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अधिवक्ता एवं उनका महत्व

अधिवक्ता एवं उनका महत्व

विधि व्यवसाय ऐसा पेशा है जिसमें संबद्ध अधिवक्ताओं को समाज के विभिन्न मानव सम्बन्धों से संव्यवहार करना होता है। उन्हें इन सम्बन्धों से संव्यवहार करने में अपनी योग्यता एवं संयम की परीक्षा देनी होती है। इसके लिये उन्हें न केवल अपने गुणों तथा उत्साह का प्रदर्शन करना होता है। अपितु अपनी सौम्यता का परिचय भी देना होता है। जब अधिवक्ता अपने पास विधिक राय के लिए आये मुवक्किल की समस्या सुनता है तब उसे मामले के तथ्य को छांटने तथा उनका विश्लेषण करने में अपनी योग्यता का प्रयोग करना होता है। उसकी शैक्षिक योग्यता एवं विधि का प्रशिक्षण ऐसी परिस्थितियों में उसके सम्बल होते हैं क्योंकि इन्हीं गुणों से वह अपने मुवक्किलों की न्यायालय में सहायता करता है और न्याय-प्रशासन की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य सम्पादित करता है। सनद रहे, अधिवक्ता ही वह यंत्र है जो न्यायालय में विधि के सिद्धान्तों का प्रतिपादन करता है, जिनके अनुसार न्यायाधीश मामलों का निराकरण करते है।

विधि-व्यवसायी (अधिवक्ता) की भूमिका केवल वादों के निस्तारण तक सीमित नहीं होती है। अधिवक्ता वर्ग समाज में शान्ति-व्यवस्था बनाये रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। विधि-व्यवसाय में उनका दृष्टिकोंण विवादों की संख्या को बढ़ाना नहीं होता अपितु आसन्न विवादों का समाधान ढूँढना होता है। इस प्रकार अधिवक्ता समाज में भाई-चारे की भावना बढ़ाकर समाज की विधिक व्यवस्था कायम रखने का गुरूतर कार्य सम्पन्न करते हैं।

विधि व्यवसायी न्याय को प्रश्रय देते हैं क्योंकि वे नागरिकों के अधिकारों तथा स्वतंत्रताओं के पोषक होते हैं और न्यायालय के माध्यम से उनके अधिकारों तथा स्वतंत्रताओं की रक्षा करते हैं। इससे समाज में न्याय का मार्ग प्रशस्त होता है।

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 विधि-व्यवसाय कोई व्यापार नहीं होता। इस व्यवसाय का मुख्य उद्देश्य धर्नाजन करना नहीं है, अपितु न्याय-प्रशासन में अपनी अग्रणी भूमिका का निर्वहन करना है जिससे समाज में शान्ति, व्यवस्था तथा न्याय कायम रखा जा सके। नि:सन्देह समाज की जटिल समस्याओं का समाधान ढूंढने, जनता के अधिकारों तथा स्वतंत्रताओं की सुरक्षा करने और विधि का शासन कायम रखने में प्रमुख भूमिका का निर्वहन करने में विधि-व्यवसाय को जो महत्वपूर्ण स्थान है, वह समाज के किसी वर्ग से छिपा नहीं है। अपनी विलक्षण प्रतिभा तथा सामाजिक दायित्व की भावना से अधिवक्ता वर्ग आसन्न कठिन परिस्थितियों को अनुकूल बनाकर उनका समाधान प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं जिसके लिए उन्हें समाज से सम्मान तथा ख्याति प्राप्त होती है। विधि-व्यवसाय का समाज में बहुत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है क्योंकि इसका कोई विकल्प नहीं है। विधि-व्यवसायी (अधिवक्ता) का प्राथमिक कर्तव्य संविधान के अनुसार-विधि का शासन समाज में बनाए रखने में अपना योगदान प्रदान करना होता है। उसे न्याय के क्रमिक विकास को प्रोन्नत करना है और संविधान में प्रदत्त नागरिकों के मूलाधिकारों के प्रवर्तन में न्यायालय की सहायता करनी

होती है। साथ ही अपने विधिक ज्ञान, योग्यता और नैतिकता द्वारा उसे नागरिकों का विश्वास तथा सद्भाव प्राप्त करना होता है, जो उसकी अमूल्य पूंजी होती है।

इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए और युवा अधिवक्ताओं के संघर्षो को रेखांकित करने के लिए लॉयर्स वौइस् के तत्वाधान में नीरज गर्ग ने एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन अभी हाल ही में दिल्ली में किया। इस एक दिवसीय कार्यशाला की शुरुआत सांसद एवं भाजपा दिल्ली प्रदेश के नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री मनोज तिवारी के अभिनन्दन से की गयी। कार्यक्रम में श्री श्याम जाजू, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष , भाजपा भी मौजूद थे। अपने स्वागत भाषण में नीरज गर्ग ने अधिवक्ताओं के समाज में महत्व और उनके संघर्षों के बारे में बताया। श्री मनोज तिवारी और श्याम जाजू ने भी अधिवक्ताओं के संघर्ष पर प्रकाश डालते हुए उनसे आग्रह किया कि वह समाज  में अपनी महती भूमिका निभाते रहे और लोगों को उनके अधिकारों को दिलाने में मदद दिलाते रहे। कार्यक्रम में विक्रमजीत बनर्जी अधिवक्ता जनरल, नागालैंड , ऐश्वर्या भाटी, उदय सागर, एडिशनल अधिवक्ता जनरल, हरियाणा सरकार और पिंकी आनंद, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल, भारत सरकार  आदि ने भी शिरकत की।

(उदय इंडिया ब्यूरो)

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