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आखिर कब तक सहेगा हिन्दू?

आखिर कब तक सहेगा हिन्दू?

हाल ही में कश्मीर में अमरनाथ तीर्थयात्रियों पर आतंकियों का हमला हुआ जिसमें आठ तीर्थयात्रियों की मृत्यु सहित कई तीर्थयात्री घायल हो गये। ये सभी तीर्थयात्री गुजरात के रहने वाले थे। पाकिस्तान अपनी जिहादी ताकतों की सहायता से पूरे विश्व को यह दिखाने में सफल हो गया कि हिंदुओं पर हमला हुआ और शिव भक्त मार दिये गये। लेकिन हमले के एक दिन बाद ही जिस प्रकार से अमरनाथ जानेवाले तीर्थयात्रियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई, उससे स्पष्ट होता है कि हिंदू कभी भी कायर नही रहे हैं और इतिहास में भी इसके कई उदाहरण हैं। हमारे समाज में विभिन्न संप्रदाय के लोग श्रावण के पवित्र माह में अमरनाथ तीर्थयात्रियों के लिए भोजन और दवा सहित अन्य उपयोगी वस्तुओं के माध्यम से सहायता करते हैं। भगवान अमरनाथ की पवित्र गुफा कश्मीर में पड़ती है और यही कारण है कि पाकिस्तान इन भक्तों पर हमला करवाने में सफल रहा। पाकिस्तान का यह हमला छद्म युद्ध के माध्यम से कश्मीर का माहौल खराब करता रहा है। लेकिन पाकिस्तान अपने इस कू्रर लक्ष्य में सफल नहीं हो पायेगा। पाकिस्तान को पता है कि हमारे समाज में लोग अपनी आस्था में गहरा विश्वास रखते हैं। इस तरह के हमलों की सहायता से पाकिस्तान देश के अलग-अलग संप्रदाय के अंदर माहौल बिगाडऩे की कोशिश करता रहा है। अत: भारत सरकार, जो कश्मीर में आतंक को खत्म करने में लगी है, उसे पाकिस्तान के इन कारनामों को कुचलने की आवश्यकता है। मैं हमारे लेखक विजय दत्त की बात को उचित समझता हूं, जो कहते है, ”यह बिल्कुल सत्य है कि भगवान की लाठी एक दिन पापियों पर अवश्य पड़ती है, लेकिन भगवान के हस्तक्षेप से पहले दिल्ली में बैठी सरकार को धारा 370 को हटाना चाहिए।’’ कश्मीर की भौगौलिक स्थिति को बदलने में समय लगेगा, लेकिन मोदी सरकार को इस पर अभी से ही काम करना आरंभ कर देना चाहिए। पिछले सप्ताह ही पाकिस्तानी गोलाबारी में नौ वर्ष की बच्ची की मौत हो गई। यह बिल्कुल सत्य है कि हमारे जवानों को पहले से काफी स्वतंत्रता मिली हुई है। लेकिन आखिर कितने जवान कश्मीर में अपनी जान न्यौछावर करेंगे? कश्मीर की कश्मीरियत और जम्हुरियत को बचाने के लिए कड़े कदम उठाने कि आवश्यकता है।

हिन्दुओं और हिंदुस्तान को बांटने का षडयंत्र वर्षों से चल रहा है। हिंदुत्व हमेशा से वसुधैव कुटुम्बकम की अवधारणा को मानता रहा है। पूरे विश्व को अपना परिवार मानता आ रहा है। मानवता और लोगों की भलाई के कामों पर हिन्दू धर्म के अनुयायियों ने हमेशा बल दिया है। लेकिन जब बात वर्षों पुरानी परंपरा तथा धार्मिक संस्कार की आती है तो हम किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा हमारी परम्परा को भंग  करने का षडयंत्र  कतई बर्दाश्त नहीं कर सकते, जो हमेशा से सीमा पार से प्रयास किया जाता रहा है। हिन्दुओं ने कभी भी हज यात्रियों या किसी चर्च पर हमला नहीं किया है, क्योंकि हमारे संस्कार इसकी अनुमति नहीं देते। भारत में कुछ कट्टर मुस्लिम और ईसाइयों ने हमेशा से हिन्दुओं को बांटने का प्रयास किया है। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण कुछ हिन्दू इन लोगों के चक्रव्यूह में फंस जाते है, लेकिन यदि ध्यानपूर्वक देखें तो हिन्दुओं ने हमेशा से यह सिद्ध किया है कि वे कायर नहीं हैं। केरल में हिन्दुओं पर लगातार जानलेवा हमले किये जा रहे हैं, परन्तु इस पर किसी भी समुदाय का ध्यान नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है की ये इनकी सहिष्णुता से काफी परे है। अपने वोट बैंक की राजनीति के लिए यहां की सरकार भी अपनी आखों पर पट्टी डाले हुए है। केरल में लगातार भौगौलिक बदलाव हो रहा है और इसका कारण बाहर के देशों में रह रहे मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा सैकड़ों एकड़ भूमि खरीदना है। केरल में लगातार मुस्लिम माफियाओं के द्वारा यहां पर सक्रिय हिन्दू नेताओं की हत्या की जा रही है।

केरल को छोड़कर भी कुछ ऐसे राज्य है जहां हिन्दुओं के विरुद्ध काम करने वाले लोगों को राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है। यदि हम बंगाल की ही बात करें, तो वामपंथियों ने लगातार तीन दशक तक वहां अपना आधिपत्य जमाये रखा। इसमें कोई संदेह नहीं कि वामपंथियों ने आम बंगाली नागरिकों के  बजाय  केवल अपने कार्यकर्ताओं की भलाई करने में सबसे अधिक ध्यान दिया। आम लोगों को सरकार के कामों का लाभ बिल्कुल नहीं पंहुचा। इन सभी कारणों से बंगाल की जनता को ममता बनर्जी के रूप में एक नेता मिला, जिसने जनता को यह विश्वास दिलाया की वह बिना किसी पक्षपात के सभी के लिए काम करेंगी। लेकिन यदि जमीनी हकीकत देखी जाए तो आज सोनार बांग्ला जल रहा है। ममता बनर्जी केवल एक समुदाय के प्रति तुष्टिकरण की राजनीति कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर देखें तो मानसून के मौसम में जो इंद्रधनुष निकलता है, उसे आम बंगाली रामधनु कहते हैं लेकिन मुस्लिम समुदाय के विरोध के बाद ममता बनर्जी ने इसे रंगधनु कर दिया। महत्वपूर्ण बात यह है कि भाजपा बंगाल में कभी भी शासन में नहीं रही है और आम बंगाली वर्षों से रामधनु शब्द का प्रयोग करते आ रहे हैं।

अत: आजादी के बाद से लेकर अभी तक लगभग सभी दलों ने अपने राजनीतिक लाभ के लिए हमेशा से हिन्दुओं को जाति व धर्म के नाम पर बांटने और नीचा दिखाने का भरपूर प्रयास किया है। पाकिस्तान ने अमरनाथ यात्रियों पर हमला किया। चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को रोकने के लिए नाथुला पास को बंद कर दिया। कोलकाता हो या केरल, भारत में हमेशा से हिन्दू त्यौहारों में अड़ंगे डालने के लिए हमले होते रहे हैं, इसमें हमारे अपने ही राजनीतिक दलों का हाथ होता है।  लेकिन इन सब के बीच ये लोग भूल जाते हैं कि हिंदुत्व की परिकल्पना सारी मानव जाति को एक साथ मजबूती से खड़ा करना है, जो हिन्दुओं को बहादुर और मजबूत बनाती है। लेकिन किसी को भी हिन्दुओं की सहिष्णुता की परख नहीं करनी चाहिए। हिन्दू कभी भी कायर नहीं रहा है।

दीपक कुमार रथ

दीपक कुमार रथ

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