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जय हो भंसालीजी! आपने तो मेरा जीवन ही सुखमय कर दिया

जय हो भंसालीजी!  आपने तो मेरा जीवन ही सुखमय कर दिया

प्रसिद्ध फिल्म निर्माता संजय भंसाली ने तो मेरी सोच ही बदल दी है। मेरा तो जीवन ही खुशिओं से भर दिया है। मुझे तो मीडिया से ही पता चला कि अल्लाउद्दीन खिलजी ने सपने में रानी पद्मावती से प्रेमालाप किया था। इस पर कुछ असमाजिक गुंडों ने उन पर हमला ही बोल दिया। उनकी पिटाई की। यह सरासर गलत है। यह तो उनकी ख्याली उड़ान है। इस पर किसी को क्या ऐतराज हो सकता है? सपना तो कोई कुछ भी देख सकता है। कैसा भी देख सकता है। किसी कि कल्पना की उड़ान की डोर तो कोई भी अपने हाथ में नहीं ले सकता।  भंसाली इसे उनके विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कुल्हाड़ी का प्रहार बता रहे हैं। बहुत से प्रगतिशील व उदारवादी महानुभाव उनका समर्थन कर रहे हैं। मैं भी उनके साथ हूं।

मेरी रूढ़ीवादी पत्नी हम से सहमत नहीं है। उसका तर्क है कि यदि भंसाली अपनी फिल्म में या कोई अपने लेख में यह लिख दे कि अकबर बाबर का पिता था तो उसे उनकी विचार व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बहाने इसे सच मान लिया जाये और कोई ऐतराज न किया जाये?

पर मैं किसी वाद-विवाद में नहीं पडऩा चाहता। मैं तो बस भंसालीजी का शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मेरी कल्पनाशक्तिको उड़ान दे दी है। मेरे सपनों को रंगीन कर दिया है। अब तो मैं किसी के साथ कोई भी सपना देख सकता हूं।

उस दिन मेरी पत्नी प्रात: उठते ही जब मेरे लिए चाय का कप ले कर आयी तो उसने मुझे बड़ा खुश पाया। पूछने लगी-क्या बात है? मैंने कहा कि आज मैंने एक बड़ा सुन्दर सपना देखा। फट बोली-कहीं तुम पर भी संजय भंसाली का भूत तो सवार नहीं हो गया?

मैंने कहा-कुछ भी हो, पर मेरे सपने तो सुखद हो गए हैं। मेरे जीवन में खुशी का संचार हो गया है।

कहने लगी मुझे भी तो सुनाओ वह सपना।

मैं भी हिचकिचाया नहीं। मैंने कहा-तू सपना को जानती है न वह विश्व सुंदरी और आज की टॉप फिल्म अभिनेत्री है जिसकी फिल्म देखने के लिए सिनेमाघरों के आगे टिकट पाने के लिए लोग घंटों खड़े रहते हैं।

हां-पत्नी ने कहा। क्या वह तुम्हारे सपने में आयी?

मैंने पूछा-तुम्हें कैसे पता?

तुम्हारे बात करने का हाव-भाव ही ऐसा है -वह बोली।

मैंने कहा-तूने तो मेरे मुंह की बात छीन ली।

बोली-सुनाओ क्या देखा?

उसकी कालो फिल्म मेरे साथ देखी थी न तूने? फिल्म बड़ी हिट हुयी थी। उसमें उसका सुहागरात का एक सीन बड़ा मशहूर हुआ था और लोग केवल उस सीन को देखने के लिए ही उस फिल्म को बार-बार देखते थे?

हां, याद है।

वह मेरे सपने में आई। मुझे देख कर इतनी खुश हुई कि वह मुझे अपने घर सीधे अपने बेडरूम में ले गयी। वहां उसने मेरे साथ वही सीन किया। मेरा तो जीवन ही सफल हो गया।

वह हंस पड़ी। बोली-चलो अच्छा ही हुआ। शादी मेरे साथ और उसके सपने देख तुम्हारा जीवन सफल हो गया। मैं खुश हूं।

अब मुझे रोज नए-नए सपने आने लगे हैं।

दूसरे दिन मैंने अपनी धर्मपत्नी को सुनाया कि रात मुझे और भी अच्छा स्वप्न आया। हमारे प्रदेश के एक नामी-ग्रामी नेता हैं जो अनेकों बार जेल गए हैं और अनेकों बार मंत्री बने हैं। कई बार तो उन्होंने चुनाव जेल के अंदर से ही लड़ा और जीता है। सभी पार्टियां उन्हें अपना प्रत्याशी बनाने का गौरव प्राप्त करने की होड़ में रहती हैं। शरीफ ही नहीं इलाके के गुंडे-बदमाश भी उनके नाम से डरते हैं। मैं उनकी सभा में चला गया। उन्होंने मुझे दूर पीछे बैठे देखा। उनका एक चमचा मेरे पास आया और कहने लगा कि महान नेताजी मुझे मंच पर बुला रहे हैं। मैंने कहा-भैया, क्यों मजाक कर रहे हो। वह तो मुझे जानते ही नहीं, पहचानते ही नहीं। वह गर्ज कर बोला-नेताजी की बात बड़े-बड़े नहीं टाल सकते। चुप्प! चुपचाप मेरे साथ चलो कि ….मैं एक दम उठकर खड़ा हो गया। हाथ जोड़े, गलती मानी, मुआफी मांगी और पीछे हो लिया। वह मुझे मंच पर ले गया। मैंने नेताजी को झुक कर नमस्कार किया। पर यह क्या? उन्होंने तो मेरे पांव ही छू लिए सब के सामने और सोफे पर बिठाते हुए कहा-पिताजी, यहां बैठिये। मैं कहने ही वाला था कि नेताजी आप मेरे पुत्र नहीं हो कि उसके चमचे ने मेरा मुंह ही दबोच दिया और इशारे से कहा-नेताजी के आगे कोई मुंह नहीं खोल सकता। चुप रहो। यह सुनते ही घबराकर मेरी नींद खुल गयी।

मेरी पत्नी बड़ी नाराज हुई। बोली-यह उलटे-सीधे सपने देखने बंद करो। नेताजी का पता है न?

अगले दिन मैंने अपनी पत्नी को एक और ताजा सपना सुनाया। वह एक महिला लेखक हैं न, बहुत सुन्दर सी। मैं उसका नाम भूल रहा हूं। तुमने भी उसके उपन्यास बहुत पढ़े और सराहे हैं। उन्हें अनेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। हम दोनों उसके बहुत बड़े फैन हैं।

हां, हां,-मेरी वामांगनी ने कहा। नाम तो इस समय मुझे भी याद नहीं आ रहा पर मैं समझ गयी। वह शायद कुंवारी भी है।

मैंने कहा-हां, हां वही। वह रात सपने में मुझे मिल गयी। मैं एक फाइव-स्टार होटल के रेस्तरां में गया था।

पत्नी ने बीच में ही टोकते हुए कहा-कभी फाइव-स्टार रेस्तरां गए भी हो?

पर सपने में तो जा ही सकता हूं न। वहां मुझे देखते ही बोली-आओ, आओ। मैं आप ही की राह देख रही थी। उसने मुझे सोफे पर अपने साथ बिठा लिया। उसके साथ के कई और दोस्त मुझे घूर-घूर कर देखने लगे। ज़्यादा बातें वह मुझसे ही करती जा रही थी। वेटर जाम लाया। बड़े प्यार से अपनी मीठी मुस्कान फेंकते हुए उसने जाम मेरे हाथ

भी थमा दिया।

और तुमने थाम लिया? मेरी बीवी ने खीज कर पूछा।

मैं क्या करता जब उसने मेरी आंखों में आंखें डाल कर इतनी प्यारी मुस्कान के साथ दिया? थोड़ी देर बाद वह मेरी बाहों में बाहें डाल कर नाचने भी लगी। गले में बाहें डाल कर उसने मुझ पर ऐसा जादू कर दिया कि मैं सब कुछ भूल ही गया। फिर उसने मेरे कान में बोला-आई लव यू। बस मैं तो वहीं ढेर हो गया। वह इतनी फास्ट निकली कि थोड़ी ही देर बाद उसने मुझे प्रोपोज भी कर दिया।

और तुमने हां भी कर दी होगी-श्रीमतिजी अब कुछ कड़क कर बोलीं।

मैं और क्या करता?

तो तुमने विवाहसूत्र में बंधने के समय जो मुझे वचन दिये थे, कसमें खाई थीं, सब भूल गये?छोड़ो भी। और उस कसम में यह तो नहीं था कि सपने में भी ऐसा नहीं करोंगे। मैंने उसे समझाया।जुदा होने से पहले हम एक बार फिर गले लगे और मैं वापस आ गया। इनती देर में नींद भी खुल गई। सपना टूट गया।

मेरी पत्नी बड़ी समझदार है, हंसमुख और उदारवादी। हंसकर बोली-मुझे तुम पर भरोसा है।

लो रात को मैंने वली पहलवान को भी चित कर दिया। डव्लयू डव्लयू ई पहलवानी में उसने बड़ी धूम मचा रखी है। मैं भी उसका एक मैच देखने अमरीका चला गया। एक पहलवान को हरा कर उसने चुनौती दी कि है कोई माई का लाल तो मुझसे जूझ ले। बस मुझे भी जोश आ गया। मैं चला गया उसके सामने। वह मुझ पर हंसने लगा। बस मुझे गुस्सा आ गया। मैंने एक घूंसा जोर का मारा और वह चित्त। पहले तो मुझे लगा कि कहीं मर ही तो नहीं गया हो क्योंकि बड़ी देर वह हिला ही नहीं। जब उसे होश आया तो उसने हार ही नहीं मानी अपितु मुझसे मुआफी मांगी कि उसको मेरे होते किसी को चुनौति नहीं देनी चाहिये थी।

दूसरे दिन मैं फिर बड़ा खुश उठा। पत्नी समझ गई कि आज भी मैंने कोई बहुत सुहाना सपना देखा है। कहती-सुनाओ आज क्या देखा जो इतना इतरा रहे हो।

मैंने और भी अकड़ते हुए कहा-यह तो तुम्हारी बड़ी किस्मत है जो मैंने तुम से शादी कर ली है वरना तुम्हारे जैसी तो मेरे महल में झाड़ू लगाने के काबिल भी नहीं थी।

अच्छा? उसने बड़ी शरारती मुस्कान देते हुए कहा-सुनाओ तो सही।

मैं महारानी एलिजाबेथ के बरतानिया की सम्राट के रूप में 65 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य के समारोह में शामिल होने लंदन पहुंच गया।

पत्नी ने कटाक्ष किया-कभी अपने शहर से बाहर तो निकले नहीं, पहुंच गए लंदन।

मैंने भी बादशाह की तरह गरज कर कहा-सुनना है तो चुप कर सुनो, वरन चली जाओ।

वह चुपचाप सुनने लगी। मैंने आगे कहा-मुझे देख महारानी बहुत खुश हुईं। बोली, मैं शीघ्र ही ताज त्यागने की सोच रही हूं और तुम्हें ही अगला बादशाह बना दूंगी। मैं उनके पांव पडऩे के लिए झुका तो मेरे घुटने में दर्द हो गया और मेरी आंख खुल गयी। मैं बिस्तर पर था। इतने सुनहरी सपने तो तोड़ देने के लिए मैंने अपनी दर्द को बहुत कोसा।

पत्नी बोली-मुझे लगता है तुम्हें हमारे किसी दुश्मन ने जादू कर दिया है जो उल्टे-सीधे सपने देखने लगे हो। मुझे तो किसी नयी मुसीबत आने का खतरा लगता है। मैं किसी तांत्रिक-जादूगर को बुलाती हूं जो तुम्हारी झाड़-फूंक कर तुम्हारे सिर चढ़े जादू को उतारे। बच्चे छोटे हैं।

मैंने कहा-तू मत घबरा। भंसाली का किसी ने क्या बिगाड़ लिया जो मेरा बिगाड़ लेगा। हमारे यहां पूरी स्वतंत्रता है। फिर सपने पर तो कोई रोक लगा ही नहीं सकता, कोई  कानून नहीं, कोई अदालत नहीं। भंसाली जिंदाबाद।

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