ब्रेकिंग न्यूज़ 

गोपालकृष्ण गोस्वामी श्रीकृष्ण भक्ति के शिखर पुरूष

गोपालकृष्ण गोस्वामी  श्रीकृष्ण भक्ति के शिखर पुरूष

श्रीकृष्ण के इस लोकनायक चरित्र ने ही उन्हें सार्वभौमिक लोकप्रियता प्रदान की। संसार की अधिकांश भाषाओं में गीता के अनुवाद के साथ कृष्ण की लीलाओं का यशोगान हुआ है। विभिन्न देशों में सिर्फ प्रवासी भारतीयों द्वारा ही नहीं बल्कि उन देशों के अपने निवासियों द्वारा भी श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व को बहुत पसंद किया जाता है। गौर वर्ण विदेशियों को भी सांवरे-सलोने श्रीकृष्ण के लावण्य ने, उनकी मधुर लीलाओं ने और एक कर्मयोगी के रूप में गीता द्वारा दिए गए संदेशों ने भक्ति रस में डुबो दिया। श्रीकृष्ण भक्ति में समूची दुनिया को मग्न एवं लीन करने में इस्कॉन की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस अंतरराष्ट्रीय सोसायटी ‘अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ’ की स्थापना स्वामी श्रील प्रभुपादजी ने सन् 1966 में न्यूयॉर्क सिटी में की थी। न्यूयॉर्क से प्रारंभ हुई कृष्ण भक्ति की निर्मल धारा शीघ्र ही विश्व के कौने-कौने में बहने लगी। कई देश हरे रामा-हरे कृष्णा के पावन भजन से गुंजायमान होने लगे। अपने साधारण नियम और सभी जाति-धर्म के प्रति समभाव के चलते इस इस्कॉन के अनुयायियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हर वह व्यक्ति जो कृष्ण में लीन होना चाहता है, उनका इस्कॉन स्वागत करता है। स्वामी प्रभुपादजी के अथक प्रयासों के कारण दस वर्ष के अल्प समय में ही समूचे विश्व में 108 मंदिरों का निर्माण हो चुका था। वर्तमान में इस्कॉन समूह के लगभग 500 से अधिक मंदिरों एवं केन्द्रों की स्थापना हो चुकी है। पूरी दुनिया में इतने अधिक अनुयायी होने का कारण यहां मिलने वाली असीम शांति है। इसी शांति की तलाश में पूरब की गीता पश्चिम के लोगों के सिर चढ़कर बोलने लगी। वर्तमान में इसके अन्तर्राष्ट्रीय अध्यक्ष है गोपालकृष्ण गोस्वामी। परमपिता परमेश्वर की जब अनंत कृपा होती है तब जाकर इस पावन धरा पर गोस्वामीजी जैसे किसी ज्ञानी-ध्यानी एव संत-महापुरुष का अवतरण होता है। किसी विशेष मिट्टी में ऐसे सद्गुरु का फूल खिलता है और वह अपने परम संबोधि के विस्फोट से नये युग-नयी चेतना का निर्माण करने को तत्पर होता है।

समग्र विश्व मानवता को श्रीकृष्ण और उनके दर्शन के गूढ़तम रहस्यों से परिचित कराने वाले गोपालकृष्ण गोस्वामी सचमुच! एक नजीर है। वे श्रीकृष्ण भक्ति के शिखर पुरुष है। ढेर सारी उपलब्धियों उनके नाम अंकित हैं। आप विश्रुत धर्माचार्य से पहले श्रीकृष्ण भक्त हैं। आपके वर्चस्वी जीवन व्यवहारों में संतता के दर्शन हर समय होते रहते हैं। आपका समग्र जीवन एक महान गंरथ हैं, जिसके हर पृष्ठ की हर पंक्ति में कुछ नयापन है। आपके व्यक्तित्व और कर्तृत्व की हिमालयी ऊंचाइयों ने आपको अंतर्राष्ट्रीय स्तर की ख्याति प्रदान की है। इतिहास के पन्नों में अंकित अक्षर मात्र अतीत की धरोहर ही नहीं होते वरन उसके पीछे छुपा होता है कर्तृत्व का वह सोपान, जिससे वर्तमान सजता है और वह हर आने वाले कल के साथ स्वर्णिम इतिहास का अविभाज्य अंग बन जाता है। गोपालकृष्ण गोस्वामी के यशस्वी व्यक्तिगत जीवन के अनेक कीर्तिमान है, लेकिन इस्कॉन से जुडऩे और अपना सम्पूर्ण जीवन इस मिशन के लिये समर्पित करने वाले श्री गोस्वामी ने इस्कॉन को एक नया शिखर दिया है।

संतता संस्कृति की वाहक होती है अत: संत ही अधिक प्रामाणिक तरीके से सांस्कृतिक तत्वों की सुरक्षा कर सकते हैं। गोस्वामीजी की गतिविधियों एवं इस्कॉन मिशन में भारतीय संस्कृति का आलोक सर्वत्र बिखरा मिलता है। दुनिया की आध्यात्मिक विचारधारा में उनकी विचारणा एक नया द्वार उद्घाटित करने वाली है। उनकी दृष्टि में संस्कृति कोई अनगढ़ पाषाण का नाम नहीं अपितु चिंतन, अनुभव और लगन की छेनियों से तराशी गयी सुघड़ प्रतिमा संस्कृति है। गोस्वामी ऐसे व्यक्तित्व का नाम है, जो वर्तमान में जीते हैं और भविष्य पर अपनी गहरी नजरें टिकाए रखते हैं। यही कारण है कि उनकी पारदर्शी दृष्टि आने वाले कल को पूर्व में पहचान लेती है और इसी का परिणाम है कि वे इस्कॉन मिशन के माध्यम से नयी सोच एवं नयी फिजां का निर्माण कर रहे हैं, जो मानवता के अभ्युदय का प्रेरक है।

गोपाल कृष्ण गोस्वामी का जन्म 14 अगस्त 1944 नई दिल्ली में हुआ। दुनिया भर में श्री विष्णु के अवतार माने जाने वाले श्रीकृष्ण की छवि को जगत-प्रसिद्ध करने वाले इस्कान मिशन के जाने माने आध्यात्मिक गुरु हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक करने के पश्चात इन्होंने पैरिस विश्वविद्यालय से बिजनेस मैनेजमेंट की उच्च शिक्षा प्राप्त की। इसी दौरान इनकी मुलाकात इस्कान मिशन के खोजकर्ता प्रभुपाद से हुई, जिन्हें मिलने के बाद ही इन्होंने इस्कान मिशन की ओर अपना रुख किया। कुछ समय के बाद प्रभुपाद महाराजजी ने इन्हें भारत में विद्यमान इस्कान मिशन के विभिन्न केंद्रों का मुखिया नियुक्त किया। वर्तमान में गोपाल कृष्ण गोस्वामी है कई देशों और क्षेत्रों दिल्ली, वृंदावन, मुंबई, मायापुर, चंडीगढ़, केन्या, कनाडा और उत्तरी अमेरिका और रूस सहित दुनिया के सम्पूर्ण इस्कॉन मिशन के मुखिया है। उन्होंने भारत सहित दुनिया में स्थान-स्थान पर अपने प्रभावी प्रवचनों, रेडियो, टीवी और अखबार में आलेखों- साक्षात्कारों के माध्यम श्रीकृष्ण के बहुआयामी व्यक्तित्व सहित हिंदू ग्रंथों जैसे, गीता और भागवत पुराण आदि पर दार्शनिक एवं चिन्तनपरक विवेचन एवं प्रस्तुति दी। उनके प्रभावी कार्यकाल की अनेक उपलब्धियां हैं। इस्कॉन के संस्थापकाचार्य स्वामी प्रभुपादजी द्वारा अमेरिका में भगवद-गीता के सन्देश प्रचार करने हेतु प्रथम समुद्री यात्रा की स्वर्ण जयंती पर आयोजित किये गये योग के अन्तर्राष्ट्रीय आयोजन ने गिनीज वल्र्ड रिकॉर्ड कायम किया। यह कीर्तिमान 13 अगस्त 2015 को कलकत्ता के नेताजी सुभाष स्टेडियम में 85 विभिन्न देशों के लोगों द्वारा एक ही स्थान पर सफलतापूर्वक योग करने पर बना था। जिसमें स्वयं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भी भाग लिया था। दूसरा कीर्तिमान 105 देशों के लोगों द्वारा एक साथ गायन पर बना था । इसमें सभी ने एक ही सुर में बंगाली गीत ‘श्रीगुरु चरण पद्म’ गाया था। हाल ही में प्रधानमंत्री निवास पर गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज एवं इस्कॉन के कम्युनिकेशन डायरेक्टर श्री बजेन्द्र नंदन दास ने मोदीजी को श्रीमद् भगवद् गीता की प्रति एवं आयोजन का एलबम भेंट किया। इस्कॉन ‘द इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्ण कॉन्सियसनेस’ है की स्थापना 13 जुलाई 1966 के इस वर्ष अपने 50 वर्ष भी पूरे करने से जुड़े आयोजनों को भी गोस्वामी ने अपनी सोच एवं मौलिकता से नये आयाम दिये हैं।

गोपालकृष्ण गोस्वामी के अनुसार पूरी मर्यादा से श्रीकृष्ण की भक्ति के उपरांत दीक्षा प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। श्रीकृष्ण की भक्ति से मुक्ति संभव है। उनका मानना है कि निंदा, द्वेष व दूसरे को नीचा दिखाने से बचना चाहिए। सदैव भगवान श्रीकृष्ण का चिंतन करते रहना चाहिए। सच्चे मन से जो श्रीकृष्ण का चिंतन करते हैं भगवान उनकी चिंता करते हैं।

श्री गोस्वामी इस्कॉन की गतिविधियों को विस्तारित करते हुए अब शिक्षा एवं सेवा के क्षेत्र में नये-नये प्रयोग कर रहे हैं। वे जगह-जगह होस्पीटल एवं स्कूलों को स्थापित कर देश एवं लोगों से जुडऩे का उपक्रम कर रहे हैं। आदिवासी एवं पिछड़े, उपेक्षित लोगों के कल्याण के लिये भी उनकी व्यापक योजनाएं हंै। वे गौ-माता के कल्याण के लिये भी आन्दोलनरत है। मानव चेतना के विकास के हर पहलू को जागृत करने के परम उद्देश्य को लेकर आप सक्रिय हैं। वे जगह-जगह श्रीकृष्ण भक्ति की अलख जगाने और ज्ञान-ध्यान की अतल गहराइयों में डुबकी हेतु जनमानस को प्रेरित करते हैं।

गोस्वामी जी का संपूर्ण जीवन श्रीकृष्ण भक्ति और इस्कॉन मिशन के लिये समर्पण की पराकाष्ठा है इसलिए वह स्वत: प्रेरणादायी है। उनके उपदेश जीवनस्पर्शी हैं जिनमें जीवन की समस्याओं का समाधान निहित है। वे चिन्मय दीपक हैं। दीपक अंधकार का हरण करता है किंतु अज्ञान रूपी अंधकार को हरने के लिए चिन्मय दीपक की उपादेयता निर्विवाद है। वस्तुत: उनके प्रवचन और उपदेश आलोक पुंज हैं। श्रीकृष्ण के जीवन की अतल गहराइयों एवं ज्ञान रश्मियों से आप्लावित होने के लिए उनमें निमज्जन जरूरी है।

गोस्वामी जी ने बताया कि हम लोग चैतन्य महाप्रभु के भक्त हैं, चैतन्य महाप्रभु का ही आदेश था कि भारतवासी अपना जन्म सार्थक करें, अर्थात जिसने भारत में जन्म लिया है वो स्वयं भक्ति करें और इस भक्ति का प्रचार प्रसार पूरे विश्व मे करें। तो एक तरह से चैतन्य महाप्रभु का ही आदेश लेकर प्रभुपादजी पूरे विश्व में निकले और अब उसी मिशन को गोस्वामीजी आगे बढ़ा रहे हैं। इस्कॉन का अन्तर्राष्ट्रीय केन्द्र कोलकता से करीब चार घंटे की दूरी पर मायापुर में है जो डिस्ट्रिक्ट नदिया में आता है यही चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव स्थल है।

ललित गर्ग    

yodle incлобановский александр отзывы

Leave a Reply

Your email address will not be published.