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आतंकवाद बहादुरों का नहीं कायरों का औजार

आतंकवाद बहादुरों का नहीं कायरों का औजार

जम्मू-कश्मीर का शायद ही कोई क्षेत्र होगा, जहां सेना या सुरक्षा बलों के किसी जवान ने शहादत न दी हो। जहां एक तरफ हमारे सेना और सुरक्षा के जवानों ने देश और प्रदेश की सुरक्षा के लिए शहादत दी है वहीं दूसरी तरफ यहां के लोगों ने भी देश और प्रदेश की सुरक्षा के लिए जितने कष्ट उठाए हैं, उससे भी मैं भली-भांति परिचित हूं। मुझे मालूम है कि कई बार सीमा पर रहने वाले हमारे नागरिकों को भी अपनी जान गंवानी पड़ती है। मैं समझता हूं कि सेना और सुरक्षा बलों के जवानों की शहादत के कारण और साथ ही साथ सीमा पर रहने वाले जांबाज बहादुर नागरिकों के कारण आज भी हमारा यह जम्मू-कश्मीर भारत के मुकुट की तरह चमक रहा है।

कभी-कभी चिंता होती है कि हमारा पड़ोसी  देश पाकिस्तान बार-बार भारत के साथ क्यों टकराता है। हम इस सच्चाई को समझते हैं कि पाकिस्तान हमारा पड़ोसी है और यह भी सत्य है कि जिंदगी में दोस्त बदल जाते है लेकिन पड़ोसी कभी नहीं बदलता है। हमारे सभी प्रधानमंत्रियों ने पड़ोसी के साथ जितने बेहतर रिश्ते हों, उतना बनाये रखने के प्रयास किए हैं। अटल जी, अपने कार्यकाल में जो भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे उन सभी से यही कहा करते थे कि जीवन में दोस्त बदल जाता है लेकिन पड़ोसी नहीं बदलता है। अटल जी की उस भाषा को भी पाकिस्तान ने नहीं सुना। पाकिस्तान के साथ हिंदुस्तान की चार-चार बार जंग हुई है लेकिन मैं शीश झुका कर अपनी सेना और सुरक्षा बलों के जवानों का अभिनंदन करता हूं, जिन्होंने चारों बार पाकिस्तान के दांत खट्टे तथा हौसले पस्त कर दिए। 1999 के करगिल युद्ध में भी पाकिस्तान को शिकस्त खानी पड़ी।

अब पाकिस्तान समझ चुका है कि वह हिंदुस्तान को किसी भी सूरत में सीधे पराजित नहीं कर सकता है। यही कारण है कि पाकिस्तान ने छद्म-युद्ध का सहारा लिया है। पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर को आतंकवाद  के सहारे भारत से अलग करना चाहता है। पाकिस्तान को यह बात समझ लेनी चाहिए कि आतंकवाद बहादुरों का नहीं, कायरों का हथियार होता है। पाकिस्तान यह सोचता है कि वह भारत को मजहब के आधार पर एक बार फिर बाट देगा। भले ही 1947 में भारत का विभाजन मजहब के आधार पर हो गया लेकिन आज भी अपना दिल उसे स्वीकार नहीं करता। हमारा दिल ये कहता है कि इस भारत मां की कोख से पैदा लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान एक दूसरे का भाई-भाई है। शायद पाकिस्तान को इस बात की जानकारी नहीं है। इस्लाम के बहत्तर फिरके होते हैं जो किसी इस्लामी देश में भी पूर्ण रूप से नहीं पाए जाते। दुनिया के किसी एक देश में यदि ये फिरके पाए जाते हैं तो वो हमारे और आपके इस भारत देश में पाए जाते हैं। पाकिस्तान हमेशा भारत के साथ टकराने का प्रयास करता है और मजहब के आधार पर भारत का विभाजन भी कराने में सफल रहा। इससे पहले की सरकारों ने धर्म के आधार पर हिंदू और मुसलमान के बीच में भेदभाव करने का प्रयास किया। मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा, लेकिन भारत का गृह मंत्री होने के नाते और अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी की नीयत को जहां तक मैं समझता हूं उस आधार पर मैं यह कह सकता हूं कि हम हिंदुस्तान में सभी को साथ लेकर चलेंगे,  कदम मिला कर चलेंगे।

दुनिया के सभी देश आइएसआइएस को लेकर चिंतित हैं लेकिन मैं इस देश का गृह मंत्री होने के नाते निर्भीक रूप से कह सकता हूं कि आइएसआइएस भारत के अंदर अपनी जड़ें नहीं जमा पाया है और मैं उसका श्रेय भारत के मुसलमानों को देना चाहता हूं। किसी को पता नहीं होगा कि इस्लाम को मानने वाले ऐसे बच्चों के माता-पिता मुझसे मिले, जिनके बच्चों के अंदर उग्र मानसिकता भर दी गई थी। उन्होंने मुझसे अपने बच्चों को बचाने को कहा। यह सोचने वाली बात है कि उनके बच्चे बाहर भी जाते हैं तो ये आकर सरकार को सूचित करते हैं। इस भाव को  समझने की आवश्यकता है। पाकिस्तान इसे नहीं समझ सकता है।

भारत का विभाजन मजहब के आधार पर हुआ और पाकिस्तान अस्तित्व में आया लेकिन कोई भी पाकिस्तान को एक नहीं रख पाया। 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े हुए और यदि पाकिस्तान अपने हरकतों से बाज नहीं आया तो अभी तो पाकिस्तान के दो टुकड़े हुए है, संभवत: पाकिस्तान के दस टुकड़े हो जाएं और वह खंड-खंड हो जाये। पाकिस्तान को खंड-खंड करने का काम भारत नहीं करेगा क्योंकि हमारी सोच और हमारी नीति कभी विस्तारवादी नहीं रही है और इतिहास इसका साक्षी है। पूरी दुनिया में भारत अकेला ऐसा देश है जिसने विस्तारवादी सोच से किसी दूसरे देश पर आक्रमण नहीं किया है। हम किसी देश के ऊपर कब्जा नहीं करना चाहते हैं। हम किसी देश को परेशान भी नहीं करना चाहते हैं।

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भारत एक ऐसी धरती है जहा के ऋषियों और मुनियों ने केवल भारत की सीमा में  रहने वाले लोगों को ही अपने परिवार का सदस्य नहीं माना बल्कि पूरे संसार में रहने वाले लोगों को अपने परिवार का सदस्य मानते हुए ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का संदेश दिया है, जो इस भारत की धरती से गया है। हम भारतीय उस संस्कृति और विचारधारा को मानने वाले हैं। हम केवल भारत में रहने वाले लोगों को ही अपना सदस्य नहीं मानते बल्कि सारे विश्व की धरा पर रहने वाले लोगों को अपने परिवार का सदस्य मानते हैं।

मैं आप सभी को याद दिलाना चाहूंगा कि करगिल युद्ध समाप्त होने के बाद भी अटल जी ने पाकिस्तान के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाया था और वे पाकिस्तान भी गए। सोचने वाली बात तो यह है कि पाकिस्तान ने उसके बदले में दिया क्या? पाकिस्तान बार-बार सीमा पर से सीजफायर का उल्लंघन करता है। पाकिस्तान से आये पाक रेंजर्स के कुछ अफसर मुझसे मिले थे। तब मैंने उनसे कहा था कि मैं विश्वास दिलाना चाहता हूं कि  हमारे बॉर्डर सिक्यूरिटी के जवान पहली गोली अपनी ओर से किसी पाकिस्तान के नागरिक के ऊपर कभी नहीं चलाएंगे, क्योंकि कभी न कभी पाकिस्तान भी हमारे ही परिवार का अंग रहा है। आज भी हम उन्हें अलग नहीं मानते। आज भी वे हमारे भाई हैं। किसी भाई के ऊपर हम गोली नहीं चलना चाहते। फिर मैंने उनसे कहा कि जा कर यह संदेश दे देना कि पहली गोली भारत के सिक्यूरिटी जवानों पर न चलाएं, वरना हम अपने जवानों से कहेंगे कि तुम गोलियां चलते समय कभी मत गिनना।

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यह बात अक्टूबर 2014 में जब मैंने जिम्मेदारी संभाली तभी साफ-साफ कह दिया था। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी के शपथ ग्रहण के पहले जब मैं पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष था तब हम सभी ने बैठ कर यह निर्णय लिया कि यदि हम भारत को एक समृद्ध भारत बनाना चाहते है तो हमें पड़ोसी देशों के राष्ट्राध्यक्षों या शासन प्रमुखों को भी इस शपथ समारोह में बुलाना चाहिए। इस निर्णय के बाद हम लोगों ने उन्हें निमंत्रित किया। नवाज शरीफ भी शपथ समारोह में आये। हमने नवाज शरीफ को केवल हाथ मिलाने के लिए निमंत्रित नहीं किया था बल्कि दिल से दिल मिलाने के लिए निमंत्रित किया था। पाकिस्तान को हमारे इस मनसूबे को समझना चाहिये था। हमारे प्रधानमंत्री यहीं तक नहीं रुके बल्कि सारे प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए, वे नवाज शरीफ के पारिवारिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए अफगानिस्तान से पाकिस्तान पहुंच गए। आखिर पाकिस्तान क्या चाहता है? हम अपना कलेजा निकाल कर रखते हैं कि हमारा पड़ोसी हमारे साथ मिल-जुल कर रहे। भारत का भी विकास हो, पाकिस्तान का भी विकास हो, नेपाल का भी विकास हो तथा वर्मा, भूटान और श्रीलंका का भी विकास हो। सारे पड़ोसी देशों का विकास हो। इतना कुछ करने के बावजूद पाकिस्तान के द्वारा नापाक हरकतें होती रहती हैं। हमारे इस दरियादिली के बदले उन्होंने हमें दिया क्या है?

हमें गुरुदासपुर, पठानकोट और उड़ी जैसे हमले दिए। पाकिस्तान से आये आतंकवादियों ने हमारी सेना पर हमला किया।  लेकिन बधाई देना चाहता हूं अपनी सेना के जवानों का जिन्होंने यह सन्देश दे दिया कि हम केवल यहीं नहीं मार सकते, जरूरत पड़ी तो वहां भी घुसकर मार सकते हैं। बजाय आतंकवाद को  रोकने के पाकिस्तान बराबर उसको बढ़ावा दे रहा है। जैसे भारत कहता है कि किसी भी सूरत में हम आतंकवाद से समझौता नहीं करेंगे तो पाकिस्तान भी ऐसा क्यों नहीं बोलता है? यदि पाकिस्तान आतंकवाद पर लगाम नहीं लगा पा रहा है और वह इसमें पड़ोसी देश भारत का सहयोग पाना चाहता है तो भारत आतंकवाद के खात्मे में सहयोग करने के लिये तैयार है। पाकिस्तान कम से कम हमसे सहयोग तो मांगे।


बौखलाया हाफिज


Hafiz Saeedमुंबई हमले का प्रमुख सूत्रधार, पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जमात उद दावा का मुखिया हाफिज सईद अपने बड़बोले बयानों से बाज नहीं आ रहा है। इस बार उसने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के बयान पर आग उगला है। उसने लाहौर के नसीर बाग में एक रैली में भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह के ताजा बयान को युद्ध की धमकी बताया। राजनाथ सिंह ने जम्मू की एक सभा में कहा था कि पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो ”अभी तो उसके केवल दो टुकड़े हुए हैं अगर उसने आतंकी गतिविधियों पर लगाम नहीं लगाई तो उसके दस टुकड़े हो जायेंगे।’’ इससे बौखलाए हाफिज सईद ने कहा, ”हम राजनाथ के बयान को जंग का ऐलान  मानते हैं और चुनौती स्वीकार करते हैं।’’ उसने अंतरराष्ट्रीय मानकों को नकारते हुये यह भी कहा कि ”हम नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम को स्वीकार नहीं करते हैं.’’ हाफिज सईद ने पाकिस्तान की सरकार को भी धमकाया कि तथाकथित भारतीय जासूस कुलभूषण को क्लीन चिट न दे।


मैं एक बार फिर भारत की दरियादिली की चर्चा करना चाहूंगा। गुरुदासपुर, पठानकोट में आतंकवादी हमले हुए, हम लोगों ने अपनी टीम पाकिस्तान नहीं भेजी बल्कि हमने पाकिस्तान द्वारा गठित उसके स्पेशल टीम को इस जांच में सहयोग करने के लिए आने का आदेश दे दिया। जब उनकी टीम यहां जांच-परख करने के बाद वापस गयी और भारत ने उनसे पाकिस्तान में अपनी जांच टीम को भेजने की बात कही तो उसी पाकिस्तानी स्पेशल टीम ने भारतीय टीम को बुलाने से साफ मना कर दिया। आखिर कितनी बार हम अपने दिल का दरवाजा खोलें? इन सबके बावजूद हम चाहते हैं कि हम पाकिस्तान के साथ मिलजुल कर रहें। लेकिन हम फिर आतंकवाद से भी कोई समझौता नहीं करेंगे। पाकिस्तान में तो यह भी चर्चा चलती है कि आतंकवादी दो प्रकार के होते है ‘गुड टेररिस्ट’ और ‘बैड टेररिस्ट’। क्या आतंकवाद भी कभी बुरा और अच्छा होता है? आतंकवादी किसी भी देश का हो, आतंकवादी आतंकवादी होता है। सार्क सम्मलेन पाकिस्तान में होने वाला था, मैं तो अपने राज्य मंत्री से कहने वाला था कि वो सार्क सम्मलेन में भाग लेने के लिए पाकिस्तान चले जाएं। लेकिन हमारी आईबी ने बताया कि पाकिस्तान में तो भारत और आप के विरुद्ध प्रदर्शन हो रहा है और इसका नेतृत्व आतंकवादी संगठनों को चलाने वाले लोग कर रहे हैं। वैसे मैं वहां  जाने वाला नहीं था लेकिन जब मैंने इन प्रदर्शनों के बारे में सुना तो मैंने अपने राज्यमंत्री से कहा कि अब मैं खुद पाकिस्तान जाऊंगा और जो कुछ भी बोलना होगा मैं स्वयं बोलूंगा। वहां पाकिस्तान में हमसे  एक किलोमीटर की दूरी में चार से छह स्थानों पर हमारे विरुद्ध प्रदर्शन हो रहे थे। क्या यही मेहमाननवाजी थी? क्या वहां  की सरकार उन्हें रोक नहीं सकती थी? लेकिन  हमने भी ठान लिया था कि दुनिया के दूसरे देश की धरती पर खड़े होकर हम पाकिस्तान के विरुद्ध नहीं बोलेंगे बल्कि पाकिस्तान की ही धरती पर तथा उसकी छाती पर खड़े होकर बोलेंगे।

पाकिस्तान हमेशा भारत को तोडऩे की साजिश करता रहता है। पाकिस्तान इस साजिश में कभी सफल नहीं हो पायेगा। कश्मीर से लेकर लद्दाख तक सभी भारत का अभिन्न अंग है। यहां रहने वाले सभी अपने परिवार के सदस्य हैं। कश्मीर में जो कुछ भी हुआ, हम सभी को उसका दर्द है। कश्मीर के बच्चों के भविष्य को लेकर हम सभी को चिंता रहती है। कश्मीर, जम्मू और लद्दाख के बिना भारत अधूरा है। इस सच्चाई को भी हमें समझना चाहिये। दुनिया की कोई ताकत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत से कभी अलग नहीं कर सकती है। मेरा मानना है कि जब तक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का विकास नहीं होता, तब तक भारत का भी विकास संभव नहीं है। यदि जम्मू-कश्मीर में गरीबी है तो नहीं कहा जा सकता कि भारत की गरीबी समाप्त हो गयी।

आप सभी को पता है कि स्वाभिमानी लोग ही अपना बलिदान देते हैं, न कि कायर लोग। स्वाभिमान तीन प्रकार का होता है। पहला व्यक्तिगत स्वाभिमान जैसे आप जम्मू-कश्मीर के बाहर जा रहे हैं और कोई जम्मू-कश्मीर की बुराई करता है तो उस समय आपका अपने राज्य के प्रति अपना व्यक्तिगत सम्मान जाग उठता है। और उसके साथ आप दो-दो हाथ करने को तैयार हो जाते हैं। यही जब भारत की सीमाओं पर दुनिया आंख उठाकर देखने का प्रयास करती है तो सारा हिंदुस्तान हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई एक होकर विदेशी ताकतों का सामना करने को तैयार हो जाते हैं। उस समय जो स्वाभिमान उत्पन्न होता है वह कोई व्यक्तिगत तथा राज्य का स्वाभिमान नहीं होता है, बल्कि वह राष्ट्रीय स्वाभिमान होता है। इसके उदाहरण चंद्रशेखर आजाद, खुदीराम बोस और अशफाक उल्लाह खान जैसे त्यागी पुरुष हैं।

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भारत की आजादी की लड़ाई में भी सभी ने योगदान किया है। क्या हम भूल गए असफाक उल्लाह खान को? चंद्रशेखर आजाद को? जिन्होंने अंग्रेज दुश्मनों से लड़ते-लड़ते जब रिवॉल्वर में एक गोली बची तो अंग्रेजों के हाथ न मरने के लिए उस एक गोली को अपने सीने में दाग कर अपनी जान न्योछावर कर दी। वह कुछ और नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्वाभिमान था। यही कारण है कि यह भारत आजाद हुआ। इक्कीस वर्ष के असफाक उल्लाह खान को मां निकाह करने को कहती थी लेकिन असफाक उल्लाह खान ने अपनी मां के बातों को टालते हुए तथा अपने राष्ट्रीय स्वाभिमान के चलते अंग्रेजों की हत्या कर दी। जब असफाक उल्लाह खान को फांसी के तख्ते पर लटकाया जा रहा था तब मजिस्ट्रेट ने उनसे पूछा की उनकी अंतिम इच्छा क्या है? यह सन्देश मैं तुम्हारी मां तक पंहुचा दूंगा। स्वाभिमानी अशफाक उल्लाह खान ने जज से कहा कि मां से कह देना की उ्रनका लड़का फांसी के तख्ते पर अपनी शादी रचाने जा रहा है। मजिस्ट्रेट ने असफाक उल्लाह खान से उस लड़की के विषय में जानना चाहा जिससे वो फांसी के तख्ते पर अपनी शादी रचाने जा रहे थे। असफाक उल्लाह खान ने मजिस्ट्रेट को अंधा कहते हुए तथा उस फांसी के फंदे को अपनी महबूबा का नाम देते हुए कहा कि यही तो है जिससे मैं अपनी शादी रचाने जा रहा हूं। ऐसे लोगों के कारण ही हमें आजादी मिली है।

संसार की कोई ताकत भारत के मान- सम्मान पर चोट नहीं कर सकती है। भारत का मस्तक सारी दुनिया में ऊंचा हुआ है। आतंकवाद, उग्रवाद, माओवाद इन सभी पर काबू पाने के लिए हमारे प्रधानमंत्री ने 500 रु. और 1000 रु. के नोट बंद किए हैं। इस नोटबंदी को कुछ लोग मजाक में नसबंदी भी कह रहे हैं। मैं जानना चाहता हूं कि क्या हमने किसकी नस काट ली है? यदि नस कटी होगी तो माओवादियों, आतंकवादियों और काला धन रखने वालों की नस कटी होगी। यह नोटबंदी का फैसला राष्ट्रहित में लिया गया है, न की पार्टी हित में। इसमें हमें आप सभी के सहयोग की आवश्यकता है। जैसा की हमारे प्रधानमंत्री ने पचास दिन का समय मांगा है, मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि पचास दिन के बाद स्थिति बिल्कुल सामान्य हो जायेगी।

मैं दूसरे लोगों की भांति आपको आश्वासन नहीं देना चाहूंगा क्योंकि भारत के आजादी के बाद जितने आश्वासन दिए गए यदि उसमें से कुछ भी पूरे कर दिए गए होते तो भारत पूरी दुनिया में एक शक्तिशाली राष्ट्र बनकर उभरा होता। अत: जितना अधिक से अधिक हो सकेगा हम इस दिशा में काम करने का प्रयास करेंगे।

               राजनाथ सिंह

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