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नीम: वैश्विक समस्याओं को सुलझाने वाला पेड़

नीम: वैश्विक समस्याओं को सुलझाने वाला पेड़

कृषि में नीम के तेल, नीम के फल और नीम के विभिन्न उप-उत्पादों जैसे सीडकेक आदि को जैव कीटनाशकों, फफूंदनाशी और जैविक खाद के रूप में प्रयोग किया जाता है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि नीम का पेड़ ‘कीट नियंत्रण’ में एक नए युग का निर्माण करेगा और विश्व को प्रभावित करने वाली इस प्रकार की अन्य पारिस्थितिक समस्याओं को हल करेगा।

नीम को धीरे-धीरे विघटित किया जाता है जिसके कारण उसमें निहित पोषक तत्व धीमी गति से बाहर निकलते हैं। पोषक तत्वों का धीमी गति से बाहर आना, बीज और केक में विभिन्न निष्कर्षण सिद्धांतों की उपस्थिति के लिए उत्तरदायी होता है। इन प्राप्त तत्वों को नाइट्रोजन उर्वरकों जैसेकि यूरिया के रूप में एक परिणामी सहायक की तरह प्रयोग किया जाता है। ऐसा अनुमान है कि फसलों में प्रयोग होने वाली यूरिया की कुल मात्रा में 50 से 70 प्रतिशत मात्रा विभिन्न रूपों में नष्ट हो जाती है और इसलिए फसलों को नाइट्रोजन की उपलब्धता कम हो पाती है। भारत में नीमकेक को यूरिया के साथ मिलाने की एक पुरानी प्रथा है। जब नीमकेक को यूरिया के साथ मिश्रित किया जाता है तो यह एक अच्छी कोटिंग बनाकर डीनाइट्रीफिकेशन की प्रक्रिया द्वारा नाइट्रोजन के नुकसान को बचाता है और इस प्रकार से फसलों की आवश्यकता के अनुसार ही एक लंबी अवधि के लिए नाइट्रोजन की विनियमित निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित होती है। नीम सीडकेक फास्फोरस की मात्रा को थोड़ा बढ़ाने का कार्य करता है लेकिन पोटेशियम की मात्रा पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

भारतीय किसान, नीम के लाभ और महत्व को जानते हैं लेकिन नीम का इस्तेमाल हमारे देश में बहुत कम होता है। आजादी की 69वीं पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में ‘सेव वाटर, सेव एनर्जी, सेव फर्टिलाइजर’ की बात पर बल दिया था। प्रधानमंत्री के विजन को गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स (जी एन एफ सी) द्वारा अपनाया गया है और नर्मदा खेदुत सहाय केंद्र, सखी मंडल, पानी समितियों और दूध मंडलियों जैसे जमीनी स्तर वाले ग्रामीण संगठनों की सहायता से नीम के फलों के संग्रहण की एक प्रक्रिया विकसित की गई है।

नीम के फल संग्रहण की प्रक्रिया में शामिल एक लाख से अधिक महिलाओं ने एक सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण हासिल किया है जिससे उनकी अतिरिक्तआय में काफी वृद्धि हुई है। गुजरात में विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्र में एक सुसंगठित प्रणाली को स्थापित किया गया है।

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जी एन एफ सी का नीम प्रोजेक्ट प्रामाणिक रूप से यूरिया के दुरुपयोग को रोकने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, खेतों में यूरिया के उपयोग को कम कर रहा है, ग्रामीण गरीबों में विशेष रूप से महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय प्रदान कर रहा है, किसानों के व्यापक हित के लिए जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा दे रहा है, नीम के पेड़ को बचाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित कर रहा है और इसके साथ ही भारत की विदेशी मुद्रा की बचत कर रहा है।

मेक्सिको और हैती में किसानों ने और ऑस्ट्रेलिया में चरवाहों ने प्रचलित सिंथेटिक रासायनिक कीट नियंत्रण के स्थान पर सामान्य नीम आधारित स्प्रे का इस्तेमाल आरम्भ कर दिया है। इससे निरीक्षण केंद्रों पर अक्सर माल की लदाई रोके जाने की समस्या समाप्त हो गयी है और किसानों के लिए बिना रासायनिक अवशिष्ट का प्रयोग किए ही संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए आम और अन्य फलों का निर्यात करना आसान हो गया है। इसी प्रकार से नीम पर आधारित स्प्रे के कारण ऑस्ट्रेलिया में चरवाहों के लिए रासायनिक कीटनाशकों वाले प्रचलित ऊन के स्थान पर कीटनाशक मुक्त ऊन बनाना सुलभ हो गया है जिसे अधिक लाभ पर यूरोपीय खरीदारों को बेचा जा रहा है। खाद्य फसलों पर नीम के उत्पादों का इस्तेमाल करना, अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी द्वारा अनुमोदित किया गया है। वर्तमान में अधिक से अधिक सरकारी एजेंसियों द्वारा खाद्य फसलों पर नीम के इस्तेमाल को मंजूरी दी जा रही है।

जी एन एफ सी के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ राजीव कुमार गुप्ता का कहना है कि जी एन एफ सी द्वारा अपनाए गए मॉडल ने इस प्रकार के विकास वाले प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के लिए दूसरे देशों और कंपनियों को आगे आने के लिए प्रेरित किया है और वे सभी जी एन एफ सी के साथ संपर्क में हैं। जी एन एफ सी के इस नीम प्रोजेक्ट ने पहले ही साल में लगभग एक लाख ग्रामीण महिलाओं और भूमिहीन मजदूरों के लिए 10 से 12 करोड़ रूपये की अतिरिक्त आय पैदा की है।

भरूच जिले के वेदाच (कम्बोयागवा) गांव की श्रीमती जमनाबेन डी जादव ने दो महीनों में प्रतिदिन आधे घंटे काम करके कुल 9909 मीट्रिक टन नीम के बीज एकत्र किए। उन्होंने कुल 48,059 रूपये की कमाई की जोकि उनके लिए एक बड़ी आर्थिक सहायता बन गई। वास्तव में एक ग्रामीण महिला के लिए यह उल्लेखनीय उपलब्धि है जिसने प्रतिदिन सिर्फ आधे घंटे बिताए और इस राशि को कमाने में सक्षम हुई। इससे निश्चित रूप से उसकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बल मिला है।

नीम का पेड़ सिर्फ वैश्विक समस्या का समाधान ही नहीं है बल्कि यह विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में आय उत्पन्न करने के लिए बहुत अधिक मददगार है।

नीलेश शुक्ला

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