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भारतीय सिनेमा का ‘बाहुबली’

भारतीय सिनेमा का ‘बाहुबली’

बाहुबली 2 ने रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड धूल में मिला दिए हैं। इन रिकॉर्ड्स में से सबसे बड़ा रिकॉर्ड बना है, किसी भारतीय फिल्म की अब तक की सबसे बड़ी कमाई का। और, बाहुबली 2 की अब तक की ये कमाई  है पूरे एक हजार करोड़ रुपए की।

जैसा की उम्मीद की जा रही थी। बाहुबली 2 ने 1000 करोड़ रुपए की कमाई करके भारतीय बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड बना लिया है। यह पहली ऐसी फिल्म है जिसने 1000 करोड़ रुपए का जादुई आंकड़ा छूकर साबित कर दिया है कि भारतीय फिल्मों में भी रिकॉर्डतोड़ कमाई का दम है।

दस दिन में इस फिल्म ने 1000 करोड़ रुपए के आंकड़े को छू लिया  और अभी इसकी धुआंधार कमाई जारी है इसलिए ये कहना अभी मुश्किल है कि ये आंकड़ा कहां जाकर रुकेगा। उम्मीद तो 1500 करोड़ की भी की जा रही है।

कुछ देर पहले ट्वीट करके जानकारी दी कि 800 करोड़ रुपए भारत में 200 करोड़ की ओवरसीज कमाई के साथ बाहुबली 2 भारत की पहली 1000 करोड़ रुपए की कमाई वाली फिल्म बन गई है। भारतीय सिनेमा कमाई के मामले में पिछले कुछ वक्त से जो सूखा झेल रहा था उसे बाहुबली 2 ने आकर खत्म कर दिया है।

बाहुबली ने भारतीय सिनेमा को एक नया रास्ता भी दिखाया है। जो अब यहां इस तरह के बड़े आइडिया और बड़े कैनवास की फिल्मों के लिए नए दरवाजे भी खोलेगा।

बाहुबली 2 ने रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड धूल में मिला दिए हैं। इन रिकॉर्ड्स में से सबसे बड़ा रिकॉर्ड बना है, किसी भारतीय फिल्म की अब तक की सबसे बड़ी कमाई का। और, बाहुबली 2 की अब तक की ये कमाई  है पूरे एक हजार करोड़ रुपए।

बाहुबली: द बिगनिंग’ का बजट 180 करोड़ रु. था, जो बॉक्स ऑफिस पर बेहद सफल हुई और 600 करोड़ रु. का बिजनेस किया था। बाहुबली-2, 250 करोड़ की लागत से बनी है और इसका मुनाफा आप देख ही रहे हैं।

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यह फिल्म इतनी बड़ी है कि इसके कारण तमिलनाडु और कर्नाटक में धारा 144 लगा दी गई है। लाठीचार्ज भी किया जा सकता है।

यह फिल्म इतनी बड़ी है कि बॉलीवुड की सबसे ज्यादा कमाने वाली फिल्म पीके ने कुल 790 करोड़ रु. का बिजनेस किया था और बाहुबली रिलीज के पहले ही 700 करोड़ रु. कमा चुकी है। अगर रिलीज के बाद को देखें तो पीके ने रिलीज के 4 दिन बाद 100 करोड़ रु. क्लब पार किया था और बाहुबली 2 ने एक ही दिन में ये आंकड़ा छू लिया। दंगल ने ये आंकड़ा तीन दिन में पार किया था। बाहुबली 2 को 1000 करोड़ रु. क्लब का दावेदार माना जा रहा था। अगर हम पूरी कमाई के बारे में देखें तो अभी तक बाहुबली 2 रिलीज के पहले ही दिन 100 करोड़ रु. से अधिक के आंकड़े को छू चुकी है।

पहले दिन में सलमान खान की सुल्तान ने 36 करोड़ कमाए थे। दंगल का ये आंकड़ा 36 करोड़ था। पीके ने पहले दिन 30 करोड़ कमाए थे। बाहुबली 1 ने रिलीज के पहले ही दिन 60 करोड़ कमाए थे, लेकिन बाहुबली 2 का आंकड़ा इससे कही ज्यादा है। अब एक बात सोचिए कि जिस फिल्म ने अभी ही ़1000 करोड़ से उपर की कमाई कर ली है वो कलेक्शन के मामले में कहां तक जाएगी? कोई बड़ी बात नहीं कि ये फिल्म 1500 करोड़ क्लब का रिकॉर्ड सेट कर दे। एक बात तो तय है कि बाहुबली 2 फिल्म इंडस्ट्री के लिए मील का पत्थर साबित होने वाली है। भारत में बॉलीवुड के अलावा कई क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्में भी अलग-अलग राज्यों में देखी जाती है। क्षेत्रीय भाषाओं में मुख्य रूप से तेलुगु, तमिल, मलयालम, मराठी, बंगाली, पंजाबी और भोजपुरी भारत में देखी जाती हैं। हालांकि, पिछले कुछ सालों से क्षेत्रीय सिनेमा ने जिस प्रकार का जलवा दिखाया है, वैसा कर पाना बॉलीवुड की कई बड़ी फिल्मों के लिए भी मुमकिन नहीं रहा है। मूल रूप से तमिल और तेलुगु में बनी फिल्म बाहुबली जब साल 2015 में हिंदी में भी रिलीज की गयी थी तब फिल्म के बारे में दर्शकों में उतनी उत्सुकता नहीं देखी गयी थी, मगर फिल्म अपनी दमदार कंटेंट और विश्वस्तरीय विजुअल इफेक्ट्स से दर्शकों के मन में ऐसी उतरी की इस फिल्म ने सफलता के नए रिकॉर्ड्स बना डाले और फिल्म का दूसरा पार्ट देखने के लिए लोगों में गजब की बेचैनी देखी गयी। अब जब दो साल बाद यह फिल्म वापस से सिनेमाघरों में आयी है तो लोग इसकी तुलना हॉलिवुड की कई बड़ी फिल्मों से कर रहे हैं, और साथ ही अधिकतर यह भी कहने से नहीं हिचक रहे कि भारत में अब से पहले ऐसी फिल्म शायद ही बनी हो। बाहुबली 2 के लिए लोगों में जैसा पागलपन देखा जा रहा है उसमें ऐसी पूरी उम्मीद जताई जा रही है कि यह फिल्म कमाई में 1000 करोड़ का आकंड़ा छू ले।

बाहुबली 2 में जिस तरह की भव्यता दिखाई गई, वह कई अंतराष्ट्रीय मानकों के करीब है और यह बॉलीवुड में फिल्में बनाने वालों के लिए अलग मानदंड स्थापित करती है। बॉलीवुड के फिल्मों पर दक्षिण भारत की सिनेमा का कितना असर होता है इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि बॉलीवुड की सबसे सफल फिल्मों में शुमार कई फिल्में दक्षिण की फिल्मों के रीमेक हैं इनमें वांटेड, रेडी, बॉडीगार्ड मुख्य हैं।

हालांकि, पहले भी राष्ट्रीय अवार्डों में क्षेत्रीय भाषा की फिल्मों ने बॉलीवुड की फिल्मों के ऊपर दबदबा बनाये रखा था, साउथ के स्टार्स भी बॉलीवुड के स्टार्स से कमतर नहीं थे, मगर साउथ की किसी फिल्म के लिए उत्तर भारत में ऐसी दीवानगी देखी नहीं गयी थी। मगर राजामौली ने बाहुबली और बाहुबली 2 के साथ नॉर्थ इंडिया के दर्शकों को भी अपना दीवाना बना दिया है, साथ ही साथ बाहुबली 2 के साथ भारतीय सिनेमा को नए आयाम भी दिए हैं ये नॉर्थ या साउथ की नहीं बल्कि इंडिया की एक बेहतरीन फिल्म है जो देश में सिनेमा की बेहतरी के लिए भी मील का पत्थर साबित होगी।

 

बाहुबली 2: द कंक्लुजन बाहुबली: द बिगनिंग फिल्म का दूसरा भाग है। यह एक ऐतिहासिक फिक्शन फिल्म है। इस फिल्म को हिन्दी, तेलुगू, तमिल और मलयालम भाषा में बनाया गया है। इसका निर्देशन एसएस राजामौली ने किया है। यह 8 जुलाई 2016 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली थी। लेकिन इसके निर्माण में देरी के कारण यह समय और आगे बढ़ गया। शुरू में, दोनों भागों को संयुक्त रूप से  250 करोड़ रु. के बजट पर तैयार किया गया, हालांकि बाद में दूसरे भाग का बजट बढ़ा दिया गया।

इस फिल्म रिलीज से पहले ही 500 करोड़ रु. का बिजनेस का रिकॉर्ड बनाया है। फिल्म को 28 अप्रैल 2017 को दुनिया भर में प्रदर्शित किया गया। बाहुबली 2-4 K हाई-डेफिनिशन में रिलीज होने वाली पहली तेलुगु फिल्म है। मूवी की रिलीज की तारीख से पहले 200 स्क्रीन के करीब 4 K प्रोजेक्टर्स को अपग्रेड किया गया। बाहुबली 2 पूरी दुनिया में पहली भारतीय फिल्म बन गई है, जिसने 3 दिनों में सभी भाषाओं में 500 करोड़ रु. से अधिक कमाई की है। यह पहले सप्ताह में 128 करोड़ रुपए से ज्यादा कमाई वाली पहली हिंदी फिल्म है।

कटप्पा (सत्यराज) अपनी कहानी सुनना जारी रखता है कि किस प्रकार उसने बाहुबली को मारा। कलकेयस से जीतने के बाद अमरेन्द्र बाहुबली को भविष्य का राजा और भल्लाल देव (राणा डग्गुबती) को सेनापति घोषित कर दिया जाता है। राज्याभिषेक होने से पूर्व ही अमरेन्द्र की मां, शिवगामी (रम्या कृष्णन) उसके लिए दुल्हन की तलाश करने लगती है। वह अमरेन्द्र और कटप्पा को बोलती है कि साम्राज्य की स्थिति और इसके लोगों को समझने के लिए इसका दौरा करें।

अमरेन्द्र को कुंतल साम्राज्य की राजकुमारी और उसके राजा की बहन, देवसेना (अनुष्का शेट्टी) से प्यार हो जाता है। भल्लाल को पता चल जाता है कि अमरेन्द्र को देवसेना से प्यार हो गया है। इसके बाद वह शिवगामी से बोलता है कि वह देवसेना से शादी करना चाहता है। शिवगामी को इस बारे में नहीं पता होता है कि देवसेना से अमरेन्द्र प्यार करता है, इस कारण वह उसकी शादी देवसेना से कराने का वादा कर देती है।

जब शिवगामी शादी का प्रस्ताव कुंतल राज्य को भेजती है तो दूत उस प्रस्ताव को इस प्रकार लिखता है जैसे किसी घमंडी व्यक्ति ने लिखा है। देवसेना इस शादी के प्रस्ताव को कड़े शब्दों के साथ मना कर देती है। जब शिवगामी को उसका उत्तर मिलता है तो वह क्रोध में देवसेना को बंदी बना कर लाने का आदेश दे देती है।

कुंतल साम्राज्य पर पिंडारियों का हमला हो जाता है। देवसेना के भाई कुमार वर्मा की सहायता से अमरेन्द्र उस हमले को विफल कर देता है और कुंतल को बचा लेता है। अमरेन्द्र उसे बता देता है कि वह कौन है और शिवगामी के क्रोध के भय को दूर करने और उसे अपनी दुल्हन बनने हेतु राजी करने की कोशिश करता है।

जब वो महिस्मति पहुंचता है, तब उसे गलतफहमी का पता चलता है। शिवगामी उसे सिंहासन या देवसेना में से किसी एक को चुनने बोलती है। वह देवसेना को चुनता है। इस कारण भल्लाल को वहां का राजा बना दिया जाता है और अमरेन्द्र को सेनापति। पर फिर भी लोग उसे ही राजा मानते हैं।

देवसेना की गोद भराई के लिए अमरेन्द्र को भल्लाल ने सेनापति के कार्य से छुट्टी दे दी थी, जिससे वह अपनी पत्नी के साथ रह सके। उसी समय देवसेना राजा भल्लाल के हेरफेर के खिलाफ बोलती है और शिवगामी के चुप रहने पर भी सवाल उठाती है। इस कारण झगड़ा शुरू हो जाता है और उन दोनों को महल से बाहर कर दिया जाता है। वह दोनों बाहर लोगों के बीच खुशी से जिन्दगी बिताने लगे थे, पर भल्लाल फिर से शिवगामी को भडक़ाता है कि अमरेन्द्र उसे मारना चाहता है

और यह भी बोलता है कि यदि उसने सीधी कार्रवाई की तो गृह युद्ध शुरू हो सकता है। इस कारण शिवगामी उसकी सेवा करने वाले सेवक कटप्पा से बोलती है कि वह संकट में है और उसे अमरेन्द्र को मारना है।

शिवगामी के कहने पर कटप्पा ने अमरेन्द्र की पीठ पर धोखे से हमला कर उसे मार दिया। फिर कटप्पा आ कर शिवगामी को सूचित करता है कि अमरेन्द्र बाहुबली की मौत हो गई है। देवसेना भी अपने बच्चे महेन्द्र बाहुबली के साथ वहां आती है और उसे भी इस बारे में पता चलता है। शिवगामी महल के बाहर घबराई हुई भीड़ को बताती है कि अमरेन्द्र मर चुका है और अब उसका पुत्र महेन्द्र नया राजा होगा।

इसके बाद भल्लाल और उसके लोग मिलकर उन लोगों को पकड़ कर कारावास में डालने की कोशिश करते हैं। देवसेना अपने बच्चे को भगाने में सफल रहती है, लेकिन अपने आप को नहीं बचा पाती। उसे भी कैद कर लिया जाता है। महेन्द्र बाहुबली महल में वापस आता है और भल्लाल को हरा कर महिस्मती का नया राजा बन जाता है।

इस फिल्म का निर्माण इसके पहले भाग के निर्माण के बाद शुरू हो गया। यह फिल्म 2017 में प्रदर्शित हुई। जहां उत्तर भारतीय हनी सिंह और मुन्नी-जलेबी के अश्लील गानों के सहारे फिल्में बेचते रह गए, वहीं द्रविड़पुत्र एस.एस. राजामौली ने प्राचीन हिन्दू सभ्यता का प्रदर्शन करने वाली यह फिल्म बना कर भारतीय संस्कृति की लाज रखी।

बाहुबली 2 के संगीतकार एम. एम. कीरावणी हैं तथा गीतकार (हिंदी संस्करण) मनोज मुन्तशिर हैं। बाहुबली 2 की संगीत एल्बम चार भाषाओं तेलुगु, तमिल, हिंदी और मलयालम में रिलीज हुई थी। फिल्म को आलोचकों और दर्शकों दोनों के द्वारा रिलीज पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।

फिल्म बाहुबाली 2 की पहली बार समीक्षा यूएई के आलोचक ओमेयर संधू ने की थी, और इसे 5/5 रेटिंग दी और हॉलीवुड फिल्मों जैसे ‘रिंग्स ट्रायलॉजी और हैरी पॉटर शृंखला’ जैसी फिल्मों के कंप्यूटर ग्राफिक्स (वीएफएक्स) से इसकी तुलना की और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रभास और राणा डग्गुबती के पात्रों की प्रशंसा की।

फस्र्टपोस्ट से हेमंत कुमार ने इसे ‘राजमौली का महाकाव्य नाटक’कहा और इसे 4/5 की रेटिंग दी। हिंदुस्तान टाइम्स के दीपांजन सिन्हा ने फिल्म को 3/5 स्टारों की रेटिंग दी। सिन्हा ने फिल्म की छायांकन और स्पेशल इफेक्ट्स की सराहना की, लेकिन कुछ महिला पात्रों में गलती पाई जैसे ‘देवसेना का पात्र एक ऐसे योद्धा के रूप में शुरू होता है पर बाद में ऐसा दिखाया जाता है जिसे संरक्षित किया जाना चाहिए।’ इंडियन एक्सप्रेस की शुभ्रा गुप्ता ने फिल्म को 2/5 स्टार दिए तथा पेसिंग और ध्वनि के साथ समस्याओं का उल्लेख किया गया। टाइम्स ऑफ इंडिया की मीना अय्यर ने इसे 4/5 रेटिंग दी और कहा कि ‘बस स्वाद ले आओ। यह भारत के लिए एक विजुअल दृश्यों की दावत है।’ अन्य प्रशंसाएं प्रभास और ग्राफिक्स में निर्देशन की करी गईं, ‘प्रभास पिता और बेटे के रूप में बहुत बढिय़ा हैं। बेशक यह सीजीआई और वीएफएक्स है जो आपको आपकी सीट में पकड़ लेता है।

कई आलोचकों ने अपनी समीक्षा में दावा किया कि भल्लाल देव के रूप में राणा डग्गुबती की भूमिका अमरेन्द्र बाहुबली के रूप में प्रभास की भूमिका से अधिक रोमांचक है।


 साउथ सिनेमा Vs बॉलीवुड


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बाहुबली -2 ने बॉक्स ऑफिस पर अपना  बाहुबल दिखा दिया, वह सुपर डुपर हिट ब्लॉकबस्टर फिल्म मानी जा रही है। उसके विजुअल इफेक्ट सबकी जुबान पर हैं, भव्यता में तो वह लाजवाब है। अभिनय में तो उसका तोड़ नहीं है, कई लोग यह भी मानते हैं कि मार्केटिंग भी बड़ी गजब की है। कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा, इस रहस्य को इतना उछाला गया  वह दर्शकों को इतने बड़े पैमाने पर थियेटर तक ले आया। लेकिन जानकार लोग मानते हैं  फिल्म का प्राण है भारत की सनातन परंपरा, उसके मूल्य और आस्थाएं, उसकी आध्यात्मिक सोच जो उसके हर दृश्य में उभरकर आती है। इसलिए कई लोग यह मानते हैं कि रामायण-महाभारत भारत के महाकाव्य हैं तो बाहुबली महाफिल्म। बाहुबली-2 भारतीय सनातन परंपराओं और धार्मिक-आध्यात्मिक शिक्षाओं से ओतप्रोत एक ऐसा महाकाव्य है जिसमें महिष्मती साम्राज्य भले काल्पनिक हो लेकिन उसके पात्र और घटनाएं संपूर्ण विश्व के इतिहास में पूर्णत: सजीव हैं। यह फिल्म न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर की है बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की पहली धमाकेदार एंट्री है।

जानेमाने गायक कैलाश खेर कहते हैं पहली ऐसी फिल्म बनी है, जिसमें आध्यात्मिकता, पौराणिकता, भारतीयता सभी को ध्यान में रखा गया है। इसके अलावा रिश्तों, भावनाओं को ध्यान में रखा गया है। –पहले भी हमारे देश में तमाम बड़ी-बड़ी फिल्में बनी हैं लेकिन उन सबमें संपूर्ण भारतीयता नहीं थी। यह पहली फिल्म है जिसमें इतने समर्पण से ऐसी कल्पनाएं की गई हैं जो लगता नहीं कि कल्पनाएं हैं। थोड़ा महाभारत भी दिखता है इसमें, थोड़ा रामायण का भी प्रतिबिंब झलकता है। थोड़ी सम्राट अशोक की झलक आती है तो थोड़ी गौतम बुद्ध की। चाणक्य की झलक आती है तो हमारे गुरुकुल और मोहंजोदाड़ो की सभ्यता भी इसमें दिखती है। शुरू में जो हमारी इंजीनियरिंग थी, उसकी भी झलक है। हमारी कूटनीति, रणनीति, युद्ध कौशल, राजनीति, समाज-नीति, रीति-रिवाजों को निभाने के ढंग, छल-नीति, चल-नीति… इन सारी नीतियों का बहुत ही अच्छे से अध्ययन करके कथानक में पिरोया गया है और बड़े सुंदर ढंग से सिनेमा के परदे पर उसका प्रस्तुतीकरण हुआ है। — भारतीय कह कहकर  कई सिनेमा बने भी हैं, उनमें भी कहीं न कहीं अपूर्ण भारतीयता थी। पहली बार बाहुबली में हमारी परंपराएं, जीवन-धर्म, मान मर्यादा, बड़ों का सम्मान है। पहली बार इसमें शत्रु यानी विलेन को भी दिखाया तो आप उससे भी घृणा नहीं कर रहे। जब आप सिनेमा से बाहर आते हैं तो आप उस शत्रु से भी, जिसने चाल चलकर एक युद्ध रचा और जिससे विखंडित हो गया एक बना-बनाया साम्राज्य महिष्मती, उस खलनायक से घृणा नहीं करते। उसका भी सम्मान करने का जी चाहता है। तकनीक, कथानक, निर्माण और संदेश—सभी स्तरों पर बाहुबली एक विश्वस्तर की फिल्म है

इस फिल्म में बहुत सारे ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। पहली बार हमारी आस्थाओं, मान्यताओं, सोच का उपहास नहीं उड़ाया गया बल्कि गौरव और धरोहर के तौर पर प्रस्तुत किया गया है। पहली बार भारत की स्थिति को मजबूरी, लाचारी, गरीबी में ढालकर नहीं दिखाया गया। मैं इसको बहुत ही गौरवमय, गरिमामय पल कहूंगा।

फिल्म के कहानीकार ने बहुत स्पष्ट तौर पर कहा है कि फिल्म पूरी तरह से कल्पना पर आधारित फिल्म है। पर उस कल्पना का आधार वह बताते हैं, ‘‘मैंने बाहुबली को महाभारत के कृष्ण से प्रभावित होकर लिखा है। बिज्जलदेव के चरित्र में आपको महाभारत के मामा शकुनि की झलक साफ मिलेगी। भल्लालदेव हू-ब-हू दुर्योधन जैसा लगेगा। दुर्योधन में भी शूरवीर योद्धा के सारे गुण थे। उसी तरह भल्लालदेव भी है। उसे लगता है कि उसके साथ कुछ गलत हुआ है और उसके भीतर किसी भी तरह से साम्राज्य हासिल करने की भूख है। महेंद्र बाहुबली कुछ-कुछ कृष्ण की तरह है तो कहीं कहीं राम के चरित्र की झलक भी दिखती है। अब बारी आती है कटप्पा की। कटप्पा का चरित्र देखने से साफ है कि वह नौकरी की खातिर नहीं, पारिवारिक वफादारी निभाने को नहीं, बल्कि समर्पण भाव से महिष्मति राज्य की सेवा कर रहा है…हनुमान की तरह। इससे चरित्रों का अभिप्रेरित होना स्वाभाविक भी है क्योंकि रामायण और महाभारत भारतीयों के रोम-रोम में बसे हैं। जीवन और बर्ताव में हैं। इसी शुद्ध भारतीयता की सुगंध से भारत का दर्शक आज बाहुबली 2 पर मुग्ध है।

भारतीय फिल्म उद्योग की बड़ी-बड़ी हस्तियां भी बाहुबली के निर्माता, निर्देशक और अभिनेताओं का लोहा मानने लगी हैं। जानेमाने निर्देशक करन जौहर ने राजमौली के साथ सेल्फी शेयर करते हुए उनको वर्तमान का महान निर्देशक मान लिया हैं.. आमिर, सलमान, शाहरुख के होश फाख्ता हैं कि ये सब क्या हो रहा भाई? भारत आज बाहुबली देखने के लिए क्यों मरा जा रहा..?

लेकिन बाहुबली की तारीफ कई लोगों को रास नहीं आ रही। उन्होंने इसमें नए-नए मीन मेख निकालने शुरू कर दिए, नतीजतन नए नए विवाद  शुरू कर दिए। कैसे सोशल मीडिया का इस्तेमाल विवाद पैदा करने में किया जाता है इसका एक और उदाहरण पिछले कुछ दिनों से मिल रहा है। वहां  बाहुबली-2 की एक तस्वीर के साथ दूसरी तस्वीर पोस्ट की जा रही है और यह पूछा जा रहा है कि आखिरकार बाहुबली का धर्म क्या है? सुनने में यह भले ही अटपटा लग रहा हो लेकिन इस पोस्टर को बहुत ज्यादा देखा जा रहा है। इस पोस्टर के जरिये यह सिद्ध करने का प्रयास किया जा रहा है कि बाहुबली पूरी तरह से हिंदुओं की फिल्म है। जबकि वास्तविकता यह है कि फिल्म का किसी भी धर्म से कोई लेना देना नहीं है। यह महज एक काल्पनिक कथा है, जिसमें हिंदुओं के रीति रिवाजों, परम्पराओं और धर्म का गुणगान किया गया है। फिल्म के गीतों में शिव भक्ति का जिक्र है। यह फिल्म उस काल की लगती है जब इस्लाम भारत में आया भी नहीं था। क्या इस समय के बारे में बनी फिल्म को भारतीय फिल्म नहीं कहा जा सकता। एक वामपंथी लेखक ने ऐसी ही हास्यास्पद बात कही है कि यह फिल्म इसलिए हिन्दूवादी है क्योंकि इसका एक भी पात्र गैर-हिन्दू नहीं है।

वैसे सोशल मीडिया में बाहुबली को लेकर अच्छी-खासी बहस चल रही है। एक साहब लिखते हैं- ‘हिंदुओं में एकजुटता का दौर शुरू हो गया है।’ देवसेना और शिवगामी के व्यवहार को ये लोग हिंदू महिलाओं के रुख के तौर पर बता रहे हैं। द बिगनिंग में हिंदू चरित्र से इसका प्रमाण मिलता है। युवा प्रभास विशालकाय शिवलिंग को जलाभिषेक के लिए कंधे पर उठाकर झरने के नीचे लाते हैं। यह सीन पहले पार्ट का शायद सबसे प्रभावशाली सीन था जो आपके दिलोदिमाग में अब तक टिका होगा। इसमें हिंदू धर्म की इमेज को और मजबूत किया गया है। इसने एक सीन ने हिंदू धर्म की भव्य और ताकतवर छवि तैयार की है.

निश्चित तौर पर बाहुबली- द कनक्लूजन में चरित्रों की धार्मिकता पर फोकस किया गया है और हिंदू धर्म को और ज्यादा बड़े रूप में दिखाया गया है। गणेश को महिष्मती साम्राज्य के मुख्य आराध्य देव के तौर पर दिखाया गया है तो देवसेना का राज्य भगवान कृष्ण को पूजता है। इस तरह से दूसरे पार्ट में पहले पार्ट के मुकाबले अंतर है, जहां कालकेय से लड़ाई से पहले एक अज्ञात देवी की पूजा की गई थी।

लेखक आनंद नीलकंठन कहते हैं कि ‘यह एक खास वक्त और दौर की कहानी है, ऐसे में लेखक को उस वक्त के सामाजिक मूल्यों को दिखाना जरूरी था। उस दौर में हिंदुत्व को फिर से खड़ा करने का प्रयास हुआ और इसके लिए कई भव्य मंदिरों का निर्माण कराया गया। बाहुबली सीधे तौर पर एक फैंटेसी फिक्शन मूवी नहीं है। इसमें एक सीक्वेंस है जिसमें अमरेंद्र बाहुबली बैलों पर काबू पाते हैं, वह दो बैलों की सवारी करते हैं। यह सीन शायद जलीकट्टू और कंबाला से प्रभावित है। बड़ी स्क्रीन पर पारंपरिक भारतीय कल्चर हिट हो रहा है।

कई फिल्मों में धर्म को विषय बनाया गया है उन पर राजनीति भी जमकर हुई है लेकिन किसी फिल्म को लेकर ऐसा नहीं हुआ कि उसके पात्रों का धर्म ढूंढ़ा जाए। सुनने में भी अटपटा है लेकिन कुछ लोग बाहुबली को हिन्दुओं की फिल्म घोषित करने के लिए ऐसा कर रहे हैं।

अभी तक ये फिल्म अपनी कमाई के अलावा साउथ सिनेमा और बॉलीवुड में जंग का कारण बनी हुई थी लेकिन अब ये धर्म की लड़ाई बनती जा रही है। कुछ लोग बाहुबली को पूर्ण रूप से हिन्दू धर्म का प्रतीक बता रहे हैं। बाहुबली के फैन शाहरुख-सलमान-आमिर पर जमकर निशाना साध रहे हैं। कहा जा रहा है कि हिंदू धर्म का मजाक बनाए बिना भी फिल्में बन सकती हैं और ये सभी को बाहुबली से सीखना चाहिए। वहीं अक्षय कुमार की ओ माय गॉड को भी निशाने पर लेते हुए कहा जा रहा है कि भगवान के साथ चलकर भी अच्छी फिल्में बनाई जा सकती हैं।

फिल्म में शिवुदु का शिवलिंग स्थापित कर उसका जलाभिषेक करना, महिष्मती में हाथी के भगवान की पूजा होना और देवसेना के राज्य में कृष्ण की पूजा होना, इन सब के आधार पर ऐसी बातें कही जा रही हैं।

सोशल मीडिया के मुताबिक बाहुबली 2 पूर्ण रूप से हिंदुत्व का प्रचार कर रही है और इस फिल्म में महिष्मती की दोनों महिला किरदार शिवगामी और देवसेना हिन्दू धर्म के लिए पूजनीय बताए जा रहे हैं।

इस सिलसिले में बाहुबली 1 के लिए एस. एस. राजामौली को नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किए जाने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। चर्चा ये भी हो रही है कि बाहुबली, हिंदुओं की फिल्म है, वरना अधूरी फिल्म को नेशनल अवॉर्ड देने की कोई जरूरत नहीं थी।

बाहुबली की सफलता पर कई दिलचस्प किस्म की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। ऐसी ही एक प्रतिक्रिया है -बॉलीवुड वालों ने फिल्में बनाने, और पैसा कमाने का नया ट्रेंड ही बनाया था हिन्दू विरोधी फिल्म बनाओ, और उसे मीडिया में लीक करो, सोशल मीडिया में लीक करो, और फिल्म के रिलीज होने से पहले विवाद पैदा करो आपकी फिल्म का राष्ट्रवादी लोग विरोध करेंगे, और आपका खूब प्रचार होगा और जब फिल्म रिलीज होगी तो सेक्युलर और वामपंथी लोग तो बढ़-बढ़ कर फिल्म देखेंगे और आप पैसा कमाओगे ऐसा ही फिल्म पीके वालो ने भी किया। अब भंसाली की ही फिल्म देखिये ‘पद्मावती’अभी फिल्म की शूटिंग भी पूरी नहीं हुई, पर फिल्म में क्या है वो सबको पता चल गया, और अब तो बाहुबली 2 ने मात्र 2 दिनों में 200 करोड़ से अधिक का कारोबार कर लिया और इस बाहुबली 2 की सफलता पर तेलगू मेगास्टार महेश बाबू ने कहा है की बॉलीवुड में एक ट्रेंड बन गया था, फिल्म में हिन्दू विरोधी चीजें डालो, विवाद पैदा करो और उस विवाद से प्रचार होगा और फिल्म से पैसा कमाओ पर बाहुबली फिल्म ने दिखा दिया की पैसा कमाने के लिए ऐसा करना जरूरी नहीं है, आप बिना विवाद पैदा किये, बिना किसी का अपमान किये, अच्छी फिल्म बनाकर और अच्छा पैसा कमा सकते हो

बाहुबली को लेकर इन दिनों बहुत से लतीफे प्रचलित हो गए हैं -आप भी सुन लीजिए एक लतीफा। एक कर्मचारी अपने ऑफिसर से छुट्टी मांगने गया। ऑफिसर ने कहा पहले मेरे सवाल का जवाब दो -कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा? कर्मचारी ने तपाक से जवाब दिया – बाहुबलि ने कटप्पा को छुट्टी नहीं दी होगी।  इस पर बॉस ने कहा- बताओ, कितने दिन की छुट्टी चाहिए।


परदा है परदा।। जी हां, परदा उन बहुत सारे सवालों पर है, जिसका जवाब बाहुबली 2 देखने के बाद भी लोगो को नहीं मिल पाया है। 2015 में जब बाहुबली का पहला संस्करण आया, तो लोगों को बस अपने सवाल का जवाब चाहिए था। सवाल तो एक ही था। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के लोग जानना चाहते थे कि बाहुबली ने कटप्पा को क्यों मारा? अनगिनत थयोरी आई। जोक्स बने।

आखिरकार दो साल बाद एस. एस. राजामौली की बाहुबली 2 ने इसका उत्तर तो बखूबी दे दिया। लेकिन, अब भी कुछ ऐसे सवाल लोगों के दिमाग में होंगे, जिसका फिल्म में कहीं कोई जिक्र नहीं है।

बाहुबली: द बिगनिंग, की बात करें तो आपको याद होगा की किस तरह अपने तलवार के एक प्रहार से महेन्द्र बाहुबली ने भल्लालदेव के बेटे भद्र का सिर धड़ से अलग कर दिया था। लेकिन, न तो राणा डग्गुबती के कैरेक्टर की पत्नी कहीं दिखाई दी और न ही उसके बारे में कुछ सुनने को मिला। पिछले साल इस बात की चर्चा जरूर हो रही थी, की श्रिया सरण को यह रोल मिलने वाला है, पर उन्होंने इन अफवाहों को खारिज कर दिया था। जिस तरह से फिल्म में दूसरी महिलाओं (शिवागामी, देवसेना, अवन्तिका) के मजबूत किरदार हैं, भल्लालदेव की पत्नी को देखना दिलचस्प होता।

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क्या है अवन्तिका की कहानी?

बाहुबली: द बिगनिंग, में अवन्तिका (तमन्ना भाटिया) का दमदार किरदार अब भी आपको याद होगा। जिस तरह से वो अपने जीवन के एकमात्र उद्देश्य देवसेना की मुक्ति को लेकर दृढ़ निश्चय थी, वो काबिल-ए-तारीफ था। लेकिन, यह दृढ़ निश्चय क्यों था इसका उतर तो बाहुबली 2 में भी नही मिल पाया है। आपका ये तर्क की वो भी अपने बाकी साथीयों की तरह, देवसेना और अमरेन्द्र बाहुबली की प्रति जुड़ाव के कारण उनका साथ दे रही थी, आधारहीन है। क्योंकि बाहुबली का कत्ल या तो उसके जन्म से पहले ही हो गया होगा या फिर वो बच्ची रही होगी। तो बाहुबली 2, इस पहेली से भी परदा उठाने में नाकाम रहा।

महिष्मती ने भल्लालदेव की गुलामी कैसे स्वीकार कर ली?

बाहुबली 2 का एक पात्र कहता है, ‘अगर अमरेन्द्र बाहुबली की हत्या होती है, तो महिष्मति विरोध कर देगा’। ये सबको पता है, की महिष्मति के लोग बाहुबली मे ही अपना शासक देखते थे। फिल्म में एक ऐसा भी सीन था जिसमें लोग उसके लिए ना सिर्फ हथियार उठाने को तैयार थे, बल्कि भल्लालदेव को जान से भी मार सकते थे। लेकिन बाहुबली की हत्या हो जाती है, और देवसेना को एक खुली जगह में जंजीरों से बांध दिया जाता है। इतना ही नहीं, उसके साथ सरेआम ज्यादती की जाती है, फिर भी वे सबकुछ चुप-चाप सह लेते हैं।

इन सवालों के उत्तर के बिना बाहुबली का कनक्लूजन संस्करण भी अधूरा-सा लगा। अब तो बस कल्पना ही की जा सकती है कि कोई अगला संस्करण हमारी जिज्ञासा को शांत कर पाएगा।

दो साल पहले फिल्मी जगत में तहलका मचाने वाली ‘बाहुबली: द बिगिनिंग’रिलीज हुई थी। रिलीज होने के बाद ही पूरे देश की जुबान पर सिर्फ एक यही सवाल था कि आखिर ‘कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा?’ थिएटर और प्रशंसकों के बीच इस फिल्म के रिलीज का उत्साह और उत्सुकता देखते ही बनती है।

हमें इस बात का पूरा यकीन है कि ‘बाहुबली’ फ्रैंचाइजी को फिल्म बनाते समय इस बात का ये बिल्कुल भी अनुमान नहीं था कि वो फिल्म नहीं बल्कि एक इतिहास बना रहे हैं। फिल्म के डायरेक्टर एसएस राजमौली ने फिल्म निर्माण के सभी मानकों को पार कर दिया है। यही नहीं उन्होंने दूसरों के लिए एक बेंचमार्क भी सेट कर दिया है।

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कटप्पा को बाहुबली ने क्यों मारा

बाहुबली-2 कई मायनों में एक अभूतपूर्व फिल्म होने जा रही है। टेक्नोलॉजी और स्टोरी टेलिंग के लिए नए प्रतिमान गढऩे जा रही है। आपको बताते हैं वो 7 कारण जिससे साबित होता है कि ‘बाहुबली 2’ भारतीय फिल्मों के इतिहास में कला और प्रौद्योगिकी का सबसे अच्छा मिश्रण होने वाला है!

फिल्म का क्लाइमेक्स ‘लार्जर दैन लाइफ’ विजुअल के साथ है जो सदी के सबसे बड़े रहस्य पर से पर्दा उठाता है। ऐसा माना जा रहा है कि फिल्म के सिर्फ क्लाइमेक्स को शूट करने में कथित रूप से 30 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। ये रकम बाहुबली पार्ट-1 के क्लाइमेक्स के शूट में खर्च हुए पैसों से दोगुनी है। अगर बजट के लिहाज से देखें तो इस फिल्म का जो क्लाइमेक्स है वो कई लोगों के अंतहीन घंटों और अथक प्रयासों का नतीजा है। और आखिर कटप्पा ने उस आदमी को क्यों मारा जिसे उसने एक बच्चे की तरह पाला था और उसे बड़ा किया था, इस राज से भी पर्दा उठता है!

अद्भुत विजुअल इफेक्टस

‘बाहुबली 2’ थियेटर में 4के हाई डेफिनेशन के साथ रिलीज होने वाली पहली भारतीय फिल्म होगी। इस फिल्म ना सिर्फ कई सिनेमा हॉल के मालिकों को नई टेक्नोलॉजी को अपनाने के लिए प्रेरित करेगी बल्कि ये सिनेमा देखने वालों को भी एक नया अनुभव प्रदान करेगी!

रेडियोन टेक्नोलॉजी के सीनियर वीपी राजा कोदुरी ने बाहुबली-2 के ग्राफिक्स के बारे में ट्विट किया है- सामैया भारत (दुनिया की?) की रीयलटाइम वीआर से बनाई गई पहली किरदार है। इसे बाहुबली के लिए एसएस राजामौली ने बनाया और रेडिओन ने उकेरा है।

आखिर कला के साथ टेक्नोलॉजी का इससे बेहतर मिश्रण और कुछ हो सकता है भला? राजामौली ने अपनी फिल्म में टेक्नोलॉजी के साथ जिस तरह के प्रयोग किए हैं वो काबिलेतारीफ हैं। यहां ये बात भी ना भूली जाए कि पूरी फिल्म में हमें वास्तविक जीवन में पसंद आने वाली कई चीजों को देखने का अनुभव भी मिलेगा। और इस बात की तस्दीक खुद राजामौली ने अपनी ट्वीट में किया है। वो लिखते हैं-

बाहुबली की तलवार के साथ वी.आर. के जरिए फिल्म निर्देशन में मैंने शुरुआत की है। मुझे इस बात की बहुत खुशी है कि इसका प्रीमियर ट्रिबेका फिल्म फेस्टिवल में हो रहा है। फिल्म के सिनेमेटोग्राफर केके सेंथिल कुमार ने कहा था कि- ‘बाहुबली के पहले भाग में उपयोग किए गए सीजीआई (कंप्यूटर ग्राफिक्स इमेज) की गुणवत्ता से वो खुश नहीं थे।’ लेकिन उन्होंने साथ में ये भी कहा कि- ‘उन गलतियों को बाहुबली-2 में ठीक कर दिया गया।’ और नतीजा हमारे सामने है! अगर सीजीआई नहीं होता तो फिल्म में दिखाए गए झरनों के वो रहस्यपूर्ण दृश्यों को हम नहीं देख पाते।

Anushka Shetty in Baahubali 2

 

यहां तक कि फिल्म में प्रयोग किए वीएफएक्स भी बिल्कुल असली लगते हैं। ये फिल्म क्षेत्रीय या डब फिल्मों के पूर्वाग्रहों को तोड़ा है।

सोनी टीवी ने बाहुबली 2 के हिंदी संस्करण के सेटेलाइट राइट को 51 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड कीमत पर खरीदा है। किसी भी डब फिल्म के लिए अब तक दी जाने वाली ये सबसे ज्यादा कीमत है। यही नहीं किसी क्षेत्रीय फिल्म के टीवी स्क्रीनिंग के लिए भी दी जाने वाली ये सबसे ज्यादा कीमत है। अब क्या कुछ और कहने की जरूरत है?

एक्टिंग से ज्यादा मेहनत ट्रेनिंग पर की गई

प्रभास (बाहुबली के रोल में) और राणा डुग्गूबाती (भल्लाल देव की भूमिका में) दोनों को ही अपने रोल को निभाने के लिए एक कठोर ट्रेनिंग शेड्यूल से गुजरना पड़ा। ये ट्रेनिंग इन्हें शारीरिक और मानसिक रुप से मजबूत करने के लिए दी गई थी ताकि ये अपना रोल सही तरीके से निभाने में सक्षम हो सकें। असल में इन दोनों को वियतनामी ट्रेनर यूआन द्वारा मार्शल आर्ट्स की भी ट्रेनिंग दी गई थी। इसके साथ ही साथ दोनों ही कलाकारों को अपने रोल में परफेक्ट दिखने के लिए लगभग 100 किलो वजन भी बढ़ाना पड़ा था।

मेकिंग ऑफ ब्लॉकबस्टर

एक कहावत है कि हर विरासत अपने पीछे एक कहानी छोड़ जाती है। और जैसा कि ये दिखता है, ‘बाहूबली’ सिर्फ कहानी ही नहीं छोडऩे वाली। ये फिल्म के निर्माताओं के लिए आत्मविश्वास की एक नई कहानी छोड़ती है, जिन्होंने दो फिल्मों के लिए करीब 450 करोड़ रुपये, 4 साल में 615 दिन की शूटिंग की, और अपनी फिल्म में परफेक्शन पाने के लिए सेट पर 600 से ज्यादा व्यक्तियों के दल को संभाला। इसके बाद तो बस इतिहास ही है!

 

 सतीश पेडणेकर

 

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