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भारतीयता को बढ़ाएं तो चल पड़ेगा देश

भारतीयता को बढ़ाएं तो चल पड़ेगा देश

By दीपक कुमार रथ

आज जब मैं यह संपादकीय लिख रहा हूं तो मन में देश के प्रति आत्म-विश्वास की अनुभूति हो रही है। ऐसा महसूस हो रहा है कि अगर हम सही रास्ते पर चलें तो अपना और समाज के विकास को शीर्ष पर पहुंचा सकते हैं। आत्म-विश्वास बढऩे का एक अन्य कारण यह भी है कि उदय इंडिया को आप जैसे प्रिय पाठकों का स्नेह लगातार बढ़ रहा है, जो राष्ट्रीयता के साथ-साथ विकास के तारतम्य को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। यह क्रम दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। हमारा अंग्रेजी संस्करण अपना छठा वर्ष बड़े हर्ष के साथ मना रहा है। इसी क्रम में एक जिम्मेदार मीडिया समूह के रूप में उदय इंडिया ने एक राष्ट्रीय कॉन्क्लेव का आयोजन किया है। छोटे-बड़े उद्योग देश की नींव को लगातार सुदृढ़ करने का काम करते हैं, इसलिए हमने इस परिचर्चा में सरकार के वरिष्ठ मंत्रीगण, उद्योगपति, बुद्धिजीवी एवं गणमान्यों को भी आमंत्रित किया है।

देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘मेक इन इंडिया’ के सूत्रधार हैं। स्वाधीनता के 60 साल बाद भी आज हमारा ग्रामीण उद्योग, मध्यम एवं भारी उद्योग विश्व स्तर को छूने के लिए अभावग्रस्त परिस्थिति का मुकाबला कर रहा है। यह तो सही बात है कि ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के शुरूआत के साथ ही हमारा उत्पादक वर्ग स्वयं को और बलिष्ठ एवं विश्वस्तरीय होने का और भी प्रयास करेंगे। हालांकि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को किस हद तक अपनाना चाहिए और इसे किस क्षेत्र तक सीमित रखना चाहिए, यह एक तर्क का विषय हो सकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं स्वदेशी जागरण मंच जैसे संगठन इस मुद्दे का हमेशा से ही विरोध करते रहे हैं। ‘मेक इन इंडिया’ का स्वरूप कैसा होगा यह अभी भी पूरी तरह से साफ नहीं हो पा रहा है। देश को आगे बढ़ाने के लिए हमारे ग्रामीण उद्योगों को समृद्ध करना और हमारे उत्पादक वर्ग को सुदृढ़ करना हमारी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। इस दिशा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सही कदम की शुरूआत की है। आज पूरे विश्व की नजर भारत की ओर है। देश को आज एक बलिष्ठ नेतृत्व मिला है। परंतु, भारत को भारतीयता की जड़ को और मजबूत करना होगा। अपनी शिक्षा, संस्कृति, परंपरा और सभ्यता को ध्यान में रखते हुए देश के सभी क्षेत्रों के विकास में तेजी लानी होगी। नई सरकार के छह महीने बीत चुके हैं। सुशासन का संकेत तो मिला है, लेकिन नीचे तक पहुंचने में अभी और समय लगेगा। यह हम सब की भी जिम्मेदारी है।

समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास केवल सरकार का ही नहीं, बल्कि समाज का भी दायित्व है। इस बार के अंक में हमने एक ऐसे व्यक्ति के उपर आवरण कथा लिखी है, जो एक छत के नीचे 20 हजार से अधिक वनवासी बच्चों को सभी प्रकार की सुविधाओं के साथ शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। भुवनेश्वर स्थित कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के संस्थापक डॉ. अच्युत सामंत ने स्वयं अपना जीवन एक अनाथ बच्चे के रूप में शुरू किया था। बपचन में गरीबी से जुझते-जुझते डॉ. सामंत ने गरीबी को मिटाने का संकल्प लिया और इसे अपने जीवन का मकसद बना लिया, वो भी शिक्षा के माध्यम से। समाज के सामने आज उन्होंने एक उदाहरण पेश किया है। ‘जीओ और जीने दो’ के सिद्धांत को अपनाते हुए उन्होंने देश भर में अनेक वनवासी आश्रम खोलने का प्रण किया है। डॉ. सामंत ने ‘आर्ट ऑफ गिविंग’ नामक एक अभियान शुरू किया है, जिससे समाज के हर तबके के व्यक्ति जुड़े हैं। इस संस्था के माध्यम से लोगों को समाज के प्रति अपने दायित्वों को निभाने के लिए प्रेरित करते हैं। इस प्रयास के लिए उदय इंडिया उन्हें साधुवाद देता है।

आज जब गरीबी, बेरोजगारी और अशिक्षा से मानव जीवन को उबारने की कोशिश हो रही है, ऐसे में पेशावर जैसी घटनाएं बाधा जरूर बनती हैं, जहां अबोध बच्चों को हिंसा का केन्द्र बनाया जाता है, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति, साफ एवं स्पष्ट दृष्टिकोण और मजबूत नेतृत्व के बल पर ऐसी बाधाओं को पार कर शिक्षा और समृद्धि की ज्योति निश्चित रूप से जलाई जा सकती है। उदय इंडिया परिवार उन मृतात्माओं को भावभीनी श्रद्धांजली देता है।

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