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मासूम के साथ हैवानियत

मासूम के साथ हैवानियत

सात साल के मासूम का शरीर खून से सना हो….ऊफ। हम इतने बड़े हैवान हो गए हैं। रेयान इंटरनेशनल स्कूल, गुरुग्राम में प्रद्युम्न ठाकुर हत्याकांड के ताजा मामले ने दिल दहलाकर रख दिया है। दहशत इतनी की कि खुद रेयान स्कूल के छात्र अभी तक सदमे में हैं। प्रद्युम्न को उसके पिता वरुण चंद ठाकुर ने आठ सितंबर को सुबह 7:50 मिनट पर स्कूल छोड़ा था और 8:10 पर उनके पास मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली सूचना आ गई। इस हत्या के आरोप में स्कूल की बस का कंडक्टर न्यायिक हिरासत में है, लेकिन अभी तक हत्या का कारण, बच्चे को चाकू से लहूलुहान किए जाने का उद्देश्य साफ नहीं हो पाया है। इसी के साथ स्कूल, स्कूल प्रशासन की लापरवाही को लेकर भी एक साथ कई सवाल खड़े हुए हैं।

रेयान स्कूल दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में अच्छी पहचान रखता है। रॉयल इंटरनेशनल इसका उन्नत संस्करण है। स्कूल की फीस, भवन, सुविधाएं सब उच्च श्रेणी में आती हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रद्युम्न के साथ हुई वारदात में हर मोड़ पर स्कूल की तरफ से हुई लापरवाही साफ नजर आ रही है। प्रद्युम्न का स्कूल के गेट पर आना, वहां से करीब 200 मीटर दूर बाथरुम में पहुंचना, बाथरूम में बस कंडक्टर अशोक का होना और चंद मिनटों में उसका लहू लुहान शरीर। खास बात यह कि पूरी वारदात ऐसे

स्थान पर जहां स्कूल में बच्चों के आने के समय से लेकर स्कूल की छुट्टी होने 2-4 की संख्या में स्कूल के लोग जरूर होते हों। इस कड़ी का दूसरा बड़ा सवाल है कि इतनी मंहगी फीस के बल पर चलने वाले रेयान इंटरनेशनल स्कूल में बस के कंडक्टर, ड्राइवर और स्कूल के छात्र एक ही बाथरुम का इस्तेमाल करें। निश्चित रूप से यह सुरक्षा के लिहाज से बहुत बड़ी लापरवाही है। दूसरे स्कूल का सीसीटीवी, स्कूल की बाऊंड्री समेत तमाम अन्य कोताही। इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली घटना वहां की प्रिंसिपल निरजा बत्रा या अन्य स्टाफ के लगातार बदल रहे बयान। बस के कंडक्टर के पकड़े जाने के बाद ड्राइवर का उसके बचाव में आना। यह सब प्रबंधन की किसी बड़ी कोताही की तरफ इशारा कर रहा है।

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जब मासूम ही सुरक्षित नहीं

रेयान इंटरनेशनल के भोड़सी, गुरुग्राम स्थित स्कूल के अलावा वसंत विहार के स्कूल में भी दो साल पहले छात्र की मौत हुई थी। वह छात्र भी लोअर प्राइमरी सेक्शन का था। तब नामी स्कूल ने छात्र को हाइपर एक्टिव बताया था और बच्चे की पानी के टैंक में जाने तथा गिरने को मौत की वजह बताया गया था। हालांकि मां-बाप ने उस समय भी बच्चे के साथ किसी और अनहोनी की आशंका जाहिर की थी। सवाल यह नहीं है कि दो साल पहले बच्चे के साथ हुए हादसे की जांच में क्या निकला?

बड़ा सवाल यह है कि एक अच्छी खासी फीस देने के बाद नामी स्कूलों में मासूमों की जिंदगी सुरक्षित नहीं है? छोटे-छोटे बच्चे लापरवाही, स्कूल प्रबंधन की खामी तथा मानव जाति की हैवानियत का शिकार हो रहे हैं।

बच्चे की मौत का जिम्मेदार कौन?

आभिभावक अपने नौनिहाल को स्कूल प्रशासन के भरोसे पर वहां उसे भेजते हैं। लेकिन स्कूल में यदि सुरक्षा, देखभाल, निगरानी के पुख्ता इंतजाम न हों तो ऐसी दशा में क्या स्कूल प्रबंधन बच्चों के साथ होने वाले हादसों का जिम्मेदार नहीं है? सच्चाई यह है कि रेयान इंटरनेशनल स्कूल ने सामान्य एसओपी (स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर) का पालन नहीं किया है। एयर फोर्स बाल भारती स्कूल लोधी स्टेट के प्रशासनिक विभाग के सूत्र का कहना है कि दिल्ली और एनसीआर के तमाम स्कूल इसका पालन नहीं कर रहे हैं। सूत्र का कहना है कि पाकिस्तान में स्कूल पर आतंकी घटना के बाद एयरफोर्स बाल भारती ने सुरक्षा के नए मानदंड बनाए। हर साल इसकी समीक्षा की जाती है और छात्रों की सुरक्षा, बेहतर शिक्षा तथा सुंदर वातावरण के निर्माण के सभी पहलुओं को केन्द्र में रखकर प्रयास किया जाता है। बताते हैं दिल्ली और एनसीआर के कई नामी स्कूल सुरक्षा से लेकर मानदंड की एयरफोर्स के स्कूल से कॉपी करते हैं।

केन्द्रीय विद्यालय, एजीसीआर कॉलोनी, दिल्ली के जूनियर विंग की एक शिक्षिका का कहना है कि स्कूल के गेट के भीतर आने के बाद हर बच्चे की जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की है। वहीं स्कूल की छुट्टी होने के बाद स्कूल प्रशासन छात्र-छात्राओं को सुरक्षित उनके घर भेजने के लिए तत्पर रहता है। इसके लिए सुरक्षा के मानदंड से लेकर देखरेख के सभी उपाय किए जाते हैं।

दिल्ली पब्लिक स्कूल, मथुरा रोड, नई दिल्ली एक नामी स्कूल है। इसके एलुमिनी विदेशों में नाम कमा रहे हैं। डीपीएस मथुरा रोड के प्रधानाचार्य मनोहर लाल कहते हैं कि वह इस तरह की लापरवाही के बारे में सोच भी नहीं सकते। मनोहर लाल का कहना है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा विद्यालय का दायित्व है। इसके लिए हर स्कूल के पास गाइड लाइन होती है। हम उस गाइड लाइन के सहारे विद्यार्थियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करते हैं। डीपीएस मथुरा में मनोहर लाल कभी इस तरह की न तो कोई लापरवाही याद है और न हीं छात्रों के साथ हुई कोई अप्रिय घटना। ऐसे में यह एक बड़ा सवाल है कि एक विकृत मानसिकता ने अमानवीय कृत्य करके प्रद्युम्न की हत्या की, लेकिन इसका जिम्मेदार और कौन हैं? उनका दंड क्या है?

बदलेगा नियम

रेयान स्कूल में प्रद्युम्न के साथ हुई वारदात ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक को हिलाकर रख दिया है। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी बच्चे के साथ हुए बर्ताव को लेकर गुस्सा और गहरी संवेदना व्यक्त की है। इस संदर्भ में सीबीएसई को अपनी रिपोर्ट देने के लिए कहा है। माना यह जा रहा है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय पुलिस और शिक्षा ऐजेंसियों की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। इस रिपोर्ट के जल्द आने की संभावना है। इसके बाद मानव संसाधन विकास मंत्री स्वयं विद्यार्थियों के अभिभावकों से रु-ब-रू होने का निर्णय ले सकते हैं। कुल मिलाकर केन्द्र सरकार स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करने, मासूमों के साथ इस तरह की हैवानियत की पुनरावृत्ति को रोकने का मन बनाया है। समझा जा रहा है कि इसके बाबत जल्द ही सीबीएसई को नई गाइड लाइन जारी करने, समय-समय पर सुरक्षा मानदंडों को सुनिश्चित करने के लिए कहा जा सकता है।

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चौंकाता है स्कूल के बस ड्राइवर सौरभ का बयान

सौरभ रेयान स्कूल की उस बस का ड्राइवर है, जिसपर हत्या का आरोपी अशोक कंडक्टर था। सौरभ का कहना है कि बस के टूल किट में चाकू था ही नहीं। यहां तक कि खून से लथपथ बच्चे के शरीर को कोई भी स्कूल की टीचर छूने के लिए तैयार नहीं थी। उसे स्कूल के चपरासी और अशोक ने कार तक पहुंचाया और तब बच्चे को अस्पताल तक ले जाया जा सका। स्कूल के स्टाफ के अनुसार बच्चे को पहले नजदीक के अस्पताल में ले जाया गया लेकिन उस अस्पताल में मुकम्मल इलाज की व्यवस्था न होने के कारण उसे दूसरे अस्पताल में ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने प्रद्युम्न को मृत घोषित कर दिया।

जारी है पुलिस की जांच

पुलिस प्रद्युम्न ठाकुर के साथ हुए अमानवीय कृत्य की जांच कर रही है। हत्या का आरोपी पहले तीन दिन की पुलिस रिमांड पर था और अब न्यायिक हिरासत में है। समझा जा रहा है कि शनिवार 16 सितंबर तक पुलिस इस मामले में आरोप पत्र दाखिल कर देगी। गुरुग्राम भोड़सी थाना क्षेत्र के पुलिस के जांच अधिकारियों का कहना है कि उनके पास अशोक के हत्या में शामिल होने को लेकर पर्याप्त सबूत है। हत्या में बरामद हुआ चाकू, खून से सने कपड़े, गवाहों के बयान, आशोक को बाथरुम में देखने वाले दोनों बच्चों के बयान, स्कूल की शिक्षिका, निलंबित प्रधानाचार्य नीरजा बत्रा के बयान, माली और चपरासी के बयान सब कुछ हैं। प्रद्युम्न की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ चुकी है और इसमें दो बार गले पर चाकू के वार के कारण उसके मृत्यु का जिक्र है। इसके अलावा जांच दल फोरेंसिक विभाग की रिपोर्ट का भी इंतजार कर रहा है।

रंजना

 

 

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