ब्रेकिंग न्यूज़ 

भारत को आध्यात्मिक नवजन्म की ज्यादा जरूरत है

भारत को आध्यात्मिक नवजन्म की ज्यादा जरूरत है

By श्री अरविन्द

भारत को धर्म के सोतों से रस लेने की जापान से भी ज्यादा जरूरत है। क्योंकि जापानियों के अंदर शक्ति थी। उसे एक बार नया प्राण देने की, उसमें पूर्णता लाने की जरूरत थी। हमारे अंदर शक्ति नहीं है, हमें शक्ति पैदा करनी होगी, हमें अपनी प्रकृति बदलनी होगी और नए हृदय के साथ नए मनुष्य बनना होगा, हमें नया जन्म लेना होगा। इसके लिए वैज्ञानिक तरीका नहीं है, कोई मशीन नहीं है। शक्ति पैदा करने का एक ही तरीका है। आत्मा के अक्षय भंडार से, भगवान् की आद्याशक्ति से उसे प्राप्त किया जाय। नया जन्म लेने से मतलब है अपने अंदर फिर से ब्रह की प्रतिष्ठा करना। यह एक आध्यात्मिक तरीका है। शरीर का कोई भी प्रयास या बुद्धि इस प्रकास का नया जन्म लेले में असमर्थ है।

राष्ट्रीय मन के लिये धर्म ही स्वाभाविक रास्ता है

हिन्दुस्तान में जब-जब महान जागृति हुई है, जब-जब उसने प्रगति की है– चाहे वह किसी तरह की क्यों न हो– उसने हमेशा किसी न किसी गहरे धार्मिक सोते से जीवनी शक्ति पायी है। जब कभी पूर्ण और विशाल धार्मिक जागृति हुई है तब राष्ट्रीय उत्थान ने भी विराट और सबल रूप लिया है। जब धार्मिक आन्दोलन संकुचित या अपूर्ण हुआ है तो राष्ट्रीय गति भी अपूर्ण, अस्थायी और लडख़ड़ाती हुई रही है। यह चीज हमारे इतिहास में बार-बार स्थिर रूप से दिखाई देती है और यह इस बात का प्रमाण है कि हमारे स्वभाव का अंग है। अगर हम स्वधर्म का छोड़कर दूसरे तरीके अपनायें तो प्रगति बहुत ही धीमी, रूक-रूककर, कष्ट के साथ और अपूर्ण होगी या फिर होगी ही नहीं। जब हमारे सामने भगवान का दिया हुआ, मां का दिया हुआ पक्का हुआ रास्ता है तो उसे छोड़कर किसी पगडण्डी को क्यों अपनाया जाय?

english koreanмихаил безлепкин дети

Leave a Reply

Your email address will not be published.