आसानी से इसे प्राप्त किया जा सकता है। बच्चों के भोजन में इन चीजों को अवश्य शामिल करें।

प्रात:काल नाश्ता जरूर दें

  • प्रात:काल नाश्ता का जीवन में सर्वाधिक महत्व है। यह दिमाग के लिए जरूरी है। नाश्ता करने से चुस्ती-फुर्ती बनी रहती है और शरीर मोटा नहीं होता। नाश्ता न करने से मोटापा घटने के बजाय और बढ़ सकता है। पर नाश्ता हल्का और पौष्टिक दें।
  • नाश्ते में फास्ट फूड को शामिल न करें। इनमें कैलोरीज अधिक होती है और फाइबर्स न के बराबर होते हैं। इन्हें खाने से मोटापा, उच्च रक्तचाप, दिल के रोग और मधुमेह की बीमारी आदि हो सकती है। सॉफ्ट ड्रिंक्स से दांत खराब होते हैं और हड्डियां भी कमजोर होती हैं। इनमें मिले केमिकल अन्य रोग भी पैदा करते हैं। अत: इससे बचें।
  • फ्रूटस चाट, अंकुरित दालों की चाट, ड्राई फ्रूटस की चाट बनाकर बच्चों को नाश्ते में दे सकते हैं।
  • चीज की जगह पनीर का इस्तेमाल करें और बर्गर में भरने के लिए ताजा सलाद प्रयोग करें।
  • मैदा ब्रेड की जगह आटा या ब्राउन ब्रेड का प्रयोग करें।
  • कम फैट व कम ऊर्जा वाली चीजें ही बच्चों को नाश्ते में दें।

अन्य सावधानियां

बच्चों की टीवी अधिक देर तक न देखने दें क्योंकि वे बैठे-बैठे जंक फूड खाते व कोल्ड ड्रिंक्स पीते हैं। इससे ऊर्जा का व्यय नहीं हो पाता है। अगर टीवी देखना है तो खेलना-कूदना भी जरूरी है। प्रतिदिन 30 से 40 मिनट तक शारीरिक श्रम के रूप में बच्चों को खेलने-कूदने दें और पसीना आने दें। पसीना आना बहुत जरूरी है। इससे शरीर निरोग हो जाता है और बच्चों की नींद भी गहरी आती है। नींद अच्छी आने से बच्चों का पाचन संस्थान ही नहीं बल्कि शारीरिक व मानसिक विकास भी समुचित रूप से होता है। इसके लिए पूज्य स्वामी जी द्वारा प्रयुक्त योगाभ्यास व प्राणायाम को बच्चों की दिनचर्या में शामिल करें। खुराक व श्रम के संतुलन से ही बढ़ती उम्र के बच्चे स्वस्थ रहते हैं।

                (लेखक पतंजलि आयुर्वेद कॉलेज, हरिद्वार, के प्राचार्य हैं)

                (साभार: योग संदेश)

डॉ. डी. एन. शर्मा

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