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टीपू की तलवार

टीपू की तलवार

इन दिनों उ.प्र. में टीपू की तलवार चर्चा का विषय बन गई है।  जब चाचा शिवपाल और चाचा रामगोपाल में तकरार बढ़ती है और अंकल अमर सिंह की मेहनत रंग लाती है, तो टीपू (अखिलेश) तलवार उठा लेते हैं। पहले चाचा शिवपाल अखिलेश को टारगेट करते हैं, इसके बाद अखिलेश जंग-ए-आजादी छेड़ देते हैं। ऐसे में पिता मुलायम जलालुद्दीन मो. अकबर की भूमिका में हैं। अब उनके सामने असल सवाल सल्तनत का है और इसको लेकर जारी हर लड़ाई से निबटने में लगे हैं।



लालू की नसीहत


Lalu and Nitish at Iftar

लालू ने अपने समधी मुलायम सिंह यादव को पते की नसीहत दी है। खबर है कि यह नसीहत पार्टी महासचिव अमर सिंह के होश उड़ा सकती है। जल्द अमर सिंह का फिर पत्ता कट सकता है। उनके खिलाफ न केवल अखिलेश यादव हैं, बल्कि परिवार में भी कुछ इधर, कुछ उधर हैं। पार्टी के कई नेताओं को भी अमर सिंह कुटनी की भूमिका में नजर आ रहे हैं। ऐसे में लालू ने मुलायम से कहा कि उन्हें आलतू-फालतू लोगों के चक्कर में नहीं पडऩा चाहिए। वहीं अमर सिंह कि तंज कसने से बाज नहीं आ रहे। ताजा तंज में कहा-ऐसा कलयुग आयेगा, बेटा राज करेगा, बाप जंगल जाएगा।



बसपा सुप्रीमो परेशान


Monsoon session of  Parliament

बसपा सुप्रीमो काफी परेशान नजर आ रही हैं। उन्हें लग रहा है कि एक तरफ भाजपा और दूसरी समाजवादी पार्टी ही अपना हित साध पा रही है। केन्द्र द्वारा नोटबंदी की घोषणा  के बाद से वैसे ही लंबे समय तक प्रचार अभियान लटका रहा। कांग्रेस का भी प्रचार अभियान ठप रहा। वहीं दूसरी तरफ रही सही कसर मुलायम का खानदानी झगड़ा पूरी कर दे रहा है। इसके चलते मीडिया से लेकर विभिन्न समाज के लोगों का ध्यान इसी में बंटा है। बसपा के एक नेता का तो यहां तक कहना कि भाई पहले सपाइयों का ड्रामा तो खत्म हो। अभी तो यही चें-पें किए जा रहे हैं। ऐसे में क्या हाथी दौड़ेगा और क्या कमल खिलेगा। अभी साइकिल का अगला-पिछला टायर ही भ्रष्ट है।



अब जो हैं यही हैं


Rahul on leave

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल ने टोपी लगाकर पार्टी का 132वां स्थापना दिवस मनाया। समारोह की अध्यक्षता की। इसके ठीक एक दिन पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष ने ममता बनर्जी के साथ छह दलों की बैठक और बाद में प्रेस कांफ्रेस की भी शुरुआत की। प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आरोपों की बौछार कर दिए और फिर खबर है कि नया साल मनाने जा रहे हैं। वह भी ऐसे समय में जब सोनिया गांधी का स्वास्थ्य खराब हो रहा है और पंजाब तथा उ.प्र. नेताओं को उनकी जरूरत है। जब इस बारे में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता से पूछा गया तो बोल पड़े- अब जो हैं, यही हैं। इनके अलावा किसी और के होने की गुंजाइश भी नहीं है।



जोशी जी के मधुर वचन


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डा. मुरली मनोहर जोशी को यूं ही ज्ञानी नहीं माना जाता। कमानी ऑडिटोरियम में शंकर घोष तबला फाउंडेशन और एक मीडिया हाऊस के तत्वाधान में परंपरा और घराना का कार्यक्रम होना था। आयोजकों ने जोशी जी से संपर्क किया। पहले तो जोशी जी व्यस्ततावश बमुश्किल तैयार हुए और जब कामानी ऑडिटोरियम पहुंचे तो खुसर-फुसर शुरू हो गई। एक बंगाली पत्रकार ने चुटकी भी ली कि क्या कट्टर संघी विचारधारा के जोशी ही मिले थे, लेकिन जैसे ही जोशी ने संस्कृति और परंपरा में पिरोए वचन बोलने शुरू किए हाल तालियों की गडगड़ाहट से गूंज उठा।  जनाब को भी अपने कहे पर पछतावा हुआ और जाकर जोशी के पैर छूकर पाप का प्रायश्चित कर आए।



प्रभु की रेल


प्रभु की रेल रह-रहकर पटरी से उतर जा रही है। खबर है कि रेल मंत्रालय में उनका सीए ज्ञान कोई खास करिश्मा नहीं दिखा पा रहा है। ऊपर से रेल मंत्री वित्त मंत्री को कई बार रेलवे की सुरक्षा के लिए वित्तीय व्यवस्था के बाबत पत्र लिखते जा रहे हैं। वहीं वित्त मंत्री जेटली इस पर चुप्पी साध ले रहे हैं। बताते हैं ऐसे में प्रभु की परेशानी बढ़ गई है। अब वह या तो रेलवे की सुरक्षा के लिए टिकट में यात्रियों पर नया कर लगाएं या रेल का किराया बढ़ाएं। देखिए प्रभु भाई क्या करते हैं?



पहुंच गई ठंडक


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संजय निरुपम से लेकर तमाम कांग्रेसी नेता उस समय बहुत खुश हो गये, जब पता चला कि सपा में बड़ी बगावत हो गई है। राशिद अल्वी समेत कई ट्विटर पर अपनी राय जाहिर करते नजर आये। सबसे ज्यादा खुशी चौधरी अजित सिंह को हुई। बताते हैं चौधरी को लगने लगा कि देर-सबेर गठबंधन ही नहीं होगा, बल्कि पश्चिमी उ.प्र. में कुछ सीटें भी आएंगी। वहीं, कुछ पार्टियों के नेता कहते नजर आए कि पहले मुलायम अवसर देखकर रंग बदले। करीबियों, सहयोगियों, पार्टियों को टरकाया और अब खुद परिवार में ही इसका शिकार हो रहे हैं।



मैडम फिर चर्चा में


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स्मृति ईरानी और चर्चा कभी बंद नहीं होने वाली। कभी साड़ी का विवाद तो कभी डिग्री का। जब वे मानव संसाधन विकास मंत्रालय में थीं तो विवाद दर विवाद, लेकिन इन दिनों स्मृति जी अपने कार्यों के चलते चर्चा में हैं। ईरानी ने अपने कपड़ा मंत्रालय में जान डाल दी है। आए दिन टिवटर पर भी छाई रहती हैं। यहां तक कि नोटबंदी के बाद भी उन्होंने तेजी से कई कदम उठाए हैं। ऐसे में जहां मैडम की तारीफ होने लगी है, वहीं यह चर्चा भी तेज हो गई कि चलिए देर से ही सही उन्हें सही पोर्टफोलियो मिल गया है।


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