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”पंजाब में जिस तरह का विकास है वह रूकना नहीं चाहिए’’

”पंजाब में जिस तरह का विकास है वह रूकना नहीं चाहिए’’

पंजाब के चुनाव में अकाली दल अगर जीतता है तो वह भाजपा के सहयोग से और भाजपा अगर जीतती है तो अकाली दल के सहयोग से। हम लड़ाई के लिए गठबंधन नहीं करते। हम गठबंधन धर्म का पालन करते हुए गठबंधन करते है,’’ ऐसा कहना है भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व संसद सदस्य (राज्यसभा) प्रभात झा का संजय कुमार बिसोयी के साथ एक साक्षात्कार के दौरान। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश:-

पंजाब में फरवरी में चुनाव हैं। पार्टी का क्या एजेंडा है?

केंद्र में भाजपा गठबंधन (एन.डी.ए) की सरकार है और पंजाब की जनता को पहली बार यह मौका मिला है कि केंद्र में जो सरकार है वैसी ही सरकार वो पंजाब में चुन सके। 14 बार कांग्रेस पंजाब में सरकार बना चुकी है और आठ बार अकाली। 2012 के चुनाव के समय यह कहा जा रहा था कि पंजाब में रिपीटिशन होता ही नहीं है लेकिन अकाली गठबंधन ने यह कर दिखाया। और इस बार फिर इतना काम कर दिखाया है कि गांव-गांव में लोग कह रहे हैं जो सरकार किसानों को 8 घंटे मुफ्त बिजली देती है उसी को वोट देंगे। जहां तक ‘आप’ की बात है तो वह एक  ‘पोलिटिकल एक्सीडेंट’ है।

चलिए ये मान लिया कि ‘आप’ ‘पोलिटिकल एक्सीडेंट’ है लेकिन भाजपा का सांगठनिक विस्तार नहीं दिखता पंजाब में।

अकालियों के साथ हमारा गठबंधन 1967 यानि पंडित दीनदयाल के समय से है। गठबंधन तोडऩे से नहीं चलता और ऊपर से माननीय मोदी जी और अमित शाह जी ने तय किया है कि साथ मिल कर चुनाव लडऩा है। हम 23 सीटों पर लड़ते थे और इस बार भी उन्हीं सीटों पर लड़ेंगे।

ऐसा कहा जा रहा है कि पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा है ही नहीं, कोई सांगठनिक विस्तार भी नहीं है और कार्यकर्ताओं में रोष भी है।

देखिये अकाली दल अगर जीतता है तो वह भाजपा के सहयोग से और भाजपा अगर जीतती है तो अकाली दल के सहयोग से। हम लड़ाई के लिए गठबंधन नहीं करते बल्कि गठबंधन धर्म का पालन करते हुए गठबंधन करते है।

लेकिन केंद्र में सरकार होते हुए भी सांगठनिक विस्तार न करना क्या कुछ अजीब नहीं लगता? कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी अनदेखी की जा रही है।

देखिये जैसे-जैसे पार्टी का दायित्व देश के प्रति बढ़ता है, कार्यकर्ता का भी उतना ही दायित्व बढ़ता है। हमारे कार्यकर्ता के दिल में कभी ऐसी भावनाएं नहीं आती। उसे पता है की अगर मोदी जी ने 23 सीटें तय की हैं तो 23 पर ही लडऩा है।

अकाली दल का इन पांच सालों का मीडिया में रिकॉर्ड काफी खराब माना जा रहा है। इस पर आप क्या कहेंगे?

केजरीवाल की छवि बहुत अच्छी थी मीडिया में। अब उनके 12 एम.एल.ए जेल में है और 21 पर तलवार लटक रही है। 4 सांसद है, उनका काम देख लीजिये। इन लोगो के पास खालिस्तानियों को जमा करने के अलावा कोई काम नहीं है। इसलिए जनता समझ गयी है कि केजरीवाल यानि दिल्ली का धोखेबाज।

लेकिन यह भी देखने की बात है कि गुजरात में भी ‘आप’ पहुंच गयी है और पंजाब में भी अकाली और कांग्रेस दोनों के लिए यह बड़ा खतरा बन गयी है। क्या इसको आप इग्नोर कर देंगे?

आप चलिए न मेरे साथ गुजरात फिर मैं दिखाता हूं किसकी पॉपुलैरिटी है। आप यहां बैठ के देख रहे है। हमारी पार्टी मीडिया परसेप्शन से नहीं चलती बल्कि ग्राउंड रियलिटी से चलती है।

बिहार चुनाव के वक्त आपके राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा था कि एक बार बैलट बॉक्स खुलने दो फिर सब तरफ भाजपा ही होगी। असम में तो सच भी हुआ लेकिन बिहार में क्या हो गया?

बिहार हमारे लिए सबक था, असम हमारे लिए प्रेरणा है। उत्तर प्रदेश और पंजाब हमारे लिए और प्रेरणा बनेंगी।

लेकिन ऐसा क्या है कि केजरीवाल या उनके अन्य नेता जहां भी जाते है लोगों की कतार लग जाती है उन्हें देखने के लिए?

आप लोगों को गलत जानकारी है। एक राजनीतिक दुर्घटना को देखने लोग जायेंगे ही। जब कोई एक्सीडेंट होता है तो घरवालों के अलावा बाहरी लोग भी देखने पहुंच जाते हैं। वही हो रहा है।

पिछले एक दशक के अकाली शासन में पंजाब ने कई विसंगतियां देखी, मसलन खाद की वजह से भू-जल में गड़बडिय़ां उत्पन्न हो गयी है। जिसकी वजह से बड़े इलाके में कैंसर जैसे रोग हो रहे हंै। उसके ऊपर ड्रग्स की वजह से पंजाब बदनाम हो रहा है।

पंजाब का 22 प्रतिशत यूथ आर्मी में है, 18 प्रतिशत एन. आर. आई. है तो क्या यह 40 प्रतिशत लोग ड्रगिस्ट हैं?  हम यह सब बात कर के  सेना का अपमान करते हैं जो देश का अपमान होता है। किस राज्य में ड्रग्स का व्यापार नहीं होता छोटा-बड़ा या ज्यादा? पंजाब को निशाना बनाया गया है। कांग्रेस के पास बोलने के लिये कुछ और नही है। पंजाब  के  लोग यही कह रहे हैं कि जिसकी केंद्र में सरकार है उसी को जिताएंगे।

नरेंद्र मोदी की लहर के बावजूद अरुण जेटली हार गए।

देखिये इससे समझ लीजिये ना की वहां सिख-जट्ट का कितना बड़ा मसला है। आज के दिन अमृतसर जाइये तो लोग उन्हें याद करते है की काश अरुण जेटली को जिता देते।

लेकिन सिद्धू को भी तो आपसे संभाला नहीं गया?

सिद्धू राजनीतिज्ञ नहीं हैं। वो एक क्रिकेटर और लाफ्टर क्लब के सदस्य हैं। अगर राजनीतिज्ञ होते तो यह समस्या ही नहीं होती। दिक्कत क्या है कि राजनीति में लोग जब सीढ़ी से ना आ कर लिफ्ट से आते हैं तो गलतफहमी के शिकार हो जाते हैं। सिद्धू को लगने लगा था कि वह पार्टी से बड़े हो गये हैं। आप जानते है कि अटल बिहारी वाजपेयी पिछले 11 साल से बीमार चल रहे हैं और उन्होंने बिस्तर पर से भी कहा कि मैं भले बीमार हूं किन्तु मेरी पार्टी को बीमार मत होने देना। आप कितने भी बड़े क्यों ना हो पार्टी से बड़े नहीं हो सकते।

क्या यह पार्टी की गलती मानी जाए?

गलती नहीं थी। पार्टी लोगों को लाती है, जोड़ती है। कहीं कुछ हो गया होगा, हम संभाल नहीं पाए होंगे या सिद्धू पचा नहीं पाये होंगे।

आप पंजाब के प्रभारी है तो आपको क्या लगता है कि पंजाब में क्या मुश्किलें हैं?

पंजाब में जिस तरह का विकास है वो रुकना नहीं चाहिए। पंजाब के किसान  खुश है।

लेकिन आप यह बात कैसे कह सकते है। यहां गोदामों के अभाव में अनाज सड़ रहा है?

ये आप आज से सात साल पहले की बात कर रहे हैं। आज ऐसी कोई स्थिति नहीं है। पंजाब में बिजली फ्री, पानी फ्री, किसानों को सॉइल कार्ड, किसानों का फसल बीमा, भारत सरकार की 70 योजनाए हैं जो पंजाब में सफलतापूर्वक चल रही हैं।

लेकिन कैंसर जैसी बीमारियां बढ़ रही है खाद की वजह से, उसका क्या?

ऐसी बीमारियां क्या इन वजहों से कहीं होती है। जो स्टडी हुई है उसमें अभी डोप्प्लेर  हुआ है जिसमें सिर्फ एक प्रतिशत में डिफेक्ट पाया गया है। आप 99 प्रतिशत की बात नहीं करते हैं। यह मजाक नहीं तो और क्या है?  इसीलिए अब जो खाद दिया जा रहा है वो नीम कोटेड दिया जा रहा है ताकि ऐसी समस्याएं ना आएं। पंजाब परिवर्तन का एक इतिहास रच रहा है। जाकर देखो वहां पर कितना पूंजीनिवेश हुआ है।

तो फिर कितना इन्वेस्टमेंट हुआ यह तो बताइये?  दो बार इन्वेस्टर्स समिट हो चुकी है।  सुखबीर सिंह बादल मीडिया पब्लिसिटी में करोड़ों खर्च कर देते हैं।

देखिये सुखबीर जी और प्रकाश सिंह बादल जी पंजाब के ऑक्सीजन है। वह बहुत काम कर रहे है। मतलब आप यह सोचिये कि क्या कोई सरकार किसी को तीर्थाटन पर भेजती है? पंजाब सरकार खुद के खर्चे पर लोगों को देश के विभिन्न भागों में तीर्थ के लिए भेजती है। वो भी डॉक्टर और सरकारी आदमियों के साथ। इतना तो कोई बेटा अपने मां-बाप के लिए भी नहीं करता।

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