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एक युग का अंत

एक युग का अंत

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता का 5 नवम्बर को रात साढ़े ग्यारह  बजे दिल का दौरा पडऩे के बाद चेन्नई के अपोलो अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई। हर जगह मातम का माहौल पसर गया। उनके शुभचिंतक आज भी गहरे शोक में हैं। जयललिता के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। जयललिता का अंतिम संस्कार मरीना बीच पर किया गया। इसी जगह पर जयललिता को राजनीति का पथ दिखाने वाले उनके राजनितिक गुरू और तमिल फिल्म के प्रसिद्ध अभिनेता एम. जी. रामचंद्रन का अंतिम संस्कार भी किया गया था।

2014 में जेल जाने के बाद से जयललिता की सेहत में लगातार गिरावट आ रही थी। इसके पश्चात वो ज्यादातर सामाजिक आयोजनों से दूर रहती थीं। बहुत दिनों तक उन्होंने अपनी गिरती सेहत की किसी को भनक तक नहीं लगने दीया। उनके साथी नेताओं  का कहना था कि जेल से निकलने के बाद अम्मा बदल गई थीं और यही कारण  था कि जयललिता ने अपने कई प्रोजेक्ट का उद्घाटन ऑनलाइन तथा कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये ही किया। ऐसा बताया जा रहा है की इन दो वर्षो में जयललिता ठीक से कभी खड़ी नहीं हो पाती थी।


अम्मा की राजनीतिक यात्रा


जून 24, 1991 :  जयललिता पहली बार एआईएडीएमके की कमान संभाली तथा भारी बहुमत के साथ तमिलनाडु में सरकार बनाते हुए पहली बार मुख्यमंत्री बनी।

अप्रैल 1997:  जयललिता पर आय से अधिक सम्पति होने का मुकदमा चला। जो उस समय के जनता दल के नेता सुब्रहण्यम स्वामी द्वारा चलाया गया था। जिसमे स्वामी ने जयललिता के पास 1991 से 1996 के बीच 66 करोड़ होने पर चलाये थे। उस समय जयललिता को जेल भी जाना पड़ा।

अक्टूबर 2000  :  चेन्नई की स्पेशल कोर्ट ने जमीन विवाद में उन्हें दोषी करार दिया।

मई  2002 :  जयललिता एक बार फिर सत्ता में आयी, चुकी इस बार उनपर चल रहे मुकदमों के कारण चुनाव नहीं लड़ी। लेकिन मुख्यमंत्री का शपथ लिया।

नवंबर 18, 2003 :  डीएमके के याचिका दाखिल करने पर सुप्रीम कोर्ट ने उन पर चल रहे आय से अधिक सम्पति के मामले को बेंगुलुरु की अदालत में भेज दिया।

मई 11, 2006 :  एआईएडीएमके की विधानसभा चुनाव में हार हुई और डीएमके शासन में आयी।

मई 2011 :  एआईएडीएमके एक बार फिर सत्ता में आयी और जयललिता मुख्यमंत्री बनीं।

नवम्बर 2011 : बेंगुलुरु स्पेशल कोर्ट ने जयललिता से 1399 प्रश्न पूछे।

सितम्बर 27, 2014 : बेंगुलुरु स्पेशल कोर्ट  ने जयललिता सहित तीन अन्य को सम्पति विवाद में दोषी ठहराते हुए चार साल की सजा सुनाई तथा कोर्ट ने जयललिता को 100 करोड़ और अन्य तीन को 10-10 करोड़ का जुर्माना लगाया। इस मामले के चलते जयललिता को नए कानून के संशोधन के चलते मुख्यमंत्री का पद छोडऩा पड़ा।

अक्टूबर 18 2014 : 21 दिन जेल में गुजारने के बाद जयललिता को कोर्ट से बेल मिल गई।

मई 22, 2015 : जयललिता को फिर पार्टी की कमान सौंपी गई।

मई 19, 2016 : एआईएडीएमके ने लगातार दूसरी बार सत्ता में आने का रिकॉर्ड बनाया।

सितंबर 22, 2016 : जयललिता को अपोलो अस्पताल में बुखार के कारण भर्ती किया  गया।

दिसम्बर 4, 2016 : जयललिता को दिल का दौरा पड़ा।

दिसम्बर 5, 2016 : रात साढ़े ग्यारह बजे जयललिता की मौत हो गयी।


 जयललिता का जीवन अत्यधिक कठिनाइयों से गुजरा। जब वो केवल दो वर्ष की थी तो उनके पिता का देहांत हो गया, मां को घर परिवार का पालन-पोषण करने के लिए फिल्मों और थिएटरों में काम करना पड़ा। बाद में जयललिता को भी अपने घर परिवार को चलाने के लिए छोटी सी उम्र में ही फिल्मों में काम करना पड़ा। आश्चर्यचकित करने वाली बात तो यह है कि जयललिता को फिल्मों में काम करने की कोई इच्छा नहीं थी। वो अभी अध्ययन करना चाहती थी।

जयललिता का राजनीति में प्रवेश उनके साथी कलाकार और उनके मार्गदर्शक एम् जी रामचंद्रन के कारण हुई।

जयललिता का राजनितिक जीवन कई उठा -पटक से होकर गुजरा। कई आरोप भी उन पर लगे। कई बार उनके   अपने नजदीकियों के द्वारा ही निंदा की गई, फिर भी लोगों के दिल में उनके प्रति प्यार कभी कम नहीं हुआ।  इसका सबसे महत्वपूर्ण कारण उनके द्वारा अपने कार्यकाल में तमिलनाडु में किया गया कार्य  है। जयललिता ने अपने पूरे कार्यकाल को गरीबों के प्रति समर्पित कर दिया। उन्होंने  हर कार्य को गरीबों को केंद्र में रख कर ही किया। यही कारण है कि आज तमिलनाडु लघु -उद्योग के क्षेत्र में अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ऊपर की श्रेणी में आता है। देश की बड़ी से बड़ी कंपनियां तमिलनाडु में आज कार्य कर रही हैं। यह सत्य है कि अब जयललिता के साथी नेता उनके पैरों पर गिरते हुए नहीं दिखेंगे, लेकिन जयललिता द्वारा किये गए कामों पर हम अपनी दृष्टि डालें तो हम  समझ जायेंगे कि आखिर क्यों तमिलनाडु के लोग उनको अम्मां के नाम से पुकारते थे। आखिर उनमें ऐसी क्या चीज थी कि उनकी पार्टी के सदस्य उनके पैरों पर गिर पडऩे को आतुर रहते थे? इसका केवल एक ही कारण है उनका गरीबों और महिलाओं की तरफ ज्यादा झुकाव रखना। इसका जीता-जागता उदाहरण है अम्मां के नाम से खुला सस्ता भोजनालय, सस्ती मेडिकल की दुकानें, फ्री लैपटॉप। ऐसी बहुत सी स्कीमें जयललिता ने शुरू ने की और शायद यही वजह है कि अम्मां को तमिलनाडु के लोग नहीं भूलेंगे। जयललिता के राजीनीतिक संबंधों पर नजर डालें तो दक्षिण भारत के अलावा अन्य राज्यों के नेताओं व  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अच्छे सम्बन्ध रहे हैं। यह अलग बात है कि अप्रैल 1999 में जयललिता की पार्टी एआईएडीएमके ने एन.डी.ए. से अपना हाथ पीछे खींचने से अटल जी की सरकार बहुमत साबित नहीं कर पायी और फिर से चुनाव कराने पड़े। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई मौके पर जयललिता की सराहना कर चुके है। 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद जयललिता की पार्टी ने कई बार लोकसभा में सरकार का साथ देते हुए दिखी, जो भाजपा के साथ अच्छे संबंधों को प्रदर्शित करता है।

उदय इंडिया ब्यूरो

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