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”उत्तर प्रदेश में गरीब का कल्याण ही भाजपा का ध्येय”

”उत्तर प्रदेश में गरीब का कल्याण ही भाजपा का ध्येय”

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और उत्तर प्रदेश प्रभारी श्री ओमप्रकाश माथुर ने उदय इंडिया के समूह सम्पादक दीपक कुमार रथ से बातचीत में पार्टी की चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।

चुनाव का बिगुल बज चुका है, भाजपा किन मुद्दों पर लोगों के बीच जाएगी?

इस चुनाव में हमारा मुख्य मुद्दा विकास पर ही आधारित होगा, क्योंकि प्रधानमंत्री जी ने पिछले ढाई वर्षों में गांव, गरीब, किसान, व्यापारी और विद्यार्थी वर्ग के लिए जो कुछ भी काम किये हैं हम उसी को लेकर लोगों के सामने जायेंगे। दूसरी ओर प्रदेश सरकार की नाकामियां हैं जिसमें उत्तर प्रदेश की खराब कानून व्यवस्था, सरकार द्वारा लोगों की जमीन को हड़पना तथा परिवारवाद को बढ़ावा जैसे मुद्दे हमारे प्रचार के मुख्य हिस्सा होंगे।

पिछले ढाई वर्षों में केंद्र सरकार ने ऐसा उत्तर प्रदेश के लिए क्या किया है जो आप विकास के मुद्दे के साथ जायेंगे ?

पिछले सत्ताइस वर्षों से गोरखपुर का फर्टिलाइजर कारखाना बंद पड़ा था। जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तब इसी समाजवादी पार्टी ने केंद्र सरकार को अपना समर्थन दिया था। प्रश्न यह है की आखिरकार समाजवादी पार्टी इसे दोबारा चालू कराने में असफल क्यों हुई? भाजपा ने सरकार बनाते ही इस काम को किया। केंद्र सरकार ने अभी हाल ही में पूर्वांचल में एम्स बनाने का निर्णय लिया क्योंकि वहां प्राय: वर्षों से जापानी बुखार के कारण छोटे बच्चों की मौत हो जाती थी। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले को दो सौ से ढाई सौ करोड़ रुपये बिजली के खम्भों तथा बिजली की व्यवस्था को ठीक करने के लिए दिया, उसमें भी राज्य सरकार इन पैसों को खर्च करने में असफल रही। साथ ही साथ सड़क के क्षेत्र में नितिन गडकरी जी ने उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक राशि प्रदान की है।

आखिर राज्य सरकार इन पैसों को खर्च क्यों नहीं कर पाती है?

इसका केवल एक ही उत्तर है कि राज्य सरकार केंद्र सरकार को क्रेडिट नहीं देना चाहती। राज्य सरकार जो कुछ भी काम करेगी उसमे केंद्र सरकार का पैसा लगा होगा और नाम केंद्र सरकार का होगा। पिछले पंद्रह वर्षों से सपा और बसपा ने उत्तर प्रदेश  की स्थिति को अत्यंत खराब कर दिया है। समाजवादी पार्टी तो परिवारवाद को बढ़ाने में ही व्यस्त है।

प्रधानमंत्री स्वयं वाराणसी से सांसद हैं, लेकिन पिछले ढाई वर्षों में वाराणसी में ऐसा कोई बड़ा विकास नहीं दिख रहा है।

 दो वर्षों में विकास का आकलन करना कठिन है, इसके लिए आपको कम से कम पांच वर्ष पूरे होने तक प्रतीक्षा करनी होगी। वाराणसी के घाटों की स्थिति पहले  अत्यंत खराब थी, पिछले ढाई वर्षों में ये आधे से ज्यादा घाट निर्मल हो चुके हैं और इस काम पर प्रधानमंत्री जी ने स्वयं अपनी दृष्टि बनायी हुई हैं।

उत्तर प्रदेश में गंगा के प्रति लोगों में एक गहरी आस्था है, इन लैंड वाटर वेज बनाने के लिए नितिन गडकरी ने निर्णय लिया था। उमा भारती स्वयं जल संसाधन मंत्री हैं लेकिन इस काम में कोई प्रगति नहीं दिख रही है।  

साठ वर्षों की गन्दगी कुछ वर्षो में नहीं निकल सकती है। इसे साफ करने के लिए कुछ और समय देने की आवश्यकता है। हमने इस काम को पूरा करने के लिए गंगा किनारे रहने वाले लोगों, साधु-संतों तथा कई एनजीओ को आगे किया जो इस पर ध्यानपूर्वक काम कर रहे हैं। जहां तक उमा भारती जी की बात है तो वो इस काम को करने के लिए पूरी संकल्प के साथ खड़ी हैं।

इन दो-ढाई वर्षों में निर्मल गंगा, स्वछ भारत जैसे अभियान में क्या कोई बड़ा कार्य नहीं दिखना चाहिए था?

काम अवश्य ही दिख रहा है। आज एक आम नागरिक के मस्तिष्क के अंदर सफाई रखने जैसी मानसिकता का निर्माण हो चुका है। बच्चा-बच्चा तक के अंदर ऐसी मानसिकता बन चुकी है। लोग सफाई के लिए कूड़ेेदान का प्रयोग करने लगे हैं। क्या यह कम है? लोगों के अंदर यह विश्वास जगा है कि प्रधानमंत्री इस उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाना चाहते हैं। इसलिए इस काम को पूरा करने के किये कुछ समय की आवश्यकता है।

उत्तर प्रदेश में किस प्रकार की गंदगी है?

उत्तर प्रदेश जहां की उर्वरक तथा जल संसाधन क्षमता सबसे अधिक है, वहां के लोग आखिरकार क्यों रोजगार की तलाश में अलग-अलग शहरों में जाने को मजबूर हैं? उत्तर प्रदेश में किसानों, रोजगार तथा उद्योग धंधों की स्थिति का आकलन करें तो यह हम सभी को सोचने पर विवश कर देगी। किसी जमाने में कानपुर पूरब का मैनचेस्टर हुआ करता था लेकिन आज कानपुर गंदगी में परिवर्तित हो चुका है। अत: इसको सुधारने का हम भरपूर प्रयास कर रहे हैं।

अटल जी भी 2004 में विकास के मुद्दे पर चुनाव में उतरे थे लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी और मुख्य कारण उत्तर प्रदेश में  जाति के आधार पर राजीनीति  होना है।

इस बात का उत्तर हमारा मतदाता देगा लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि इसी उत्तर प्रदेश से हमने लोकसभा में 73 सीटें जीती थीं तथा  इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में दो करोड़ भाजपा के सदस्य भी बने और वे सभी प्रधानमंत्री मोदी जी के काम से अत्यंत प्रभावित हैं।

लोगों का मनना है कि अखिलेश यादव एक युवा और साफ छवि वाले नेता हैं और वहीं भाजपा के पास ऐसा कोई मुख्यमंत्री का चेहरा ही नहीं है।

भाजपा कार्यकर्ता पर आधारित पार्टी है, न कि परिवार पर और इसका निर्णय केंद्रीय कमेटी करेगी।

क्या नोटबंदी का असर उत्तर प्रदेश के चुनाव में जनता पर पड़ेगा ?

नोटबंदी को केवल उत्तर प्रदेश की ही जनता ने ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लोगों ने स्वीकार किया है। यह नोटबंदी का फैसला गरीब, किसान के कल्याण के हित में था।

दलित वर्ग को प्रभावित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भीम ऐप  लांच किया। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?

प्रधानमंत्री जी के पिछले ढाई वर्षों की योजनाओं का आप ध्यानपूर्वक अनुसरण करेंगे तो कई योजनाओं के कई नाम दिए गए हैं लेकिन समझ नहीं आ रहा है कि केवल एक भीम नामक ऐप बनाने से लोगों में इतनी बेचैनी क्यों है? मजाक तो जन-धन योजना का भी उड़ा था लेकिन परिणाम आपके सामने है। नरेंद्र मोदी जी ने गरीबों का कल्याण करने का लक्ष्य बना रखा है।

नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने अल्पसंख्यक समुदाय को सरकारी खर्चे पर विदेश में भेजने का निर्णय लिया है। मनमोहन सिंह जी ने भी कहा था कि नेचुरल रिसोर्सेज पर  अल्पसंख्यक समुदाय का पहला हक है।  इसको क्या समझा जाय?

हमने पहले ही दिन कहा था की हमारे लिए कोई अछूता नहीं है। प्रधानमंत्री जी का भी तो सब का साथ, सब का विकास का नारा है और अगर अल्पसंख्यक वर्ग सब में आते हैं तो क्यों नहीं आएंगे?

अभी खादी बोर्ड ने जो कलेंडर प्रकाशित किया था उसमे गांधी की जगह नरेंद्र मोदी को चरखा चलाते हुए दिखाया गया था। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?

मुझे नहीं लगता कि इसे चर्चा का विषय बनाना चाहिए। बल्कि मुझे तो लगता है कि इससे गांधी जी के स्वदेशी को बढ़ावा देने की अवधारणा को मजबूती मिली है। और यदि प्रधानमंत्री जी के फोटो वाले कलेंडर निकालने से खादी की बिक्री 14 प्रतिशत तक बढ़ी है, तो इससे किसी को क्या समस्या होती है। यह मेरी समझ से परे है। जितना महिमामंडन गांधी जी का प्रधानमंत्री जी ने किया है, उतना शायद ही किसी और ने किया है। मोदी गंाधी जी के रास्ते पर चलने वाले हैं, न कि उनका नाम इस्तेमाल करने वाले।

भाजपा उत्तर प्रदेश का चुनाव जीत जाती है तो लोगों के लिए विजन क्या होगा ?

हम उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने

पर काम करेंगे तथा हमारी प्राथमिकता यहां के हर हाथ को काम तथा हर काम को हाथ देना होगा।

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