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दंत, त्वचा और हमारे बाल, करें सुंदरता की मांग

दंत, त्वचा और हमारे बाल, करें सुंदरता की मांग

आज का मनुष्य अपने शरीर के प्राकृतिक रख-रखाव पर ध्यान न देकर विभिन्न रासायनिक उत्पादों के प्रयोग द्वारा बीमारियों को बढ़ावा दे रहा है। दंत, त्वचा एवं बालों का मनुष्य के शरीर में सुंदरता व शरीर की सुघड़ता बनाने में अपना अमूल्य योगदान है। दंत जो मनुष्य की सुंदरता एवं पाचन क्रिया को बनाये रखने में सहायक सिद्ध होते हैं, वही त्वचा एवं बालों की देखभाल से हम शरीर को सशक्त व आकर्षक रखते हैं। प्रस्तुत लेख द्वारा दांत, त्वचा व बाल को आरोग्य पूर्ण बनाये रखने हेतु कुछ कारगर प्रयोगों पर चिंतन कर एक अच्छे स्वास्थ्य की ओर अग्रसर होने का संकल्प व्यक्त किया जा रहा हैं:-

एक अच्छे दांत तथा उन्हें दृढ़ता व शक्ति प्रदान करने वाले एनामेल के स्वास्थ्य के लिये विटामिन ए, बी, सी, कैल्शियम तथा फॉस्फोरस से युक्त आहार लेना जितना आवश्यक है, उतना ही चीना के बने पदार्थ के दांतों के लिए जहर है, इससे असमय दांत गिरते हैं और उनमें विभिन्न प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाने से अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। इससे व्यक्ति अपने दांतों की मजबूती को लम्बे समय तक बनाये नहीं रख सकता। इसी प्रकार टूथपेस्ट को लेकर भ्रम रहता है। कई तो दांत की स्वच्छता के नाम पर नामी-गिरामी कंपनियों के जहरीले रसायनों का प्रयोग कर बैठते हैं, जबकि स्वस्थ दांत के लिए निम्नलिखित साधारण से उपाय ही पर्याप्त हैं, जो प्रस्तुत हैं:-

  • भोजन को जितना चबाते हैं उतना ही दांतों का व्यायाम होता है तथा लार का क्षारतत्व दांतों को खराब करने वाले अम्लत्व के प्रभाव को उदासीन करता है।
  • इसी प्रकार निचले दांत ऊपरी दांतों पर जमकर गर्दन को ऊपर नीचे 10 बार दायें-बायें, 10 बार घड़ी की दिशा में तथा घड़ी की विपरीत दिशा में 10-10 बार बिना झटके के लय ताल में घुमायें।
  • मुंह यथासंभव खोलें। निचले जबड़े को यथासंभव धीरे-धीरे ऊपर उठाकर दांतों को जमायें। सामने डेढ़ गज की दूरी पर दृष्टि को स्थिर करते हुए 10 बार ठोढ़ी ऊपर उठाकर, 10 बार ठोढ़ी को कंठकूप में लगायें व 10 बार जबड़ों को तेजी के साथ दांतों को बिना टकराए गिराऐं-उठायें।
  • खाना खाने के पहले तथा बाद में दातून से दांत साफ करें। नीम का दातून मुख-कैंसर से बचाता हैं।
  • प्रतिदिन 10 नीम के कोमल पत्ते अथवा अन्य हरे पत्ते चबायें। इससे दांतों को क्लोरोफिल तथा रोगाणुनाशक तत्व मिलते हैं, दांत मजबूत तथा चमकीले होते हैं।
  • प्रत्येक भोजन के बाद ठोस, कड़े फल या सब्जी (ककड़ी, आंवला, अमरूद, सेब, ईख, गाजर आदि) चबाने से दांतों की सफाई होती है, दांतों के लिए यह अच्छा व्यायाम भी है। मुंह से बदबू आने की स्थिति में सरसों के तेल से दांतों एवं मसूड़ों की मालिश करें। एक बड़ा चम्मच सरसों के तेल को मुंह में भरकर 15 मिनट तक धीरे-धीरे चलायें और फिर गरारा एवं कुल्ला करें। इससे मुंह की बदबू, गले तथा दांत के रोग दूर होते हैं।
  • खट्टी तथा मीठी चीज खाने के बाद दांतों को ब्रश से अवश्य साफ करें अथवा गरम पानी से मुंह को धोये। इस प्रकार आपके दांत स्वस्थ्य चमकदार बने रहेंगे। स्वस्थ दांत भी हमारी सुंदरता की अभिव्यक्ति करते हैं।

Loss hair comb in women handत्वचा का स्वास्थ्य एवं सौंदर्य

लालिमा, सजीवता, आभा एवं सौन्दर्ययुक्त त्वचा आंतरिक स्वास्थ्य का प्रतिबिंब है। त्वचा की संरचना अद्वितीय है। इसके एक वर्ग सेंटीमीटर में 5 वसा ग्रंथियां, 4 ताप सूचक यंत्र, 4 गंज स्नायु, 10 रोमकूप, 25 स्पर्शानुभूति तंत्र, 100 स्वेद ग्रंथियां, 200 दर्द सूचक स्नायु छोर, 3 हजार संवेदना-ग्राहक कोशिकाएं, 30 लाख कोशिकाएं, 3 फुट रक्त-वाहिनियां हैं, जो अपने अद्भूत कार्य में निरंतर संलग्न हैं।

पेन्सिल्वेनिया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक पीटर विलियम्स के अनुसार पुरुष की त्वचा के एक वर्ग सेंटीमीटर में 24 लाख 10 हजार जीवाणु होते हैं। त्वचा की परतों में 14 लाख 60 हजार तथा ललाट पर प्रति वर्ग सेंटीमीटर में दो लाख जीवाणु होते हैं। वही एक ग्राम मिट्टी में एक करोड़ से दस अरब तक सूक्ष्म जीवाणु होते हैं, जबकि त्वचा के सिर्फ एक ग्राम बाहय छिलके में 5 अरब 30 करोड़ जीवाणु होते है। कंघी, चुम्बन, मालिश तथा एक-दूसरे के श्रृंगार प्रसाधनों के प्रयोग से ये जीवाणु संक्रमित हो कर बढ़ते घटते रहते हैं।

प्राय: सौन्दर्य विशेषज्ञ त्वचा के बाहा स्वास्थ्य पर ध्यान देते हैं, उसे विभिन्न रसायनों से सजाते-संवारते हैं। पर त्वचा रोगाणुओं से सर्दी-गर्मी से हमारी रक्षा करती है। सुखद, गर्म, ठण्डा, मौसम परिवत्र्तन, खुरदरा, नरम सभी प्रकार की संवेदनाओं की सूचना त्वचा द्वारा ही उपलब्ध होती है।

इसीलिए विशेषज्ञ बताते हैं कि बाल तथा त्वचा का स्वास्थ्य कृत्रिम सौन्दर्य-प्रसाधनों से नहीं, बल्कि प्राकृतिक सौन्दर्य प्रसाधन व विटामिन-ए, बी, सी, ई, युक्त जैविक संतुलित आहार, वायु सूर्य तथा विविध जलस्नान तथा तेल मालिश से मिलता है। इसी प्रकार सूखे तौलिये अथवा हाथों से घर्षण करने से त्वचा का स्वास्थ्य अक्षुण्ण रहता है। चेहरे पर बर्फ अथवा मुलायम तौलिये को शीतल जल में भिगोकर हल्की मालिश करने से भी चेहेरे का स्वास्थ्य खिलता है। तैलीय चेहरे प्रति रात्रि मुलतानी मिट्टी 100 ग्राम तथा एक नींबू का रस मिला कर लेप करें। सप्ताह में एक बार सारे शरीर पर 25 मिनट के लिए मुलतानी मिट्टी का लेप करें। धूप स्नान 15 मिनट लें। स्नान करके नारियल के तेल में नींबू का रस मिलाकर धूप में मालिश करें। स्नान करते समय रोयेदार तौलिये को बाल्टी में रखे पानी में भिगो-भिगोकर गरम-ठण्डा घर्षण स्नान लेने से त्वचा की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, त्वचा की स्वस्थ तथा आभामंडित होती है।

बालों का स्वास्थ्य

सौन्दर्य रक्षा में बालों का अपना स्थान है। बालों की अस्वच्छता तथा स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही के कारण गंजापन, बालों का झडऩा, सफेद होना, एक्जीमा, रूसी आदि रोग होते हैं। यह स्थिति या तो किसी प्रकार के रोग के कारण उत्पन्न होती है अथवा यह संकेत देती है कि बालों की देख-रेख ठीक प्रकार से नहीं हुई है।

निरंतर परेशानी दु:ख, चिन्ता, भय, क्रोध, आत्मग्लानि, उदासी, अवसाद, उत्तेजना, पुराना सिरदर्द, जुकाम, बैठा-ठाला जीवन, भारी व्यायाम, निरंतर संभोग, कब्ज सिफलिस, मलेरिया, अनिद्रा, टायफाइड, टी.बी., तंग टोपी, पगड़ी व हैट, रात्रि को देर से सोना, रक्त में यूरिक एसिड, एड्रीनलिन, हार्मोन शर्करा का ज्यादा होना तथा आवश्यक विटामिन- ए, बी, सी, ई, खनिज लोहा, तांबा, आयोडीन, उच्च स्तर के प्रोटीन, सफाई, धूप, व्यायाम, विश्राम की कमी एवं वंश परंपरा के कारण गंजापन तथा बालों के अन्य रोग होते हैं।

सामान्यत: प्रतिदिन 0.37 मिलीमीटर बाल बढ़ते है तथा 50 से 100 बाल झड़ते हैं। प्राय: भूरे बाल वालों के सिर पर लगभग डेड़ लाख, काले बाल वालों के सिर पर सवा लाख तथा सबसे कम लाल बाल वालों के सिर पर नब्बे हजार बाल होते हैं। झडऩे वाले बालों की जगह नये सुदृढ़ बाल स्वत: उग जाते है। इसके विपरीत बालों की बीमारी नानसिकाट्रीशियल बालों के लिए खतरनाक साबित होती है।

नानसिकाट्रीशियल स्थिति में बालों की जड़ नष्ट नहीं होती। यह स्थिति सिर पर फंगस, मानसिक तनाव, मलेरिया, टायफायड तथा अन्य दीर्घकालीन ज्वर या बीमारी के कारण होती है। बीमारी ठीक होने पर एक दो माह में पुन: बाल उग आते हैं।

जबकि सिकाट्रीशियल की स्थिति में फॉलिकल पूर्णतया नष्ट हो जाते हैं, फलत: बालों की पुन: उत्पत्ति नहीं हो पाती और गंजापन की स्थिति हैं, फलत: बालों की पुन: उत्पत्ति नहीं हो पाती और गंजापन की स्थिति पनपती है। यह विशेष प्रकार के त्वचा रोग टीनिया के कारण भी हो जाता है।

सिर के किसी विशेष स्थान से बाल झडऩे से ‘एलोपीसिया एरियेटा’, सिर के समस्त बालों के झडऩे को ‘टोटेलिस’ तथा सारे शरीर के बाल झडऩे को ‘यूनिवर्सेलिस’ की स्थिति कहा जाता हैं।

वायरल फीवर, मेनिनजाइटिस, हार्मोन (एंड्रोजन) असंतुलन, एक्सरे का दुष्प्रभाव, परीक्षा या अन्य पारिवारिक चिन्ताएं, देर तक रात्रि जागरण, थायरॉयड, कैंसर, रेडियो व कीमोथैरेपी, उच्च रक्तचाप, संधि दर्द तथा संक्रमण की दवा क्रमश: प्रोपरेनॉल, इण्डोमेथासिन, जेन्टामाइसिन के दुष्प्रभाव से भी बाल झडऩे लगते हैं।

पोषण व उपचार

बालों के पोषण हेतु भोजन में जैविक आहार लें। बादाम रोगन, जैतुन, शिकाकाई, आंवला, दही, तिल या सरसों के तेल में सम मात्रा में मेहंदी के पत्तों के ताजे रस को मंद आंच पर पकाकर सुरक्षित रखें। इसी से धूप में हथेलियों तथा अंगुलियों से बालों की जड़ों तक मालिश करें।

आहार में खीरे, ककड़ी, टमाटर, आंवला, गाजर, चुकन्दर का रस पीयें। अंकुरित अनाज, दूध, दही ताजे फल एवं फलों का रस तथा सलाद पर्याप्त मात्रा में खायें, ताकि कुपोषण से होने वाले बालों के रोगों को रोका जा सके। आसनों में सर्वांग आसन, हलासन, कर्णपीड़ासन, मत्स्यासन, शीर्षासन तथा कपालभांति, अनुलोम-विलोग तथा ध्यान विशेष लाभदायक हैं। इनसे बाल स्वस्थ, सुन्दर, मजबूत तथा चमकीले होते हैं।

                (साभार: योग संदेश)

डॉ. नागेन्द्र कुमार नीरज, पतंजलि योगग्राम

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