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जनता व षड्यंत्रकारी दोनों केजरीवालजी के पीछे

जनता व षड्यंत्रकारी दोनों केजरीवालजी के पीछे

बेटा: पिताजी।

पिता: हां, बेटा।

बेटा: मैं तो केजरीवालजी का फैन पहले ही था पर अब बहुत बड़ा बन गया हूं।

पिता: क्या घर के लिेये तू कोई बड़ा फैन ले आया है?

बेटा: ओहो, पिताजी। आपको अंग्रेजी नहीं आती, यही मुसीबत है। फैन सिर्फ पंखा ही नहीं होता, फैन का मतलब किसी का जी-जान से अंधा समर्थक भी होता है।

पिता: अच्छा, अक्ल तो तेरे पास पहले ही नहीं थी, अब तू अंधा भी हो गया है समर्थन करने में?

बेटा: आपने तो पिताजी अपने होनहार बेटे को कभी जौहरी की नजर से आंका ही नहीं।

पिता: चल छोड़। तू बोल क्या बोल रहा था?

बेटा: पिताजी, केजरीवालजी का तो जीवन ही महान है।

पिता: अच्छा?

बेटा: वह तो सोते हैं, जागते हैं, सांस लेते हैं तो केवल आम आदमी के लिये वह खाते हैं, पीते हैं तों अपने लिये नहीं, केवल इसलिये कि वह लम्बा समय जी सकें और देश व आम आदमी की लम्बी सेवा कर सकें।

पिता: यह तो बहुत अच्छी बात है बेटा।

बेटा: यही नहीं, पिताजी। राजनीति में आने से पूर्व ही उन्हें गले की तथा अन्य बीमारियां लग चुकी थीं। पर तब उन्होंने अपनी कोई चिन्ता नहीं की पर ज्योंही आम आदमी ने उन्हें दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया उन्होंने आम आदमी के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य की चिन्ता भी शुरू कर दी।

पिता: हां, तभी वह दो-तीन बार बंगलौर में अपने उपचार के लिये गये थे।

बेटा: यह भी केवल इसलिये कि जनता ने जो उन्हें सेवा का मौका दिया है वह उसमें अपने खराब स्वास्थ्य के कारण चूक न जायें। वरन् वह तो कभी अपनी चिन्ता न करते।

पिता: यह तो तू ठीक ही कह रहा है।

बेटा: उन्होंने तो पिताजी, दिल्ली को लन्दन बनाने की घोषणा कर दी है। वह कहते हैं कि दिल्ली को देखकर तो लोग लन्दन को ही भूल जायेंगे।

पिता: पर बेटा, वह लन्दन की नकल क्यों करना चाहते हैं? वह यह क्यों नहीं कहते कि वह दिल्ली को लन्दन से भी बेहतर बना देंगे कि लन्दन को ही शर्म आ जाये।

बेटा: यह तो पिताजी वह ही जानें।

पिता: यह बेटा इसलिये कि हमारे महान नेता मौलिकता की बात कम, नकल की बात अधिक करते हैं। यह हमारी हीन भावना का परिचायक है।

बेटा: पर पिताजी, उनकी सारी योजनाओं को विफल कर देने के नायक हैं हमारे प्रधानमंत्री श्री मोदी।

पिता: कैसे?

बेटा: पिताजी, केजरीवालजी पंजाब और गोवा को भी दिल्ली जैसा आदर्श राज्य बना देना चाहते थे। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि वह दोनों ही राज्यों को आम आदमी की आदर्श सरकार दे देंगे।

पिता: क्या आदर्श स्थापित करना चाहते थे वहां?

बेटा: वह दो मास में पंजाब को ड्रग के अभिशाप से मुक्त कर देना चाहते थे।

पिता: दिल्ली को उन्होंने दो साल में इस अभिशाप से मुक्त कर दिया है?

बेटा: पिताजी, वह अपनी लग्न के बहुत पक्के हैं। मेरे विचार में तो वह यह करने में सफल हो गये हैं।

पिता: तो फिर दिल्ली में जगह-जगह नशा उन्मूलन केन्द्र क्यों खोल रखे हैं जब यह समस्या ही नहीं है?

बेटा: यह इसलिये कि कहीं बाहर से आने वाले नशेड़ी लोग इस स्वच्छ राज्य को प्रदूषित न कर दें।

पिता: अच्छा। तो चुनाव परिणाम से तो जनता ने यह सन्देश दिया कि वह नशामुक्ति नहीं चाहते।

बेटा: पर पिताजी, जनता ने सत्तासीन अकाली-भाजपा का सरकार को तो हरा दिया ना?

पिता: बेटा, यह तो हमारे चुनाव गणित का करिश्मा है। आम आदमी पार्टी को अकाली गठबन्धन से दो सीटें अवश्य अधिक मिली हैं पर वोट प्रतिशत उनसे कम है।

बेटा: पिताजी, आप इन बारीकियों में मत पड़ा करो।

पिता: बेटा, सच्चाई से आंखें मूंद लेने से सच्चाई ओझल नहीं हो जाती। तुझे तो यह भी ज्ञात होना चाहिये कि केजरीवालजी के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी व वर्तमान सांसद विधानसभा चुनाव हार गये थे।

बेटा: पिताजी, चुनाव में तो हार-जीत चलती ही रहती है।

पिता: पर यह भी तो सच्च है ना कि केजरीवालजी ने पंजाब व गोवा दोनों ही में सरकार बनाने का दावा किया था।

बेटा: यह तो सब करते हैं।

पिता: पर सब को सच से भी मुंह नहीं मोडऩा चाहिये। तुझे पता है कि केजरीवालजी ने गोवा में 40 में से 39 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। उनमें से 38 की जमानत जब्त हो गई है।

बेटा: पिताजी, आपने अखबार पढ़ी नहीं। केजरीवालजी ने कह दिया है कि ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी की गई और जीती हुई आम आदमी पार्टी को हरा दिया गया ।

पिता: बहुत खूब। जीत जाओ तो कहो मैं जीता, हार जाओ तो दूसरों ने हरा दिया। जब आम आदमी पार्टी 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में 40 में से 37 सीटें जीत गई तब तो ईवीएम मशीनें ठीक थी। अब जब पंजाब व गोवा में हार गई तो वही मशीने खराब हो गईं। दोनों चुनाव के समच केन्द्र में मोदी सरकार ही थी। नाच न जाने, आंगन टेढ़ा।

बेटा: पर पिताजी, यही आरोप बहुजन समाज पार्टी सर्वेसर्वा सुश्री मायावती भी तो लगा रही हैं। सब गलत तो नहीं हो सकते।

पिता: बेटा, दोनों ही एक थैली के चट्टे-बट्टे हैं। 2007 के यूपी विधान सभा चुनाव में इन्ही मशीनों ने मायाजी को बहुमत दे दिया तो वह सच बता रहीं थीं। अब नहीं मिला तो वही मशीने झूठी हो गईं। लगता है पालिटिक्स में नैतिकता नाम की तो काई चीज ही नहीं रह गई है।

बेटा: लेकिन पिताजी, आपको यह तो मानना ही पड़ेगा कि आम आदमी पार्टी ही सब से स्वच्छ, ईमानदार व पारदर्शी पार्टी है।

पिता: हां, भ्रष्टाचार के विरूद्ध लड़ाई के ढकोंसले पर अवश्य यह पार्टी जन्मी थी। भाई-भतीजावाद के खिलाफ ही इसने आवाज उठाई थी और उसे समाप्त करने का दम भरा था। आज वह उसी की दलदल में फंस कर रह गई है।

बेटा: पिताजी, इस आदर्श पर तो केजरीवालजी आज भी अडिग हैं।

पिता: लगता है तुमने अभी शिंगलू कमेटी रिपोर्ट नहीं पढ़ी।

बेटा: नहीं, पिताजी पढ़ी है।

पिता: तब किस मुंह से केजरीवालजी ईमानदारी की बात करते हैं। अपने आपको भाई-भतीजावाद के विरूद्ध बताते हैं?

बेटा: पिताजी, यह तो कोई नई बात नहीं है। यह भी मोदीजी का ही आम आदमी पार्टी और केजरीवालजी के खिलाफ एक घोर षडय़ंत्र का सबूत है।

पिता: कैसे?

बेटा: उन्होंने इस रिपोर्ट को जानबूझ कर दिल्ली नगर निगम चुनाव व विधानसभा उपचुनाव की पूर्वसंध्या पर जारी कर मतदाता को गुमराह करने का प्रयास किया है।

पिता: तू भी आम आदमी पार्टी की ही भाषा बोल रहा है।

बेटा: पिताजी, मैं तो पहले ही कह चुका हूं कि मैं केजरीवालजी का बहुत बड़ा फैन हूं।

पिता: तू बहुत बड़ा फैन है, यह मैं तो मान लेता हूं पर सारी जनता ने तो अपनी आंखें, दिमाग और कान बन्द नहीं कर रखे। उनको तो सब दिखाई दे रहा है।

बेटा: पिताजी, पार्टी तो इसे झूठ का पुलिन्दा व षडय़ंत्र बता कर पहले ही नकार चुकी है।

पिता: अन्य पार्टियां या नेता कभी कोई छींक भी मार दें तो केजरीवालजी चाहते हुये भी अपनी जुबान खोलने से अपने आपको रोक नहीं पाते। पर अब क्यों चुप हैं?

बेटा: पिताजी, पार्टी तो इन आरोपों को सिरे से खारिज कर चुकी है।

पिता: बेटा, यह आरोप नहीं हैं। शिंगलू कमेटी ने जांच के बाद इन आरोपों को साबित कर दिया है।

बेटा:यह सब षडय़ंत्र है पिताजी।

पिता: तो बेटा क्या पार्टी के विरोधियों ने केजरीवालजी व सिसोदियाजी तथा अन्य मन्त्रियों के रिश्तेदारों को उनकी मर्जी के बिना ही केजरीवालजी से नौकरियां दिला दी थीं? आप के नेताओं ने यह तो नहीं कहा कि वह उनके रिश्तेदार नहीं थे जिन्हें लाभ पहुंचाया गया।

बेटा: मैं तो बस यही कहूंगा कि यह सब पार्टी व केजरीवालजी को बदनाम करने और चुनाव में अनुचित लाभ उठाने का एक भौंड़ा प्रयास है।

पिता: अब जवाब नही है तो षडय़ंत्र का बार-बार जाप करने से यह पाप पुन्य नहीं बन जायेगा।sovetnegзаправка картриджей самостоятельно canon

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