ब्रेकिंग न्यूज़ 

दिल्ली एक सफर

दिल्ली एक सफर

‘दिल्ली’ नामक यह उपन्यास प्रसिद्ध लेखक खुशवन्त सिंह के द्वारा भारत की राजधानी दिल्ली की संस्कृति के उपर आधारित है। इस पुस्तक में लेखक ने अपने दिल्ली भ्रमण को एक कहानी के माध्यम से बताने का प्रयास किया है। यह दिल्ली की छह सौ साल पहले से लेकर इन्दिरा गांधी की हत्या तक की कहानी है जिसे लिखने में लेखक को लगभग पच्चीस वर्ष का समय लगा। दिल्ली के इतिहास के अलग-अलग परिच्छेदों को नायक-मुख्य वाचक एवं उसकी किन्नर प्रेमिका–भागमती–के  जरिये एक सूत्र में बांधा गया है, हालांकि सभी अध्याय अपने आप में एक पूरी-की-पूरी कहानी कहते हैं। मुसदीलाल, गयासुद्दीन बलबन, अमीर खुसरो, तैमूर लंग, औरंगजेब, नादिर शाह, मीर तकी मीर, बहादुरशाह जफर, 1857 का गदर-इन सबकी कहानी खुशवंत सिंह ने सजीवता से बयान की है।

उपन्यास का एक पूरा-का पूरा अध्याय नयी दिल्ली के निर्माण से संबंधित है।

इस उपन्यास की सबसे अनोखी बात है एक किन्नर का इसकी नायिका होना। इस पुस्तक के अनुसार खुशवंत सिंह ने बताया है कि दिल्ली और भागमती दोनो की एक ही कहानी है–दोनों ही जाहीलों के हाथों रौंदी जाती रहीं। जिस तरह अनेक प्रेमियों द्वारा भोगी जाती भागमती कभी प्रजनन नही कर सकी, वैसे ही अनेक आक्रमणों में आततायियों द्वारा बार-बार उजड़ी यह दिल्ली भी बसने-उजडऩे के चक्र से गुजरती, बांझ-सरीखी ही बनी रही, विकास तो इसका हुआ ही नहीं।

दिल्ली

लेखक           : खुशवंत सिंह

          प्रकाशक       : किताबघर प्रकाशन

मूल्य        : 400 रु.

पृष्ठ      : 334

इस पुस्तक में लेखक ने कुतुबमिनार, लाल किला से लेकर कनट प्लेस तक के दौरे को बड़ी ही सुंदरता से अपने शब्दो में प्रदॢशत किया है। दिल्ली पर कटाक्ष करते हुए, उस समय शहर में होने वाली गंदगी को लेकर खुशवंत सिंह ने लिखा कि दिल्ली एक मृतप्राय नदी-किनारे बसा, शोर-शराबे से सराबोर, भीड़-भरे, सड़े-गले बाजारोंवाला एक ऐसा शहर है जंहा टुटे-फूटे किलों अैर मकबरों के चारों तरफ पनपती गंदी बस्तियों का सम्राज्य है।

दिल्ली में रहने वाले सिख समुदाय की व्यवसायिक मानसिकता को दर्शाने के लिए लेखक ने अपनी साथी भागमती से की गई चर्चा को लिखा है कि ये सारे के सारे पंजाबी खाली-जेब आये थे इस दिल्ली में। और अब इनको देखो! सारा शहर इन्होने अपनी ही मिल्कियत बना लिया है। अपने लिए महल दो महल खड़े कर लिए हैं इन सबों ने! दबाकर तंदूरी-चिकन खाएंगे, व्हिस्की चढ़ाएंगे।

खुशवंत सिंह द्वारा लिखी गई यह पुस्तक कटाक्ष से भरपूर है। इस पुस्तक के माध्यम से लेखक ने न केवल अपने समय में शहर में होने वाली गंदगियों की आलोचना की है, बल्कि उन्होने विभिन्न पंथों, राजनीतिक दलों तथा यहां रहने वाले उन सभी लोगों की अपने लेखन के माध्यम से आलोचना की है जो इस शहर के समाजिक तथा वास्तविक वातावरण को खराब करते हैं।

यह पुस्तक खुशवंत सिंह की दिल्ली नामक अंग्रेजी पुस्तक का अनुवाद है जिसकी पृष्ट-भूमि काफी पुरानी है। अत: यह पुस्तक वर्तमान समय के युवाओं  को उस समय की पुरानी दिल्ली को जानने का मौका देती है जो संभवत: उनके लिए अत्याधिक लाभदायक है।

रवि मिश्रा

logistics and supply chain magazinevsemsmart.ru

Leave a Reply

Your email address will not be published.