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आत्मनिर्भरता ही सुरक्षा की गारंटी: राजनाथ सिंह

आत्मनिर्भरता ही सुरक्षा की गारंटी: राजनाथ सिंह

दुनिया का कोई देश हो अगर हम उसकी आंतरिक और बाहरी सुरक्षा को फुलप्रूफ करना चाहते हैं तो जब तक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वह देश आत्मनिर्भर नहीं होगा तब तक उस देश की  आंतरिक और बाह्य सुरक्षा को पक्का करने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। यह तो हमको मानना ही होगा कि दुनिया का कोई भी देश हो अगर वह आत्मनिर्भर नहीं भी हो तो भी अपनी सुरक्षा के लिए उसको दूसरे देशो पर निर्भरता कम-से-कम करनी होगी। हम लोगों ने इस दिशा में प्रयास प्रारम्भ किया है। हमारे प्रधानमंत्री ने भी इस दृष्टि से कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जहां तक भारत का प्रश्न है, आप सभी जानते हैं कि आज से कुछ दशक पहले तक भारत एक कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था के रूप में जाना जाता रहा है जो की एक सच्चाई है। लेकिन आज भारत स्पेसलाइज्ड सर्विस इकोनॉमी में बदल रहा है। इसको सभी मानते हैं। आपको यह जानकर खुशी होगी कि भारत केवल सर्विसेज में ही नहीं, रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट के क्षेत्र में  भी इंटरनेशनल हब के रूप में उभर रहा है। मैं यहां एक रिपोर्ट का हवाला देना चाहूंगा। 2015 की एक रिपोर्ट है की रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट आउटसोर्सिंग का सर्वाधिक इन्वेस्टमेंट दुनिया के किसी देश में आया है तो वह भारत में आया है। 2014-15 में अमेरिका में रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट आउटसोर्सिंग का जो इन्वेस्टमेंट हुआ है, वह करीब 2.3 अरब डॉलर का है और चीन में यह करीब 9.7 अरब डॉलर है। विशेष रूप से ग्लोबल इंजीनियरिंग रिसर्च ऐंड डिजाईन के क्षेत्र में पिछले साल जितने भी रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट सेंटर खुले हैं, उनमें से 30 प्रतिशत से ज्यादा भारत में  खुले हैं। उसके आंकड़े भी हैं हमारे पास।

अप्रैल से लेकर दिसंबर 2015 तक करीब 190 रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट सेंटर खुले हैं जिसमें से 57 भारत में खुले हैं। इस 57 में 19 सेंटर मेक इन इंडिया के तहत खुले हैं। पिछले 2 वर्षों में मेक इन इंडिया के जरिये भारत में मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट बढ़ाने की जो कोशिश हुई है, उसका परिणाम यह हुआ है कि भारत विश्व की बड़ी कंपनियों के लिए एक आकर्षक इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन के रूप में उभर कर आया है। यहां तक कि डिफेन्स सेक्टर में भी मेक इन इंडिया इनिशिएटिव पहल के माध्यम से स्वदेशी डिफेन्स प्रोडक्शन को बढ़ावा दिया जा रहा है। और हमारी सरकार इस काम को तेजी के साथ आगे बढ़ाना चाहती है।

हाल ही में भारतीय वायु सेना में जो लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तैयार हुआ जिसे आप तेजस के नाम से जानते हैं, वह भी पूरी तरह से एक स्वदेशी उत्पादन है। मैं यह भी कहना चाहूंगा कि जहां तक हमारी सरकार का प्रश्न है, हमारी सरकार का पूरा फोकस है कि हम दुनिया के दूसरे देशों पर अपनी निर्भरता बना कर न रखें, बल्कि इसे जितना कम हो सके, वह करें। सरकार बनने के साथ ही यह सिलसिला हमलोगों ने शुरू कर दिया है। जहां तक रक्षा उपकरणों के खरीद का प्रश्न है, मैं कह सकता हूं कि पहले की तुलना में रक्षा उपकरणों की खरीद के बारे में जो फैसले लिए जा रहे हैं, तेजी से लिए जा रहे हैं।

उन पर अमल भी पहले की तुलना में तेजी के साथ हो रहा है। हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भारत में बने जो प्रोड्यूस है उसके लिए भी हमारी सरकार ने निर्णय लिए है। भारत में विदेशी कंपनियां भारतीय कंपनियों के साथ मिल कर डिफेन्स प्रोडक्शन में हिस्सेदारी करें, इसके लिए एफडीआइ सीमा को 26 प्रतिशत से बढ़ा कर हमलोगों ने 49 प्रतिशत कर दिया है। मेक इन इंडिया के माध्यम से डिफेन्स प्रोडक्शन में जो बड़ी कंपनियां भारत में आ कर मैन्युफैक्चरिंग करती हैं, उन्हें प्रोत्साहन भी हमने दिया है। पहले डिफेन्स प्रोडक्शन को जितना बढ़ावा मिलना चाहिए था, भले ही पूर्ववर्ती सरकारों ने इस सम्बन्ध में कार्य किया हो, लेकिन वो कामयाबी नहीं मिल पायी। और इस कारण डिफेन्स ऑर्डर्स में प्रतिस्पर्धा की जगह करप्शन भी बढ़ा है। इस तरह के आरोप आपको सुनने को मिले होंगे और साथ ही साथ मीडिया में पढऩे को मिले होंगे। इस क्षेत्र में सरकार ने प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के साथ साथ पारदर्शिता लाने के लिए भी कई बड़े कदम उठाये हैं।

मैं यहां मंगलयान की चर्चा करना चाहूंगा। हमने मंगलयान अनुमानित लागत खर्च से काफी कम में बनाया है और हम मंगल यान किफायती लागत में बनाने की क्षमता रखते हैं तो हम दुनिया के देशों से इम्पोर्ट करने के संबंध में अपनी निर्भरता बनाकर क्यों रखें, यह बात हमारी समझ के परे है। हम मेक इन इंडिया के माध्यम से डिफेन्स प्रोडक्शन को नई ऊंचाइयों तक ले जाना चाहते हैं। विदेशी कंपनियां डिफेन्स प्रोडक्शन या मैन्युफैक्चरिंग के लिए भारत आना चाहती हैं। मैं इजराइल और चीन दोनों जगह गया था तो वहां इजराइल के प्रधानमंत्री और चीन के पोलित ब्यूरो के सदस्य, जो होमलैंड सिक्योरिटी देखते हैं, दोनों ने कहा कि हमारे यहां से बहुत सारी कंपनियां भारत जाना चाहती हैं और वहां पर डिफेन्स प्रोडक्शन मे इन्वेस्टमेंट करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि हम न सिर्फ वहां इन्वेस्टमेंट और प्रोडक्शन करना चाहते हैं बल्कि जरूरत पड़ी तो ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी भी कर सकते हैं। भारत की यह साख, भारत की यह विश्वसनीयता पूरी दुनिया में तेजी के साथ फैली है और वैसे तो हमारे प्रधानमंत्री ने पहले ही कहा था कि ‘कम इन्वेस्ट इन इंडिया, कम मेक इन इंडिया। ‘और यह भी कहा था कि इसके लिए हमें जो भी सहूलियतें देनी होंगी, इंसेंटिव देना होगा,  वह भी हम देने के लिए तैयार हैं। जरूरत हुई तो हम पुनर्विचार करने को भी तैयार हैं। इस समय जहां तक भारत का सवाल है तो आप सभी जानते हैं कि भारत दुनिया की टॉप टेन अर्थव्यवस्था में से है और फास्टेस्ट ग्रोइंग इकोनॉमी दुनिया में इस समय किसी की है तो वह हमारे देश की है। यह भी हम लोगों का सौभाग्य है जबकि ग्लोबल ट्रेंड्स जितने पॉजिटिव होने चाहिए उतने है नहीं तो ऐसी सूरत में भारत की यह स्थिति बनी हुई है। एक साल में लगभग 51 अरब डॉलर एफडीआइ भारत में आई है, और आप जानते हैं कि ये जो एफडीआइ आई है, वह चीन और अमेरिका में आई एफडीआइ से ज्यादा है। भारतीय इकोनॉमी में इन्वेस्टमेंट साइकिल को तेज करने में सुनियोजित काम प्रारम्भ किया है और यह सिलसिला आगे बढ़ रहा है। हम ऐसी कोशिश कर रहे हैं कि देश में व्यवस्थागत और प्रक्रियागत बदलाव कैसे लाए जा सकें। जहां तक कारोबारी सहूलियत का सवाल है इसको भी बढ़ावा देने की कोशिश जारी है। 1 अप्रैल 2017 से जीएसटी को लागू करने का प्रयत्न अपनी तरफ से हमलोग कर रहे हैं, कुछ कठिनाइयां आ रही हैं लेकिन मैं समझता हूं कि उनका समाधान निकलेगा और हमारा जो टारगेट है कि 1 अप्रैल 2017 तक जीएसटी लागू करने का, वह पूरा हो जायेगा, ऐसा मेरा विश्वास है।

इससे अलग- अलग टैक्स होने कारण जो बहुत सारी कठिनाइयां होती थीं, वह दूर होंगी। मैं समझता हूं कि टैक्स कलेक्शन भी बढ़ेगा और विशेष रूप से जीडीपी में भी 1.5 से लेकर 2 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होगी। यह हमने सोचा है। इससे मैं मानता हूं की टैक्सेशन में भी ट्रांसपेरेंसी आएगी। जहां तक करप्शन और ब्लैक मनी का सवाल है तो पहले दिन से ही सरकार ने इस दिशा में कार्य प्रारम्भ किया है। हमारी सरकार की पहली कैबिनेट मीटिंग में ही हमने ब्लैक मनी के खिलाफ एसआइटी का गठन किया था। और काले धन और बेनामी सम्पति के खिलाफ भी हमारी सरकार ने जंग छेड़ी है। ब्लैक मनी की जो समानांतर अर्थव्यवस्था चल रही थी उसके खिलाफ भी हाल ही में कुछ कदम उठाये गए हैं।

मैं यह भी कहना चाहूंगा कि इनोवेशन और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए भी कई योजनाएं हमारे प्रधानमंत्री ने चालू की हैं। यहां मैं चर्चा करना चाहूंगा स्टार्ट अप इंडिया की। आप सहमत होंगे कि स्टार्ट अप किसी भी देश की इकोनॉमी को डायनामिक बनाने में बड़ा योगदान होता है। प्रधानमंत्री ने जनवरी 16 में ही स्टार्ट अप एक्शन प्लान की घोषणा की और यहां टैक्स हॉलिडे, कैपिटल गेन टैक्स  जैसी रियायतें दी हैं, वहीं पर 10,000 करोड़ रु.का एक डेडिकेटेड फंड भी हमारी गवर्नमेंट ने बनाया है। स्टार्ट अप से स्पेशल सर्विसेज के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग को भी, मैं  समझता हूं, निश्चित रूप से बढ़ावा मिलेगा। और सर्वाधिक लाभ अगर किसी को मिलना है इससे, वो है हमारे नौजवानों को। साथ ही रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। और मैं यह मानता हूं कि भारत अब प्रगति की राह पर है। अगर ऐसे ही हम चलते रहे और हमारे देश की इकोनॉमी को ताकत मिलती रही तो आगामी 10 से 15 साल में ऐसे हालात पैदा हो सकते हैं कि हमारा भारत जो आज टॉप 10 अर्थव्यवस्थाओं में जाना जाता है, वो शायद टॉप 3 अर्थव्यवस्था में जाना जाने लगे। और इसके लिए जो भी करना पड़ेगा, यह हम लोगों का संकल्प है कि हम करेंगे। भारत को हम सशक्त भारत बनाना चाहते हैं, स्वाभिमानी भारत बनाना चाहते हैं, स्वाबलंबी भारत बनाना चाहते हैं।

                उदय इंडिया ब्यूरो

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