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तब कलाम अब कोविंद

तब कलाम अब कोविंद

रामनाथ कोविंद देश के — वे राष्ट्रपति तथा दूसरे दलित राष्ट्रपति होंगे। उनका दलित होना रायसीना की रेस का प्रमुख मुद्दा रहा। भाजपा के दलित कार्ड का कोई माकूल जवाब न होने के कारण विपक्ष ने भी दलित मीरा कुमार को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया। हालांकि कोविंद की जीत पक्की थी। सबसे खास बात यह है कि भाजपा में राष्ट्रपति पद के लिए कई दिग्गजों के नामों की चर्चा थी। लालकृष्ण आडवाणी से लेकर सुषमा स्वराज तक के नाम उभर रहे थे मगर भारतीय जनता पार्टी की तरफ से बिहार के गवर्नर और दलित समाज के रामनाथ कोविंद का नाम राष्ट्रपति पद के लिए प्रस्तावित किया गया जिसकी किसी को आशा नहीं थी कि एकाएक नए चेहरे को राष्ट्रपति पद के लिए चुना जाएगा। बीजेपी की संसदीय बोर्ड की मीटिंग में रामनाथ कोविंद का नाम प्रस्तावित किया गया। राष्ट्रपति पद के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने ही उनका नाम सुझाया। राजनीतिक हल्कों में चर्चा है मोदी ने एक तीर से कई शिकार किए हैं।

रामनाथ कोविंद देश के दूसरे दलित राष्ट्रपति हैं। इससे पहले कोच्चेरील रमण नारायण देश के पहले दलित राष्ट्रपति थे। वे भारत के दसवें राष्ट्रपति थे। उन्हें 1997 में राष्ट्रपति बनाया गया था। इससे पहले वे 1992 में उपराष्ट्रपति भी रह चुके थे। कोविंद का नाम राष्ट्रपति पद के लिए चुनकर प्रधानमंत्री मोदी ने एक तीर से कई शिकार किये हैं, पहला शिकार तो ये कि वे दलित समाज से आते हैं, अगर कांग्रेस और विपक्षी पार्टियां उनके नाम का विरोध करेंगी तो उन्हें दलित विरोधी समझा जाएगा। मोदी ने दूसरा शिकार ये किया है कि – विपक्षी पार्टियां बीजेपी को दलित विरोधी साबित करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही हैं, ऐसे में एक दलित नेता को राष्ट्रपति उम्मीदवार चुनकर बीजेपी ने साबित कर दिया है कि वे दलित विरोधी नहीं हैं, इसके अलावा दलित समाज भी बीजेपी से जुड़ने की कोशिश करेगा क्योंकि बीजेपी का विरोध करने के लिए ही विपक्षी पार्टियों ने भीम आर्मी का गठन किया है जो भारत के दलित समाज को बीजेपी के खिलाफ भड़काने के लिए निकल पड़े हैं।

तीसरा शिकार ये किया है कि दलितों को ही बीजेपी के खिलाफ भड़काकर विपक्षी पार्टियां महागठबंधन बना रही हैं लेकिन मोदी ने दलित समाज के ही व्यक्ति को देश के सबसे ऊचें पद पर बिठाकर विपक्षियों की चाल बेकार कर दी है, अब बनाते रहो महागठबंधन, बीजेपी को साबित करते रहो दलित विरोधी, सभी चालें फेल हो गयीं कांग्रेस की।

राम नाथ कोविन्द की खासियत यह है कि कोविंद विनम्र हैं, मृदुभाषी हैं, वो किसी विवाद में नहीं फंसे, उनके राजनीतिक जीवन में कोई दाग नहीं लगा। भारतीय जनता पार्टी के राजनेता हैं साथ ही राज्यसभा सदस्य तथा बिहार के राज्यपाल रह चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने प्रेस कांफ्रेंस करके उनकी उम्मीदवारी की घोषणा की, अमित शाह ने कहा कि रामनाथ कोविंद दलित समाज से उठकर आये हैं और उन्होंने दलितों के उत्थान के लिए बहुत काम किया है, वे पेशे से एक वकील हैं और उन्हें संविधान का अच्छा ज्ञान भी है इसलिए वे एक अच्छे राष्ट्रपति साबित होंगे और आगे भी मानवता के कल्याण के लिए काम करते रहेंगे।

कोविन्द का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की (वर्तमान में कानपुर देहात जिला), तहसील डेरापुर के एक छोटे से गांव परौंख में हुआ था। कोविन्द का सम्बन्ध कोरी या कोली जाति से है जो उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के अंतर्गत आती है। वकालत की उपाधि लेने के पश्चात दिल्ली उच्च न्यायालय में वकालत प्रारम्भ की। वह 1977 से 1979 तक दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार के वकील रहे। 8 अगस्त 2015 को बिहार के राज्यपाल के पद पर नियुक्ति हुई। उन्होने संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा भी तीसरे प्रयास में ही पास कर ली थी।

वर्ष 1991 में भारतीय जनता पार्टी में सम्मिलित हो गये। वर्ष 1994 में उत्तर प्रदेश राज्य से राज्यसभा के निर्वाचित हुए। वर्ष 2000 में पुन: उत्तर प्रदेश राज्य से राज्य सभा के लिए निर्वाचित हुए। इस प्रकार कोविन्द लगातार 12 वर्ष तक राज्यसभा के सदस्य रहे। वह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रहे। वह भाजपा दलित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अखिल भारतीय कोली समाज अध्यक्ष भी रहे। वर्ष 1986 में दलित वर्ग के कानूनी सहायता ब्यूरो के महामंत्री भी थे।

चुनाव से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एनडीए के प्रत्याशी रामनाथ कोविंद को चालीस दलों का समर्थन हासिल है और उन्हें विश्वास है कि कोविंद की जीत होगी। संसद के मानसून सत्र के शुरू होने की पूर्व संध्या पर मोदी ने एनडीए से संबंध सांसदों की बैठक में गठबंधन के सभी सांसदों और विधायकों से राष्ट्रपति चुनाव में मतदान की अपील की। अनंत कुमार ने बताया कि मोदी ने इस बात को रेखांकित किया कि ओडिशा, बिहार, तेलंगाना और तमिलनाडु के मुख्यमंत्रियों ने कोविंद का समर्थन किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव को लेकर एक स्पष्टता है और आगे का रास्ता भी साफ दिख रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें कोविंद के साथ काम कर खुशी होगी।

कोविंद के कोली समुदाय के होने के कारण ओबीसी भी उनसे खुश हैं। गुजरात में एक और संदेश देने की कवायद चल रही है। बीजेपी अपने इस कदम से गुजरात में ओबीसी जातियों लुभाने की तैयारी कर रही है। रामनाथ कोविंद कोली समुदाय से आते हैं। गुजरात में कोली कम्युनिटी ओबीसी जातियों में शामिल है। रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनाए जाने के कदम को ओबीसी जातियों के बीच प्रचारित किया जा रहा है। कोली समुदाय के कार्यक्रमों में कोविंद के सम्मानित करने की तैयारी हो रही है। इसे एक बड़े वर्ग को आकर्षित करने के कदम के बतौर देखा जा रहा है।

25 जुलाई को नए राष्ट्रपति पदभार ग्रहण करेंगे। सियासी समीकरणों को देखें तो इस चुनाव में एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद की जीत पक्की मानी जा रही है। राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ में शामिल दोनों उम्मीदवार रामनाथ कोविंद और मीरा कुमार दलित समुदाय से आते हैं और उन्होंने देशभर में घूम-घूम कर विधायकों का समर्थन हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की।

आंकड़ों की बात की जाए तो बिहार के पूर्व राज्यपाल कोविंद की दावेदारी मजबूत नजर आ रही है, क्योंकि उन्हें एनडीए के अलावा जेडीयू और बीजू जनता दल (बीजेडी) जैसे विपक्षी दलों का भी समर्थन हासिल है। यहां जेडीयू के पास निर्वाचक मंडल का कुल 1.91 फीसदी वोट है, जबकि बीजेडी के पास 2.99 फीसदी वोट है। इसके अलावा तेलंगाना में सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के पास 2 प्रतिशत, ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कडग़म (एआएडीएमके) का एक गुट (5.39 प्रतिशत) और वाईएसआर कांग्रेस (1.53 प्रतिशत) ने भी कोविंद के पक्ष में मतदान करने की घोषणा की।

सतीश पेडणेकर

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