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गुणकारी पपीता 

गुणकारी पपीता 

पपीता आसानी से प्राप्त होने वाला फायदेमंद फल है। इसे बीमारी के समय भी खाया जा सकता है। पका पपीता हमेशा से ही स्वादिष्ट होता है। कई प्रकार के खनिज और विटामिन से भरपूर होने के कारण यह शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। संसार  में पपीते का सबसे अधिक उत्पादन भारत में ही होता है, जिसकी पैदावार आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश तथा महाराष्ट्र में अधिक मात्रा में  होती है।

पपीता फल के रूप में खाये जाने के अलावा भी कई तरह से प्रयोग किया जाता है।  कच्चे पपीते की सब्जी बनाई जाती है। कच्चे पपीते का सलाद भी बनाकर खाया जाता है। पपीते की पत्तियां, जड़, बीज, आदि सभी औषधि के रूप में काम में लिये जाते हैं। पपीते का शेक बनता है, जो बहुत स्वादिष्ट होता है, जिसका आजकल बहुत चलन है। पपीते को स्मूदी और आइसक्रीम बनाने में भी प्रयोग किया जाता है।

कच्चा पपीता काटने पर उसमे से दूध निकलने  लगता है। इस दूध में पपेन नामक एंजाइम होता है जिसमे प्रोटीन के मजबूत रेशों को तोड़कर उसे पचाने की शक्ति होती है। इस दूध या आक्षीर को सुखाकर इसे कई प्रकार से उपयोग में लाया जाता है। पपेन का उपयोग कई प्रकार की दवा बनाने में किया जाता है। विशेषकर पाचन से संबंधित दवाओं में इसका उपयोग होता है। हमारे शरीर में प्रोटीन के पाचन के लिए पेप्सिन नामक एंजाइम का स्राव होता है। यह एंजाइम पेट में एसिड होने पर सक्रिय होता है। जबकि पपेन बिना एसिड की मौजूदगी के पेप्सिन जैसा ही प्रोटीन को पचाने का काम आसानी से कर लेता है। इसके अलावा पपेन का उपयोग च्युंगम बनाने में, कॉस्मेटिक्स में, टूथपेस्ट में, कॉन्टेक्ट लेंस क्लीनर बनाने में किया जाता है। टेक्सटाइल इंडस्ट्री तथा चिपकाने का सामान बनाने में भी इसका उपयोग होता है।

पपीता खनिज और विटामिन से भरपूर होता है। पका हुआ पपीता विटामिन सी का भंडार होता है। यह  विटामिन ए, फोलेट, पोटेशियम, कॉपर, पैण्टोथेनिक एसिड तथा फाइबर का बहुत अच्छा स्रोत है। पपीते से कैल्शियम, मैग्नीशियम, विटामिन बी 1, बी 3, बी 5, विटामिन ई तथा विटामिन के भी प्राप्त होता है। पपीते में बीटा केरोटीन होता है। कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट भी इसमें पाए जाते हैं जैसे ल्यूटेन, जिक्सेनथिन, क्रिप्टोक्सेंथिन आदि। पपीते में कुछ मात्रा में प्रोटीन व कार्बोहाइड्रेट भी होता है। एक छोटे पपीते में लगभग 60 कैलोरी होती हैं।

पपीता खाने से विटामिन सी मिलता है जो प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा कर बीमारियों से बचाता है। इससे मिलने वाला विटामिन ए आंखों के लिए, स्वस्थ त्वचा के लिए, म्यूकस मेम्ब्रेन के लिए आवश्यक होता है। रेटिना में होने वाले मैक्युलर डिजनरेशन से बचाव के लिए पपीता बहुत महत्वपूर्ण है। नियमित पपीता खाने से स्किन जवां बनी रहती है। पका हुआ पपीता किसी भी रोगी को दिया जा सकता है।

हमारे शरीर में मेटाबोलिज्म की प्रक्रिया में कुछ फ्री रेडिकल बनते है। थोड़ी मात्रा में इनका बनना जरूरी होता है। परंतु जब ये ज्यादा मात्रा में बनते है तो नुकसान पहुंचाने लगते है। अधिक फ्री रेडिकल के कारण त्वचा पर झुर्रियां, थकान, सिरदर्द, स्मरण शक्ति कम होना, जोड़ों का दर्द, मांसपेशियों का दर्द,  सफेद बाल, आंखों से कम दिखाई देना आदि दुष्प्रभाव सामने आने लगते है। पपीते में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट इन हानिकारक फ्री रेडिकल के नुकसान से बचा सकता है। पपीते में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट की विशेषता यह है की शरीर इन्हें ज्यादा आसानी से ग्रहण कर लेता है।

पपीते में पाए जाने वाला बीटा केरोटीन फेफड़े और मुंह के कैंसर से बचाता है। पपीते में कई प्रकार के एमिनो एसिड तथा एंजाइम होते है जो सूजन और जलन को मिटाने में सक्षम होते हंै। पपीता ह्रदय के लिए फायदेमंद होता है। इसमें मौजूद लाइकोपीन और विटामिन सी ह्रदय रोग से बचाते हैं। पपीते में मौजूद विटामिन सी तथा विटामिन ए नसों में कोलेस्ट्रॉल जमने से रोकते हंै। इससे मिलने वाला फाइबर रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने में सहायक होता है।

पका हुआ पपीता सेंधा नमक, काली मिर्च, काला नमक, नींबू आदि लगाकर कुछ दिन लगातार खाने से अम्लपित्त और अपच ठीक होता है। इसमें मिलने वाला फाइबर कब्ज को ठीक करता है। इससे पेट भी ठीक रहता है।

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पपीते से लाभ

पपीते के पत्ते को पीस कर तिल के तेल में मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को थोड़ा गर्म करके इससे सिकाई करने से गठिया, संधिवात, हाथीपांव आदि की सूजन में आराम मिलता है। सुन्न पड़े अंग पर सिकाई करने से उसमे रक्त संचार ठीक होता है। पपीता प्रोटीन को पचाने में सहायक होता है। प्रोटीन का पाचन सही तरीके से नहीं होने से भी गठिया, कब्ज, आर्थराइटिस आदि हो सकते है। पपीता खाने से इनसे बचाव हो सकता है। पपीते में पाये जाने वाले एंजाइम भी आर्थराइटिस से बचाव करते हैं।

कुछ दिन लगातार पके हुए पपीते का गूदा चेहरे पर मलने से झाइयां मिटती है, मुंहासे ठीक होते है, झुर्रियां मिट जाती है। यह डेड सेल्स को निकाल देता है। यदि धूप में ज्यादा रहना पड़ता है तो रोज पपीते का गूदा मलने से धूप से होने वाले नुकसान नहीं होते। चेहरे पर लगाए जाने वाले फेस मास्क में भी पपीते का गूदा मिलाया जा सकता है। इससे चेहरा खिल उठता है। पपीता खाने से भी चेहरे की चमक बनी रहती है।

मलेरिया या लंबे समय तक बुखार के बाद लीवर या प्लीहा में वृद्धि होने पर कच्चा पपीता जीरा, काली मिर्च व सेंधा नमक मिलाकर खाने से लाभ होता है।

गले में होने वाले टॉन्सिल, दर्द और सूजन होने पर पपीते का दूध एक चम्मच एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर गरारे करने से आराम मिलता है।

पपीते का दूध मुंहासे, एक्जिमा, दाद, खुजली, छाले आदि होने पर लगातार कुछ दिन लगाने से फायदा होता है।

पपीते के सूखे हुए बीज पीस कर तिल के तेल में मिलाकर उबालें। ठंडा होने पर छान लें। इस तेल की लकवाग्रस्त अंग पर मालिश करने से लाभ होता है।

पका  हुआ पपीता खाने से लीवर को शक्ति मिलती है। यह पेट साफ करता है, भूख बढ़ाता है। छोटे बच्चे जिनका पेट अक्सर खराब रहता है उन्हें पपीता खिलाना चाहिए।

पपीते के पेड़ की जड़ को छाया में सूखा कर पीस लें। रात को यह पाउडर आधा गिलास पानी में दो चम्मच डालकर भिगो दें। सुबह छानकर पी लें। यह प्रयोग कुछ दिन करने से गुर्दे की पथरी छोटी हो तो निकल जाती है।

कच्चे पपीते के टुकड़े खाली पेट सुबह अजवाइन, काली मिर्च, नमक, नींबू आदि मिलाकर खाने से पेट में कीड़े नष्ट होते है। मंदाग्नि दूर होती है।

पीलिया रोग में तथा तिल्ली बढऩे पर पपीता खाने से आराम मिलता है। पर अधिक मात्रा में ना खायें।

पका हुआ पपीता, दूध और चीनी मिलाकर ग्राइंडर में शेक बनाकर पीने से पेट की गर्मी दूर होती है।

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प्रेग्नेंसी में पपीते से नुकसान

कच्चा पपीता गर्भावस्था में बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे पपीते में मौजूद पपेन के कारण प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन कम हो जाता है। यह हार्मोन गर्भ-धारण के लिए आवश्यक होता है। पपेन में भ्रूण के विकास के लिए आवश्यक झिल्ली को तोडऩे की प्रवृति के कारण भी गर्भावस्था के लिए यह नुकसानदेह होता है। अच्छे से पका हुआ पपीता नुकसान नहीं करता। बल्कि विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट की प्रचुर मात्रा के कारण फायदा ही करता है। पके हुए पपीते में पपेन बहुत कम मात्रा में होता है। गर्भावस्था में पपीते की पत्ती का भी उपयोग भी नहीं करना चाहिए।

सावधानिया

अल्सर होने पर या खून को पतला करने वाली दवा लेने वालों को भी डॉक्टर से पूछ कर ही पपीते का सेवन करना चाहिए।

किसी भी सर्जरी से पहले या बाद में कच्चा पपीता नहीं लेना चाहिए। क्योंकि यह रक्त को पतला कर सकता है।

नियमित और अधिक मात्रा में पपीता खाने से इसमें मौजूद बीटा केरोटीन त्वचा के रंग को प्रभावित कर सकता है। स्किन के कलर में पीलापन दिख सकता है।

लेटेक्स से एलर्जी हो तो पपीता नहीं खाना चाहिए। चेहरे, होंठ, जीभ पर या गले  में  सूजन,  दर्द, खुजली पपीता खाने के  तुरंत बाद उभरने लगे या पेट में दर्द,  निगलने में कठिनाई, चक्कर आने लगे तो पपीता नहीं खाना चाहिए।

 (उदय इंडिया ब्यूरो)

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