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वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन 2017: एक शानदार सफलता

वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन 2017: एक शानदार सफलता

सुर की लहरियों पर तैरता ‘जय-जय गर्वी गुजरात’ का कोरस-गान जैसे ही अपने चरम पर पहुंचा, गीत में मग्न प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अंगुलियां डेस्क पर तबला बजाने के अंदाज में थिरक उठीं। वाइब्रेंट गुजरात सम्मलेन के उद्घाटन के मौके पर १०० देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे। इनमें कुछ राष्ट्राध्यक्ष भी थे लेकिन इस भारी-भरकम मौजूदगी के बीच मोदी एकदम सहज और शांत दिखे। मोदी की इस छवि की तुलना २००३ के उस हालात से कीजिए, जब उन्होंने बतौर मु2यमंत्री गुजरात विधानसभा का चुनाव जीतने के बाद पहली बार वाइब्रेंट गुजरात का आयोजन किया था। वाइब्रेंट गुजरात वैश्विक स6मेलन २०१७ में कुल २५,५७८ सहमति ज्ञापनों (एमओयू) पर दस्तखत किए गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार ने देश में कारोबार का माहौल सुधारने के लिए कदम उठाए हैं, जिससे पिछले ढाई साल में देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रवाह १३० अरब डॉलर पर पहुंच गया है। मोदी ने वाइब्रेंट गुजरात सम्मलेन  में निवेशकों को संबोधित करते हुए कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ अब देश का सबसे बड़ा ब्रांड बन गया है. उन्होंने कहा कि पिछले दो वित्त वर्षों में एफडीआई का प्रवाह इससे पिछले दो वित्त वर्षों से ६६ प्रतिशत अधिक रहा है। पिछले साल एफडीआई का प्रवाह अब तक का सर्वाधिक रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल में जिन देशों से और जिन क्षेत्रों में एफडीआई आया है, उसका विविधीकरण हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा, ”कारोबार के लिए अनुकूल वातावरण उपल4ध कराना और निवेश आकषिर्त करना मेरी शीर्ष प्राथमिकताओं में है। हमें युवाओं के लिए अवसर पैदा करने को यह करना होगा”।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोग कहते हैं कि लोकतंत्र शीघ्र परिणाम और सुशासन नहीं प्रदान कर सकता, लेकिन हमने पिछले ढाई साल में देखा है कि यह संभव है। उन्होंने कहा कि हमने अथक प्रयास किया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे अधिक डिजिटल बने और मैं यह बताने में गर्व महसूस कर रहा हूं कि यह आपके सामने हो रहा है।  प्रधानमंत्री ने कहा, ”हर बीतते महीने के साथ भारत व्यापार के लिहाज से एक सुगम स्थान बनता जा रहा है। आप सभी देखेंगे कि भारत जल्द ही दुनिया में व्यापार करने के लिहाज से सर्वोत्तम स्थल होगा। आर्थिक सुधारों के लिए हमने कई अहम कदम उठाए हैं-जैसे जीएसटी, आईपीआर, दिवालिया कानून आदि। ग्लोबल रिपोर्ट में भारत की रैंकिंग में उछाल आया है,  ‘मेक इन इंडिया’ अब देश का सबसे बड़ा ब्रांड बन गया है, पिछले साल एफडीआई का प्रवाह अब तक का सर्वाधिक रहा है, मई २०१४ के बाद एफडीआई १३०0 अरब डालर पर पहुंच गया। यह भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेशकों के भरोसे को प्रतिबिंबित करता है। लाइसेंस की प्रक्रिया तथा मंजूरी, रिटर्न तथा जांच से संबंधित प्रावधानों के लिए निर्णायक कदम उठाए गए हैं, ढाई साल से सरकार ने भारत की क्षमता को हकीकत में बदलने के लिए दिन-रात काम किया है।

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वाइब्रेंट गुजरात समिट में शिरकत करते हुए कहा कि भारत सरकार देश का नवनिर्माण कर रही है। हमें सामान्य सरकार नहीं चलानी है। अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव करना है। छद्म इकोनॉमी को खत्म कर देना है। नोटबंदी व जीएसटी इसके लिए बेहद जरूरी हैं। नोटबंदी की वजह से आया व्यवधान बस कुछ समय के लिए है। इन दोनों कदमों के चलते टै1स भरने से गुरेज करने वाले भी कर अदा करने लगेंगे।


गौ-आधारित अर्थव्यवस्था समय की मांग


 

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भारत की पारंपरिक खेती हमेशा से पशु और दूध उत्पादन पर रही है जो न केवल हमारे समाज की जीविका के लिए महत्वपूर्ण था बल्कि इसके माध्यम से हमारा देश भी आत्मनिर्भर था। देश में तेजी से बढ़ रही जनसंख्या  के कारण अब हम इस क्षेत्र में लगभग बाहर के देशों पर निर्भर हो चुके है जिसका कारण सरकार का इस क्षेत्र में कम रूचि होना, इससे जुड़े उद्योगों की संख्या  में कमी होना तथा इससे जुड़े क्षेत्रों का असगंठीत होना है। अब समय आ चूका है कि इस क्षेत्र को बढ़ाने पर वार्तालाप हो जिससे इस क्षेत्र में निवेश का अवसर प्रदान हो सके।

 स्वच्छ रूप से अधिक मात्रा में दूध का उत्पादन करना ही इस क्षेत्र की सफलता का राज है। गौ पर आधारित निवेश के लिए इंडस्ट्रियल पार्क का निर्माण करने की आवश्यकता है। इसके साथ ही खाद तथा आयात-निर्यात के सामानों का उत्पादन करने के लिए एक अलग समूह क्षेत्र का निर्माण होना चाहिए। गोचर भूमि असल में गौशाला का रूप है अत: सरकार को इसके अनुसार काम करने की आवश्यकता है।

इस क्षेत्र का व्यापर भी समाज के मनमुताबिक होना चाहिए और इसके प्रशिक्षण के लिए एक सफल बिजनेस मॉडल भी तैयार करने की जरूरत है।

सरकार को उन क्षेत्रों की भी खोज करनी चाहिए जहां देशी नस्ल की गायों की संख्या  काफी अधिक मात्रा में है। इस प्रकार के मजबूत गौ आधारित अर्थव्यवस्था के विकास के लिए हमें पंचायतों, बैंकों, इन्श्योरेंस देने वालों तथा जंगल के बीच एक कड़ी तैयार करनी होगी। अच्छे परिणाम के लिए आध्यात्मिक, पवित्र और पर्यावरण पर आधारित एक आयाम बनानी होगी। हमें गौ दूध पंचगव्य तथा गौ से निर्मित दवाओं पर अनुसंधान करने की आवश्यकता है। भारत में गौ के विकास के लिए एन.आर.आई और पी.आई.ओ की सहायता लेनी चाहिए। गुजरात में गौ सेवा में लगे लोगों की सराहना करने की आवश्यकता है। हैदराबाद के आई.ए.एस अफसर डॉ1टर डब्लू आर रेड्डी पी.पी.पी मॉडल पर इस क्षेत्र के विकास के लिये प्रशिक्षण देने के लिए तैयार हो गए है। नीति आयोग भी इस काम में अपना सहयोग  देने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इसलिये इन सभी कार्यों में आने वाली रुकावटों को इस क्षेत्र को टे1नोलॉजी, मैनेजमेंट, फाइनेंस, कौशल विकास और  इससे जुड़े व्यापार को बढाकर ही किया जा सकता है।


वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यह भी साफ कर दिया कि देश में छद्म अर्थव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पहले की सरकारें इसके सामने झुक गई थीं। अब देश इसके लिए तैयार नहीं है। वित्त मंत्री ने ये भी कहा कि भारत अब बदल रहा है। इसके लिए अर्थव्यवस्था में भी बड़े बदलाव की जरूरत है। वर्ष १९९६ से सरकारें हालात से समझौता करती आ रही थीं। बीमारी दूर करने के लिए कड़वी दवा देने का कठोर फैसला जरूरी हो गया था। मोदी सरकार ने इस रवैये को बदलते हुए नोटबंदी का हि6मतभरा कदम उठाया। दुनिया की निगाहें आज भारत पर टिकी हैं। आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ५०० व १००० के नोट बंद करने के फैसले से दीर्घ और मध्यम अवधि में देश को लाभ होने वाला है। इसी तरह वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) पर केंद्र व राज्यों के बीच कुछ मुद्दों पर जल्द ही सहमति बनने से पहली अप्रैल से इसके लागू होने का रास्ता साफ हो जाएगा। इसके लिए जीएसटी काउंसिल की १६ जनवरी को बैठक होगी। जीएसटी लागू होने से फॉर्मल इकोनॉमी का विस्तार होगा और ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा। नोटबंदी के बाद लेनदेन को डिजिटल बनाने की रफ़्तार  तेज हुई है। यह कदम भी अर्थव्यवस्था के हित में है। इन तीनों कदमों का परिणाम पहले से बड़ी, स्वच्छ व बेहतर अर्थव्यवस्था के रूप में सामने आएगा। गुजरात के मुख्यमंत्री  विजय रूपाणी ने कहा की पूरे देश में एक सामान टैक्स  की व्यवस्था जीएसटी से व्यापार और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। लंबे समय से ऐसे कानून की जरूरत राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में पूरी नहीं हो पा रही थी। आज २९ राज्यों और ९० दलों से गुजरकर जीएसटी लागू होने के करीब है।

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने बताया कि आईएमएफ के आंकड़ों के अनुसार हमारे देश का वित्तीय घाटा जी20 देशों में सबसे अधिक है, जो २०१६-१७ में जीडीपी का ६.४ फीसदी है। इस घाटे में राज्य और केन्द्र दोनों सरकारों का घाटा शामिल है। उर्जित पटेल ने राज्य और केन्द्र सरकार से इस कर्ज के स्तर पर ध्यान रखने को कहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का बढ़ता कर्ज भी भारत को अच्छी रेटिंग दिलाने  की राह में रोड़ा है।

मोदी ने साल २००३ में वाइब्रेंट गुजरात की शुरुआत की और तभी से उनके इस आयोजन को शक-संदेह की नजर से देखा जाता रहा और इसके नाकाम होने की आशंका जतायी जाती रही। लेकिन मोदी ने अपने दिल से आती आवाज को सुना और आयोजन को सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

आज की तारीख में वाइब्रेट गुजरात उद्योग-जगत, विज्ञान और समाज के बीच संवाद का एक अंतर्राष्ट्रीय मंच बन चला है और इस मंच के सहारे मोदी ने अगल-अलग रंगों के सियासी और सामाजिक संदेश दिए हैं। ‘जय जय गर्वी गुजरात’ की धुन पर डेस्क पर थिरकती उनकी अंगुलियां इस बात का संकेत थी वे न सिर्फ इस आयोजन से खुश हैं बल्कि उनके मन में इसे लेकर एक संतोष और इत्मीनान के भी भाव हैं।

 संजय कुमार बिसोई, गांधीनगर, गुजरात से

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