ब्रेकिंग न्यूज़ 

मुख्यमंत्री के नाते एक योगी

मुख्यमंत्री के नाते एक योगी

हिंदुत्व की शान और पूर्वांचल का शेर के नाम से मशहूर योगी आदित्यनाथ ने  19 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। गोरखपुर से लोकसभा सांसद योगी आदित्यनाथ भारतीय राजनीति में कट्टर हिंदुत्व की पहचान माने जाते है। योगी आदित्यनाथ सबसे पहले 1998 में गोरखपुर से सांसद चुने गए थे उस समय उनकी उम्र मात्र 26 वर्ष की थी और लोकसभा में सबसे कम उम्र के सांसद थे। वे भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं में से एक है। योगी आदित्यनाथ नाथ संप्रदाय से है और नाथ संप्रदाय का मानना है कि सन्यासी को देश, धर्म और राजनीती में जरूर हिस्सा लेना चाहिए। योगी का कथन है ‘एक हाथ में माला और एक हाथ में भाला’ उनके इस कथन से ही उनके सशक्त चरित्र का आभास होता है। योगी आदित्यनाथ के बचपन का नाम अजय सिंह बिष्ट था। इनका जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी जिले के पंचेर गांव में हुआ था। योगी आदित्यनाथ का जन्म राजपूत परिवार में हुआ और इनके पिता का नाम नंद सिंह बिष्ट है। वैसे उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र जीवन से ही हो गई थी। गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित विषय से बीएससी की डिग्री हासिल करने तक उनकी गिनती अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रखर कार्यकर्ताओं के रूप में होने लगी थी। आदित्यनाथ ने 22 वर्ष की अवस्था में सांसारिक जीवन त्यागकर संन्यास ग्रहण कर लिया और गोरखनाथ मंदिर के पूर्व महंत अवैद्यनाथ के सानिध्य में रहने लगे और महंत अवैद्यनाथ की निर्वाण के बाद वह गोरखनाथ मंदिर के गोरक्षपीठाधीश्वर चुने गए। ये तो हुआ योगी आदित्यनाथ का जीवन परिचय, अब जानते हैं कुछ और उनसे जुड़ी बातें:-

हिन्दू युवा वाहिनी के संस्थापक

योगी आदित्यनाथ हिंदू युवा वाहिनी के संस्थापक भी हैं, हिंदू युवा वाहिनी संगठन हिन्दू युवाओं का सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी समूह है। ये संगठन हमेशा किसी न किसी विवाद में उलझा रहा। इस संगठन पर 2005 में मऊ में हुए दंगे का आरोप भी लगा था। यह दंगा भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक कृष्णानंदा राय की हत्या के आरोपी मुख्तार अंसारी को लेकर हुआ था।

राजनैतिक जीवन

योगी आदित्यनाथ 1998 से लगातार गोरखपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। योगी यूपी बीजेपी के बड़े चेहरे माने जाते है। योगी आदित्यनाथ 2014 में पांचवी बार लोकसभा सांसद बने। योगी के गुरु अवैद्यनाथ ने सन 1998 में राजनीति से संन्यास लिया और योगी आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। यहीं से योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक पारी शुरू हुई। 1998 में गोरखपुर से 12वीं लोकसभा का चुनाव जीतकर योगी आदित्यनाथ संसद पहुंचे तो वह सबसे कम उम्र के सांसद थे, वो 26 साल की उम्र में पहली बार सांसद बने।

विवादित जीवन

Layout 1राजनीत की कीचड़ में कुछ एक नेताओं को छोड़ दें तो शायद ही कोई ऐसा नेता हो जिसका जीवन विवादित न रहा हो। योगी आदित्यनाथ का राजनैतिक जीवन हमेशा से विवाद में बना रहा।

सन 2005 में योगी आदित्यनाथ पर ईसाईयों का धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगा था। जिसमे उत्तर प्रदेश के एटा में 1800 इसाई लोगों ने धर्म परिवर्तन कर हिन्दू धर्म अपनाया था।

2015 में भी सूर्य नमस्कार को लेकर योगी आदित्यनाथ का बयान विवादों में रहा था जिसमे उन्होंने सूर्य नमस्कार का विरोध करने वाले लोगो को कहा था कि जो लोग सूर्य नमस्कार नहीं करते उन्हें भारत में रहने का कोई हक नहीं है। उन्होंने कहा था की उनकी उन लोगों से गुजारिश है, जो लोग सूर्य में भी हिन्दू-मुस्लिम देखते हैं ऐसे लोगों को चल्लूभर पानी में डूब कर मर जाना चाहिए।

लव जिहाद की बात पर योगी का एक वीडियो सामने आया था जिसमें वो अपने समर्थकों से कहते सुनाई दे रहे थे कि हमने फैसला किया है कि अगर वे एक हिंदू लडक़ी का धर्म परिवर्तन करवाते हैं तो हम 100 मुस्लिम लड़कियों का धर्म परिवर्तन करवाएंगे।

दादरी कांड पर आजम खान द्वारा यूएन जाने की बात पर योगी ने उन्हें तुरंत बर्खास्त करने को कहा था। योगी ने कहा था कि अखलाक पाकिस्तान गया था, और उसके बाद से उनकी गतिविधियां बदल गई थीं। क्या सरकार ने ये जानने की कभी कोशिश की कि ये व्यक्ति पाकिस्तान क्यों गया था आज उसे महिमामंडित किया जा रहा है।

Layout 1

मस्जिद में गौरी-गणेश की मूर्ति

फरवरी 2015 में विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम में योगी ने कहा कि अगर उन्हें अनुमति मिले तो वो देश के सभी मस्जिदों के अंदर गौरी-गणेश की मूर्ति स्थापित करवा देंगे।

विधानसभा चुनाव के दौरान राम मंदिर पर बयान देते हुए योगी ने कहा था कि राम मंदिर जरूर बनेगा और किसी में दम नहीं है कि वहां पर राम मंदिर बनने से रोक सके।

मुस्लिमों की बढ़ती जनसंख्या

सितंबर 2015 में आदित्यनाथ ने कहा था कि मुस्लिमों के बीच ‘उच्च’ प्रजनन दर से जनसंख्या असंतुलन हो सकता है।  मुस्लिमों में अपेक्षाकृत उच्च प्रजनन दर से जनसंख्या का गंभीर अंसतुलन पैदा होगा।

अनुपम खेर हैं ‘विलेन’ बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ ने अभिनेता अनुपम खेर को असल जिंदगी का खलनायक बताया था। खेर ने एक कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ और साध्वी प्राची को जेल में डालने और पार्टी से बाहर करने की बात कही थी।

जेएनयू प्रकरण पर योगी आदित्यनाथ ने कन्हैया पर कहा था कि जेएनयू सहित देश के किसी भी शिक्षण संस्था से किसी भी जिन्ना को पैदा नहीं होने दिया जाएगा योगी ने कहा कि जिन्ना को पैदा होने से पहले ही दफन कर दिया जाएगा।

नवंबर 2015 में योगी आदित्यनाथ ने शाहरुख की तुलना हाफिज सईद से करते हुए कहा था कि हाफिज सईद की भाषा और शाहरुख की भाषा में कोई अंतर नहीं है।  योगी आदित्यनाथ यहीं नहीं रुके उन्होनें कहा कि देश में माहौल खराब करने के लिए एक साजिश रची जा रही है जिसमें शाहरुख खान भी शामिल हो गए हैं। आदित्यनाथ ने शाहरुख को हाफिज के न्योते पर बोलते हुए कहा कि शाहरुख को पाकिस्तान चले जाना चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि अगर देश में बहुसंख्यक समाज ने शाहरुख खान की फिल्म का बहिष्कार कर दिया तो वो सडक़ पर आ जाएंगे।

अपनी ही पार्टी से विवाद

आदित्यनाथ अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण के मजबूत पैरोकार हैं। उन्होंने हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश में भाजपा के हिन्दुत्व अभियान को मथा। कई बार वह पार्टी से बगावती सुर में बोलते दिखे लेकिन हिन्दू वोटरों पर मजबूत पकड़ की वजह से पार्टी उनकी उपेक्षा नहीं कर पाई। उनमें कुशल नेतृत्व क्षमता भी है। आदित्यनाथ विज्ञान विषय में स्नातक तक शिक्षा प्राप्त हैं। उनकी अपनी व्यक्तिगत वेबसाइट भी है और खुलकर अपने विचारों को ब्लॉग के जरिए व्यक्त करते रहे हैं। कानों में सोने का मोटा कुंडल पहने और आंखों पर रेबैन का काला चश्मा चढ़ाए आदित्यनाथ हमेशा भगवा में ही नजर आते हैं। योगी के भाजपा से संबंध एक समय खासे तनावपूर्ण हो गए थे। वह पूर्वी उत्तर प्रदेश में पार्टी मामलों में बड़ी भूमिका चाहते थे, जिससे विवाद गहरा गया। दिसंबर 2006 में उन्होंने गोरखपुर में विराट हिन्दू महासम्मेलन कराया, उसी समय लखनऊ में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक हो रही थी।

योगी आदित्यनाथ और भाजपा नेतृत्व के बीच 2007 के चुनावों में भी तनाव हो गया था, जब योगी 100 से अधिक सीटों पर अपनी पसंद के उम्मीदवार उतारना चाहते थे। बाद में हालांकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दखल के बाद समझौता हुआ।

ऐसे बढ़ा योगी का कद

योगी आदित्यनाथ की हैसियत ऐसी है कि जहां वो खड़े हो जाते हैं, सभा वहीं शुरू हो जाती है। वो जो बोल देते हैं, उनके समर्थकों के लिए वो कानून हो जाता है यही नहीं, होली और दीपावली जैसे त्योहार कब मनाया जाए, इसके लिए भी योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर से ऐलान करते हैं, इसलिए गोरखपुर में हिुंदुओं के त्योहार एक दिन बाद मनाए जाते हैं। गोरखपुर और आसपास के इलाके में योगी आदित्यनाथ और उनकी हिंदू युवा वाहिनी की तूती बोलती है।

2008 में हुआ था जानलेवा हमला

सात सितंबर 2008 को सांसद योगी आदित्यनाथ पर आजमगढ़ में जानलेवा हिंसक हमला हुआ था। इस हमले में बाल-बाल बचे थे, यह हमला इतना बड़ा था कि सौ से अधिक वाहनों को हमलावरों ने घेर लिया और लोगों को लहुलुहान कर दिया। आदित्यनाथ  गोरखपुर दंगों के दौरान तब गिरफ्तार किए गए जब मुस्लिम त्यौहार मोहर्रम के दौरान फायरिंग में एक हिन्दू युवा की जान चली गई थी। डीएम ने बताया की वह बुरी तरह जख्मी है, तब अधिकारियों ने योगी को उस जगह जाने से मना कर दिया, लेकिन आदित्यनाथ उस जगह पर जाने के लिए अड़ गए। तब उन्होंने शहर में लगे कफर्यू  को हटाने की मांग की।

Layout 1

उर्दू बन गई हिंदी, मियां बदलकर माया

आदित्यनाथ के तौर-तरीकों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने गोरखपुर के कई ऐतिहासिक मुहल्लों के नाम बदलवा दिए।  इसके तहत उर्दू बाजार हिंदी बाजार बन गया। अली नगर आर्यनगर हो गया। मियां बाजार माया बाजार हो गया।  इतना ही नहीं, योगी आदित्यनाथ तो आजमगढ़ का नाम भी बदलवाना चाहते है। इसके पीछे आदित्यनाथ का तर्क है कि देश की पहचान हिंदी से है उर्दू से नहीं, आर्य से है अली से नहीं।

आदित्यनाथ जी के व्यक्तित्व के विभिन्न आयाम

भगवामय बेदाग जीवन

योगी आदित्यनाथ जी महाराज एक खुली किताब हैं जिसे कोई भी कभी भी पढ़ सकता है। उनका जीवन एक योगी का जीवन है, सन्त का जीवन है। पीडि़त, गरीब, असहाय के प्रति करुणा, किसी के भी प्रति अन्याय एवं भ्रष्टाचार के विरुद्ध तनकर खड़ा हो जाने का निर्भीक मन, विचारधारा एवं सिद्धान्त के प्रति अटल, लाभ-हानि, मान-सम्मान की चिन्ता किये बगैर साहस के साथ किसी भी सीमा तक जाकर धर्म एवं संस्कृति की रक्षा का प्रयास उनकी पहचान है।

पीडि़त मानवता को समर्पित जीवन

वैभवपूर्ण ऐश्वर्य का त्यागकर कंटकाकीर्ण पगडंडियों का मार्ग उन्होंने स्वीकार किया है। उनके जीवन का उद्देश्य है – ‘न त्वं कामये राज्यं, न स्वर्ग ना पुनर्भवम्। कामये दु:खतप्तानां प्राणिनामर्तिनाशनम्।। अर्थात् ‘‘हे प्रभो! मैं लोक जीवन में राजपाट पाने की कामना नहीं करता हूं। मैं लोकोत्तर जीवन में स्वर्ग और मोक्ष पाने की भी कामना नहीं करता। मैं अपने लिये इन तमाम सुखों के बदले केवल प्राणिमात्र के कष्टों का निवारण ही चाहता हूं।’’  योगी आदित्यनाथ  को निकट से जानने वाला हर कोई यह जानता है कि वे उपर्युक्त अवधारणा को साक्षात् जीते हैं। वरना जहां सुबह से शाम तक हजारों सिर उनके चरणों में झुकते हों, जहां भौतिक सुख और वैभव के सभी साधन एक इशारे पर उपलब्ध हो जाये, जहां मोक्ष प्राप्त करने के सभी साधन एवं साधना उपलब्ध हों, ऐसे जीवन का प्रशस्त मार्ग तजकर मान-सम्मान की चिंता किये बगैर, यदा-कदा अपमान का हलाहल पीते हुए इस कंटकाकीर्ण मार्ग का वे अनुसरण क्यों करते?

सामाजिक समरसता के अग्रदूत

‘जाति-पांति पूछे नहिं कोई-हरि को भजै सो हरि का होई’ गोरक्षपीठ का मंत्र रहा है। गोरक्षनाथ ने भारत की जातिवादी-रूढि़वादिता के विरुद्ध जो उद्घोष किया, उसे इस पीठ ने अनवरत जारी रखा। गोरक्षपीठाधीश्वर महन्त अवैद्यनाथ जी महाराज के पद-चिह्नों पर चलते हुए  योगी आदित्यनाथ जी महाराज ने भी हिन्दू समाज में व्याप्त कुरीतियों, जातिवाद, क्षेत्रवाद, नारी-पुरुष, अमीर-गरीब आदि विषमताओं, भेदभाव एवं छुआछूत पर कठोर प्रहार करते हुए, इसके विरुद्ध अनवरत अभियान जारी रखा है। गांव-गांव में सहभोज के माध्यम से ‘एक साथ बैठें-एक साथ खाएं’ मंत्र का उन्होंने उद्घोष किया।

भ्रष्टाचार-आतंकवाद-अपराध विरोधी संघर्ष के नायक

योगी जी के भ्रष्टाचार-विरोधी तेवर के सभी साक्षी हैं। अस्सी के दशक में गुटीय संघर्ष एवं अपराधियों की शरणगाह होने की गोरखपुर की छवि योगी जी के कारण बदली है। अपराधियों के विरुद्ध आम जनता एवं व्यापारियों के साथ खड़ा होने के कारण आज पूर्वी उत्तर प्रदेश में अपराधियों के मनोबल टूटे हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में योगी जी के संघर्षों का ही प्रभाव है कि माओवादी-जेहादी आतंकवादी इस क्षेत्र में अपने पॉव नही पसार पाए। नेपाल सीमा पर राष्ट्र विरोधी शक्तियों की प्रतिरोधक शक्ति के रुप में हिन्दु युवा वाहिनी सफल रही है।

शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा के पुजारी

सेवा के क्षेत्र में शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता दिये जाने के गोरक्षपीठ द्वारा जारी अभियान को  योगी आदित्यनाथ  ने भी और सशक्त ढंग से आगे बढ़ाया है। योगी जी के नेतृत्व में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद् द्वारा आज तीन दर्जन से अधिक शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाएं गोरखपुर एवं महाराजगंज जनपद में कुष्ठरोगियों एवं वनटांगियों के बच्चों की नि:शुल्क शिक्षा से लेकर बी.एड. एवं पालिटेक्निक जैसे रोजगारपरक सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने का भगीरथ प्रयास जारी है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में गुरु श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय ने अमीर-गरीब सभी के लिये एक समान उच्च कोटि की स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करायी है। नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविरों ने जनता के घर तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुचायी हैं।

विकास के पथ पर अनवरत गतिशील

योगी आदित्यनाथ के व्यक्तित्व में सन्त और जननेता के गुणों का अद्भुत समन्वय है। ऐसा व्यक्तित्व विरला ही होता है। यही कारण है कि एक तरफ जहां वे धर्म-संस्कृति के रक्षक के रूप में दिखते हैं तो दूसरी तरफ वे जनसमस्याओं के समाधान हेतु अनवरत संघर्ष करते रहते है; सडक़, बिजली, पानी, खेती आवास, दवाई और पढ़ाई आदि की समस्याओं से प्रतिदिन जुझती जनता के दर्द को सडक़ से संसद तक योगी जी संघर्षमय स्वर प्रदान करते रहे हैं। इसी का परिणाम है कि केन्द्र और प्रदेश में विपक्षी पार्टियों की सरकार रहने के बावजूद गोरखपुर विकास के पथ पर अनवरत गतिमान है।

नीलाभ कृष्ण

ship cargo EUдетские палатки

Leave a Reply

Your email address will not be published.