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संचार से ग्रामीण समाज की आधुनिक संरचना

संचार से ग्रामीण समाज की आधुनिक संरचना

‘ग्रामीण समाज और संचार बदलते आयामÓ ग्रामिण क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहे संचार माध्यम के प्रारूप को एक समसामयिक अध्ययन के द्वारा लेखक ने अपने लेखन के माध्यम से समझाने का प्रयास किया है।  लेखक ने इस क्षेत्र की बढ़ोत्तरी में भारतीय मीडिया के योगदान को भी दर्शाया है। लेखक ने इसमें आदिवासियों द्वारा इस संसाधन को अपनाने में आ रही कठिनाई को भी अपने आकड़ों के माध्यम से समझाने का प्रयास किया है। भारत जैसे विशाल ग्रामीण क्षेत्र वाले समाज में केवल जन-माध्यम ही ग्रामवासियों तक सूचनाएं कम्यूनिकेट कर सकता है। एक कम्यूनिकेशन व्यवस्था ही इस बात को संभव कर पाती है कि ग्रामीण क्षेत्र की आबादियां स्वयं को निरंतर सूचना प्रदान कर सके  और अपनी राय जाहिर कर सकें। इसी से राष्ट्रीय अस्मिताएं निर्मित होती हैं तथा एक समाज सांस्कृतिक रूप से ग्रामिण तथा शहरी क्षेत्रों में विभाजित होने से बच सकता है।

Layout 1ग्रामीण समाज और संचार बदलते आयाम

संपादन  : डॉ. निर्मला सिंह ऋषि गौतम

प्रकाशक                : रिगी पब्लिकेशन

मूल्य      : ४९९ रु.

पृष्ठ        : ४६४

लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण बात होती है- समाज के उन तबकों की राजनीतिक भागीदारी जो अब तक उससे बहिष्कृत रखे गये थे, वंचित रखे गये थे। हमें इस बात को याद रखना होगा कि बुनियादी सामाजिक परिवर्तनों के दौर में जनमाध्यमों का सबसे ज्यादा असर होता है। परिवर्तनों के ऐसे दौर में समाज के पारंपरिक मूल्य तथा संरचनाएं संक्रमण की हालत में होती हैं, और उनमें जनमाध्यम बदलाव का रूख तय करने और नए विचार कम्यूनिकेट करने में मददगार हो सकते हैं लेकिन इसकी शर्त यह है कि जन माध्यमों को अपनी विश्वसनीयता बनानी और कायम रखनी होगी। बीते कई दशकों में जिस तेजी से संचार के साधनों में तकनीकी तरक्की हुई है उसी गति से संचार माध्यमों और मानवीय पहलुओं के जनपक्षीय सूचनाओं के बीच का अंतराल भी बढ़ा है। लेखक ने ग्रामीण समाज में पत्रकारिता के योगदान के प्रभाव की व्याख्या करते हुए लिखा है कि भारत गावों का देश है। इन गावों में देश की कुल आबादी की 68.68 फीसदी जनसंख्या देश के विभिन्न हिस्सों में निवास करती है। भारतीय पत्रकारिता ने अनेक महत्वपूर्ण बदलावों को दिशा देकर सामाजिक परिवर्तन तथा समाज सुधार में अपना योगदान दिया है। सार्वजनिक जीवन में वयाप्त भ्रष्टाचार को इसने निशाना बनाया है। कितने ही मंत्री, अधिकारी, सांसद, विधायक, व अन्य पदाधिकारी अपने भ्रष्टाचार, पद के दुरूपयोग, लूट तथा भाई-भतीजावाद के चलते अपने पद से हटाये गए हैं। इंटरनेट और तकनीक का विस्तार प्रस्तावित सभी दिशाओं में तेजी से हुआ है। आधुनिक तकनीक और डाटा प्रबंधन ने सरकार और नागरिकों से बीच के अंतर को पाटा है। इसका सीधा असर नागरिक सहभागिता और जन शैली के सभी क्षेत्रों, विशेष रूप से सामाजिक रहन सहन, स्थानीय व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ, बैंकिंग, ई-गवर्नेंस आदि में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। या टैक्स सम्बन्धी सूचना, रेलवे टिकट बुकिंग, अस्पतालों के ओपीडी सुविधाओं तक पहुंच जैसी कई सुविधाएं उपलबध होने लगी हैं।

यह पुस्तक पाठकों को प्रभावित करेगी इसका कारण इस पुस्तक का ग्रामीण संचार के संबन्ध में गहरा अध्ययन करना है जो आम ग्रामीण लोगों के संचार के माध्यम को दर्शाती है।

रवि मिश्रा

 

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