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तब तू मेरा बेटा न रहकर केजरीवाल बन जाता

तब तू मेरा बेटा न रहकर केजरीवाल बन जाता

बेटा: पिताजी।

पिता: हां, बेटा।

बेटा: पिताजी, अरविंद केजरीवाल पंजाब में क्या हैं?

पिता: बेटा, वह तो दिल्ली के मुख्यमन्त्री हैं और आजकल पंजाब में अपनी आम आदमी पार्टी का चुनाव प्रचार कर रहे हैं।

बेटा: उन्होंने वहां कहा है कि चुनाव के बाद वह पंजाब के वर्तमान मन्त्री मजीठिया को कालर से पकड़ कर जेल में डाल देंगे।

पिता:  यह तो मैंने भी पढ़ा है।

बेटा: तो उन्होंने ऐसा क्यों कहा है?

पिता:  इसलिये कि उनको उम्मीद है कि चुनाव के बाद उनकी पार्टी सरकार बनायेगी।

बेटा: तो केजनीवालजी वहां क्या थानेदार होंगे?

पिता:  क्या मूर्खों वाली बात कर रहा है? दिल्ली के मुख्यमन्त्री क्या पंजाब में थानेदार बनेंगे?

बेटा: पंजाब के मुख्यमन्त्री बनेंगे फिर?

पिता:  बिलकुल बन सकते हैं यदि पंजाब के लोग चाहेंगे तो।

बेटा: हरियाणा निवासी दिल्ली के मुख्यमन्त्री अब पंजाब के मुख्यमन्त्री?

पिता:  बेटा, यह भारत की राजनीति है। इसमें सब कुछ सम्भव है।

बेटा: मान लिया कि वह मुख्यमन्त्री बन जायेंगे। तो किस संवधिान या कानून में यह प्रावधान है कि मुख्यमन्त्री किसी का भी कालर पकड़ कर उसे घसीट कर जेल धकेल सकते हैं?

पिता:  मुख्यमन्त्री को तो कोई अधिकार नहीं है।

बेटा: तो फिर वह ऐसा दावा क्यों कर रहे हैं?

पिता:  बेटा, चुनाव से ऐसा सब चलता है।

बेटा: तो क्या यही शब्द मजीठिया केजरीवाल के बारे में भी कह सकते हैं?

पिता:  बेटा, यह तो मैं नहीं कह सकता। मैं कोई राजनीतिज्ञ तो हूं नहीं।

बेटा: वैसे तो पिताजी, दिल्ली विधानसभा चुनाव के समय भी तो केजरीवालजी ने लोगों को कहा था कि दिल्ली में उनकी सरकार बनने के दस दिन के अन्दर तत्कालीन मुख्यमन्त्री श्रीमति शीला दीक्षित व उनकी सरकार में आधे से अधिक मन्त्री जेल में होंगे।

पिता:  हां, कहा तो था।

बेटा: तो उन में से कौन है आज जेल के अन्दर?

पिता:  कोई नहीं।

बेटा: तो उनके कथन की क्या कीमत रह गई?

पिता:  बेटा, मैंने बताया न कि चुनाव में सब चलता है।

बेटा: तो क्या चुनाव झूठ और झूठे वादों के सहारे ही जीता जाता है?

पिता:  यह तो मैं क्या कह सकता हूं? मै तो केवल इस बात का कायल हूं कि केजरीवालजी दमदार व्यक्ति हैं और कुछ भी बोलने से विल्कुल नहीं डरते।

बेटा: अच्छा, अब समझा यह उनकी दमदारी का ही फल है कि उनके विरूद्ध सब से अधिक मानहानि के मुकद्दमें चल रहे हैं। मुझे तो लगता है उनका नाम गिनी बुक ऑफ रिकार्ड में आने वाला है और वह देश के प्रथम मुख्यमन्त्री बनने वाले हैं जिनके विरूद्ध सब से अधिक ऐसे मुकद्दमें चल रहे हैं।

पिता:  बेटा, जो हिम्मत दिखायेगा उसे ऐसे जोखिम तो उठाने ही पड़ेंगे। तुम्हें पता है कि जब व्यक्ति फौज में भर्ती होता है तो उसकी जान को हर समय खतरा रहता है।

बेटा: कमाल है पिताजी आप केजरीवालजी का मुकाबिला एक फौजी से कर रहे हैं।

पिता:  बेटा, मै तुम्हें वैसे ही समझाने के लिये ही यह कह रहा था अन्यथा एक सैनिक और राजनीतिक व्यक्ति का कोई मुकाबिला नहीं।

बेटा: पिताजी, केजरीवालजी दिल्ली के लिये पूर्ण राज्य का दर्जा मांग रहे हैं। उससे हमारे जैसे साधारण व्यक्ति को क्या फायदा?

पिता:  हमारे को कोई फायदा नहीं। न उसके न होने से हमें कोई तकलीफ ही है। आम आदमी को सरकार से क्या काम पड़ता है? किसी को राशन कार्ड बनवाना होता है, किसी को गाड़ी का लाइसैंस बनवाना होता है, गाड़ी बेचनी या खरीदनी होती है। हमें काम पड़ता है पटवारी से, कानुनगो से, तहसीलदार से। यह काम तो जिला कार्यालय में ही हो जाता है।

बेटा: तो यह मांग जनता की है या आम आदमी पार्टी की?

पिता:  आम आदमी के नाम पर आम आदमी पार्टी की।

बेटा: यदि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाये तो केजरीवालजी को क्या फायदा है?

पिता:  उनके अधिकार बढ़ जायेंगे। दिल्ली पुलिस उनके अधीन हो जायेगी।

बेटा: उनका तो रूतबा भी बढ़ जायेगा। पहले वह झगड़ा करते थे उपराज्यपाल से, तब वह राज्यपाल से संघर्ष करेंगे।

पिता:  क्यों?

बेटा: जो काम वह करने में विफल रहेंगे उसके लिये किसी न किसी और को दोषी तो बनाना ही है। अब वह उपराज्यपाल को सिर दोष मढ़ते हैं, फिर राज्यपाल के सिर डालेंगे।

पिता:  बात तो तेरी ठीक है। लगभग एक मास पूर्व उन्होंने दिल्ली की समस्याओं को छोड़ कर जब पंजाब आदि प्रदेशों की ओर ध्यान करना शुरू कर दिया तो उन्होंने जनता को सन्देश दे दिया था कि उन्होंने जनता से किये सारे वायदे पूरे कर दिये हैं और जो रह गये हैं उनके लिये जनता उनसे नहीं, उपराज्यपाल से पूछे।

बेटा: पिताजी, पंजाब तो पूर्ण राज्य है न?

पिता:  बिल्कुल। पंजाब तो शुरू से ही पूर्ण राज्य रहा है।

बेटा: तभी केजरीवालजी ने मजीठिया को कालर से पकड़ कर जेल में धकेल देने की बात की थी।

पिता:  यह सच्चाई तो अवश्य उनके मन में रही होगी। तभी उन्होंने ऐसी धमकी दी।

बेटा: अगर पिताजी, दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाता है तो पुलिस उनके अधीन आ जायेगी।

पिता:  यह तो बेटा स्वाभाविक ही है।

बेटा: तब तो बेटा उनके कई राजनीतिक विरोधियों की शामत आ जायेगी। वह तो हर रोज ही किसी न किसी का कालर पकड़ते फिरेंगे।

पिता:  बेटा उनके मन की बात पढ़ लेना मेरे जैसे साधारण व्यक्ति के बस की बात नहीं है।

बेटा: पिताजी, यह तो मानना पड़ेगा कि केजरीवालजी काम करने की दृढ़ शक्ति रखते हैं।

पिता:  तू किस आधार पर यह बात कह रहा है?

बेटा: पिताजी, उन्होंने पंजाब की जनता को आश्वासन दे दिया है कि उनकी सरकार बनते ही वह एक मास के भीतर पंजाब को ड्रग मुक्त कर देंगे।

पिता: यह आश्वासन तो उन्होंने बड़ा जबरदस्त दिया है। पंजाब को बड़ी राहत मिलेगी।

बेटा: इसका मतलब तो यह हुआ कि उन्होंने पिछले दो वर्ष से कम समय में ही दिल्ली को ड्रग्ज की लानत से मुक्त कर दिया है।

पिता:  ऐसी बात तो नहीं है। भारत की राजधानी में भी इसकी विकट समस्या है। सरकार ने ही तो दिल्ली में जगह-जगह बड़े-बड़े होर्डिग्ज लगा रखे हैं और युवकों को ड्रग्ज से बचने की सलाह दी है। बेशुमार नशामुक्ति केन्द्र खोल रखे हैं। यदि नशे और ड्रग्ज की समस्या न होती तो इस अभियान की क्या आवश्यकता थी?

बेटा: यह बात तो समझ नहीं आई। यदि वह दिल्ली को दो वर्ष में ड्रग्ज मुक्त न कर सके तो वह पंजाब को एक मास में ऐसा करने का करिश्मा कैसे दिखा देंगे?

पिता:  बेटा, वह केजरीवालजी हैं। वह सब करिश्में कर दिखा सकते हैं। इसका मतलब यह कभी नहीं कि जो काम वह दिल्ली में कर पाने में असफल रहे उसी काम को करने में वह पंजाब में सफल नहीं होंगे।

बेटा: यहां तो मैं आपसे सहमत हूं। पर आप एक चीज बताओ। चुनाव के बाद कोई एक पार्टी बहुमत प्राप्त कर लेती है और अपनी सरकार बनाती है। वह सरकार उस पार्टी की होती है या पूरे देश या प्रदेश के लिये?

पिता:  वह पूरे देश व प्रदेश के लिये होती है। वह उस व्यक्ति के लिये भी होती है जिसने उस पार्टी को वोट नहीं दिया होता है।

बेटा: इसका मतलब तो यह हुआ कि चुनाव के बाद सरकार सबकी व सब के लिये होती है। वह किसी जाति, धर्म, लिंग या क्षेत्र से भेदभाव नहीं करती।

पिता:  बेटा, ऐसा हमारे संविधान में प्रावधान है।

बेटा: फिर हमारे नेता यह आरोप क्यों लगाते फिरते हैं कि अमुक सरकार में अमुक जाति, अमुक समुदाय, अमुक क्षेत्र या महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। क्या प्रत्येक समुदाय व जाति के मन्त्री अपनी-अपनी जाति व समुदाय के लोगों का ही कल्याण करते हैं और बाकियों का नहीं?

पिता:  ऐसी बात नहीं है। ऐसा नहीं होता और न होना ही चाहिये।

बेटा: तो फिर केजरीवालजी ने अपने चुनाव घोषणापत्र में यह क्यों कहा है कि उनकी पार्टी  सत्ता में आई तो एक दलित उप-मुख्यमन्त्री बनाया जायेगा?

पिता:  उन्होंने यह भी तो नहीं कहा है कि मुख्यमन्त्री कौन होगा या दलित उप-मुख्यमन्त्री कौन होगा।

बेटा: पिताजी, आम आदमी ने दिल्ली में कोई उप-मुख्यमन्त्री दलित बनाया है?

पिता:  दलित तो क्या उन्होंने तो कोई महिला भी मन्त्री नहीं बनाई है।

बेटा: इसका क्या मतलब? क्या उन्हें दिल्ली में दलित समुदाय व महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने व उन्हें न्याय दिलाने की कोई चिन्ता नहीं है?

पिता:  इसका मतलब यह कि सारे सपने सच्चे नहीं होते और सारे चुनावी वायदे पूरे नहीं किये जाते।

बेटा: पिताजी, चुनाव की यह राजनीति तो मुझे समझ नहीं आती।

पिता:  अच्छा है कि तुझे समझ नहीं आती। यदि आ जाती तो तू मेरा बेटा न रह कर केतरीवाल ही न बन जाता।купить пупсаПустые клики: где онлайн СМИ набирают миллионные аудитории читателей?

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