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जयंत बाबू

जयंत बाबू

विदेश में रंग-रिवाज देकर पूरी ठसक से रहने वाले जयंत बाबू को कुछ समझ में नहीं आ रहा है। चुनाचे कि वह पूर्व वित्त और विदेश मंत्री, पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा के बेटे हैं, कभी वित्त राज्य मंत्री थे। बैंकिंग देखते थे, रघुराम राजन भी उनसे खुश रहते थे और पीएम के भी गुडबुक में थे। इतना ही नही मीडिया भी भाव देता था। लेकिन जब से जिम्मेदारी बदली है, सब कुछ बदल गया है। अब कौन समझाये कि जयंत बाबू जब दिन बदलता है, तो सब बदल जाता है।



ओनली कैप्टन


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पंजाब में जैसे-जैसे कांग्रेस मुकाबले में लौट रही हैं, कैप्टन अकड़ते जा रहे हैं। कैप्टन की अकडऩ से कांग्रेस आला कमान हैरान भी है और परेशान भी। क्योंकि कैप्टन ठहरे कैप्टन। वह किसी को भाव ही नहीं देते। राज्य की प्रभारी आशा कुमारी से लेकर पीके और कांग्रेस उपाध्यक्ष से एक ही भाव में मिलते हैं। ऐसे में आला कमान टिकट बटवारे से लेकर भितरघात तक को लेकर परेशान है, जबकि कैप्टन हैं कि अपने पूरे मिजाज में हैं।



कमल खिलेगा


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यूपी में कमल खिलेगा। संजीव बालियान, योगी आदित्यनाथ, दिनेश शर्मा, महेश शर्मा, केशव प्रसाद मौर्य, स्वामी प्रसाद मौर्य सबका दावा यही है। यह बात अलग है कि भाजपा हाईकमान को उनके दावे से ज्यादा यकीन जनता के मूड पर है। जनता नोटबंदी से परेशान, मगर, खुश है। ऐसे में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह जहां जहां सपा-भाजपा में मुकाबला होने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी कतार का कहना है कि अब सीएम चेहरे की घोषणा हो जाए।



चल हाथी चल


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मायावती का हाथी बैठ गया है। न उठ रहा है न चल रहा है। खबरची को पता चला है कि जब से नोटबंदी हुई है, तब से हाथी मुंडी ही हिला रहा है। भाईचारा समिती से लेकर जोनल कोआर्डिनेटर तक भरपूर पसीना बहा रहे हैं, लेकिन ग्राउंड जीरो पर अभी कोई चमत्कार नही दिख रहा। हालांकि बसपाईयों का कहना हैं कि यूपी मे सरकार बनाने जा रहे हैं, जबकि ब्राम्हण, मुसलमान और कुछ जातियां अभी भी खामोश हैं। वहीं अखिलेश हैं कि बुआ जी कहकर हाथी की हवा निकाल दे रहे।



राहुल बाबा मुस्कराए


Rahul on leave

कांग्रेस और राहुल बाबा दोनों खुश हैं। दोनों खुश हैं तो सोनिया गांधी भी खुश हैं। सबकी खुशी का राज भी अजब है। पिछले महीने के दौरान कांग्रेस पार्टी का मानना है कि राहुल बाबा ने बहुत गेन किया है। उनके बयान का साफ असर भाजपा अध्यक्ष, प्रधानमंत्री मोदी और पार्टी नेताओं पर दिखा। इतना ही नही यू.पी. में भी राहुल की सभाओं में भीड़ आने लगी है। यह बात अलग है कि जब से पीके अखिलेश, मुलायम से मिले हैं, सूबे में पार्टी उकडू़-मुकड़ू बैठ गई है।



चाचा हुए लाचार


shivpal

चाचा यानी शिवपाल यादव। खबर है कि नेता जी मुलायम ने धोबियापाट चलकर चित्त कर दिया है। वहीं टीपू (अखिलेश) चमचमाती तलवार दिखा रहे हैं। यही हाल अंकल (अमर सिंह) का भी है। कुछ नही सूझता तो कह बैठते हैं कि मुलायम सिंह हैं। सुनते सबकी हैं और करते अपने मन की हैं। शिवपाल चाहते हैं कि यू.पी. में गठबंधन हो जाए। वहीं अखिलेश गठबंधन की मार्केटिंग कर रहे हैं, जबकि मुलायम खामोश हैं। ऐसे में चचा को कुछ नहीं बुझा रहा। देखते जाइए आगे होता है क्या?


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