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माई दिल फॉर इंडिया, माई विल फॉर इंडिया: स्वामी चिदानंद सरस्वती

माई दिल फॉर इंडिया, माई विल फॉर इंडिया: स्वामी चिदानंद सरस्वती

चीजें बदले, परिस्थितियां बदले ये बहुत जरूरी है, लेकिन देश की इमेज बदले ये उससे भी ज्यादा जरूरी है। यूनाईटेड नेशन्स में लोग इकट्ठे होते हैं, लेकिन यूनाइटेड क्रिएशन कैसे हो उसकी आवाज किसी ने बुलंद की वह पहली बार भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की। ऐसा पहली बार हुआ कि कोई प्रस्ताव लाया गया और कुछ ही दिनों में 177 देशों की उस पर सहमति बन गई। केवल जीडीपी की बात न करें, सिर्फ इकोनॉमिकल डेवलपमेंट की बात न हो, बल्कि स्पीरिचुअल डेवलपमेंट, सोशल डेवलपमेंट के लिए भी देश जाना जाए मैं उस भारत की बात करता हूं। मेक इन इंडिया एक ग्रेट स्लोगन है, लेकिन इंडिया सिर्फ मेक इन इंडिया के बजाय मेक इंडिया के लिए भी जाना चाहिए। भारत का निर्माण का कैसे हो यह भाव जरूरी है।

वस्तुएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन व्यक्ति उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। भारत ने विचार दिया, उस व्यक्ति का व्यक्तित्व बनाने के लिए। लेकिन, आज वस्तु का महत्व बढ़ गया और व्यक्ति का महत्व खत्म हो गया। वस्तु को हम उपयोग में लाते थे, लेकिन व्यक्ति को हम अपना बनाते थे। आज व्यक्ति का उपयोग होने लगा और वस्तुओं को हम अपना बनाने लगे। यह उदय इंडिया नहीं है। उदय इंडिया है, जहां वस्तुओं का निर्माण हो लेकिन साथ-साथ व्यक्तियों का भी निर्माण हो। यही कारण है कि जंगलों में बैठे ऋषियों ने कहा कि दुर्लभम् भारते जन्म:। उन्होंने किसी राज्य की नहीं बल्कि भारत की बात की।

उस समय न कोई टेलिस्कोप था, ना कोई टेलिफोन था, न ट्विटर था, न फेसबुक था। उतनी दूर बैठकर उन्होंने दिलों की दूरियों को कम करने के मंत्र दिए। आज सब कुछ बढ़ गया, लेकिन दिल की दूरियां भी बढ़ती चलीं गईं। यह कौन सा उदय है? भारत को ऐसा उदय नहीं चाहिए, जो इस फेसबुक के साथ-साथ अपने फेसबुक को भूल जाए। आज छोटे-छोटे बच्चे बोलते हैं कि मुझे बहुत टेंशन है। आज सब सेट है, लेकिन बच्चे अपसेट हैं। आज स्वयं से पूछने कि जरूरत है कि हम कहां खड़े हैं। जिस दिन भारत के लोग जान जाएंगे कि हमारा भारत बिटर बनने के लिए नहीं, बेटर बनने के लिए है, उस दिन उदय इंडिया होगा।

17-01-2015

आज धर्मांतरण की बात हो रही है। आज भारत को धर्मांतरण की नहीं, रूपांतरण की जरूरत है। जब धर्म फंदा बनने लगता है, जब धर्म धंधा बनने लगता है, तब न तो धर्म का विकास होता है और न देश का विकास होता है। आज धर्म को न तो धंधा बनाएं, न तो फंदा बनाएं, ताकि लालच में आकर उसे बेचना पड़े। धर्म को बेचने का अर्थ है खुद को बेचना, अपनी जड़ों से कटना। हम जड़ों को काटने वाले लोग नहीं हैं, हम तो जड़ों को जोडऩे वाले लोग हैं। जड़ों से जुड़ेंगे और जड़ों से जोड़ेंगे वही होगा उदय इंडिया। आज यंग दिल इंडिया को तंगदिल इंडिया नहीं बनाना है। जिस दिन एक टैक्सीवाला कहता है कि अपना भारत बदल रहा है, उसी समय से इंडिया का उदय होना शुरू हो जाता है।  हमें ऐसे भारत की जरूरत है जहां सबका विकास तो हो, लेकिन सतत और सुरक्षित विकास भी हो।

अगर हमें अपने बच्चों को गन प्वांइट पर ही स्कूल भेजना है और उन्हें वापस लाना है तो ऐसा भारत सुरक्षित भारत नहीं होगा। हमें तो ऐसे भारत का निर्माण करना है जहां सब स्वतंत्र हों, सभी सुरक्षित हों। आज देश में बात हो रही है कि देश में जितने बिल थे उन्हें कम किया जाए। अब हम नए बिल की बात नहीं कर रहे हैं, अपने उदय इंडिया के लिए नए विल की बात कर रहे हैं। आज स्लोगन होना चाहिए कि ‘माई दिल फॉर इंडिया, माई विल फॉर इंडिया’। चुनाव से पहले गुजरात पूरे देश के लिए मॉडल बना, अब हमारा देश मॉडल बने पूरे विश्व के लिए। ऐसा हो सकता है। भारतीयों के पास हर चीज का जुगाड़ है, लेकिन जुगाड़ के बजाय हमें इस विकासधारा में खुद जुड़ जाने की जरूरत है। जब हम खुद खड़े हो जाएंगे तो काम जरूरत बनेगा। अगर हम खुद खड़े हो जाएंगे तो सब साथ खड़े हो जाएंगे। साथ खड़े होकर क्या नहीं किया जा सकता है, इस दर्शन को जानने के लिए पूरा विश्व हमारे यहां आएगा।

भारत को मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाएंगे

17-01-2015

मेक इन इंडिया योजना हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गयी है, ताकि हमारा देश के ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बन सके। हमारे प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में सरकार के संबंधित विभाग मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए व्यापार नीतियां तैयार कर रहे हैं। भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्लोबल प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने की जरूरत देश के दीर्घकालिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। अगर मेक इन इंडिया योजना सही ढंग से लागू हो जाती है तो प्रति वर्ष 12 से 14 फीसदी की दर से इस क्षेत्र के विकास में वृद्धि होगी और साथ ही यह 2020 तक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 100 मिलियन अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा होंगे। यह मेरा विश्वास है कि सरकार मेक इन इंडिया को साकार करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

(जी. एम. सिद्धेश्वरा, केन्द्रीय उद्योग मंत्री)

हमने क्रिएटर की बहुत पूजा की, लेकिन क्रिएशन को हमलोग भूल गए। हमारे यहां पेड़ की बात हुई, पहाड़ की बात हुई, पानी की बात हुई, लेकिन इन्हें दूषित भी इन्हीं लोगों ने किया। चाहे वह इंडस्ट्रीज के माध्यम किया हो, मीडिया के माध्यम से किया हो या व्यक्तिगत रूप से किया गया हो, लेकिन किया सबने है। अब बारी रिस्पॉन्सिबिलिटी की है। कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी तो है, लेकिन अब मीडिया सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी की बारी है। निगेटिविटी में टीआरपी है, लेकिन पोजिटिविटी से अब नए भारत को आप बनाते हैं। ब्रेकिंग न्यूज के बजाय आज मेकिंग न्यूज की जरूरत है। चुनाव से पहले की क्या स्थिति थी और आज क्या स्थिति है, आप खुद देख सकते हैं। इसमें मीडिया का बहुत बड़ा योगदान है। उसने एक सशक्त भूमिका निभाई है।

देश के 44 प्रतिशत लोगों का जीवन और जीविका गंगा के कारण है, लेकिन आज गंगा और यमुना की क्या स्थिति है, यह बताने की जरूरत नहीं है। गंगा और यमुना किसी और देश में होती तो यह क्या से क्या हो गई होती, लेकिन भारत में ये नदियां नष्ट होने के कगार पर खड़ी हैं। यदि गंगा को हम यूं ही नष्ट होने देंगे तो निश्चित रूप से हम अपना बहुत बड़ा नुकसान करेंगे। इसे बचाने के लिए हमें संकल्प लेना होगा कि अपने-अपने घरों की गंदगी को गलियों में नहीं आने देंगे, गली से नालों में नहीं जाने देंगे और नालों से नदी में नहीं जाने देंगे। यह बहुत बड़ी शुरूआत है।

17-01-2015

देश के विकास में मीडिया की भी महत्वपूर्ण जिम्मेवारी

17-01-2015

मीडिया को अक्सर लोग समझते हैं कि वो समाज से बाहर की कोई चीज है। वह बहार से कुछ देखता है और बाहर से देखकर भीतर बताता है। मैं ये समझता हूं कि मीडिया समाज का एक अभिन्न अंग है और वो अंदर ही रहता है। इसलिए समाज की विकास यात्रा में उसको साथ चलना पड़ता है, तैरना पड़ता है, डूबना पड़ता है। वो बाहर खड़े होकर लहरों को गिनने का काम नहीं कर सकता। आज नेटवर्क 18 देश का सबसे बड़ा मीडिया नेटवर्क है। हम लगभग 150 मिलियन घरों में पहुंचते हैं। हमारे लगभग 15 न्यूज चैनल्स हैं। एंटरटेनमेंट टेलीविजन के रूप में हमारे पास कलर्स टेलिविजन, एमटीवी, हिस्ट्री 18 जैसे चैनल्स हैं। डिजिटल स्पेस में हम लगभग 30 मिलियन लोगों तक पहुंचते हैं। फस्र्टपोस्ट, मनीकंट्रोल, आईबीएन लाईव, आईबीएन खबर आदि इनमें प्रमुख हैं। इसलिए समाज की जो विकास यात्रा है उसमें हमारा भी उतना ही योगदान है, क्योंकि हम समझते हैं कि हम इसके अभिन्न हिस्से हैं। अब हमने एक नीति अपनायी है कि हम पॉजिटिव और कंस्ट्रक्टिव डायलॉग की, जो समाज में विमर्श है। उदय इंडिया भी शुरू से ऐसा ही प्रयास करती आई है। अभी पुस्तक का विमोचन हुआ है, उसमें दीपक भाई ने लिखा है कि जब उन्होंने उदय इंडिया शुरू किया था तो उसे कई लोगों ने मिशन इम्पॉसिबल कहा था। अरे कैसे पत्रिका चलाएंगे, छ: महीने में बंद हो जाएगी। लेकिन दिनकर की कुछ पंक्तियां हैं और वो मैं आपको सुनाना चाहता हूं। उन्होंने स्वतंत्रता के बारे में लिखा है, ‘स्वतंत्र गर्व उनका जिनपे संकट की घात न चलती है, तूफानों में जिनकी मशाल कुछ और तेज ही जलती है’। तो दीपक ने तूफानों के बावजूद इस मशाल को जलाये रखा। चिंतन की एक नयी परंपरा, जोकि भारतीय परंपरा है, उसे पत्रकारिता में दिया। अडिगता से दिया और उस पर टिके रहे। यह सबसे महत्वपूर्ण बात है। दीपक भाई कि एक और खूबी है कि वो जब कोई आसमान में पहुंच जाये तभी उसकी तारीफ नहीं करते, जब वो कुछ नहीं होता, तब भी उससे वे मित्रता निभाते हैं। मुझे गर्व है कि उदय इंडिया के एक कॉलमनिस्ट के रूप में मैं उनके साथ जुड़ा रहा और अपने विचारों को स्पष्टता के साथ रखने का उन्होंने मुझे लगातार मौका दिया। दीपक और प्रकाशजी का बहुत-बहुत धन्यवाद। ‘मेक इन इंडिया’ में मीडिया भी एक विषय है। एक बात तो ये है कि देश के अंदर मीडिया तेजी से बढ़ रही है, मीडिया की टेक्नोलॉजी तेजी से बढ़ रही है, फिर भी हम अधिकतर चीजें बाहर से ही आयात करते हैं। लगभग 11 करोड़ डिजिटल सेट टॉप बॉक्स हमने इम्पोर्ट किये हैं और शायद 25 करोड़ की और संभावना है। अब इसमें कोई खास टेक्नोलॉजी नहीं है, फिर हम इसे आयात कर रहे हैं। हर तिमाही में हम करीब लाखों फोन इम्पोर्ट करते हैं। क्या ये भारत में नहीं बन सकते? अगर भारत कार मैन्युफैक्चरिंग में क्वालिटी प्रोडक्ट बना सकता है मारुति के रूप में या हुंडई के रूप में तो फोन और डिजिटल सेटटॉप बॉक्स क्यों नहीं बना सकता? इसके लिए जो पॉलिसी एन्वायरनमेंट चाहिए उसे बनाने की जरूरत है। पॉलिसी एन्वायरनमेंट बनाने के लिए जो मीडिया सपोर्ट चाहिए वह पोजिटिव होना चाहिए। देश का सबसे बड़ा मीडिया संस्थान होने के नाते मैं भरोसा दिलाता हूं कि हम उसमें मदद करेंगे, क्योंकि देश के विकास में हमारी भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है और होनी चाहिए। रोज की खबरें दिखानी जरूरी है, लेकिन उसके साथ ही वह भी दिखाना आवश्यक है जो देश के विकास के लिए जरूरी है। भारत की मीडिया स्पेस में बहुत छोटी उपस्थिति है। क्या हमारे पास बीबीसी, अल-जजीरा जैसा कोई नेटवर्क है, जो दुनिया में हम पहुंचे? क्या हमारे पास ऐसा कोई ऑनलाइन पोर्टल है जो दुनिया में पढ़ा या देखा जाता हो? प्रकाश जावड़ेकर जी कह रहे थे कि हमारे पास गूगल नहीं है, फेसबुक नहीं है, हमारे पास कोई प्लेटफॉर्म नहीं है। इसलिए देश के सब से बड़े मीडिया नेटवर्क के तहत हमने तय किया है कि एक ऐसा नेटवर्क बनाने की चेष्टा करेंगे, जो भारत की प्रजेंस पूरी दुनिया में स्थापित करे। देश को ताकतवर बनाने के लिए एक जो सॉफ्ट पावर है, वह है मीडिया। अपनी संस्कृति, अपनी व्यवस्था, अपनी परंपरा, अपनी डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूशन्स, अपनी विकास की कहानी, हमारी बहुलता के बारे दुनिया को कैसे बताना है इसकी चेष्टा हम करेंगे। इसलिए मेक इन इंडिया में ये सब कुछ जुड़ा हुआ है और ये बहुत जरूरी भी है, क्योंकि जब हम ये कहते हैं किविश्व में हिंदुस्तान सबसे युवा देश है तो उन युवाओं को रोजगार के अवसर जुटाना, उनके लिए कारखाने स्थापित करना, उमके लिए सॉफ्टवेयर कंपनी स्थापित करना हमारा दायित्व बन जाता है।

(उमेश उपाध्याय, अध्यक्ष, न्यूज, नेटवर्क 18)

आज देश की बहुत बड़ी आबादी को शौच के लिए खुले में जाना पड़ता है। लगभग 60 करोड़ लोगों के पास शौचालय की व्यवस्था नहीं है। यह भी एक बहुत बड़ी समस्या है। निर्भया जैसे कांड इसके फलस्वरूप सामने आते हैं। इसे हमें बदलना होगा। आज देश में 6 करोड़ बच्चों की कद और काठी छोटी रह गई है। इसका कारण है खुले में शौच करना। असम में 70 लोग मारे गए तो हमारे गृहमंत्री को कार्यक्रम छोड़कर, संसदीय बोर्ड की मीटिंग छोड़कर जाना पड़ा। पेशावर में 132 बच्चे मारे गए तो मोदीजी से लेकर ओबामा तक, मलाला से लेकर मौलाना तक ने इसकी भत्र्सना की। चारों तरफ मीडिया में यही बात दिखाई जाती रही। लेकिन, भारत में 1 से लेकर 5 साल तक के 12 सौ बच्चे प्रतिदिन मर जाते हैं। इसका कारण है जल प्रदूषण। डायरिया, कॉलरा, हैजा सहित पानी के प्रदूषण से संबंधित कई बीमारियों के कारण ये मौतें होती हैं। आज देश में 73 प्रतिशत बच्चे, तीन से कम उम्र की 90 प्रतिशत लड़कियां, 50 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं। वजह है कि हम उन्हें वो पोषित अन्न ही नहीं दे पाते।

मिड डे मिल की शुरूआत हुई इस देश में। 22 करोड़ बच्चे इस प्रोग्राम से लाभान्वित हो रहे हैं, लेकिन अधिकांश जगहों पर मिड डे मिल का पोषाहार दूषित है। इसे और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है, इस पर चर्चा होनी चाहिए। आज हमें जंक से जैविक की ओर, टॉक्सिक से टॉनिक की ओर जाने की जरूरत है। हो सकता है कि जो हम टॉक्सिक अपने बच्चों को दे रहे हैं, उसे टॉनिक में बदल दें, अगर हम इंडिया को ऑर्गेनिक इंडिया बनाएं। अगर हम अपने इंडिया को परिवर्तित करें कि कैसी फसलें, कैसी मिट्टी, कैसी हवा, कैसा पानी हमें देनी चाहिए तभी उदय इंडिया होगा। हमें ऐसे ग्रेन तैयार करने की जरूरत है जो ब्रेन को तैयार करे। आज तो ड्रेन पॉल्यूशन भी और ब्रेन पॉल्यूशन भी है।

विकास के प्रति सरकार ईमानदार

17-01-2015

मेक इन इंडिया कार्यक्रम की शुरूआत हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को ग्लोबल मैन्यूफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने के लिए किया है। मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में तेज गति लाने के लिए प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में संबंद्धित विभाग बिजनेस पॉलिसी का निर्माण कर रहे है। मुझे विश्वास है कि नई नीतियां इस क्षेत्र को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होंगी। भारतीय निर्माण उद्योग का वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि भारत के दीर्घकालीन विकास के लिए लाभकारी होंगी। इसके लिए सरकार की नेशनल मैन्यूफैक्चरिंग पॉलिसी एक व्यापक पॉलिसी है। मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बनाई जाने वाली यह पॉलिसी अपने आप में एक अनोखी नीति है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर, स्कील डेवलपमेंट, टेक्नोलॉजी, वित्त की उपलब्धता आदि का भी ध्यान रखेगी।

अगर मेक इन इंडिया कार्यक्रम को अच्छे तरीके से लागू किया जाय तो मध्यम अवधि में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर का 12 से 14 प्रतिशत की दर से सलाना विकास होगा। इन नीतियों के कारण इस क्षेत्र में 2020 तक 100 मिलियन अतिरिक्त रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। गुणवत्ता और लागत के मामले में हमारे मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को वैश्विक कंपनियों की बराबरी करनी होगी और इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग आवश्यक है। उम्मीद है कि 2020 तक हमारा देश विकास के मामले में और मैन्यूफैक्चरिंग उद्योग में विश्व के शीर्ष 3 देशों में शामिल हो जाएगा। गुणवत्तायुक्त मानव संसाधन के कारण हमारा देश यह स्थान निश्चित रूप से प्राप्त कर सकता है। अन्य देशों की अपेक्षा हमारे यहां मानव-शक्ति ज्यादा सस्ती है।

हमारे पास एक बड़ा घरेलू बाजार है। हमारे प्रधानमंत्री द्वारा बनाए गए सकारात्मक माहौल के कारण जापानी निवेशक देश में निवेश करने में अपनी रूचि दिखा रहे हैं। हमारी सरकार नेशनल इन्वेस्टमेंट और मैन्यूफैक्चरिंग जोन की स्थापना करने जा रही है। मुझे पूरा विश्वास है कि मेक इन इंडिया को पूरी तरह लागू करने के लिए सरकार पूरी ईमानदारी से काम रही है।
(बी. बी. हरिचंदन, पूर्व उद्योग मंत्री, ओडिसा सरकार)

मिड डे मिल के साथ मिड डे फ्रुट मिल का प्रोग्राम भी चला सकते हैं। सरकार मिड डे मिल चलाए, लेकिन मिड डे फ्रुट प्रोग्राम हम और आप चला सकते हैं। हर स्कूल में बच्चे के जन्मदिन के साथ एक फलदायी पेड़ को रोपित किया जा सकता है। मेरा पेड़, मेरा स्कूल का कार्यक्रम भी हो सकता है। इसके लिए मां-बाप को प्रेरित किया जाना चाहिए। वर्षगांठ में पेडें बांटने के बदले पेड़ लगवाएं। ये है इनोवेटिव आइडिया। इससे होगा उदय इंडिया, अन्यथा बिल्डिंग तो खड़ी होती जाएगी, लेकिन हरियाली खत्म होती जाएगी। अगर इस देश की हरियाली को बनाए रखना है, इस देश की खुशहाली को बनाए रखना है तो इस तरह के इनोवेशन की जरूरत होगी।
पितृ-तर्पण होता है। तर्पण के बाद दक्षिणा देने के पहले आप भी पंडितों से संकल्प कराएं कि वो भी पेड़ लगाऐंगे। पितृ तर्पण, पेड़ अर्पण। बच्चों के जन्मदिन पर पेड़ लगाएं, अपनी वर्षगांठ पर पेड़ लगाएं। इन छोटी-छोटी चीजों से हम निश्चित रूप से बदलाव ला सकते हैं।

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