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वसुंधरा राजे सरकार की पहली सालगिरह पर पंचायत चुनाव का शंखनाद

वसुंधरा राजे सरकार की पहली सालगिरह पर पंचायत चुनाव का शंखनाद

By जयपुर से गुलाब बत्रा

राजस्थान में ऐतिहासिक जनादेश के एक साल बीतने के बावजूद सत्ता में हिस्सेदारी के प्रति भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की अधीरता, यूरिया के लिए  किसानों के आक्रोश एवं कानून व्यवस्था, एक के बाद एक चुनावों में सत्तारूढ़ दल की झोली भर कर भी अपने को ठगा महसूस करते मतदाता और तिस पर विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा सरकार को कठघरे में खड़े करने के प्रयासों के बीच वसुंधरा राजे सरकार ने राजधानी जयपुर में अपनी पहली वर्षगांठ के जश्न में दूर-दराज के गांवों तक के अपने हजारों कार्यकत्ताओं को जुटाने के साथ आगामी पंचायत चुनावों का शंखनाद कर दिया है।

राज्य विधानसभा के सामने जनपथ पर उमड़े जन-सैलाब ने ठीक एक बरस पहले के परिदृश्य की याद ताजा कर दी। विधानसभा के पाश्र्व में बनाये गये विशाल मंच पर श्रीमती वसुंधरा राजे ने 13 दिसंबर 2013 को दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। तब वसुंधरा राजे निकटवर्ती मंच पर आसीन पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिलने गईं और दोनों नेताओं ने हाथ हिलाकर शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित जनता-जनार्दन का अभिवादन किया था। संयोगवश 13 दिसम्बर 2014 को दृश्य बदला हुआ था। कांग्रेस ने भाजपा सरकार के साल भर के जश्न समारोह के प्रांतव्यापी विरोध में धरना प्रदर्शन आयोजित किया। खुद गहलोत अपने गृह नगर जोधपुर में धरने में शामिल हुए। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि जब खुद मुख्यमंत्री कह रही हैं कि एक साल में उन्हें 151 दिन मिले इसलिए काम नहीं कर पाई। जब काम ही नहीं किया तो जश्न किस बात का। गहलोत ने यह भी आरोप लगाया कि वसुंधरा राजे ने पहले 13 दिसम्बर को बूथ स्तर के कार्यकताओं का सम्मेलन बताया था, अब इस जश्न को सरकारी कार्यक्रम बना दिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने भी इसी स्वर में जयपुर में कहा कि बिना काम के खुद की पीठ थपथपाना ही भाजपा सरकार की पहचान है। भाजपा राज का एक साल निराशाजनक रहा है। कांग्रेसजनों ने काला चश्मा और स्कार्फ पहनकर सरकार के प्रति विरोध जताया। पहली वर्षगंठ की पूर्व संध्या पर सचिन पायलट ने पार्टी के प्रदेश कार्यालय पर ब्लैक पेपर जारी करते हुए विशाल होर्डिंग का लोकार्पण किया, जिसमें समाचार-पत्रों की कटिंग्स फोटो आदि के माध्यम से सरकारी कामकाज की पोल खोलने का प्रयास किया गया है। चौदह भागों में विभक्त ब्लैक पेपर में अपराधों में बीस फीसदी की वृद्धि, कृषि रोजगार व नौकरी क्षेत्र सहित अन्य विफलताओं का उल्लेख है।

राज्य सरकार की पहली वर्षगांठ पर सुबह मुख्यमंत्री ने जनपथ स्थित शहीद स्मारक पर प्रदेशवासियों की ओर से श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। पांचबत्ती स्थित राजकीय गोदावरी देवी जाजू हॉस्पीटल में राष्ट्रीय शहरी मिशन के तहत संचालित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के लोकार्पण के साथ वसुंधरा राजे ने नि:शुल्क कैंसर स्क्रीनिंग शिविर का शुभारंभ किया। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र राठौड़ के अनुसार प्रदेश के 21 केन्द्रों पर स्क्रीनिंग का काम शुरू होगा। मुख्यमंत्री ने 108 एंबुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रामलीला मैदान में मुख्यमंत्री ने सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय द्वारा लगाई गई चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और सुजस के नई दिशा-नया राजस्थान विशेषांक का लोकार्पण किया। संयोगवश सुजस की संपादक और सहायक निदेशक सुश्री नर्वदा इंदौरिया को 12 दिसम्बर को माणक अलंकरण का विशिष्ट पुरस्कार (जनसम्पर्ककर्मी) देने की घोषणा की गई है।

अपराह्न में जनपथ पर आयोजित समारोह में वसुंधरा राजे के मंत्रिमण्डल के सदस्य, विधायकगण सहित केन्द्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, ऊर्जा राज्य मंत्री पीयूष गोयल तथा राजस्थान से केन्द्र सरकार में शामिल तीनों राज्यमंत्री उपस्थित थे। मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय मंत्रियों ने लगभग 81 हजार करोड़ रूपए की लागत वाली योजनाओं की घोषणा की। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री द्वारा सौर ऊर्जा के ट्रांसमिशन के लिए केन्द्र के खर्चे पर पॉवर ग्रिड कॉरपोरेशन के माध्यम से ग्रीन एनर्जी कॉरिडार की स्थापना की मांग को केन्द्र सरकार ने सैद्धान्तिक रूप से स्वीकार कर लिया है। चार हजार करोड़ की लागत की 8 नई सड़क योजनाओं का शिलान्यास करते हुए गडकरी ने व्यग्ंयपूर्ण लहजे में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत सड़कों के निर्माण संबंधी प्रस्ताव केन्द्र को भेजते थे, लेकिन राजस्थान से केन्द्र में शामिल मंत्री (उनका इशारा तत्कालीन केन्द्रीय परिवहन मंत्री डॉ. सी.पी. जोशी की ओर था) इन प्रस्तावों को रोक लेते थे, इसलिए शिलान्यास नहीं हो सके। उन्होंने आयात-निर्यात प्रोत्साहन हेतु सेटेलाईट पोर्ट के रूप में शुष्क बंदरगाह स्थापित किए जाने, पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से प्रदेश के जलाशयों में विमान उतारने की सुविधा दिलाने की घोषणा की। दोनों केन्द्रीय मंत्रियों ने वसुंधरा राजे के नेतृत्व की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए यह विश्वास व्यक्त किया कि उनके कार्यकाल में राजस्थान तेजी से विकास करेगा।

मुख्यमंत्री ने आंदोलनरत विद्यार्थी मित्रों के लिए सौगात की घोषणा करते हुए कहा कि पूर्व भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर विद्यालय सहायक का नया कैडर बनाकर भर्ती होगी। जनजाति क्षेत्र के लिए अलग सेवा नियम व कैडर बनाने से 17 हजार लोगों को सरकारी नौकरी मिलेगी। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर प्रहार करते हुए कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए कुछ लोग कह रहे हैं कि हमारी सरकार ने जीरो प्रतिशत ब्याज पर किसानों को ऋण देना बंद कर दिया है। उन्होंने साफ किया कि किसानों को यह ऋण मिलता रहेगा। उपस्थित जनसमूह से उन्होंने कहा कि विधानसभा से लेकर निकाय चुनावों तक आपने विपक्ष का सफाया किया, अब मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप पंचायत चुनावों में भी ऐसा करके दिखाओगे। वसुंधरा राजे ने विश्वास जताया कि टीम राजस्थान, टीम इंडिया से मिलकर प्रदेश के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

सरकार की पहली सालगिरह पर प्रदेश भर से पहुंचे कार्यकर्ताओं के वाहनों की पार्किंग की सुचारू व्यवस्था और सभा स्थल पर कड़ी सुरक्षा के बावजूद नर्सरी टीचर्स ट्रेनिंग के अभ्यार्थी अपने विरोध प्रदर्शन में कामयाब हो गए। एन.टी.टी. छात्राएं महिला भाजपा कार्यकर्ताओं के बाड़े में जा पहुंचीं और मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान अपनी मांग के समर्थन में बैनर लहराया। पुरूष बाड़े में शामिल एन.टी.टी. छात्रों ने नारेबाजी की। लगभग दस मिनट के हंगामें के बाद पुलिस ने उन पर काबू पाया तथा चार महिला अभ्यार्थियों को हिरासत में लेकर बाद में उन्हें छोड़ दिया। इससे पूर्व पांच बत्ती के पास एन.एच.एम. के कार्यक्रम में एक कश्मीरी युवक ने हाथ में सफेद कागज पर बैनर लहराया तथा कश्मीरी लोगों के मानवाधिकारों के हनन तथा राजस्थान में उनके लूटपाट की वारदातों में पुलिस की चुप्पी पर रोष जताया।

अचरज की बात यह है कि इस बार वसुंधरा राजे ने राज्य सरकार की पहली वर्षगांठ पर न्यूज चैनल तथा प्रिंट मीडिया को साक्षात्कार देने में कंजूसी नहीं बरती। राज्य के प्रमुख समाचार-पत्रों में छपे साक्षात्कार में पूछे गए सवालों के जवाब में मुख्यमंत्री ने चुनाव आचार संहिता तथा सरकारी अवकाश के चलते कामकाज के 151 दिनों की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करते हुए भावी योजनाओं पर भी रोशनी डाली। उन्होंने 2015 में तीन लाख करोड़ रूपये के निवेश की योजना के साथ चुनाव संकल्प पत्र के सभी वादे पांच साल में पूरा करने का भरोसा दिया। दूसरे कार्यकाल में 15 लाख लोगों को रोजगार के अवसर के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने करीब 50 हजार युवाओं को रोजगार मुहैया कराने का दावा किया। स्किल डेवलपमेंट के तहत अगले साल तक 400 सेंटर्स शुरू होने से तीन लाख युवाओं के लिए रोजगार की व्यवस्था होगी।

पिछली सरकार द्वारा सरकारी भर्तियों के बिगाड़े गए ढर्रे को सुधारने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस राज की योजनाओं को बंद करने के प्रचार पर स्पष्ट किया है कि नि:शुल्क दवा योजना की बजट राशि 255 करोड़ से बढ़ाकर 298 करोड़ रूपए की गई है। पेंशन चालू है। तेल रिफाइनरी के मामले में सरकार राज्य के फायदे के लिए काम कर रही है। संभाग के दौरों में मिली तीन लाख से अधिक शिकायतों में से आधी से अधिक का निस्तारण किया जा चुका है। शेष जिला प्रशासन तथा जिला परिषद में लम्बित है। इनके निराकरण के साथ जिला स्तर पर सरकारी मशीनरी को जवाबदेह बनाने के लिए कदम उठाए गए हैं।

उधर मुख्यमंत्री ने केन्द्र स्तर पर राज्य की लम्बित मांगो की पैरवी में कोई कसर नहीं रखी है। हर बार की तरह दिल्ली प्रवास में उन्होंने केन्द्रीय मंत्रियों से मुलाकात की। इसके चलते केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और ऊर्जा राज्यमंत्री पीयूष गोयल तेरह दिसम्बर को जयपुर आए और घोषणाएं की गई है। राजस्थान में नदी जोड़ो अभियान को गति दी गई है। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती से मिलकर रावी-व्यास नदी जल में राजस्थान के हिस्से का पानी दिलाने, इंदिरा गांधी फीडर के हैड रेगुलेटर की क्षमता बढ़ाने, यमुना नदी जल समझौते के तहत हरियाणा से राजस्थान के हिस्से का पानी दिलाने की मांग की। वहीं स्वास्थ्य और कल्याण मंत्री जेपी नड्डा से राज्य कैंसर संस्थान एवं बीकानेर-झालावाड़ में क्षेत्रीय कैंसर केयर सेन्टर्स स्थापित किए जाने का मुद्दा उठाया। इन पर 210 करोड़ की लागत आनी है और इस दिशा में केन्द्र का सकारात्मक रूख है। अगला वित्तीय वर्ष राजस्थान के लिए सुखद होगा ऐसा माना जा सकता है।

राज्य सरकार ने 295 पंचायत समितियों में कमल खिलाने की जुगत आरम्भ कर दी है। इसके लिए राज्य सरकार तथा पार्टी संगठन के आपसी तालमेल को प्रभावी बनाया गया है। कांग्रेस शासनकाल में जनआंदोलन छेडऩे, सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, रास्ता रोकने आदि के आरोप में भाजपा कार्यकताओं पर लगाए गए तीन सौ से अधिक मुकदमें वापस लेने की प्रक्रिया आरम्भ की गई है।

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